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सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रैक्स टिलरसन एक प्रेस उपलब्धता पर 26 अक्तूबर 2017 जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड

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अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट
प्रवक्ता कार्यालय
तत्काल रिलीज़ के लिए
26 अक्तूबर 2017
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट

 

 

सेक्रेटरी टिलरसन:  खैर, जाहिर है कि यह एक – हालांकि कई दिन तक की – लेकिन एक लम्बी यात्रा नहीं थी, लेकिन कई जगह रुकने की वजह से यह एक लम्बी यात्रा बन गई।  तो मुझे लगता है कि मेरे कई पर्यवेक्षण हैं जो मैं आप लोगों के सामने प्रस्तुत करना चाहूंगा।  इसलिए मैने उन्हें कागज़ पर लिख लिया है ताकि मैं कुछ चीज़ें भूल न जाऊँ।  तो मैं उनके बारे में बताऊंगा और फिर उसके बाद आपके सवाल लूंगा।

तो जैसा कि आप लोग जानते हैं, हम इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण राजधानियों के इस सप्ताहांत की यात्रा के आखिरी पड़ाव पर हैं, जिनमें से कई अभी भी व्यापक और महत्वपूर्ण संघर्ष में हैं।  प्रत्येक पड़ाव पर, हमने दोबारा पुष्टि की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका सभी लोगों के लिए वैश्विक नेतृत्व, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना जारी रखेगा।  और ऐसा करने में, जाहिर है हम अमेरिकी लोगों को भी यही पहुंचाना चाहेंगे।

रियाद में यह जाहिर था, जहां हमने यात्रा शुरू की थी।  मैंने महामहिम राजा सलमान और प्रधानमंत्री अबादी के साथ उद्घाटन संयुक्त समन्वय समिति में भाग लेने पर बहुत सम्मानित महसूस किया।  इस समारोह ने सऊदी अरब और इराक दोनों के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों की ताकत और हम उन दोनों के बीच अधिक सहयोग को कैसे जारी रख सकते हैं, पर प्रकाश डाला।  हम मानते हैं कि गहरे होते सऊदी-इराकी संबंध केवल इराक के स्थिरीकरण और पुनर्निर्माण के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

इस साल के शुरू में रियाद शिखर सम्मेलन के भावार्थ में, संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवादियों और उनको वित्तपोषित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कतर और हमारे खाड़ी के सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखता है।  हमारे खाड़ी के सभी सहयोगी आतंकवाद के विरुद्ध एक नए सिरे से प्रयास कर रहे हैं।  हमें उन सभी प्रयासों को अधिक सहयोग, समन्वय और जानकारी के साझाकरण के माध्यम से बढ़ाना होगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका खाड़ी विवाद के दूरगामी परिणामों के बारे में परेशान और चिंतित है।  हमारा संदेश स्पष्ट है:  GCC सबसे अधिक मजबूत है जब वह एकजुट है।  हम उस एकता को आगे बढ़ाने के लिए संचार की लाइनें खोलने के हमारे प्रयासों को जारी रखेंगे, और जैसा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है, हम किसी मध्यस्थता प्रयासों में सहायता के लिए तैयार रहते हैं।

अमेरिकी नेतृत्व इराक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आवश्यक है, और मैंने संयुक्त समन्वय समिति की बैठक के साथ-साथ अलग से प्रधानमंत्री अबादी के साथ मिलने का अवसर का स्वागत किया।  प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, ISIS पीछे हट रहा है।  राष्ट्रपति ट्रम्प के शब्दों में, “ISIS खलीफा का अंत अब नज़र आ रहा है।”  गठबंधन के समर्थन के साथ, इराकी सुरक्षा बलों ने इराक में किसी समय ISIS के कब्ज़े वाले क्षेत्र में से 90 प्रतिशत से अधिक को सफलतापूर्वक मुक्त करवा लिया है, जिससे 2 मिलियन से अधिक इराकी घर लौट आए हैं।  और आज, इराकी अपने समुदायों का पुनर्निर्माण कर रहे हैं।  इराक के नेतृत्व में 360 से अधिक, संयुक्त राष्ट्र के कार्यान्वयन वाली, गठबंधन-द्वारा वित्त पोषित स्थिरीकरण परियोजनाएं चल रही हैं और जारी रहेंगी।

हम जानते हैं कि युद्ध के मैदान पर ये जीत स्थिर, समृद्ध इराक बनाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए हम इराकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और चल रहे मानवीय और स्थिरीकरण के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय समर्थन की तलाश करना जारी रखते हैं।  हम इराक और उसके पड़ोसियों के बीच कनेक्शनों को बढ़ते देखते हुए खुश हैं, जैसा कि रियाद में समन्वय परिषद की बैठक में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

पिछले महीने उत्तरी इराक में जो तनाव सामने आए हैं, वे चिंतित करने वाले हैं।  बगदाद में हमारे दोस्तों और इराक के कुर्द क्षेत्र में हमारे दोस्तों सहित, संयुक्त राज्य अमेरिका सभी इराकियों का एक दोस्त है।  हम निराश हैं कि पार्टियाँ अभी तक हाल के तनावों के एक पूर्ण शांतिपूर्ण समाधान तक नहीं पहुंच पाई है।

