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“अगली सदी में भारत के साथ हमारे संबंध को परिभाषित करने” पर

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अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट
प्रवक्ता कार्यालय
तत्काल रिलीज़ के लिए 
18 अक्तूबर 2017
टिप्पणियाँ
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रैक्स टिलरसन
सामरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र
वाशिंगटन डी. सी.

 

 

सेक्रेटरी टिलरसन:  तो, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जॉन, और इस कार्यालय में वापस आकर बहुत अच्छा लगा।  और मैं जॉन से पूछ रहा था कि क्या यह कार्यालय उन सभी अपेक्षाओं को पूरा कर रहा है जो कि तब थे जबकि यह परियोजना शुरू की गई थी, और मैं कमरे में ऐसे कई चेहरे देखता हूं जो इसे एक वास्तविकता बनाने में एक बड़ा हिस्सा रहे हैं।  मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे बताया कि आज चार कार्यक्रम एक साथ चल रहे हैं, और मैंने कहा, “सर्वोत्तम।  हम यही तो चाहते थे।”

और साथ ही मैं यहाँ इस कमरे में मौजूद कई लोगों को उन 11 महान वर्षों के लिए शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जो मैंने यहाँ न्यासियों के बोर्ड में सेवा करते हुए, और आपने मेरा संरक्षण करते हुए गुजारे हैं। मैंने उस समय के दौरान बहुत कुछ सीखा जबकि मैं यहाँ उन पदभारों पर कार्यरत था।  और मैं जॉन का उनकी मित्रता के लिए धन्यवाद करता हूँ।  वह उस समय के दौरान एक प्रिय मित्र बने रहे।  मेरे देश की सेवा करने के लिए मुझसे जो भी कहा गया उस क्षमता को हासिल करने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण रहा है।  तो फिर, यहां मौजूद होना एक वास्तविक आनंद की बात है, और इस कार्यालय में वापस आने देने के अवसर के लिए धन्यवाद।

तो सबसे पहले, मुझे अमेरिका में, भारत में, और दुनिया भर में हमारे सभी दोस्तों को दीवाली की शुभकामनाएं देने दें, जो रोशनी समारोह का जश्न मना रहे हैं। आम तौर पर, इस पर पटाखे जलाए जाते हैं।  मुझे किन्हीं पटाखों की जरूरत नहीं है; मेरे आसपास वैसे भी पहले ही कई धमाके हो रहे हैं। (हंसते हैं)।  तो हम पटाखों की बात छोड़ देंते हैं।

भारत के साथ मेरा संबंध 1998 से है, इसलिए अब लगभग 20 साल, जब मैंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर काम करना शुरू किया था। जाहिर है, उन कई वर्षों में मैंने इस देश के कई दौरे किये।  और यह तब भारतीय समकक्षों के साथ व्यापार करने का एक बड़ा विशेषाधिकार था, और इस वर्ष भारतीय नेताओं के साथ सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के रूप में काम करने का यह महान सम्मान रहा है।  और मैं अपनी आधिकारिक क्षमता में पहली बार अगले सप्ताह दिल्ली लौटने की उम्मीद करता हूं।  यह यात्रा अमेरिकी-भारतीय संबंधों और अमेरिका-भारत की भागीदारी के लिए और अधिक आशाजनक समय पर नहीं आ सकती।

जैसा कि आप में से बहुत से जानते हैं, यह साल हमारे दोनों देशों के बीच संबंधों की 70वीं वर्षगांठ को चिन्हांकित करता है। जब राष्ट्रपति ट्रूमैन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू का वाशिंगटन की यात्रा पर स्वागत किया था, उन्होंने कहा, और मैं उद्धरित करता हूँ, “भाग्य ने यह सुनिश्चित किया कि हमारे देश को आपके देश तक एक नये मार्ग की तलाश को खोजना चाहिए।”  मुझे उम्मीद है कि आपकी यात्रा भी संयुक्त राज्य अमेरिका की खोज की भावना से की गई होगी।

प्रशांत और भारतीय महासागरों ने हमारे देशों को सदियों से जोड़ा है। फ्रांसिस स्कॉट की ने लिखा कि HMS मिंडेन पर बैठे हुए हमारा राष्ट्रीय गान कैसा बनेगा, जो भारत में बनाया गया एक जहाज था।

जबकि हम अगले 100 वर्षों की ओर देखते हैं, यह महत्वपूर्ण है कि भारत-प्रशांत, एक ऐसा क्षेत्र जो हमारे साझा इतिहास के लिए काफी महत्वपूर्ण है, का स्वतंत्र और खुला रहना जारी रहे, और यही आज सुबह आपको मेरी टिप्पणियों का विषय भी है।

राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी उनके पहले के किसी भी अन्य नेताओं की तुलना में, एक महत्वाकांक्षी साझेदारी के निर्माण के लिए कहीं अधिक प्रतिबद्ध हैं, जो न केवल हमारे दो महान लोकतांत्रिकताओं को लाभ पहुंचाती है, बल्कि अन्य संप्रभु राष्ट्रों को भी जो अधिक शांति और स्थिरता के लिए काम कर रहे हैं।

जून में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने हमारे सामरिक संबंधों के इस नए क्षेत्र में पहले से ही चल रहे सहयोग के कई क्षेत्रों पर प्रकाश डाला।

हमारे रक्षा संबंध विकसित हो रहे हैं। हम पहले से कहीं अधिक आतंकवाद प्रतिरोध प्रयासों का समन्वय कर रहे हैं।  और इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी कच्चे तेल का एक शिपमेंट भारत में पहुंचा है, जो हमारे विस्तारणीय ऊर्जा सहयोग का एक ठोस उदाहरण है।  ट्रम्प प्रशासन इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के लिए प्रभावशाली तरीकों से गहरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमारे लिए आज यह देखना आसान है कि यह मायने क्यों रखता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करता है।  हमारे करीबी रिश्ते की प्रेरणा शक्ति हमारे लोगों के बीच संबंधों पर निर्भर है – हमारे नागरिक, व्यावसायिक नेता, और हमारे वैज्ञानिक।

लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी आगंतुक पिछले साल भारत आए थे। 166,000 से अधिक भारतीय छात्र संयुक्त राज्य अमेरिका में अध्ययन कर रहे हैं।  और लगभग 4 मिलियन भारतीय अमेरिकी संयुक्त राज्य अमेरिका को अपना घर कहते हैं, और अपने समुदायों में डॉक्टरों, अभियंताओं, और नवोन्मेषकों के रूप में योगदान करते हुए और अपने देश की गर्व से वर्दी में सेवा कर रहे हैं।

जैसे-जैसे हमारी अर्थव्यवस्थाएं नज़दीक आती हैं, हम अपने लोगों के लिए समृद्धि के और अवसरों को प्राप्त करते हैं। 600 से अधिक अमेरिकी कंपनियां भारत में काम करती हैं।  पिछले दो वर्षों में ही अमेरिकी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 500 प्रतिशत बढ़ गया है।  और पिछले साल, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने लगभग 115 अरब डॉलर का रिकॉर्ड छुआ है, एक संख्या जिसे हम और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

साथ मिलकर, हमने आर्थिक सहयोग की एक मजबूत नींव बनाई है, क्योंकि हम विस्तार के अधिक अवसरों की तलाश कर रहे हैं। अगले महीने हैदराबाद में होने वाले पहले दक्षिणी एशियाई वैश्विक उद्यमी शिखर सम्मेलन की होने वाली घोषणा, इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण है कि राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं, नौकरी के अवसरों का विस्तार कर रहे हैं, और हमारी दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के नए तरीके तलाश रहे हैं।

जब हमारी सेनाएँ संयुक्त अभ्यास का संचालन करती हैं, तो हम वैश्विक कमांडों की रक्षा और हमारे लोगों की रक्षा के प्रति अपनी वचनबद्धता के रूप में एक शक्तिशाली संदेश भेजते हैं। इस साल के मालाबार अभ्यास अब तक हमारे सबसे जटिल अभ्यास थे।  अमेरिकी, भारतीय और जापानी नौसेनाओं के सबसे बड़े जहाज़ों ने पहली बार हिंद महासागर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, जिसमें तीन भारतीय-प्रशांत लोकतंत्रों की संयुक्त ताकत का स्पष्ट उदाहरण दिया गया।  हम आने वाले वर्षों में इसमें दूसरों के जुड़ने की अपेक्षा करते हैं।

पिछले साल अमेरिकी कांग्रेस द्वारा ज़बर्दस्त तरीके से समर्थित – एक प्रमुख रक्षा सहयोगी के रूप में भारत की स्थिति को ध्यान में रखते हुए – और समुद्री सहयोग के विस्तार में हमारे पारस्परिक हित को ध्यान में रखते हुए, ट्रम्प प्रशासन ने गार्जियन UAV समेत भारत के विचार करने के लिए रक्षा विकल्प के एक मेन्यू की पेशकश की है। हम उस भूमिका की कद्र करते हैं जो भारत वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता में अदा कर सकता है और यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं कि उनके पास और भी अधिक क्षमताएँ हैं।

