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राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा जेरूसलम पर वक्तव्य

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दी व्हाइट हाउस
प्रेस सेक्रेटरी का कार्यालय
6 दिसम्बर 2017
डिप्लोमैटिक रिसेप्सन कक्ष

 

 

दोपहर 01:07 बजे EST

राष्ट्रपति:  धन्यवाद।  जब मैंने पदभार संभाला, तब मैंने खुली आँखों और नई सोच से विश्व की चुनौतियों को देखने का वचन दिया।  हम समान विफल धारणाएं रखकर और अतीत की समान विफल कार्यनीतियों को दोहराकर अपनी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते।  पुरानी चुनौतियों के लिए नए दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होती है।

आज मेरी घोषणा से इस्राइल और फिलिस्तीनियों के बीच संघर्ष में एक नए दृष्टिकोण का सूत्रपात हुआ है।

1995 में, कांग्रेस ने जेरूसलम दूतावास अधिनियम अपनाया जिसमें संघीय सरकार से यह आग्रह किया गया कि वह अमेरिकी दूतावास को जेरूसलम में स्थानांतरित करे और इसे मान्यता दे कि यह नगर — और बहुत महत्वपूर्ण रूप से — इस्राइल की राजधानी है।  कांग्रेस ने इस अधिनियम को अत्यधिक द्विपक्षीय बहुमत से पारित कर दिया और केवल छह महीने पहले सिनेट के सर्वसम्मत वोट द्वारा इसकी पुनःपुष्टि की गई।

इसके बावजूद, 20 से अधिक वर्षों से हर पिछले राष्ट्रपति ने कानून की छूट का प्रयोग किया है और अमेरिका के दूतावास को जेरूसलम में स्थानांतरित करने और जेरूसलम को इस्राइल की राजधानी का नगर मानना अस्वीकार किया है।

राष्ट्रपति ने ये छूटें इस विश्वास के अंतर्गत जारी कीं कि जेरूसलम को मान्यता देने से मना करने से शांति की पहल को आगे बढ़ाया जा सकेगा।  कुछ लोग यह कहते हैं कि उनमें साहस की कमी थी लेकिन उन्होने उस समय समझे तथ्यों के आधार पर अपने बेहतरीन फैसले किए।  बहरहाल, रिकॉर्ड मौजूद है। छूटों के दो से अधिक दशकों के बाद, हम इस्राइल और फिलीस्तीनियों के बीच चिरस्थायी शांति करार के समीप नहीं हैं।  यह मानना बेवकूफी होगी कि उसी बिल्कुल समान सूत्र को दोहराने से अब भिन्न या बेहतर परिणाम प्राप्त होगा।

इसलिए मैंने निश्चय किया है कि जेरूसलम को इसराइल की राजधानी औपचारिक रूप से मानने का समय आ गया है।

हालाँकि पिछले राष्ट्रपतियों ने यह बड़ा अभियान वचन दिया है, लेकिन वे इसे निभाने में विफल रहे।  आज मैं इसे निभा रहा हूँ।

मैंने इस कार्रवाई को संयुक्त राज्य अमेरिका; और इसराइल और फिलीस्तीनियों के बीच शांति की खोज के सर्वोत्तम हितों में पाया है।  यह शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और चिरस्थायी करार के लिए कार्य करने के लिए लंबे समय से बकाया काम है।

इस्राइल एक सम्प्रभु राष्ट है और इसके पास अपनी स्वयं की राजधानी का निर्धारण करने के लिए प्रत्येक अन्य सम्प्रभु राष्ट्र की भाँति अधिकार है।  इसे तथ्य के रूप में स्वीकार करना शांति बहाल करने के लिए आवश्यक शर्त है।

70 वर्ष पहले संयुक्त राज्य ने राष्ट्रपति ट्रूमैन के अंतर्गत इस्राइल राज्य को मान्यता दी।  तब के बाद से, इसराइल ने जेरूसलम नगर में अपनी राजधानी बनाई है — वह राजधानी जिसे यहूदी लोगों ने प्राचीन समय में स्थापित किया था।  आज जेरूसलम आधुनिक इसराइली सरकार की सीट है।  यह इस्राइली संसद, नेसेट के साथ-साथ इसराइल के उच्चतम न्यायालय का केंद्र है।  यह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास का स्थान है।  यह बहुत से सरकारी मंत्रालयों का मुख्यालय है।