प्रधानमंत्री अबादी के साथ मेरी बैठक के बाद, मेरी कुर्दिस्तान के राष्ट्रपति बरज़ानी के साथ एक बहुत लंबा टेलीफोन वार्ता हुई।  शांतिपूर्ण, राजनीतिक साधनों के माध्यम से एक एकीकृत, संघीय, और लोकतांत्रिक इराक के समर्थन में एक सकारात्मक मार्ग को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, बगदाद और इरबिल की सहायता करने के लिए तैयार है।  मैंने इराक और पेशेमर्गा सैन्य बलों के बीच सभी संघर्षों से बचने का दोनों पक्षों से आह्वान किया और मैंने इराकी संविधान के आधार पर वार्ता के लिए इरबिल के सुझावों को स्वीकार करने के लिए प्रधानमंत्री अबादी को प्रोत्साहित किया।

यात्रा का शेष हिस्सा दक्षिण एशिया और क्षेत्र के लिए राष्ट्रपति की नई रणनीति और अफ़गानिस्तान के भविष्य पर केंद्रित है।  जैसा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया, अफ़गानिस्तान में शांति, स्थिरता और समृद्धि हासिल करने के लिए क्षेत्रीय भागीदारों की भागीदारी की आवश्यकता है – सबसे महत्वपूर्ण रूप से, पाकिस्तान और भारत की।  हमारा लक्ष्य हमारे क्षेत्रीय भागीदारों के साथ काम करना है ताकि अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान में आतंकवादियों के सुरक्षित आश्रयों को खत्म किया जा सके ताकि दक्षिण एशिया शांति और समृद्धि की अवधि में प्रवेश कर सके।  एक स्थिर, सार्वभौमिक, एकीकृत और लोकतांत्रिक अफ़गानिस्तान के मार्ग को अफगान सरकार की आवश्यकता है ताकि सुधार में उनकी प्रतिबद्धता को बढ़ाया जा सके।  राष्ट्रपति गनी ने मुझे आश्वासन दिया कि वे और उनकी सरकार सुधारों, विशेष रूप से अफगान लोगों के लिए वास्तविक प्रगति हासिल करने के लिए आतंकवादी विरोधी प्रयासों का।

इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण भागीदार है।  हमारा पाकिस्तान के साथ सकारात्मक साझेदारी का लंबा इतिहास है, लेकिन पाकिस्तान को अपने देश के भीतर सक्रिय उग्रवादियों और आतंकवादियों को खत्म करने के लिए और बहुत कुछ करना होगा।  पाकिस्तान के लोगों को एक स्थिर, शांतिपूर्ण अफ़गानिस्तान से, और एक ऐसे क्षेत्र से बहुत फायदा पहुंचेगा तो आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय देने से इंकार करता है।  यह मेरा प्रधानमंत्री अबादी, चीफ़ ऑफ आर्मी स्टॉफ बाजवा, और पाकिस्तानी नेतृत्व को मुख्य संदेश था।

भारत में, मैंने राष्ट्रपति की दक्षिण एशिया रणनीति और भारत की भूमिका के हमारे संदेश को साझा करना जारी रखा।  हम अफ़गानिस्तान के विकास के लिए भारत के उदार योगदान के लिए आभारी हैं, और हम उनसे अधिक भागीदारी देखने की उम्मीद करते हैं।  जैसा कि मैंने वाशिंगटन में पिछले सप्ताह रेखांकित किया था, हम शांति, स्थिरता और भारत-प्रशांत क्षेत्र के विकास की नींव बनाने के तौर पर अमेरिका-भारत सामरिक भागीदारी को बनाये रखने के लिए काम करेंगे।  हम भारत की ज़िम्मेदारी भरी उन्नति का समर्थन करते हैं और एशिया में उनके और अन्य समान सोच वाले देशों के साथ मिलकर नए तरीके तलाशना चाहते हैं।  प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोवाल और विदेश मंत्री स्वराज के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों पर मेरी बहुत व्यापक चर्चा हुई।  यह आवश्यक है कि हमारे दोनों लोकतंत्र हमारे लोगों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक साथ मिलकर काम करें।

और मैंने कुछ ही क्षण पहले सीरिया में चल रही घटनाओं के बारे में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत दी मिस्टूरा के साथ एक उपयोगी चर्चा की।  ISIS के हार के किनारे पर होने के साथ, हम सीरिया में हिंसा को कम करने के हमारे प्रयासों और सीरिया के लोगों को एक नया राजनीतिक मार्ग तैयार करने देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2254 के तहत जेनेवा प्रक्रिया का समार्थन करते हैं।  जैसा कि हमने पहले भी कई बार कहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार में बशर अल असाद के लिए कोई भूमिका नहीं वाला एक संपूर्ण और एकीकृत सीरिया चाहता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के हर क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।  और जैसे कि हम नेतृत्व करते हैं, हम दूसरों से अधिक ज़िम्मेदारियाँ उठाने के लिए अपील करना जारी रखेंगे ताकि वे अंततः अपने लोगों का भरण-पोषण कर सकें और अपनी स्वयं की संप्रभुता को बनाए रख सकें।  जैसा कि हम करते हैं, हम अमेरिकी लोगों को अधिक सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करेंगे।