और पिछले एक दशक में, हमारे आतंकवाद प्रतिरोध सहयोग ने काफी विस्तार किया है। हजारों भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए अमेरिकी समकक्षों के साथ प्रशिक्षण लिया है।  संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत ज्ञात और संदेहास्पद आतंकवादियों की क्रॉस-स्क्रीनिंग कर रहे हैं, और इस साल आगे चलकर हम आतंकवादी पदनामों पर एक नई वार्ता में सम्मिलित होंगे।

जुलाई में, मैंने हिज़बुल मुजाहिदीन को एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किये जाने पर हस्ताक्षर किये क्योंकि अमेरिका और भारत आतंकवाद के खिलाफ कंधे से कंधे मिलाकर खड़े हैं। ऐसे राज्य जो आतंकवाद का नीति के एक साधन के रूप में उपयोग करते हैं, केवल अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और स्थिरता को कम करेंगे।  आतंकवाद के संकट से निपटना प्रत्येक सभ्य राष्ट्र का दायित्व है, चुनाव नहीं।  संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत उस क्षेत्र में इस प्रयास में अग्रणी हैं।

लेकिन एक और और प्रगाढ़ परिवर्तन जो हो रहा है, एक ऐसा जिसके अगले 100 वर्षों तक दूरगामी प्रभाव होंगे: संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत तेजी से बढ़ते सामरिक अभिसरण में वैश्विक साझेदार हैं।

भारतीय और अमेरिकी केवल लोकतंत्र के लिए एक समानता को ही साझा नहीं करते। बल्कि हम भविष्य के एक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।

उभरती हुई दिल्ली-वाशिंगटन रणनीतिक भागीदारी, कानून के शासन, नेवीगेशन की स्वतंत्रता, सार्वभौमिक मूल्यों और मुक्त व्यापार को साझा करने की एक साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। हमारे देशों में स्थिरता की दो पुस्तक अवलंब हैं – दुनिया के दोनों तरफ – दुनिया भर में हमारे नागरिकों और लोगों के लिए अधिक से अधिक सुरक्षा और समृद्धि के लिए खड़े हैं।

जिन चुनौतियों और खतरों का हम सामना करते हैं, वे ज़बर्दस्त हैं। आतंकवाद और साइबर आक्रमणों द्वारा बोया जाने वाला विकार हर जगह शांति को धमकाता है।  उत्तरी कोरिया के परमाणु हथियार परीक्षण और बैलिस्टिक मिसाइलों ने संयुक्त राज्य अमेरिका, हमारे एशियाई सहयोगियों और अन्य सभी देशों की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट और आसन्न खतरा पैदा किया हुआ है।

और वह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, जिसने भारत की वृद्धि को फायदा पहुंचाया है – और कई अन्य देशों की – वह तेजी से तनाव के अधीन है।

चीन, जिसने भारत के साथ बढ़ते समय, कई बार अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमज़ोर करते हुए, इतनी कम जिम्मेदारी से काम किया है, जबकि भारत जैसे देशों ने एक अन्य ढांचे के भीतर काम किया जो अन्य राष्ट्रों की संप्रभुता की रक्षा करता है।

दक्षिण चीन सागर में चीन की उत्तेजक कार्रवाईयाँ सीधे अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानदंडों को चुनौती देती हैं जिनके लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत दोनों प्रतिबद्ध हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका चीन के साथ रचनात्मक संबंध बनाना चाहता है, लेकिन हम नियमों के आधार पर बनी व्यवस्था के प्रति चीन की चुनौतियों की वजह से पीछे नहीं हटेंगे और जहां चीन ने पड़ोसी देशों की संप्रभुता को घटा दिया है और वह अमेरिका और हमारे मित्रों को नुकसान पहुंचाता है।

अनिश्चितता और कुछ हद तक चिंता के इस दौर में, भारत को विश्व स्तर पर एक विश्वसनीय साथी की जरूरत है। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ:   वैश्विक स्थिरता, शांति और समृद्धि के लिए हमारे साझा मूल्य और दृष्टिकोण के साथ, संयुक्त राज्य अमेरिका यह भागीदार है।

और भारत के युवाओं, इसके आशावाद, इसके शक्तिशाली लोकतांत्रिक उदाहरण और विश्व स्तर पर इसके बढ़ती कद के साथ, यह पूरी तरह से अर्थपूर्ण है कि इस समय – संयुक्त राज्य अमेरिका – को भारत के साथ सहयोग के हमारे वर्षों क मजबूत आधार पर निर्माण करना चाहिए । यह वास्तव में एक लोकतांत्रिक साथी को दोगुना करने का समय है जो अभी भी विकास कर रहा है – और जिम्मेदारी से बढ़ रहा है – अगले 100 वर्षों के लिए।

लेकिन सबसे अधिक, विश्व को – और विशेष रूप से भारत-प्रशांत – को मजबूत भागीदारी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत की जरूरत है।

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को करना ज़रूरी है, जैसे कि भारतीय कहावत है, “वह करें जो ज़रूरी है।” (हंसते हैं)।

हमारे दोनों देश दुनिया के लिए उस आवाज का काम कर सकते हैं जिसके उसे आवश्यकता है, जो कि नियमों के आधार पर व्यवस्था की रक्षा करने के बचाव में स्थिरता से खड़े हो सकते हैं ताकि वे ग्रहों के साझा स्थान तक बिना रुकावट के, चाहे वह जमीन पर हो, या समुद्र में, या साइबर स्पेस में, पहुंच सकें।

विशेष रूप से, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को स्वतंत्र और खुले भारत-प्रशांत के उद्देश्य से और अधिक समृद्धि और सुरक्षा को बढ़ावा देना होगा।

भारत-प्रशांत – पूरे हिंद महासागर, पश्चिमी प्रशांत और उनके चारों ओर स्थित राष्ट्रों सहित – 21वीं सदी में विश्व का सबसे अधिक परिणामी हिस्सा होगा।

तीन अरब से ज्यादा लोगों का घर, यह क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा और व्यापार मार्गों का केंद्र बिन्दु है। दुनिया के तेल की आपूर्ति का चालीस प्रतिशत हर दिन हिंद महासागर से आर-पार होता है – मलक्का और होर्मुज की स्ट्रेट्स जैसे जलग्रीवा के महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से।  और अफ्रीका में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं और भारत में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग के साथ, बाजार की हिस्सेदारी में इस वैश्विक बदलाव के लिए संपूर्ण अर्थव्यवस्थाएं खातों में बदलाव ला रही हैं।  वैश्विक जीडीपी में एशिया का हिस्सा इस शताब्दी के मध्य तक 50 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है।

हमें यह सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ सहयोग करने की आवश्यकता है कि भारत-प्रशांत तेजी से शांति, स्थिरता और बढ़ती समृद्धि का स्थान है – ताकि यह विकार, संघर्ष और हिंसक अर्थशास्त्र का क्षेत्र न बन जाए।

विश्व का गुरुत्वाकर्षण का केंद्र भारत-प्रशांत क्षेत्र के केंद्र में जा रहा है। अमेरिका और भारत को – हमारे शांति, सुरक्षा, नेवीगेशन की स्वतंत्रता, और एक स्वतंत्र और खुली वास्तुकला के साझा लक्ष्यों के साथ – भारत-प्रशांत के पूर्वी और पश्चिमी प्रकाश स्तंभ के रूप में सेवा करनी होगी।  उस बंदरगाह और स्टार बोर्ड रोशनी के रूप में जिसके बीच में यह क्षेत्र अपनी सबसे बड़ी और सर्वोत्तम क्षमता तक पहुंच सकता है।

सबसे पहले, हमें अपने लोगों और भारतीय और प्रशांत महासागरों में रहने वालों के लिए अधिक समृद्धि की दृष्टि से विकास करना होगा।

वर्ष 2050 तक, भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दावा कर सकता है। भारत की आबादी – 25 साल की औसत उम्र के साथ-साथ अगले दशक में चीन की तुलना में अधिक होने की संभावना है।  हमारा आर्थिक साझेदारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।

आर्थिक विकास नवीन विचारों से प्रवाहित होता है। सौभाग्य से, कोई ऐसे दो देश नहीं हैं जो नवाचार को संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत से बेहतर प्रोत्साहित करते हैं।  बैंगलोर और सिलिकॉन वैली के बीच प्रौद्योगिकियों और विचारों का आदान-प्रदान दुनिया को बदल रहा है।

21वीं शताब्दी और उससे आगे के समय की समृद्धि सक्रिय समस्या सुलाझाने पर निर्भर करेगी, जो कि भारत की प्रशांत क्षेत्र में बाजारों की शक्ति और उभरती हुई नवाचारों को दोहन करती है। यह वह जगह है जहां संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के पास एक शानदार प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मौजूद है।

हमारे खुले समाज मुक्त विचारों की गति पर उच्च गुणवत्ता वाले विचार उत्पन्न करते हैं। क्षेत्रीय साझेदारों की मदद से समान प्रणालियों की स्थापना 21वीं शताब्दी की समस्याओं के समाधान प्रदान करेगी।