दशकों से, दौरा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति, राज्य के सेक्रेटरी, और सैन्य नेतृत्वकर्ता जेरूसलम में अपने समकक्षों से मिले हैं जैसा कि मैंने इस वर्ष पहले इसराइल की अपनी यात्रा में किया था।

जेरूसलम न केवल तीन महान धर्मों का केंद्रीय स्थान है, बल्कि अब यह विश्व में एक सबसे सफल लोकतंत्र का केंद्र भी है।  पिछले सात दशकों में, इस्राइली लोगों ने ऐसा देश बनाया है जहाँ यहूदी, मुस्लिम और ईसाई और सभी आस्थाओं वाले लोग अपनी आत्मा और अपने विश्वास के अनुसार रहने और प्रार्थना करने के लिए स्वतंत्र हैं।

आज जेरूसलम ऐसा स्थान है और इसे ऐसा स्थान बने रहना चाहिए जहाँ यहूदी वेस्टर्न वाल पर प्रार्थना करते हैं, जहाँ ईसाई क्रॉस के स्टेशनों का अनुसरण करते हैं और जहाँ मुस्लिम अल-अक्सा मस्जिद में सजदा करते हैं।

फिर भी, इन सभी वर्षों में, संयुक्त राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रपतियों ने जेरूसलम को इसराइल की राजधानी के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता देना अस्वीकार कर दिया है।  वास्तव में, हमने इसराइल की कोई राजधानी मानना ही अस्वीकार कर दिया है।

वास्तविकता को मानने से अधिक या कम कुछ नहीं होता।  यह करने के लिए सही चीज़ भी है। यह एक ऐसी चीज़ है जो की जानी है।

इसीलिए, जेरूसलम दूतावास अधिनियम के अनुरूप, मैं स्टेट डिपार्टमेंट को अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से जेरूसलम में स्थानांतरित करने के लिए तैयारी आरंभ करने का भी निर्देश दे रहा हूँ।  इससे वास्तुशिल्पियों, इंजीनियरं और योजनाकारों की सेवाएं लेने की प्रक्रिया स्वतः आरंभ होगी जिससे नया दूतावास, जब पूर्ण हो जाए, शांति के लिए भव्य श्रद्धांजलि होगा।

ये घोषणाएं करने में, मैं एक बात बहुत स्पष्ट करना चाहता हूँ।  इस निर्णय का आश्य किसी भी रूप में चिरस्थायी शांति करार करने में सहायता करने के लिए हमारी सुदृढ़ प्रतिबद्धता से विचलित होना नहीं है।  हम ऐसा करार चाहते हैं जो इसराइलियों के लिए शानदार डील हो और फिलिस्तीनियों के लिए शानदार डील हो।  हम जेरूसलम में इसराइली सम्प्रभुता की विशेष सीमाओं और विवादित सीमाओं के समाधान सहित किसी अंतिम स्थिति मुद्दे पर कोई रुख अख्तियार नहीं कर रहे हैं।  ये प्रश्न संबंधित पक्षों पर निर्भर हैं।

संयुक्त राज्य ऐसा शांति करार करने में सहायता करने के लिए गहन रूप से प्रतिबद्ध है जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।  मेरा इरादा ऐसा करार करवाने में सहायता करने में अपनी हर संभव शक्ति का प्रयोग करना है।  किसी प्रश्न के बिना, जेरूसलम उन वार्ताओं का एक सबसे संवेदनशील मुद्दा है।  संयुक्त राज्य उस स्थिति में ऐसे दो-राज्य समाधान का समर्थन करेगा यदि दोनों पक्ष इस पर सहमत हों।

इसी बीच, मैं सभी पक्षों का आह्वान करता हूँ कि वे टैम्पल माउंट जिसे हरम अल-शरीफ भी कहा जाता है, सहित जेरूसलम के पवित्र स्थानों में यथास्थिति बनाए रखें।