प्रश्न:  आपने इस गर्मी में टर्की में जो कहा था, उससे असाद पर यह बयान थोड़ा अलग लगता है – लेकिन मेरा मतलब है, उसे जाने के लिए एक स्पष्ट अपील।  क्या यह उस स्थिति में बदलाव को दर्शाता है जो हम ले रहे हैं – आपने संकेत दिया था कि वास्तव में यह स्वयं सीरियाई लोगों को तय करने पर निर्भर था।

सेक्रेटरी टिलरसन:  तो यह हमारा नजरिया है कि – जैसा कि मैंने यह पहले भी कई बार कहा है – कि हमें नहीं लगता कि असाद शासन, या असाद परिवार का कोई भविष्य है।  मुझे लगता है कि ऐसा मैंने कई बार कहा है।  असाद परिवार का शासन अब समाप्ति के करीब है, और मुद्दा केवल यह है कि उसे सम्पादित कैसे किया जाए।  और हमारा मानना है कि इसे सम्पादित किया जा सकता है और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हिस्से के तौर पर – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2254 के कार्यान्वयन के तौर पर लाया जाएगा, जो कि, जैसा कि आप जानते हैं, चुनावों और एक नए संविधान के विकास के लिए एक बहुत विशिष्ट निर्धारित प्रक्रिया है।

मुझे लगता है – केवल जो बात बदल गई है जब से यह प्रशासन कार्यालय में आया, वह यह है कि हमने एक नजरिया अपनाया है कि यह पहले से आवश्यक नहीं है कि प्रक्रिया शुरू होने से पहले असाद चला जाए, बल्कि वह तंत्र जिसकी वजह से असाद का प्रस्थान होता है उसकी उस प्रक्रिया से उत्पन्न होने की संभावना है।

प्रश्न:  मैंने सुना है कि यूरोपीय राजनयिक सीरिया का ईरान की जीत के रूप में वर्णन करते हैं, क्योंकि ईरान असाद सरकार के लिए बहुत आवश्यक रहा है।  आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि मामला यह नहीं है?  और क्या आपको दी मिस्टूरा से कोई आश्वासन मिला है – क्या ये बातचीत शुरू करने के लिए कोई समयसीमा है?

सेक्रेटरी टिलरसन:  मैं सीरिया को ईरान की जीत के तौर पर नहीं देखता।  मैं ईरान को एक हैंगर-ऑन के तौर पर देखता हूँ।  ईरान क्षेत्रों को आजाद करवाने में विशेश रूप से सफल नहीं रहा है।  रशिया की सरकार, सीरियाई शासन के सैन्य बलों के लिए काफी हद तक हवाई सहायता प्रदान कर रही है, सफल रही है।  उनकी अपनी सफलताएँ रही हैं।  हमारी अपनी सफलताएँ रही हैं, हमारे गठबंधन के सैन्य बलों के साथ ज़बर्दस्त सफलताएँ।  इसलिए मुझे नहीं लगता कि ईरान को सीरिया में ISIS की हार के लिए किसी भी तरह का श्रेय दिया जाना चाहिए।  बजाय इसके, मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी उपस्थिति से वहाँ उस परिस्थिति का काफी हद तक फायदा उठाया है।

फिर से, सीरिया में ईरान के भविष्य के प्रभाव के संदर्भ में, मुझे लगता है कि अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2254 के कार्यान्वयन से नए संविधान, चुनाव और किस बात के माध्यम से वह उभर आएगा।

प्रश्न:  महोदय, पाकिस्तानियों के साथ आपकी मुलाकात के बारे में बात करें।  उनकी आधिकारिक समाचार एजेंसी ने इस बारे में बात की है कि किस प्रकार संयुक्त राज्य अमेरिका ने उन 75 आतंकवादियों की सूची उन्हें प्रस्तुत की है, जिसके बारे में पाकिस्तानी दावा करते हैं कि उनमें से कोई भी पाकिस्तानी नहीं है, कि लश्कर-ए तैयब्बा का प्रमुख उस सूची में नहीं हैं और कि उन्होंने आपको 100 आतंकवादियों की एक सूची प्रदान की है, जिनके बारे में वे चाहते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका उनके पीछे जाए।  क्या आप उन बातों के बारे में बात कर सकते हैं जो आपने विशेष रूप से उनके सामने रखी थी जब आप उनसे कुछ दिन पहले बात की थी?

सेक्रेटरी टिलरसन:  तो, मुझे लगता है कि आपने जो भी अभी-अभी वर्णन किया वह आतंकवादियों के बारे में जानकारी का एक बहुत ही स्वस्थ आदान-प्रदान है, जो कि हम वास्तव में पाकिस्तान के साथ हासिल करने की उम्मीद करते हैं।  हमने उनको केवल व्यक्तियों के नामों के अलावा, विशेष मांगें भी प्रदान की हैं।  हमने उनके सामने कुछ विशिष्ट मांगे रखी हैं।  लेकिन हमने साथ ही उन्हें अधिक से अधिक साझा करने के लिए भी आमंत्रित किया है।  इसलिए हम उनसे जानकारी प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं जो कि उपयोगी होगी।