ऐसा करने के लिए, अधिक क्षेत्रीय संयोजकता आवश्यक है।

सिल्क राउट्स से ग्रैंड ट्रंक* सड़कों तक, दक्षिण एशिया सदियों से एक क्षेत्र था जो माल, लोगों और विचारों के आदान-प्रदान के साथ मिलकर संगठित हुआ था।

लेकिन आज यह दुनिया में सबसे कम आर्थिक रूप से एकीकृत क्षेत्रों में से एक है; अंतर-क्षेत्रीय व्यापार समाप्त हो गया है – कुल व्यापार का करीब 4 या 5 प्रतिशत हिस्सा है।

इसकी ASEAN से तुलना करें, जहां अंतर-क्षेत्रीय व्यापार कुल व्यापार का 25% है।

विश्व बैंक का अनुमान है कि बाधाओं को दूर करके और सुव्यवस्थित रीति-रिवाज प्रक्रियाओं के साथ, दक्षिण एशिया में अंतर-क्षेत्रीय व्यापार लगभग 28 बिलियन डॉलर से बढ़ाकरा 100 अरब डॉलर तक चौगुना हो जाएगा।

जब स्थायी विकास की बात आती है, तो अधिक से अधिक संयोजकता का लक्ष्य भारत-प्रशांत क्षेत्र में सही विकल्प प्रदान करता है।

मिलेनियम चैलेंज कार्पोरेशन एक ऐसा मॉडल है कि हम इसे कैसे हासिल कर सकते हैं। यह कार्यक्रम निजी निवेश के लिए सही परिस्थितियों को बढ़ावा देने के लिए डेटा, जवाबदेही, और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।

पिछले महीने, संयुक्त राज्य अमेरिका और नेपाल ने 500 मिलियन डॉळर के एक संविदा समझौते पर हस्ताक्षर किए – दक्षिण एशियाई राष्ट्र के साथ सबसे पहले – नेपाल में बढ़ती बिजली और परिवहन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश करना और इस क्षेत्र में भागीदारों, जैसे भारत के साथ अधिक व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए।

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत को इस संयोजकता और हमारे अपने आर्थिक संबंधों को विकसित करने के और अवसरों को तलाशना होगा, भले ही हम इस क्षेत्र में दूसरों के लिए अधिक विकास और वृद्धि की सुविधा के लिए और तरीकों की तलाश करें।

लेकिन समृद्धि के लिए भारत-प्रशांत में पकड़ बनाने के लिए, सुरक्षा और स्थिरता की आवश्यकता है। हमें भी इस क्षेत्र में भागीदारों के रूप में विकसित होना होगा।

भारत के लिए, यह विकास अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी क्षमता को पूर्ण रूप से ग्रहण करेगा। सबसे पहले, इसका अर्थ है सुरक्षा क्षमता का निर्माण करना।

मेरे अच्छे दोस्त और सहयोगी सेक्रेटरी मैटिस पिछले ही महीने इस पर चर्चा करने के लिए दिल्ली में मौजूद थे। हम दोनों उत्सुकता से जल्दी ही उदघाटन 2+2 वार्ता के लिए तत्पर हैं, जो राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा समर्थन प्राप्त हैं।

यह तथ्य कि भारतीय नौसेना पी-8 समुद्री निगरानी विमान का पहला विदेशी उपयोगकर्ता था, जो इसे अमेरिकी नौसेना के समकक्षों के साथ प्रभावी तरीके से संगठित करता है, यह काफी हद तक हमारे साझा समुद्री हितों की मात्रा और अंतर-क्षमता बढ़ाने की हमारी ज़रूरतों की बात करता है।

जिन प्रस्तावों को संयुक्त राज्य अमेरिका ने सामने रखा है, जिसमें गार्जियन UAVs, एयरक्राफ्ट कैरियर टेक्नोलॉजीज़, भविष्य में ऊर्ध्वाधर-लिफ्ट कार्यक्रम और एफ-18 और एफ-16 लड़ाकू विमान शामिल हैं, हमारे वाणिज्यिक और रक्षा सहयोग के लिए सभी संभावित गेम परिवर्तक हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका का गति, प्रौद्योगिकी और पारदर्शिता के लिए सैन्य रिकॉर्ड खुद ही बोलता है – जैसा कि हमारी भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का रिकॉर्ड है। भारत के लिए चिंता पैदा करने वाले सुरक्षा मुद्दे संयुक्त राज्य अमेरिका की चिंताओं के मुद्दे भी हैं।

सेक्रेटरी मैटिस ने कहा है कि दुनिया के दो महानतम लोकतांत्रिक देशों के पास दो महानतम सेनाएँ होनी चाहिए। मैं इस बात परा पूरी तरह सहमत हैं।

जब हम साझा सुरक्षा चिंताओं का समाधान करने के लिए मिलकर काम करते हैं, तो हम न केवल स्वयं की सुरक्षा करते हैं, बल्कि हम दूसरों की रक्षा भी करते हैं।

इस साल की शुरुआत में, अमेरिकी और भारतीय सेनाओं के प्रशिक्षक अफ्रीकी भागीदारों के बीच एक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान बनाने के लिए एकत्र हुए, एक ऐसा कार्यक्रम जिसका हम विस्तार जारी रखने की उम्मीद करते हैं। यह अमेरिका और भारत की सुरक्षा क्षमता और तीसरे देशों में शांति को बढ़ावा देने का एक बढ़िया उदाहरण है – और एक बहुत ही कष्टप्रद दुनिया में शांति के लंगर के रूप में एक साथ काम करने का भी उदाहरण है।

और जबकि हम राष्ट्रपति ट्रम्प की नई दक्षिण एशिया रणनीति को कार्यान्वित करते हैं, हम अफ़गानिस्तान और पूरे क्षेत्र में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों का सहारा लेंगे। भारत अफ़गानिस्तान में शांति के लिए एक भागीदार है और हम उनके सहायता प्रयासों का स्वागत करते हैं।

पाकिस्तान भी दक्षिण एशिया में एक महत्वपूर्ण अमेरिकी भागीदार है। इस क्षेत्र में हमारे रिश्ते अपनी विशेषताओं के आधार पर खड़े हैं।  हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान अपनी सीमाओं के भीतर आतंकवादी समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा, जो उसके अपने ही लोगों और व्यापक क्षेत्र को खतरा पहुंचाते हैं।  ऐसा करने में, पाकिस्तान अपने और अपने पड़ोसियों के लिए स्थिरता और शांति को बढ़ावा देता है, और अपने स्वयं के अंतर्राष्ट्रीय स्तर को सुधारता है।

यहां तक ​​कि जब संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत हमारे अपने आर्थिक और रक्षा सहयोग को विकसित कर रहे हैं, तब भी हमें अन्य देशों को शामिल करने पर नज़र रखनी होंगी जो हमारे लक्ष्यों को साझा करते हैं। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे देशों को अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए, अधिक से अधिक संपर्क बनाने, और एक क्षेत्रीय संरचना में एक ज़ोरदार आवाज़ बनने, जो उनके हितों को बढ़ावा देती है और उनकी अर्थव्यवस्थाओं को विकसित करने में सक्षम बनाता है।  यह भारत की “पूर्व की ओर कार्रवाई” नीति का एक प्राकृतिक पूरक है।

हमें उन लोगों का स्वागत करना चाहिए जो कानून के शासन को मजबूत करना चाहते हैं और इस क्षेत्र में आगे की समृद्धि और सुरक्षा को बढ़ावा देना चाहते हैं।

विशेष रूप से, हमारे प्रारंभिक बिंदु को भारत-प्रशांत लोकतांत्रिकता के साथ अधिक सहभागिता और सहयोग करना जारी रखना चाहिए।

हम पहले ही अमेरिका, भारत और जापान के बीच हमारे महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय संबंधों के लाभों को हासिल कर रहे हैं। जबकि हम भविष्य की ओर देख रहे हैं, साझा उद्देश्यों और पहलकदमियों को बनाने के लिए ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य लोगों को आमंत्रित करने के लिए स्थान मौजूद है।

भारत दूसरों के लिए एक विविध, गतिशील, और बहुलवादी देश के एक स्पष्ट उदाहरण के रूप में भी काम कर सकता है – वैश्विक आतंकवाद के युग में एक समृद्ध लोकतंत्र। यह उपमहाद्वीप दुनिया के चार प्रमुख धर्मों का जन्मस्थान है, और भारत की विविध आबादी में 170 मिलियन से अधिक मुसलमान शामिल हैं – दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी।  फिर भी हमारा ISIS या अन्य आतंकी गुटों के रैंकों में विदेशी लड़ाकों के बीच भारतीय मुस्लिमों की महत्वपूर्ण गणना से सामना नहीं होता है, जो भारतीय समाज की ताकत के बारे में बोलता है।  लोकतंत्र की यात्रा कभी आसान नहीं होती है, लेकिन भारत के लोकतांत्रिक उदाहरण की शक्ति एक है जो मुझे पता है कि दुनिया भर में दूसरों को मजबूत करने और दूसरों को प्रेरित करना जारी रखेगा।