आखिरकार, हमारी सर्वोपरि आशा शांति है, जो पूरे विश्व में प्रत्येक मानव हृदय की इच्छा है।  आज की कार्रवाई से, मैं क्षेत्र के लिए शांति और सुरक्षा के भविष्य के लिए अपने प्रशासन की चिरस्थायी प्रतिबद्धता की पुनःपुष्टि करता हूँ।

निःसंदेह इस घोषणा के संबंध में असहमति और असंतोष होगा।  लेकिन हम आश्वस्त हैं कि अंततः जैसे-जैसे हम इन असहमतियों के संबंध में कार्य करेंगे, हम शांति और ऐसे स्थान पर पहुँच पाएंगे जो समझ और सहयोग में बहुत विशाल है।

इस पवित्र नगर को हमारी दृष्टि को यथासंभव की ओर उन्मुख करते हुए मानवता में सर्वश्रेष्ठ का आह्वान करना चाहिए; हमें पुराने युद्धों की ओर पीछे तथा नीचे नहीं धकेलना चाहिए जो पूरी तरह से अनुमान लगाने योग्य बन गए हैं।  शांति कभी भी उन लोगों की पहुँच से दूर नहीं है जो इस तक पहुँचने के इच्छुक हैं।

इसलिए आज, हम शांति, मध्यस्थता और सहिष्णुता की आवाज़ों को घृणा के ठेकेदारों पर हावी होने का आह्वान करते हैं।  हमारे बच्चों को हमारा प्रेम विरासत में मिलना चाहिए, न कि हमारे संघर्ष।

मैं उसी संदेश को दोहराता हूँ जो मैंने इस वर्ष के आरंभ में सऊदी अरब में ऐतिहासिक और असाधारण शिखर-सम्मेलन में दिया था:  मध्य पूर्व एक ऐसा क्षेत्र है जो संस्कृति, उत्साह और इतिहास से समृद्ध है।  इसके लोग शानदार, गर्वीले, और विविध, उत्साहित और सुदृढ़ हैं।  लेकिन इस क्षेत्र की प्रतीक्षा कर रहा अविश्वसनीय भविष्य खूनखराबे, अज्ञानता और आतंक द्वारा ठुकरा दिया जाता है।

उप राष्ट्रपति पेंस उस कट्टरवाद को पराजित करने के लिए पूरे मध्य पूर्व में भागीदारों के साथ काम करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता की पुनःपुष्टि करने के लिए आने वाले दिनों में क्षेत्र की यात्रा करेंगे जो भविष्य की पीढ़ियों की आशाओं और सपनों को विफल करता है।

यह ऐसे बहुत से व्यक्तियो के लिए समय है जो अपने बीच से अतिवादियों को भगाने के लिए शांति की इच्छा रखते हैं।  सभी सभ्य नागरिकों और लोगों के लिए हिंसा नहीं अपितु तर्कपूर्ण वाद-विवाद के माध्यम से असहमति का उत्तर देने का समय आ गया है।

और यह पूरे मध्य पूर्व में स्वयं के लिए उज्ज्वल और खूबसूरत भविष्य का दावा करने के लिए युवा और संयमित आवाज़ों का समय है।

इसलिए आज, आइए हम स्वयं को पारस्परिक समझ और सम्मान के मार्ग पर पुनः समर्पित कर दें।  आइए हम पुरानी अवधारणाओं के बारे में फिर से सोचें और संभव तथा संभावनाओं के प्रति हमारे दिलो-दिमाग के दरवाज़ों को खोलें।  और अंत में, मैं क्षेत्र के नेताओं — राजनीतिक और धार्मिक; इस्राइली और फिलीस्तीनी; यहूदी और ईसाई तथा मुस्लिम — का आह्वान करता हूँ कि वे चिरस्थायी शांति की उदार खोज में हमसे जुड़ें।

धन्यवाद।  भगवान आपका भला करे।  भगवान इसराइल का भला करे।  भगवान फिलीस्तीनियों का भला करे।  भगवान संयुक्त राज्य का भला करे।  बहुत-बहुत धन्यवाद।  आपका धन्यवाद।

(घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाते हैं।)

समाप्त   दोपहर 01:19 बजे EST


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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