और किसी खास दिन या किसी विशेष सैल की विशिष्ट जगहें जहाँ वे स्थित हो सकते हैं – वे काफी इधर-उधर घूमते हैं।  जैसा कि आप जानते हैं, पाकिस्तान-अफगान सीमा काफी झरझरा है; वास्तव में, यह खराब तरीके से परिभाषित है।  और इसलिए हम कम चिंतित हैं कि वे पाकिस्तानी क्षेत्र में हैं, या अफ़गानिस्तान के क्षेत्र में, या – जैसे कि हम जानकारी प्राप्त कर रहे हैं ताकि हम उन्हें समाप्त कर सकें।

प्रश्न:  मैं पाकिस्तान के विषय पर बने रहना चाहूंगा।  आज हम पाकिस्तान से जो प्रतिक्रिया प्राप्त कर रहे हैं वह यह है कि आपकी यात्रा अच्छी नहीं रही, और यह महसूस किया गया कि आप दिल्ली और काबुल से इस्लामाबाद को व्याख्यान दे रहे थे।  मैं आपको पूछना चाहता हूं कि अगर आपको लगता है – आप वास्तव में क्या सोचते हैं कि आपने क्या हासिल किया जो आप वहां जाए बिना पूरा नहीं कर सकते थे।

सेक्रेटरी टिलरसन:  खैर, मैं अपने प्रत्यक्ष विचार-विमर्शों को बिलकुल भी व्याख्यान के तौर पर नहीं रखूंगा।  यह एक बहुत उपयोगी और उत्पादक विचार-विनिमय था।  दरअसल, हमने लगभग 80 प्रतिशत समय उनकी बात सुनी और 20 प्रतिशत ही बोले।  और यह मेरे लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि मैं पहले कभी पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ सम्मिलित नहीं हुआ था।  और मेरा लक्ष्य उनकी बात को सुनना, उनके नजरिये को जानना था।

हमने अपनी बातें उनके सामने रखीं।  हमने अपनी अपेक्षाएँ बिना किसी अनिश्चित शब्दों के उनके सामने रखीं।  मेरी यात्रा से पहले काफी महत्वपूर्ण सहभागिता हुई थी, और भविष्य में भी आगे संबद्धताएँ होंगी, जैसा कि हम चाहते हैं, जैसा कि मैंने कहा, जानकारी का विनिमय और इन आतंकवादी संगठनों को नष्ट करने के उद्देश्य को प्राप्त करने का लक्ष्य, वे जहां कहीं भी स्थित हैं।  हमारी – यह बहुत स्पष्ट, बहुत स्पष्ट बातचीत थी।  हमारी प्रधानमंत्री अब्बासी और पूर्ण नेतृत्व दल के साथ संयुक्त बैठक हुई।  और फिर मेरी सेना के जनरल बाजवा और उनके कुछ करीबी सलाहकारों के साथ दूसरी बैठक हुई, इसलिए हम कुछ विवरणों के बारे में अधिक गहन चर्चा कर सकते थे।

लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही खुली, स्पष्ट और फ्रैंक एक्सचेंज था और यह है – व्याख्यान के द्वारा प्राप्त करने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन हमें अपनी उम्मीदों के बारे में और हम क्या मांग कर रहे हैं, के बारे में बहुत स्पष्ट होना चाहिए।  और या तो लोग आगे बढ़ेंगे और उन उम्मीदों को पूरा करेंगे या वे नहीं करेंगे। हम अपने मार्ग को पाकिस्तान के साथ संगत करने जा रहे हैं, जो कि न केवल कहते हैं, लेकिन वास्तव में वे क्या करते हैं।

प्रश्न:  क्या मैं – मैं पहले दो, पहले तीन – कई पड़ावों के बारे में जानना चाहता हूँ, लेकिन सऊदी और इराक मेल-मिलाप के संबंध में।  मुझे लगता है कि यह बहुत स्पष्ट है कि लगभग – बहुत ही शुरुआती, फरवरी या मार्च के बाद, से महत्वपूर्ण प्रगति हुई है या – इन दोनों को करीब लाने में।  लेकिन मैं जानना चाहता हूँ कि दोनों की क्या उम्मीद है या यह कितना यथार्थ है कि रियाद और बगदाद के इस तरह से इकट्ठे होने की कितनी उम्मीदें हैं – वास्तव में, इराक के पुनर्निर्माण के लिए न केवल मदद करने के उद्देश्य को हासिल करना, बल्कि ईरान के प्रभाव को धुंधला करना भी, जबकि रियाद में आपकी बैठक और आपके बगदाद जाने के कुछ ही दिन बाद अबादी तेहरान में है।

सेक्रेटरी टिलरसन:  खैर, मुझे लगता है – और दरअसल, प्रधानमंत्री अबादी ने टिप्पणी की है – या कम से कम मैने कुछ टिप्पणियाँ पढ़ी हैं जो उन्होंने अपनी ईरान की यात्रा के बारे में की हैं।  मुझे लगता है कि हमें यथार्थवादी होना चाहिए और समझना चाहिए और यह मानना चाहिए कि इराक की ईरान के साथ काफी लंबी सीमारेखा है।  लंबे समय तक – न सिर्फ कुछ दशकों से, ईरान और इराक के बीच सदियों से लंबे संबंध हैं, और हम उन दोनों देशों के बीच सभी संपर्कों को खत्म करने नहीं जा रहे हैं।  वे वैध संपर्क हैं जो जारी रहने चाहिएँ – आर्थिक, व्यापारिक, और ऐसी ही कई चीजें।  हम इराक को जो कह रहे हैं, वह है, “आपको अपने पैरों पर खड़े रहने और उस प्रभाव का विरोध करने की क्षमता विकसित करनी होगी।”  और जिस तरह से हम इराक की सहायता कर सकते हैं, वह यह सुनिश्चित करना है कि इराकी लोग समझते है, क्योंकि वहां हुआ है – और मुझे लगता है कि विदेश मंत्री जुबेर ने रियाद में हमारी प्रेस उपलब्धता में इसका उल्लेख किया था, – इराक और GCC देशों के बीच लगभग तीन दशक से अधिक का लम्बा अलगाव रहा है – और उन्होंने बताया कि क्यों।