अन्य क्षेत्रों में, हम अधिक सहयोग के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं। जितना अधिक हम समुद्री डोमेन जागरूकता, साइबर सुरक्षा, और मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे मुद्दों पर सहयोग का विस्तार करेंगे, उतना ही भारत-प्रशांत क्षेत्र में अन्य देशों को फायदा पहुंचेगा।

हमें यह भी समझना होगा कि बुनियादी ढांचे में निवेश के कार्यक्रमों और वित्तपोषण योजनाओं के संबंध में कई भारत-प्रशांत देशों के पास सीमित विकल्प हैं, जो अक्सर उन लोगों के लिए रोज़गार या समृद्धि को बढ़ावा देने में विफल रहते हैं, जिनकी वे मदद करने का दावा करते हैं। यह पारदर्शी, उच्च मानक क्षेत्रीय ऋण देने के तंत्र का विस्तार करने का समय है – ऐसे उपकरण जो बढ़ते कर्ज के साथ उन्हें काठी बनाने की बजाय वास्तव में राष्ट्रों की मदद करेंगे।

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को इन बहुपक्षीय प्रयासों के विकास के मार्ग का नेतृत्व करना होगा।

आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग के और भी अधिक अवसरों की तलाश करते हुए हमें आम चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारी सामूहिक विशेषज्ञता का लाभ देने के लिए बेहतर काम करना होगा। आवश्यकता मौजूद है और हमें इस मांग को पूरा करना होगा।

अमेरिकी और भारतीय हितों और मान्यताओं का बढ़ता हुआ अभिसरण भारत-प्रशांत को नियमों पर आधारित वैश्विक प्रणाली की रक्षा करने का सर्वोत्तम अवसर प्रदान करता है जिससे पिछले कुछ दशकों में मानवता को इतना लाभ हुआ है।

लेकिन यह एक जिम्मेदारी के साथ भी आता है – हमारे दोनों देशों के लिए स्वतंत्र, खुले और संपन्न भारत-प्रशांत के एकजुट दृष्टि के समर्थन में “वह करें जो ज़रूरी है” करना ज़रूरी है।

संयुक्त राज्य अमेरिका इस क्षेत्र में और पूरे विश्व में भारतीय लोगों की बढ़ती हुई ताकत और प्रभाव का स्वागत करता है। हम अपने इस रिश्ते को बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं, भले ही भारत एक वैश्विक नेता और ताकत के रूप में बढ़ता है।

भारत-प्रशांत क्षेत्र की ताकत हमेशा कई लोगों, सरकारों, अर्थव्यवस्थाओं और संस्कृतियों के बीच बातचीत का विषय रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका दक्षिण एशिया या व्यापक क्षेत्र में किसी भी देश के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है जो भारत-प्रशांत के हमारे दृष्टिकोण को साझा करता है जहां संप्रभुता को बरकरार रखा जाता है और एक नियम-आधारित प्रणाली का सम्मान किया जाता है।

अब समय आ गया है कि हम स्वतंत्र और खुले भारत-प्रशांत के हमारे दृष्टिकोण पर कार्य करें, जो कि लोकतंत्र के दो मजबूत स्तंभों द्वारा समर्थित और संरक्षित है – संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत। आपके ध्यान देने के लिए धन्यवाद।

(तालियाँ बजती हैं)।

श्रीमान हमरे:   धन्यवाद, श्रीमान सेक्रेटरी। हम इसे यहाँ नीचे की ओर कर देते हैं ताकि यहाँ मौजूद लोग इसे देख सकें।  यहाँ एक रुकावट पैदा करने वाला वैक्टर मौजूद है।

इतना दिलचस्प भाषण देने के लिए आपका धन्यवाद। एक खास वाक्यांश ने मेरा ध्यान आकर्षित किया।  मैं उस पर जल्दी ही बात करूंगा, और मुझे कल रात उसे देखने का विलास प्राप्त हुआ, इसीलिए मैंने इसे लिख लिया है।  (हंसते हैं)।  “हमें यह सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ सहयोग करने की आवश्यकता है कि भारत-प्रशांत तेजी से शांति, स्थिरता और बढ़ती समृद्धि का स्थान है – ताकि यह विकार, संघर्ष और हिंसक अर्थशास्त्र का क्षेत्र न बन जाए।”  बहुत ही दिलचस्प अभिव्यक्ति है।  क्या आप – आप किसे हिंसक अर्थशास्त्र के उदाहरण के तौर पर देखते हैं जिसके लिए हमारे बीच हमें जागरूक होना चाहिए?

सेक्रेटरी टिलरसन:  खैर, मुझे लगता है कि सभी लोग उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं, बुनियादी ढांचे के निवेश के लिए कई नस्लवादी लोकतंत्रों के बीच, भारत-प्रशांत क्षेत्र में बड़ी जरूरतों के बारे में जागरूक हैं और यह महत्वपूर्ण है कि उभरती हुई लोकतांत्रिकताओं और अर्थव्यवस्थाओं के पास उनकी जरूरत के बुनियादी ढांचे लेकिन साथ ही अर्थव्यवस्थाओं को भी विकसित करने दोनों के विकास के वैकल्पिक माध्यम मौजूद हैं।  हमने इस क्षेत्र में दूसरों की गतिविधियों और कार्रवाइयों को देखा है, विशेष रूप से चीन की, और वह वित्तपोषण तंत्र जो यह इन देशों में से कईयों के लिए लाता है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कर्ज के विशाल स्तर के साथ जुड़ना पड़ता है।  वे अक्सर नौकरियाँ नहीं बनाते, इन बुनियादी ढांचे परियोजनाओं को इन अर्थव्यवस्थाओं में ज़बरदस्त नौकरी बनाने वाली होना चाहिए, लेकिन अक्सर, इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निष्पादित करने के लिए विदेशी कामगारों को लाया जाता है।  वित्तपोषण एक ऐसे तरीके से संरचित होता है जिससे भविष्य के वित्तपोषण को प्राप्त करना उनके लिए बहुत कठिन हो जाता है, और अक्सर वित्तपोषण में बहुत ही सूक्ष्म ट्रिगर होते हैं जिसके परिणामस्वरूप वित्तपोषण में चूक और ऋण का इक्विटी के रूप में रूपांतरण होते हैं।

इसलिए यह एक ऐसी संरचना नहीं है जो इन देशों के भविष्य के विकास का समर्थन करती हो। हमें लगता है कि यह महत्वपूर्ण है कि हम वैकल्पिक वित्तपोषण उपायों, वित्तपोषण संरचनाओं के साथ प्रतिस्पर्धा वाले कुछ साधनों को विकसित करना शुरू करें।  और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान – अगस्त में मंत्रिस्तरीय शिखर सम्मेलन के दौरान, हमने दूसरों के साथ एक गंभीर बातचीत की शुरुआत की, कि वे क्या अनुभव कर रहे थे, उन्हें क्या जरूरत थी, और हम एक बहुपक्षीय तरीके से गंभीर बातचीत शुरू कर रहे हैं:  हम वैकल्पिक वित्तपोषण तंत्र कैसे बना सकते हैं?  हम चीन की पेशकश वाली शर्तों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं होंगे, और – पर देशों को यह फैसला करना होगा:  वे अपनी संप्रभुता और उनकी अर्थव्यवस्थाओं के भविष्य के नियंत्रण को सुरक्षित करने के लिए क्या भुगतान करने के इच्छुक हैं?  और इस बारे में भी उनके साथ हमारी बातचीत जारी थी।

