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सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रैक्स टिलरसन “2017 और परे की विदेश नीति चुनौतियों का सामना करने” पर 2017 अटलांटिक काउंसिल-कोरिया फाउंडेशन फोरम

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अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट
प्रवक्ता कार्यालय
तत्काल रिलीज़ के लिए
12 दिसम्बर 2017
वाशिंगटन, डी. सी.

 

 

सेक्रेटरी टिलरसनवैसे, स्टीफन, इतनी गर्मजोशी के साथ स्वागत का आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।  और हम एक-दूसरे को बहुत लम्बे समय से जानते है, और मेरे पुराने जीवन में अक्सर दुनिया भर में जो कुछ मैंने देखा था, उसके बारे में दृष्टिकोणों को साझा करता था और कुछ सलाह देने की कोशिश करता हूं कि क्या मैं बाएं या दाहिनी ओर सही तरीके की ओर जा रहा हूं।  और सलाह हमेशा ठोस और बहुत सराहनीय थी।  धन्यवाद।

और मैं राजदूत चाओ का भी उनके परिचय और स्वागत के लिए धन्यवाद करना चाहता हूँ।  और मैं 2017 अटलांटिक परिषद-कोरिया फाउंडेशन फोरम में बोलने के अवसर की भी सराहना करता हूं, और मैं वास्तव में पिछले 11 महीनों को प्रतिबिंबित करने के एक अवसर के रूप में इसका उपयोग करने जा रहा हूं।  और इसलिए मैं इस साल हुई घटनाओं के बारे में थोड़ा-बहुत बात करूंगा।  मैं कई मुद्दों, कुछ भौगोलिक क्षेत्रों पर बात करने जा रहा हूं, और मुझे उम्मीद है कि ऐसा करने में और विदेश नीति के क्षेत्र में राष्ट्रपति की प्राथमिकताएँ क्या रही हैं, इनमें से कुछ – इन नीतियों के कई चौराहे आपके लिए स्पष्ट हो जाएंगे।  मुझे लगता है, जैसा कि स्टीव हैडली ने बताया था, दुनिया इतनी परस्पर रूप से जुड़ी हुई हो गई है कि दुनिया का कोई भी हिस्सा वास्तव में अपने आपको अलग नहीं कर सकता है या अपनी विदेश नीति के मुद्दों को संयोजित नहीं कर सकता है, क्योंकि वे कहीं न कहीं एक दूसरे को छूते हैं।

तो यह कुछ के लिए एक आश्चर्य के रूप में आ सकता है, हालांकि यह नहीं होना चाहिए, यह कि हमारी सभी नीतियों, हमारी रणनीतियों, और हमारी रणनीतियों को अंतर्निहित करने में यह एक स्पष्ट मान्यता है जिसे अमेरिका सभी विदेश नीतियों के संबंध में ध्यान में रखता है कि हमारे बहुत से सहयोगी हैं।  साझा बलिदान से पैदा हुए कई सहयोगी दल, साझा मूल्यों से जन्मे, और कोरिया गणराज्य की तुलना में किसी से भी अधिक नहीं।  प्रायद्वीप पर हमारे साझा बलिदान और साझा मूल्यों के माध्यम से, जिसने एक जीवंत, समृद्ध दक्षिण कोरिया का नेतृत्व किया है, जिसे आज हम देखते हैं।  और जैसा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने एशिया क्षेत्र में अपनी हाल की यात्रा में सियोल में सामान्य विधानसभा में अपनी टिप्पणी में प्रकाश डाला था, जब कोई DMZ में जाता है और कुछ मील की दूरी पर DMZ में देखता है तो कुछ ही मीलों के अंतर में मान्यताओं में काफी बड़ा फर्क देखने को मिलता है, वे मान्यताएँ जो कोरिया गणराज्य द्वारा अपनाई गई हैं और जो उन्होंने जीवन की गुणवत्ता के मामले में कोरियाई नागरिकों के लिए बनाया है, और साथ ही उत्तरी कोरिया की ओर से किए गए विकल्पों की तुलना में जीवन की वैश्विक गुणवत्ता का योगदान भी।

ये बड़ी संख्या में सहयोगी दल, जो दुनिया भर में अमेरिकी नीति की एक बड़ी ताकत है, हमारे किसी भी विरोधी द्वारा मेल नहीं खाते हैं।  हमारे किसी भी विरोधी को ऐसा लाभ प्राप्त नहीं है।  तो मैं जो करने जा रहा हूं, मैं वर्णन देने नहीं जाऊंगा क्योंकि यदि ऐसा किया – अगर मैंने वर्णन देना शुरु किया, तो उसमें बहुत लंबा समय लगेगा, लेकिन मैं दुनिया भर में से थोड़ा सा बताने जा रहा हूं।  और मैं स्पष्ट रूप से, DPRK की स्थिति और चीन के साथ हमारे संबंधों पर बात करने जा रहा हूं, लेकिन मैं ISIS को हराने के प्रयासों और विशेष रूप से, इराक और सीरिया में हमारे प्रयासों के बारे में थोड़ा सा बताने की कोशिश कर रहा हूं; वे व्यापक आतंकवाद विरोधी नीतियाँ जो हम मध्य पूर्व में निष्पादित कर रहे हैं, जिनमें से बहुत से राष्ट्रपति के ऐतिहासिक रियाद शिखर सम्मेलन से उभर कर आई हैं।  लेकिन दुनिया के दूसरे हिस्सों में आतंकवाद का सामना कैसे किया जा रहा है – अफ्रीका और लीबिया में साहेल में, लेकिन साथ ही हम इसे फिलीपींस और मिंडानाओ में भी एशिया में देखते हैं।