लेकिन ऐतिहासिक रूप से, सदियों से लंबे समय से, ये इराक में उनके आदिवासी भाई हैं।  ये सभी समान लोग हैं।  इराकी अरब हैं।  इराकी पर्शियाई नहीं है।  तो चाहे वे इराकी-सुन्नी है या इराकी-शिया, वे इराकी-शिया अरब हैं।  वे पर्शियाई नहीं है।  और एक चीज़ – मुझे लगता है कि सऊदी लोग जो हासिल करना चाहते हैं, उनमें से एक चीज़ है कि वे अपने लम्बे समय से आदिवासी भाईयों से दुबारा जुड़ना चाहते हैं।  और जब हमने फरवरी में शुरुआती चर्चाएं की थीं और मुझे हैम्बर्ग में विदेश मंत्री जुबेर के साथ मेरी पहली बैठक हुई थी, हमने इसके महत्व के बारे में बात की थी – कि यह सऊदी अरब के राज्य के लिए एक अवसर है: नेतृत्व लें और इराक में अपने अरब भाइयों के साथ फिर से जुड़ें।

और वह बहुत बहादुर है – अगर आपको याद है, तो उन्होंने बड़ी बहादुरी से, मुझे लगता है कि मार्च के आरंभ में, बगदाद जाकर पहला कदम उठाया और पहली यात्रा की।  इसके बाद हमारे सऊदी अरब आकर हमारे उत्साहवर्धक प्रधानमंत्री अबादी ने पारस्परिक रूप से इसका प्रत्युत्तर दिया।  इससे दरवाज़े खुलने लगे।  और इसलिए हमने उसे सुगम बनाने और प्रोत्साहित करने के लिए कड़ी मेहनत की।  वे इसे अपनी ओर से करेंगे।  हम इसे प्रोत्साहित करने के लिए उस सीमा तक वहाँ मौजूद हैं जिस तक हम उस पहल में सहायता कर सकें।  और इसमें थोड़ी समयावधि में ही बहुत प्रगति हुई है।  साम्राज्य इसके लिए बहुत प्रतिबद्ध है।  युवराज के साथ मेरी बैठकों के दौरान वे उस घनिष्ठता के लिए बहुत प्रतिबद्ध हैं।  कुवैतियों ने यह प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि कुवैत में अगले वर्ष के आरंभ में इराकियों के साथ संयुक्त रूप से पुनर्निर्माण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

इसलिए मेरे विचार में ये – इराक, को फिर से आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करना महत्वपूर्ण है जिससे वह केवल पूर्व की ओर न देखे।  इसके पास महत्वपूर्ण भागीदार – सुरक्षा भागीदार है, लेकिन अधिक महत्वपूर्ण रूप से दक्षिण में आर्थिक भागीदार हैं।   और मेरे विचार में, हम इराक को इस प्रकार एक स्वतंत्र देश के रूप में सुदृढ़ कर सकते हैं और वे इसके बाद अपने स्वयं के निर्णय ले सकते हैं।

प्रश्न:  क्या मैं एक सेकेंड के लिए वापस पाकिस्तान पर जा सकता हूँ?  क्या यह कहना सही है कि आप द्वारा पाकिस्तान से प्राप्त संदेश यह था, “हमसे ज़बरदस्ती नहीं की जाएगी,” कि उन्होंने अमेरिका द्वारा उन पर दबाव डालने का प्रयास करने की अवहेलना करते हुए आपको एक संदेश भेजा?  और क्या – इस प्रकार का कोई प्रश्न है।  और दूसरा प्रश्न है:  क्या उन्होंने भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की अमेरिकी रणनीति के बारे आपको कोई उत्तर दिया?

सेक्रेटरी टिलरसन:  आपके पहले प्रश्न के उत्तर में, यह बैठक को पूरी तरह से गलत रूप से प्रस्तुत करना होगा।

यह बहुत खुली, उन्मुक्त बातचीत थी जो अमेरिका और पाकिस्तान के बीच इतिहास को दोहराने के साथ शुरू हुई जो कमोबेश बहुत-बहुत सकारात्मक इतिहास रहा है।  पिछले 10 वर्षों में उस संबंध में ह्रास हुआ है लेकिन उससे पहले हमारे पाकिस्तान के साथ बहुत सुदृढ़ संबंध थे।  शीत युद्ध से लेकर शीत युद्ध के बाद तक, 9/11 के बाद तक, वे हमें 9/11के हमलों में शामिल बहुत से लोगों को गिरफ्तार करने में सहायता करने के संबंध में ज़बरदस्त भागीदार थे।