श्रीमान हमरे: सेक्रेटरी, वह – वह – उससे वास्तव में एक नई समझ उत्पन्न करने में सहायता मिलती है जिसे हम सभी को विकसित करना है।  और यदि मैं आपसे पूछ सकूँ, यह विषमता प्रतीत होती है क्योंकि आप एक बड़ी कॉर्पोरेशन चलाते हैं।  आप द्वारा किसी बड़ी परियोजना के  लिए पूँजी जुटाने के लिए, आपको सार्वजनिक बाज़ारों, किसी सार्वजनिक बाज़ार के क्षेत्र में जाना होगा और इसके बावजूद आप राज्य के स्वामित्व वाले ऐसे उद्यमों के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा कर रहे थे जो किसी केंद्रीय बैंक का रुख कर सके और बिना ब्याज का ऋण या केवल अनुदान प्राप्त कर सके।  मेरा मतलब यह है कि यह एक ऐसी घोर विषमता है जिससे हमें निपटना है।  यह नई वित्तपोषण साधनों से भी आगे बढ़ सकता है।  आप इसके बारे में कैसे सोच रहे हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  मेरे विचार में, बहुत से मायनों में, यह ऐसा मामला है जो इन देशों के सामने प्रस्तुत किया जाना है जिन्हें ऐसे अवसंरचना वित्तपोषण की आवश्यकता है कि उन्हें इसे दीर्घकालिक भविष्य के बारे में वास्तव में सोचना है कि उनका देश और इसकी अर्थव्यवस्थाएं कैसे विकास करें।  और बहुत-से दृष्टिकोणों से, वे उस प्रकार की चर्चाओं और तर्कों के समान थे जो हम अपने निजी क्षेत्र के दिनों में प्रस्तुत करेंगे, कि यहाँ ऐसे सभी अन्य लाभ मौजूद हैं जो आप तब प्राप्त करते हैं जब आप निवेश के डॉलरों को स्वयं के पास इस तरीके से आने देते हैं:  आप संप्रभु नियंत्रण रखते हैं, आप अपने देश के भीतर कानून और निष्पादन पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं।  और इसका उनके लिए तब महत्वपूर्ण मूल्य होना चाहिए जब वे भविष्य के बारे में सोच रहे हैं।  और इस प्रकार यह – जबकि यह प्रत्यक्ष रूप से प्रतिस्पर्धी आधार पर है, वहीं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ प्रतिस्पर्धा करना कठिन है जो ऐसी वित्तीय शर्तों पर किसी चीज़ की पेशकश कर रहा है जो ऋण देने वाले पक्ष की ओर से कुछ प्वाइंट्स के योग्य हैं, लेकिन हमें उन्हें अपने देश के नियंत्रित करने, उनके इसे देश के भविष्य को नियंत्रित करने, नियम-आधारित प्रणाली पर उनकी अर्थव्यवस्था के विकास को नियंत्रित करने की दीर्घकालिक योग्यता को नियंत्रित करने के परिदृश्य में रखने में उनकी सहायता करनी है।  और वास्तव में जिसे हम बढ़ावा दे रहे हैं, वह है – अपनी संप्रभुता बनाए रखें, आप नियम-आधारित व्यवस्था में अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखें, हम आपसे लिए अन्य विकल्पों के साथ आएंगे।

श्रीमान हमरे: बहुत बढ़िया। धन्यवाद।  और मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।  राजदूत सिंह यहाँ मौजूद हैं।  वे एक बहुत गतिशील दूतावास चला रहे हैं।  मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि आपको यह पता हो कि वे यहाँ थे, और मैं एक ऐसा प्रश्न पूछने जा रहा हूँ जो वे पूछेंगे, लेकिन वे इसे नहीं पूछने जा रहे हैं – (हंसी) – और वह है:  मैं अगस्त में भारत में था और भारत में विकसित हो रहे संबंध के प्रति अत्यधिक उत्साह था लेकिन उस तरीके के संबंध में वास्तव में कुंठा थी जिसमें हम भारत को प्रौद्योगिकी और इस प्रकार की चीज़ तक पहुँच बनाने से रोकते हैं।  क्या – क्या – राजदूत का प्रश्न यह है:  तो आप इसे कैसे दुरुस्त करने जा रहे हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  तो आप जानते हैं, वे शर्मीले नहीं हैं।  उन्होंने प्रश्न पूछ लिया है।  (हंसते हैं)।  तो मेरा मतलब है, हमने इस बारे में चर्चा कर ली थी, और मैंने इसे एक बड़े प्रतिरक्षा भागीदार के रूप में भारत को निर्धारित करने और इस संबंध में कांग्रेस की पुष्टि के बारे में तैयार की गई टिप्पणियों का संक्षेप में उल्लेख किया।

मेरा विचार है कि जैसा कि हर कोई मानता है, अमेरिका के पास इस ग्रह में सबसे बढ़िया लड़ाकू सैन्य बल है, सबसे पहले वर्दी वाले पुरुषों और महिलाओं की गुणवत्ता के कारण – सारा स्वयंसेवी बल, लेकिन वे ऐसी बेहतरीन प्रौद्योगिकियों और हथियार प्रणालियों से भी लैस है जिनका पूरी दुनिया में अन्य कहीं सानी नहीं है।  तो, यह हमारी सैन्य शक्ति के लिए एक व्यापक लाभ है, तो हम उसे हल्के रूप में प्रदान नहीं करते, और इसीलिए हमारे यहाँ तब ऐसी कठोर समीक्षा प्रणालियाँ हैं जब हम प्रौद्योगिकी अंतरण का कार्य करते हैं।

लेकिन इतना कहने के बाद, हमारे सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों और भागीदारों की इन तक पहुँच है और भारत को उस स्तर तक बढ़ाया गया है। और इसीलिए मैंने कुछ ऐसी प्रणालियों को छूआ जिन्हें किसी को प्रदान नहीं किया गया है।  गार्डियन UAV प्रणाली उसका एक बेहद प्रौद्योगिकीय किट भाग है जिसे अब हम उपलब्ध करा रहे हैं और हम अन्य उच्च-स्तरीय हथियार प्रणालियों के बारे में भारत के साथ चर्चाएं कर रहे हैं।  और जैसा कि मैंने कहा है, यह इस महत्वपूर्ण सुरक्षा को निभाने की उनकी योग्यता में सुधार करने के लिए है जो हम सभी जानते हैं कि वे इस क्षेत्र में निभाना चाहते हैं।  इसलिए हम इस क्षेत्र में अमेरिका के प्रतिस्पर्धी लाभ की रक्षा करते हुए उन प्रणालियों के संबंध में जान-बूझकर काम करना जारी रख रहे हैं।

श्रीमान हमरे:  मैं यह नहीं जानता कि आप कितना करीब से सुनते हैं, लेकिन सेक्रेटरी ने उल्लेखनीय आमंत्रण दिया जिसके अंतर्गत अमेरिका और भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया में एक-साथ मिलकर बड़ी नेतृत्व भूमिका निभानी है।  यह बहुत महत्वपूर्ण वक्तव्य था।  आपने यह भी इंगित किया कि समन्वय का विकसित होता हुआ वास्तुशिल्प भी होना चाहिए।  आपने संकेत दिया कि यह अमेरिका-जापान-भारत त्रिपक्ष का विस्तार करने के इर्दगिर्द घूम सकता है।  आपने संकेत दिया कि यह ऑस्ट्रेलिया हो सकता है।  क्या – क्या यह इस नई रणनीति में अमेरिका की संलग्नता का वास्तुशिल्प होने जा रहा है?

सेक्रेटरी टिलरसन:  मेरा विचार है कि जैसा कि आपने मुझे कहते हुए सुना और यदि आप नक्शे के बारे में सोचते हैं – भारत-प्रशांत से लेकर संयुक्त राज्य से पश्चिमी तट तक, और वह नक्शे का वह भाग है जिसे हम देख रहे हैं – भारत, यह बहुत व्यापक और महत्वपूर्ण लोकतंत्र उस नक्शे को एक तरफ पिन करता है; जापान, जो एक बहुत महत्वपूर्ण और सुदृढ़ लोकतंत्र है जिससे हमारे बहुत प्रगाढ़ सुरक्षा संबंध हैं, वह नक्शे की इस तरफ को पिन कर रहा है।  लेकिन दक्षिण प्रशांत का एक ऐसा महत्वपूर्ण भाग है जिसे भी हमारे विचार में महत्वपूर्ण पिन प्वाइंट की ज़रूरत है।  ऑस्ट्रेलिया एक अन्य बहुत सुदृढ़ और महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार और अमेरिका का सहयोगी है और इसने हर युद्ध में लड़ाई की है और हमारे साथ मिलकर लड़ा है।  हमारे द्वारा लड़े गए प्रत्येक युद्ध में ऑस्ट्रेलियाई हमारे साथ रहे हैं।

इसलिए हम यह मानते हैं कि उस वर्तमान त्रिपक्षीय संबंध में कुछ उपयोगी वार्ताएं की जानी हैं जो बहुत सुदृढ़ और कारगर है – भारत – जापान – अमरीका संबंध। इसलिए हम इसकी खोजबीन जारी रखने जा रहे हैं कि हम उस वास्तुशिल्प को कैसे सुदृढ़ करें जो वास्तव में – यह इस भारत-प्रशांत मुक्त और खुली नीति के बारे में है जो हमारे पास है, और हम इसे कैसे हमारे सबसे मज़बूत, सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों के साथ उपयुक्त स्थानों में पिन करें, और हम कैसे उन्हें इस बहु-पक्षीय व्यवस्था में सुदृढ़ करें।  भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध, इन्हें कैसे सुदृढ़ किया जा सकता ह?  इसे, स्पष्ट रूप से हर किसी के हित में होना चाहिए।  भारत को इसे अपने हित में देखना है।  जापान को इसे अपने हित में देखना है।

लेकिन यह ऐसी विकसित होती हुए प्रक्रिया होने जा रही है कि हम ऐसा सुरक्षा वास्तुशिल्प कैसे सृजित करें जो इसे स्वतंत्र और मुक्त भारत-प्रशांत क्षेत्र रखे, राष्ट्रों के लिए अपनी स्वयं की सम्प्रभुता की रक्षा करने के लिए अवसर उत्पन्न करे, अन्यों द्वारा धमकी दिए गए बिना उनके आर्थिक मामलों का संचालन करने का अवसर प्रदान करे। और वास्तुशिल्प के डिज़ाइन को वास्तव में यही करना होता है।