तो जो कुछ हुआ है, बहुत हाल में हुआ है और मेरे विचार में मेरे लिए जो महत्वपूर्ण था – वह यह था कि आइए हम फिर से संबंध स्थापित करें और याद करें कि हमेशा ऐसा नहीं रहा है।   तो कोई भाषणबाज़ी नहीं रही है और उनकी ओर से भी मेरे लिए कोई भाषणबाज़ी नहीं थी।  मैं इसे सम्मानजनक संबंध के रूप में देखता हूँ।  हमारे कुछ बहुत उपयुक्त प्रश्न हैं, कुछ बहुत उपयुक्त सरोकार हैं जिन पर ध्यान देने के लिए हमें उनकी सहायता की आवश्यकता है।  मैंने उनसे कहा, “आप ऐसा कर सकते हैं या आप ऐसा न करने का निर्णय कर सकते हैं।   यदि आप यह निर्णय करते हैं कि आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं, तो बस हमें सूचित करें।  हम अपनी योजनाओं को इसके अनुसार समायोजित करेंगे और हम इससे स्वयं निपटेंगे।”

और यह – धमकी नहीं है।  यह बस सच्चाई है।  यह ज़मीन पर परिस्थितियों से निपटना है।  और जैसा कि आप जानते हैं, पूरी दक्षिण भारत रणनीति परिस्थिति-आधारित रणनीति है, और इसलिए पाकिस्तान को समान संदेश यह था:  “हमें पाकिस्तान द्वारा यह किए जाने की आवश्यकता है। हम आपसे यह करने के लिए कह रहे हैं; हम किसी चीज़ की माँग नहीं कर रहे हैं।  आप संप्रभु देश हैं।  आप निर्णय करेंगे कि आप क्या करना चाहते हैं, लेकिन इसे समझें कि हमारे विचार में क्या आवश्यक है।  और यदि आप वह नहीं करना चाहते हैं, तो ऐसा महसूस न करें कि आप ऐसा कर सकते हैं, हम समान उद्देश्य को किसी भिन्न तरीके से प्राप्त करने के लिए अपनी नीतियों और रणनीतियों को समायोजित करेंगे।”

मेरे विचार में, वे उसी समान सरोकार को साझा करते हैं जो आतंकवाद की मौजूदगी के बारे में हमारे हैं।  वे आतंकवाद से पीड़ित हैं – इससे पीड़ित रहे हैं।  पाकिस्तानियों को आतंकवाद से स्वयं लड़ने में ज़बरदस्त नुकसान हुआ है।  उनके साथ हमारी चर्चा इस बारे में थी कि हमारे विचार में पाकिस्तान के भविष्य के स्थायित्व के बारे में क्या महत्वपूर्ण है।  और हाँ, जो वे कर सकते हैं, उसका अफ़गानिस्तान में सुलह और शांति के लिए परिस्थितियाँ उत्पन्न करने पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, लेकिन यह केवल अफ़गानिस्तान के ही बारे में नहीं है।  यह पाकिस्तान के दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए हमारी चिंता के बारे में भी है।

प्रश्न:  और भारत संबंधी प्रश्न – और भारत संबंधी प्रश्न, क्या यह प्रस्तुत हुआ था, भारत के साथ गहन संबंध।

सेक्रेटरी टिलरसन:  इस बारे में इसके सिवाए बहुत अधिक चर्चा नहीं की गई कि उनके भारत के साथ स्पष्ट रूप से मतभेद हैं, भारत के साथ उनकी सीमा के संबंध में उनके सरोकार हैं।  मैंने उनके समक्ष टिप्पणी की, ”आपकी दो बहुत परेशानीजनक सीमाएं हैं।  एक अफ़गानिस्तान में है, और आपकी एक सीमा भारत के साथ है,” और हम इन दोनों सीमाओं के संबंध में सहायता करने के इच्छुक हैं, और हम यहाँ केवल अफगान सीमा पर स्थिति के बारे में ही बात करने के लिए नहीं हैं।  हम यहाँ इस बारे में भी बातचीत करने के लिए मौजूद हैं कि हम भारत के साथ किस प्रकार तनाव को कम कर सकते हैं और उस सीमा की दोनों तरफ उपयुक्त सरोकार हैं।

प्रश्न:  महोदय, जैसा कि आप जानते हैं, आपकी शक्ति इसमें निहित है कि आपको कितने करीब से राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करने के रूप में देखा जाता है।  हमारे द्वारा दौरा किए गए देशों में तब महत्वपूर्ण संदेह थे जब हमने राजनयिकों से बात कि आप – राष्ट्रपति के स्पष्ट प्रतिनिधि हैं।  वे उस संबंध में चिंतित हैं जिसे वे वॉशिंगटन में थोड़ी अराजकता मानते हैं।  वे उसका उत्तर कैसे देते हैं और आप अपने वार्ताकारों को कैसे आश्वस्त करते हैं कि आप वास्तव में अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से बात कर रहे हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  मैंने अपने प्रस्थान से पहले राष्ट्रपति के साथ इस दौरे की समीक्षा की।  हर ठहराव पर, मैंने यह मानते हुए कि मैं निश्चित स्थानों में जा सकता हूँ, उन्हें बताया कि मेरी कहाँ जाने की योजना है, उद्देश्य यह है, मैं यह अर्जित करने का प्रयास कर रहा हूँ, मेरे जाने से पहले कोई ऐसा दिशानिर्देश जो वे मुझे देना चाहते थे।  तो – यह वह सामान्य तरीका है जिससे मैं बाहर जाने पर चीज़ें करता हूँ, और वह यह है कि हम बैठें और मेरे जाने से पहले बातचीत करें, और मैंने एंड्रयूज़ जाने से ठीक पहले शुक्रवार रोत को उनसे बात की।  इसलिए यदि कोई चीज़ स्पष्ट रूप से उपस्थित होती है, तो हम बात कर सकते हैं।