श्रीमान हमरे:  मैं एक ऊर्जा व्यक्ति के रूप में आपसे मुखातिब होने वाला हूँ।  और पिछले सप्ताह – मुझे पिछले माह कहना चाहिए, हमारे यहाँ नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ज़िम्मेदार भारतीय मंत्री मौजूद थे और यह भारत के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।  आप ऊर्जा सेक्रेटरी नहीं हैं, लेकिन आप इसके बारे में बहुत कुछ जानते हैं।  आपके विचार में हम कैसे भारत के साथ ऊर्जा के मुद्दों पर सहयोग का विस्तार कर सकते हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  वहाँ – मुझे पता है कि भारत के भीतर कितनी ही संख्या में सक्रिय कार्यक्रम हैं।  भारत की अत्यधिक ऊर्जा आवश्यकताएँ हैं, केवल ऊर्जा की सीधी आपूर्ति से ही नहीं, बल्कि उस ऊर्जा को वितरित करने के लिए अवसंरचना से भी और इसमें पहुँचने के संबंध में भी – जिससे सभी भारतीयों की जीवन की अपनी निजी गुणवत्ता के लिए, बल्कि आर्थिक विकास और विस्तार के लिए इस तक पहुँच हो सके।  और मैं जानता हूँ कि CSIS के यहाँ कुछ ऐसे विशेष कार्यक्रम है जो इसका अन्वेषण कर रहे हैं, और वे सभी, मेरे विचार में महत्वपूर्ण अवसर और तंत्र हैं।

अमेरिका की उस प्रौद्योगिकी के संबंध में बहुत महत्वपूर्ण ऊर्जा स्थिति है जिसे यहाँ परंपरागत से नवीकरणीय तक और ऊर्जा के अन्य रूपों से ऊर्जा के समस्त प्रकार के विकल्पों में विकसित किया गया है और मेरा विचार है कि संबंधों का मूल्य अमेरिकी व्यावसायिक समुदाय और हमारे उद्यमियों और हमारे नवप्रवर्तकों के बीच है, हमारे पास ऐसे अनेक प्रकार के अत्यधिक अवसर हैं जिन्हें हम उन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत के साथ भागीदारी में प्रदान कर सकते हैं और हम ऐसा चाहते हैं – हम इसे प्रोत्साहित कर रहे हैं। एक बार फिर, हम मानते हैं कि CSIS द्वारा किया जा रहा कार्य उसे प्रदान करने के लिए उन संबंधों को सृजित करने के संबंध में महत्वपूर्ण है।  यह अमेरिकी व्यवसायों के लिए क्षेत्र का एक अन्य अवसर है।

श्रीमान हमरे:  जैसा कि हमारे भारतीय मित्र प्रौद्योगिकी की प्रतिबंधकता के बारे में सही रूप से शिकायत करते हैं, अमेरिकी कंपनियाँ इस बारे में शिकायत करती हैं कि भारत में व्यवसाय करना कितना कठिन है।  वह बातचीत आपकी चर्चाओं में कैसे प्रवेश करने जा रही है?

सेक्रेटरी टिलरसन:  इसमें उतार-चढ़ाव हैं।  और उन 20 वर्षों जिनमें मैंने भारत के साथ संव्यवहार किया है, उनमें मैंने उन्हीं कुंठाओं का सामना किया है।  मेरे विचार में भारत ने अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए हैं और हम इसे स्वीकार करना चाहते हैं।  मेरे विचार में यह महत्वपूर्ण है कि उन प्रयासों और उस गति को बरकरार रखा जाए।  कुछ कार्रवाइयाँ करना आसान है, आप कुछ सुधार लागू करते हैं, और इसके बाद कहते हैं, ठीक है, हमारा काम हो गया, आइए अब हम आराम से बैठ जाएं।  आपका काम कभी पूरा नहीं होता।  आपका काम कभी पूरा नहीं होता।  और यह भारत को मेरा संदेश है:  आपका काम कभी पूरा नहीं होता।  चूँकि आपके आसपास का विश्व स्थिर नहीं है, इसलिए आपको उन आवश्यक शर्तों को लागू करना है जो प्रथमतया भारत के व्यवसाय, केवल आपके स्वयं के आंतरिक व्यावसायिक संगठनों के लिए, आकर्षक हो, लेकिन साथ ही इसे विदेशी निवेशकों के लिए भारत आने और उस अर्थव्यवस्था का विकास करने के लिए भी आकर्षक बनाया जाना चाहिए।

मेरे विचार में – भारत के साथ मेरा एक आरंभिक रोचक अनुभव 90 के दशक में था जब भारत ने बहुत, बहुत कम विदेशी प्रत्यक्ष निवेश किया। यह बहुत बंद प्रणाली थी।  उन्होंने कंपनियों को बाहर जाने और विदेशों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया।  और मेरी एक पहली पारस्परिक-क्रिया ONGC विदेश लिमिटेड की खरीद में सहायता करने के संबंध में थी जो एक बहुत महत्वपूर्ण भारतीय राष्ट्रीय तेल कंपनी है जिसने रूस में 20 सखालिन-1 परियोजना प्राप्त की है।  और मैं उन पक्षों को ऐसे बहुत से कारणों के लिए एक साथ रखता हूँ जिन्होंने उन लोगों के हित को पूरा किया जिनका मैंने उस समय प्रतिनिधित्व किया।  लेकिन यह एक रोचक चर्चा थी।  मैं उस प्रक्रिया में भारतीयों के साथ बहुत अधिक बातचीत की क्योंकि वे विदेश में निवेश करने के अभ्यस्त नहीं थे।  इसके परिणामस्वरूप मुझे गोवा में एक व्यावसायिक सम्मेलन में जाना पड़ा।

कुछ वर्ष बाद उन्होंने मुझे उन भारतीय व्यवसायियों से मिलने के लिए आने को कहा जिन्हें विदेश में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था। एक बार फिर, यह उनके लिए एक नए प्रकार की चीज़ थी।  और मुझे अंतिम बात याद है – हमारे यहाँ पैनल चर्चा हुई, बहुत सारे अच्छे प्रश्न पूछे गए।  मुझे जो अंतिम प्रश्न मिला, एक भारतीय व्यवसायी ने कहा, “यदि कोई ऐसी चीज़ हो जो हमें हमेशा सुनिश्चित करनी चाहिए जिसे हमे विदेश में निवेश करने पर ध्यान में रखना चाहिए, तो वह क्या है?  और मैंने उनसे  कहा, “यह बहुत सरल है।  भागीदारों को बुद्धिमानी से चुनें।”  क्योंकि किसी भी उद्यम में, आप भागीदार अपनाने जा रहे हैं, और आप जिसे चुनते हैं वह आपकी सफलता निर्धारित करने जा रहा है।

मैंने किसी भी संबंध में वही सबसे महत्वपूर्ण घटक अपनाया है। मैंने उसे हमेशा देखा है।  और हम अब इसी तरीके से भारत-अमेरिका के संबंध को देखते हैं:  अपने भागीदारों को बुद्धिमानी से चुनें।  हम यह मानते हैं कि हमने रणनीतिक भागीदारी के लिए भारत में किसी भागीदार को बुद्धिमानी से चुना है, लेकिन मेरे विचार में मैंने 20 वर्षों में भारत द्वारा विदेश में निवेश करने की जो प्रक्रिया देखी है, वह भारत को अपने यहाँ सफल होने के लिए आवश्यक शर्तों को समझने में सहायता करती है क्योंकि जब आपको इसका एक विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक के रूप में सामना करना पड़ता है, तब आप अचानक यह समझते हैं कि सफलता के लिए क्या महत्वपूर्ण है।  आप इसे वापस अपने देश ले जाते हैं, और इससे आपको अपने देश में सुधार करने में सहायता मिलती है।

हम भारत को सुधारों के संबंध में राह जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ऐसा बहुत-सा काम है जो इसके पूर्ण आर्थिक मूल्य को वास्तव में बढ़ाने के लिए किया जाना है कि भारत को क्या पेशकश करनी है।

प्रश्न:  मुझे ऐसे लगभग चार या पाँच प्रश्न पूछने हैं जो लगभग एक ही मुद्दे से संबंधित हैं, और वह इस क्षेत्र में जटिल पॉवर जियोमेट्री के बारे में है।  हमारे – भारत के रूस के साथ ऐतिहासिक रूप से प्रगाढ़ संबंध हैं।  चीन के पाकिस्तान के साथ प्रगाढ़ संबंध हैं।  हमने भारत और पाकिस्तान – दोनों के साथ प्रगाढ़ संबंध रखने का प्रयास किया।  अब यह अधिक जटिल वातावरण है।  क्या आप इस पॉवर जियोमेट्री में भारत के बारे में अपने विचार प्रदान कर सकते हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन: हमारा – मेरा मत, और मेरे विचार में यह अमेरिका सरकार के भी भीतर सामूहिक मत है – वह मत यह है कि चीन ने पिछले 20 से अधिक वर्षों में विकास करके विश्व में एक आर्थिक शक्ति के रूप में अपना उचित स्थान पा लिया है और अपने सैंकड़ो मिलियन लोगों को मध्य वर्ग की स्थिति में ला दिया है, भारत भी विकास करता रहा है। और मैंने अभ्युक्तियों में इसका दोबारा उल्लेख किया।  और हम यह देख रहे हैं कि कैसे वे दो बहुत विशाल राष्ट्र अपना स्थान ग्रहण कर रहे है्ं- वैश्विक अर्थव्यवस्था में उचित स्थान, उन्होंने ऐसा भिन्न तरीकों में किया है और मैंने उसे छूआ था।  और मेरे विचार में इसीलिए अमेरिका अब इसे हमारे संबंध की अगली शताब्दी के बारे में सोचते हुए एक महत्वपूर्ण बिंदु मानता है।