इस सप्ताह में अब तक, वे मेरी सभी बैठकों के भी विवरण प्राप्त करते रहे हैं।  कुछ भी प्रस्तुत नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने ठीक वैसा ही किया है जैसा हमने उस समय आशा की थी, कोई वास्तविक बड़ा आश्चर्य नहीं है।  इसलिए मैं उस विदेश नीति को लागू कर रहा हूँ जिसे राष्ट्रपति द्वारा – राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की अंतरएजेंसी प्रक्रिया के माध्यम से अपनाया गया है।  हम नीति विकसित करते हैं, राष्ट्रपति इसका अनुमोदन करते हैं और तब यह मुझे पर होता है।  मेरी जिम्मेदारी बाहर जाना और उस नीति को लागू करना है।  और इसलिए यह दौरा दक्षिण एशिया की नीति के संबंध में निष्पादन करने, हाल की मुक्त और खुली भारत-प्रशांत नीति के संबंध में निष्पादन करने के बारे में था।

प्रश्न:  इस संबंध में – इसे किस रूप में लिया गया  यह नई नीति, क्या लोग इस नीति को समझते थे?  कि – लोग अब यह कह रहे हैं कि ISIS का ह्रास हो रहा है, कोई व्यापक अमेरिकी नीति नहीं है, इसलिए हम एक प्रकार से फिर से वापसी पर पहुँच गए हैं।

सेक्रेटरी टिलरसन:  नहीं, मेरा ख्याल है कि दक्षिण एशिया नीति, जो अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, भारत से संबंधित है – और जैसा कि आपको याद होगा, जब इसे जारी किया गया था और जब इसका वर्णन किया गया था, हम लोगों से इस संबंध में बहुत स्पष्ट रहे कि यह केवल अफगानिस्तान के बारे में नहीं है।  कि वास्तव में, हमने अतीत के उन नीतिगत निर्णयों को देखा जो अफ़गानिस्तान के बारे में लिए गए हैं, जब मैंने उनका अध्ययन किया और जब हमने नीति के आवश्यक तत्वों का निर्माण करना आरंभ किया, वह संरचना जिसमें हम अंतरएजेंसी के माध्यम से वृद्धि करते हैं, मेरी टिप्पणी यह थी कि हमने अफ़गानिस्तान को हमेशा अलगाव में देखा है और हम अफ़गानिस्तान में अफ़गानिस्तान को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।  और मेरे विचार में इसका कोई औचित्य नहीं था।

इसलिए हमने – स्टेट डिपार्टमेंट में इसके बारे में सोचना आरंभ किया, हमने इसे ज़ूम आउट किया और हमने कहा, हमें कौन-सी अन्य चीज़ प्रभावित कर रही है?  और बेशक, तुरंत, पाकिस्तान तुरंत व्यूफाइंडर में आ जाता है और तब अचानक आपको यह महसूस होता है कि भारत का प्रभाव है।  और वास्तव में, मध्य एशियाई प्रभाव है और C5 देशों और हमने उनके साथ अफ़गानिस्तान में स्थिति के बारे में बातचीत आरंभ करने के लिए UN महासभा के साथ-साथ न्यूयॉर्क में उनके साथ पहले ही बैठकें की हैं।  आप और अधिक ज़ूम आउट करते हैं और अब चीन को भूमिका निभानी है।

और इसलिए हमने जो कुछ किया है, वह वास्तव में उन तत्वों का विस्तार करना है जिससे अफ़गानिस्तान में सफलता मिल सके और उसे सम्मिलित करने के लिए नीतियाँ और रणनीतियाँ बनाई जाएं जो अन्य कर सकें। और हो सकता है कि यह केवल इसका एक भाग हो, लेकिन वह भाग अंतिम लक्ष्य प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।   और हम जो करते रहे हैं – वह उन्हें हर किसी की भूमिका बताना है और प्राप्त करना है- हमने क्षेत्र में जो कुछ प्राप्त किया है, वह दक्षिण एशियाई रणनीति में अत्यंत सकारात्मक है।  लोगों ने यह कहा है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि जब हमने कोई रणनीति देखी है।  मेरा विचार है कि बहुत से व्यक्तियों ने कहा है, हाँ, हम 16 वर्षों से अफ़गानिस्तान में युद्ध लड़ते रहे हैं; जब हम लड़ते रहे हैं, तब यह 16 एक वर्ष की रणनीतियाँ थीं।  इस बारे में कोई चीज़ कभी दिमाग में नहीं थी कि यह कैसे समाप्त हुआ।  और हमने एक ऐसा बहुत व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है जो इसका रोडमैप प्रस्तुत करता है कि हमारे विचार में हम इसे कैसे अर्जित कर सकते हैं।  अब हमें बस निष्पादन करना है।

प्रश्न:  जब आप यह कहते हैं “यह कब समाप्त होगा,” परिस्थिति आधारित अपेक्षाएं क्या हैं – जैसे उस बारे में समय-सीमा क्या है?  परिस्थिति आधारित का अर्थ और 16 वर्ष हो सकता है, है न?