हम चीन के साथ महत्वपूर्ण संबंध रखने जा रहे हैं। हम चीन, एक गैर-लोकतांत्रिक समाज, के साथ कभी वैसा संबंध नहीं रखेंगे जैसा हम किसी बड़े लोकतंत्र के साथ रख सकते हैं।

और इसलिए मैं सामने उपस्थिति स्थिति के बारे में सोचता हूँ और मुझे भारतीयों – भारतीय सरकार को स्वयं के लिए बात करने देनी है, लेकिन मेरे विचार में, चूँकि भारत उत्थान की इस प्रक्रिया से गुज़र चुका है, इसने भी इसके आसपास की परिस्थितियों और संबंधों के इसके इतिहास और इन बातों पर विचार किया है कि उनके संबंधों ने उनकी प्रगति में कैसे सहायता की है और उन्होंने कैसे प्रगति में सहायता नहीं की है। और मैं विश्व के – एक सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, विश्व का सबसे लोकतंत्र, इसने कहा है, मैं किसी अन्य लोकतंत्र के साथ भागीदार होना चाहता हूँ; मैं इन उन देशों के साथ भागीदारी नहीं करना चाहता जो समान मूल्यों के साथ प्रचालन नहीं करते हैं।

मेरे विचार में इसकी समाप्ति पर, यह संबंध साझा मूल्यों पर निर्मित है। यही चीज़ हमें करीब लेकर आई है।  दो बहुत विशाल महत्वपूर्ण लोकतंत्र समान भविष्य को साझा करना चाहते हैं और हमारे पास भविष्य के लिए साझा संकल्पना है।

और मेरे विचार में पिछले कुछ – तीन दशकों में यही परिवर्तन हुआ है। यहाँ वास्तविक रूप से विचार किया गया है, जैसा कि मैंने इसका अवलोकन किया है – भारत सरकार द्वारा अपने विगत अनुभवों पर वास्तविक रूप से विचार किया गया है और यह निर्णय लिया गया  है कि हम कहाँ जाना चाहते हैं।

श्रीमान हमरे:  सेक्रेटरी, यह – मैं जानता हूँ कि यह आपकी यात्रा का निश्चित कारण नहीं है, लेकिन मैं ऐसा मानता हूँ कि हमें कुछ प्रश्न पूछने हैं।  मुझे आपसे म्यांमार के बारे में पूछना है।  आप जानते हैं कि वहाँ रोहिंग्या का अविश्वसनीय मानवीय संकट बना हुआ है।  क्या आप इस संबंध में अपने विचार हमारे साथ साझा कर सकते हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  हम उस बारे में असाधारण रूप से चिंतित हैं जो बर्मा में रोहिंग्या के साथ घटित हो रहा है।  मैं ओंग सान सू की, सरकार की नागरिक पक्ष की नेता के संपर्क में रहा हूँ।  जैसा कि आप जानते हैं कि वह सत्ता की भागीदारी करने वाली सरकार है जो बर्मा में प्रकट हुई है।  रोहिंग्या* क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए हम वास्तव में सैन्य नेतृत्व को जवाबदेह ठहराते हैं।

हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि विश्व मूक दर्शक बनकर उन अत्याचारों को देखता भर नहीं रह सकता जो क्षेत्र में रिपोर्ट किए जा रहे हैं। हमने सेना को जो कुछ करने के लिए प्रोत्साहित किया है, वह यह है – पहला, हम यह समझते हैं कि आपके यहाँ देश के उस भाग के भीतर गंभीर विद्रोही/आतंकवादी घटक हैं जिनसे आपको निपटना है, लेकिन आपको उस संबंध में अनुशासित होना होगा कि आप उनसे कैसे निपटें, आपको इस संबंध में संयम बरतना होगा कि आप उनसे कैसे निपटें।  और आपको इस क्षेत्र में फिर से पहुँच की अनुमति देनी होगी जिससे हम परिस्थितियों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकें।  मेरा विचार है कि जिस किसी ने भी द न्यू यॉर्क टाइम्स में हाल का समाचार पढ़ा होगा, उसका कलेजा फट गया होगा।  यह पढ़कर आपका दिल टूट जाता।

इसलिए हम क्षेत्र में पहुँच के लिए अनुरोध करते रहे हैं। हम अपने दूतावास से हमारे कुछ लोगों को उस क्षेत्र में ले जा पाए हैं जिससे हम घटने वाली घटनाओं को स्वयं देख सकें।  हम सहायता एजेंसियों  – रेड क्रॉस, द रेड क्रीसेंट, UN एजेंसियों – के लिए पहुँच को प्रोत्साहित करते रहे हैं जिससे हम कुछ अत्यावश्यक मानवीय ज़रूरतों को पूरा कर सकें, लेकिन अधिक महत्वपूर्ण रूप से, जिससे हम यह पूरी तरह जान सकें कि क्या हो रहा है।  किसी – यदि ये रिपोर्टें सही हैं, तो उसके लिए किसी को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा।

और यह निर्णय लेना बर्मा के नेतृत्व पर निर्भर करता है कि वे बर्मा के भविष्य में किस दिशा में खेलना चाहते हैं क्योंकि हम बर्मा को एक महत्वपूर्ण उदय होता हुआ लोकतंत्र मानते हैं। लेकिन यह वास्तविक परीक्षा है।  यह सत्ता की भागीदारी करने वाली इस सरकार का वास्तविक परीक्षण है कि वे इस बहुत गंभीर मुद्दे से कैसे निपटने वाले हैं।

इसलिए हम गहनता से संलग्न हैं। हम अन्यों के साथ संलग्न हैं और हम अंततः UN द्वारा लिए गए निर्णय के साथ इसमें संलग्न होने जा रहे हैं।

श्रीमान हमरे:  एक बार फिर, कुछ प्रश्न:  हम अफ़गानिस्तान संबंधी कार्य कर रहे हैं और अफ़गानिस्तान का जटिल भूगोल, जटिल भूराजनीति है, मुझे ऐसा कहना चाहिए।  अफ़गानिस्तान में होने वाली घटनाओं में भारतीयों की बेहद रुचि रही है और इसकी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की भी इसमें रुचि रही है।  अफ़गानिस्तान – आप यहाँ क्या करने जा रहे हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  आपने यह सुना कि राष्ट्रपति ने इस संबंध में अपनी नई नीति की घोषणा की – और यह दक्षिण एशिया रणनीति है।  अफ़गानिस्तान वह देश है जिस पर लोगों द्वारा विशेष ध्यान देने की प्रवृत्ति है।  लेकिन हम वहाँ की चुनौतियों के संबंध में क्या पहल करते हैं, इस संबंध में एक अंतर है और इसीलिए हमें इस नीति को पूरी तरह से तैयार करने में थोड़ा अधिक समय लगा, वह यह है कि हम इसे क्षेत्रीय मुद्दा मानते हैं।  यह केवल अफ़गानिस्तान का मुद्दा नहीं है।

और आप क्षेत्रीय चुनौतियों पर ध्यान देकर अफ़गानिस्तान का समाधान करते हैं। और पाकिस्तान उसका एक महत्वपूर्ण घटक है।  भारत इसका एक महत्वपूर्ण घटक है कि हम अंतिम लक्ष्य को कैसे पूरा करते हैं जो एक स्थिर अफ़गानिस्तान है, जो आगे से आतंकवाद के संगठनों के लिए मंच के रूप में काम न करे।  आतंकवाद पर हमारी नीति बस यह है कि हम आतंकवादियों को अवसर, साधन, स्थान, पैसे, वित्तपोषण, और अमेरिकियों के खिलाफ देश एवं विदेश में, दुनिया में कहीं भी, हमले के लिए संगठित होने तथा करने की क्षमता से वंचित कर देंगे।  ठीक है, स्पष्ट रूप से इस नीति के खतरे को अफ़गानिस्तान में कई तरह से अपना ठिकाना मिल जाता है।  और इसलिए, उस हद तक जिस तक हम उसे अफ़गानिस्तान में आतंकवाद के अवसर के रूप में हटा सकते हैं, पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान इसके सबसे बड़े लाभार्थी होने वाले हैं।  और अफ़गानिस्तान को विकास सहायता प्रदान करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि वे ऐसी बेहतर आर्थिक स्थिति बनाने के लिए आगे आते हैं, जो अफ़गानिस्तान में बहुत ही विविध जातीय समूह के लोगों की ज़रूरतों को पूरा करते हैं।  इसलिए यह तालिबान और उन अन्य तत्वों के लिए एक प्रतिबद्धता, एक संदेश के रूप में है कि हम कहीं भी नहीं जा रहे हैं।  और इसलिए हम तब तक यहीं रहेंगे जब तक आपको अपना मन बदलने में समय लगता है और फैसला करें कि क्या आप सुलह प्रक्रिया में अफगान सरकार से जुड़ना चाहते हैं और सरकार का एक ऐसा रूप विकसित करना चाहते हैं जो अफगानी संस्कृति की ज़रूरतों के अनुरूप हो।

और अफगान सरकार को, देश और उसके अपने इतिहास में मौजूद बहुत जातीय विविध संस्कृतियों की पूरी ज़रूरतों का पता लगाने के लिए उन्हें खुले बने रहने पर प्रतिबद्ध होना चाहिए। और हमें लगता है कि यह प्राप्त करने योग्य है और हमारे पास एक स्थिर, शांतिपूर्ण अफ़गानिस्तान हो सकता है।  और जब ऐसा होता है, तो पाकिस्तान की भविष्य की स्थिरता के सम्मुख भी बड़ा खतरा हट जाता है, जिसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए बेहतर स्थिति पैदा होती है।  इसलिए हम इसे न केवल एक मुद्दे के रूप में देखते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के रूप में देखते हैं।  और हमारा भारत और पाकिस्तान के साथ मिलकर निकटता से काम करने का इरादा है, हम आशा करते हैं कि उनकी सीमा पर चल रहे तनाव भी कम हो जाएंगे।

पाकिस्तान में दो बहुत अशांत सीमाएं हैं – दो बहुत अशांत सीमाएं। और हम उन दोनों जगहें पर तनाव कम करने में मदद करना चाहते हैं और भविष्य में पाकिस्तान सरकार की स्थिरता सुरक्षित रखेंगे, जो हमें लगता है कि इस क्षेत्र के संबंधों में भी सुधार लाएगी।

श्रीमान हमरे: सेक्रेटरी, मुझे – मुझे पता है कि मैं अपने घोड़ा रखने वालों द्वारा दी गई समयसीमा के करीब हूं, लेकिन मुझे पूछने दें – कई प्रश्न विकास के निपटान से थे, और मुझे लगता है कि मैं आपसे इस स्थिति पर प्रश्न पूछना चाहता हूं: USAID के लिए नए व्यवस्थापक हमारे पास एक बहुत ही सक्षम हैं।  मैं जानता हूं कि आप व्यक्तिगत रूप से वर्षों से सहायता और विकास संबंधी मुद्दों में काफी शामिल हैं।  आप स्टेट डिपार्टमेंट और USAID के बीच बढ़ते के रिश्ते में क्या देखते हैं?  आप इसके बारे में कैसा सोचते हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  खैर, हमें – मुझे लगता है कि यह परंपरागत रूप से दो संगठनों की भूमिकाओं की तुलना में अलग नहीं है।  स्टेट डिपार्टमेंट विदेश नीति तैयार करता है, यह रणनीतियों और कार्यनीतियों को विकसित करता है, और हमारी विदेश नीति के क्रियान्वयन का प्रमुख तत्व विकास सहायता और समर्थन है, चाहे वह प्रत्यक्ष मानवीय सहायता हो, खाद्य कार्यक्रम की सख्त ज़रूरतों का समाधान निकालना हो, आपदा प्रतिक्रिया हो, या फिर चाहे लोकतांत्रिक क्षमता और संस्थागत क्षमता विकसित करने की बात हो।  तो USAID विदेश नीति का महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता उपकरण है।  वे नीति नहीं बनाते, लेकिन वे विदेशी नीति के क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हैं।  और यह असल में वहां है जहां हम चाहते हैं कि वह विशेज्ञता रहे, और मैं उन्हें कई तरह से देखता हूं – अपने पहले के जीवन की भाषा का उपयोग करते हुए कहूं तो, जब बात सहायता और विकास कार्यक्रमों की आती है, तो वे विशेषज्ञता के एक केंद्र हैं।  कोई भी उनसे बेहतर नहीं कर सकता; न सिर्फ सीधे, बल्कि उनके पास ज़बरदस्त संगठनात्मक और अन्य बहुपक्षीय संगठनों के माध्यम से काम करने की आहूत क्षमता है।  चाहे यह संयुक्त राष्ट्र संगठन, एनजीओ, सीधे देश के भीतर क्षमता हो, वे वास्तव में दुनिया में ऐसा करने के विशेषज्ञ हैं।  उनके तमाम रिश्ते हैं, उनके संपर्क हैं, उनके पास प्रक्रिया है, उनके पास कार्यविधियां हैं और वे हमारी विदेश नीति के क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हैं।  और इसलिए, वे इसके अभिन्न अंग बन जाते हैं कि हम विदेश नीति को कैसे विकसित करते हैं, हम इसकी व्यवहार्यता का कैसे परीक्षण करते हैं, और फिर हम उस नीति के प्रति क्रियान्वयन के लिए योजनाओं, रणनीतियों और युक्तियों को कैसे तैयार करते हैं।

तो यह है कि – यह है रिश्ता और एक चीज है जिसे हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर कोई अपनी भूमिकाओं को समझे और हर कोई यह समझे कि उनकी क्या भूमिका नहीं है। स्टेट डिपार्टमेंट के पक्ष में, हमारी विशेषज्ञता विश्लेषण, मूल्यांकन, विदेश नीति के विकास, उन सभी के राजनयिक एकीकरण को लेकर है।  USAID, यद्यपि, वे वास्तव में विशेषज्ञ हैं और हममें – स्टेट डिपार्टमेंट के पास वैसी विशेषज्ञता नहीं है।  यह वास्तव में वहां पर रहती है।

श्रीमान हमरे: एक आखिरी – मुझे एक संकेत मिला जो कहता है, “अंतिम प्रश्न।” मुझे आखिरी प्रश्न पूछने दें और – हालिया वर्षों में, ज्यादातर स्टेट सेक्रेटरी नीतियों से जुड़े लोग रहे हैं, उन्होंने नीतियों की दुनिया में अपना जीवन बिताया है।  लेकिन स्पष्ट रूप से, डिपार्टमेंट के समूचे इतिहास में, हमारे पास बहुत से कारोबारी लोग थे जो इसमें रहे हैं। क्या – आप निजी क्षेत्र के साथ काम करके दुनिया भर में अमेरिकी कूटनीति और अमेरिकी मूल्यों को आगे बढ़ाने के तरीके के बारे में किस तरह सोचते हैं ?

सेक्रेटरी टिलरसन:  खैर, मुझे लगता है कि हमारे लिए ज़रूरी चीजों में से एक यह है कि हम यह सुनिश्चित करें – कि हम इस बारे में पूरी तरह स्पष्ट हों कि हमारी नीतियाँ क्या हैं, हमारी रणनीतियाँ क्या हैं, हमारी कार्यनीतियाँ क्या हैं, ताकि निवेशक, व्यापारिक समुदाय, कम से कम उनका आकलन कर सकें, क्योंकि वे अपने स्वयं के व्यावसायिक आचरण, निजी उद्यम, चाहे वह निवेश, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हो जिसे वे करना चाहते हैं, या कि चाहे यह पार्टनरशिप हो जिसे वे अमेरिका में निवेश के लिए बना रहे हों। यह मेरी पिछली टिप्पणी तक जाता है:  अपने सहयोगियों का बुद्धिमानी से चुनाव करें।

मुझे लगता है कि स्टेट डिपार्टमेंट में हमारे लिए महत्वपूर्ण चीजों में से एक यह सुनिश्चित करने में सक्षम होना है कि हम व्यापारिक समुदाय और निवेशकों को किसी विशेष देश के साथ संबंध क्या है, हम जोखिम को कैसे देखते हैं, उस देश की स्थिरता के बारे में स्पष्टता प्रदान कर सकें। ये वे चीजें थी जो मेरे लिए निर्णय लेने में महत्वपूर्ण थीं जब मैं निजी क्षेत्र में था।  यह एक जोखिम प्रबंधन संबंधी निर्णय है।  तो हम सब इस बात को कैसे समझ सकते हैं कि इस देश में क्या जोखिम हैं, लेकिन यह भी कि स्थितियाँ क्या हैं?  क्या हम सोचते हैं कि स्थितियाँ सही दिशा में जा रही हैं, या हमारी चिंताएं हैं कि चीजें गलत दिशा में जा सकती हैं, और फिर व्यापारिक नेता अपने निर्णय ले सकते हैं कि उन्हें इसके के बारे में क्या करना चाहिए।

श्रीमान हमरे:  मुझे लगता है कि आप सभी देख सकते हैं कि मैं 11 सालों से क्यों इतना भाग्यशाली था, क्योंकि मेरे बोर्ड में सेक्रेटरी टिलरसन हैं।  वे एक बुद्धिमान और विचारशील व्यक्ति हैं।  क्या आप कृपया अपनी प्रशंसा के साथ उनका धन्यवाद करेंगे?

सेक्रेटरी टिलरसन:  धन्यवाद।

(तालियाँ बजती हैं)।

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मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/secretary/remarks/2017/10/274913.htm
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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