सेक्रेटरी टिलरसन:  नहीं, यह और 16 वर्ष नहीं होगा।  चूँकि राष्ट्रपति स्पष्ट थे, यह असीमित समय नहीं है, यह खाली चेक नहीं है और यह  – हम यह नहीं कहने जा रहे हैं, “यहाँ निश्चित रूप से तारीख डालें।”   यह वह गलती है जो हर किसी ने अतीत में की है।  आप – आप एक वर्ष की 16 रणनीतियों के साथ यही करते हैं।  यह परिस्थिति आधारित है।

जैसा कि मैंने कहा है, हमने क्षेत्रीय पक्षों के लिए विशेष भूमिकाएँ और उत्तरदायित्व निर्धारित किए हैं और हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम उन्हें उस समाधान के लिए कार्रवाई करते हुए देखें।  यह ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करने के बारे में निर्मित है जहाँ तालिबान और तालिबान का नेतृत्व – जिसमें ऐसा करने की इच्छा है, वह यह कहने के लिए तैयार है, “बहुत हो गया।”  और हमने तालिबान को यह स्पष्ट किया है:  आप कभी भी सैन्य विजय प्राप्त नहीं करेंगे।  और यह वह बातचीत है जो हम उनके साथ पिछले माध्यमों से और दोहा कार्यालय से करते हैं।  क्या आप ऐसा चाहते हैं कि आपके बच्चे और पोते-पोतियाँ, नाती-नातिनें यही लड़ाई लड़ते रहें?  क्या यह तब इसी तरीके से होने जा रहा है यदि आप आगे बढ़ने के लिए कोई भिन्न तरीका नहीं खोजते।

अफगान सरकार की उन परिस्थितियों को सृजित करने का विशेष उत्तरदायित्व है जो तालिबान को मेज पर आने के लिए आमंत्रित कर रही हैं।  और जैसा कि मैंने अपनी टिप्पणियों में कहा है, इस सरकार में तालिबान के लिए भूमिका है।  कृपया आएँ।  कृपया आएं और अपनी भूमिका संभालें, लेकिन आपको इस शर्त पर आना होगा कि आप आतंकवाद का त्याग करते हैं, आप उग्र अतिवाद का त्याग करते हैं और आप कभी फिर से ऐसे प्रयास नहीं करेंगे।  तो यह – तो यह बहुत विशिष्ट रणनीति है और हमारे पास पहले कभी ऐसी रणनीति नहीं रही है।

प्रश्न:  आपके भाषण  – CSIS भाषण में– आपने सूत्रधारों, भारत-पाक क्षेत्र और चार सूत्रधारों – अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के बारे में बात की।

प्रश्न:  और मैं बस यह जानना चाहता था – तो मेरे विचार में, भारतीय इसे आपके भाषण के बाद से इसे सुनने वाले पहले व्यक्ति हैं – क्या यह कोई ऐसी चीज़ है जिसके बारे में वे रोमांचित हैं?  मैं ऐसा मानता हूँ कि वे है, लेकिन मैं यह जानना चाहता हूँ – या वे —

प्रश्न:  क्या वे इस बारे में थोड़े घबराए हुए हैं —

सेक्रेटरी टिलरसन:  हाँ, लेकिन मैं इसे स्वीकार करने वाला पहला व्यक्ति होऊँगा कि यह नया दृष्टिकोण भी है, और मेरा विचार है कि हमारे – कि अमेरिका के भारत के साथ 70 वर्षों से सकारात्मक संबंध रहे हैं लेकिन ये कभी अगले स्तर पर नहीं पहुँचे हैं और मेरे विचार में यह आंशिक रूप से दोनों पक्षों के कारण है।  समय-समय पर, अन्य पक्ष अपने स्वयं के कारणों से संबंधों से पीछे हट गए हैं।  हम जो कुछ करने का प्रयास कर रहे हैं, वह यह है – यह मामला बनाना कि इसे अगले स्तर पर लाने और जैसा मैंने कहा था, अगले 100 वर्ष तक बरकरार रखने की ज़रूरत है।

हमारे जापान, भारत और अमेरिका के बीच स्थायी त्रिपक्षीय संबंध हैं, इसमें बहुत-सा – हमने इस संबंध में बस कुछ प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए जल्दी बातचीत आरंभ की कि यह क्या होने जा रहा है।  मेरे विचार में, जापान, वे इसे संभवतः किसी अन्य से बेहतर जानते हैं, और हमने भाग लेने के बारे में आस्ट्रेलियाईयों से भी बातचीत की है।  हर किसी को यह निर्णय लेना है कि यह करने के लिए सही चीज़ है। इसलिए हम – यह सप्ताह एक है —

— इसे सम्पन्न करने के लिए।


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/secretary/remarks/2017/10/275104.htm
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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