मैं दक्षिण एशिया और अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और भारत पर राष्ट्रपति की नीति पर बताने जा रहा हूं; यूरोपीय संघ-नाटो संबंध; रूस और रूस के साथ संबंध पुन: स्थापित करने के हमारे प्रयास; और फिर मैं उन कुछ मुद्दों पर बहुत जल्दी से बात करूंगा जिनसे हम पश्चिमी गोलार्ध में निपट रहे हैं।  लेकिन मुझे लगता है कि यह खोया नहीं है- और मुझे लगता है कि मुद्दा स्पष्ट किया गया था, और मैं – अटलांटिक परिषद की विडंबना की सराहना करने वाला अंतिम व्यक्ति नहीं होगा, जो दक्षिण कोरिया के साथ अमेरिकी साझेदारी पर एक आयोजन की मेजबानी करता है और मुझे लगता है कि मुद्दा स्पष्ट किया गया है।  लेकिन मेरे विचार में, यह सही समझ बनाता है क्योंकि जैसा कि आप ने देखा है, परमाणु हथियारबंद उत्तरी कोरिया की संभावना का मुकाबला करने के लिए एकता और मजबूत साझेदारी लगती है, जो कि अटलांटिक और प्रशांत क्षेत्र में फैले हुए हैं।

कार्यालय में अपने पहले दिन से, यह पहली नीति थी, जिसे राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्टेट डिपार्टमेंट को विकसित करने और स्थापित करने के लिए कहा, और यह स्पष्ट मान्यता है कि वह इस खतरे को गंभीरता से लेने वाले हैं, और वह इसे अनावश्यक नहीं छोड़ रहे थे और यथास्थिति को स्वीकार नहीं करने वाले हैं।  यह प्रतिनिधित्व करता है, और पहले भी प्रतिनिधित्व करता था कि हमारे देश के सामने सबसे तात्कालिक खतरा क्या है, और यह कि हम रणनीतिक धैर्य के युग को समाप्त करेंगे और रणनीतिक जवाबदेही का युग शुरू करेंगे।  यह खतरा किसी भी लंबे समय तक अनदेखा करने के लिए बहुत बड़ा है।

DPRK के संबंध में हमारी नीति वास्तव में बहुत स्पष्ट है, और यह स्पष्ट रूप से कोरियाई प्रायद्वीप का पूर्ण और प्रमाणिक रूप से प्रतिवादी है।  यह एक ऐसी नीति है जिसे क्षेत्र के अन्य लोगों द्वारा साझा किया जाता है; वास्तव में, यह चीन की नीति भी है।  और रूस ने कहा है कि यही उसकी नीति भी है।  तो यह है – जबकि यह आम तौर पर आयोजित किया जाता है, नीति के कार्यान्वयन के लिए हमारी रणनीति क्षेत्र के पार्टियों के बीच थोड़ी अलग हो सकती है।  जैसा कि आपने देखा है, हमारा दृष्टिकोण, अधिक से अधिक प्रतिबंध लगाएगा और उत्तरी कोरिया में शासन पर अधिक दबाव डालने के लिए उन्हें अपने वर्तमान परमाणु हथियार विकास कार्यक्रम और उनके सिस्टम को रोकने के लिए राजी कर देगा, जिसके द्वारा वे इन हथियारों को डिलीवर कर सकते हैं, और उस मार्ग को बदलने के लिए और एक अलग मार्ग अपनाने के लिए।

हमने पिछले कई महीनों में अब तक कई जगहों पर आर्थिक प्रतिबंधों का सबसे व्यापक सेट स्थापित किया है, जो मुझे लगता है कि समर्थन के साथ, विशेष रूप से चीन और रूस दोनों के, दोनों व्यापक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से इकट्ठा किया गया है, स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि कैसे वे भी खतरे की गंभीरता को देखें।

इन प्रतिबंधों ने अब उत्तर से – उत्तर कोरिया से सारे कोयला निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।  उन्होंने अपने कपड़ा निर्यात समाप्त कर दिए हैं।  उन्होंने मजबूर श्रम के निर्यात पर सीमाएं लगा दी हैं और उसे खत्म कर देंगे।  उन्होंने ईंधन के आयात को भी सीमित कर दिया है और सारे आयात को कम कर दिया है – हर कार्रवाई के साथ उत्तरी कोरिया पर दबाव बढ़ रहा है।

हमें पता है कि इससे उत्तरी कोरिया पर प्रभाव पड़ रहे हैं।  इसका प्रमाण कोरियाई नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतों के साथ दिखाई दे रहा है, जो शुरू में 90 प्रतिशत तक उछला था।  जहाँ वे पहले थे वे अब वापस वहाँ से 50 प्रतिशत ऊपर तक पहुंच गये हैं।  हमें यह भी पता है कि कमियाँ दिखाई देनी शुरु हो गईं हैं, और ऐसे भी उत्पाद हैं, जो उत्तरी कोरिया के शैल्फों पर दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें पहले निर्यात किया जा रहा था।  तो अब उन्हें आंतरिक रूप से ही पूरा करना होगा।

ये राजनयिक प्रतिबंधों के साथ जुड़े हुए हैं जहां हमने दुनिया भर के देशों से कहा है कि वे न केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू करें, बल्कि वहां भी जहां पर उन्हें इसकी समझ और आवश्यकता महसूस हो, साथ ही उत्तर कोरियाई शासन को अलग-थलग करने के लिए अपने राजनयिकों को वापस बुलाएं, कार्यालयों को बंद करें और उत्तर कोरिया को यह जता दें कि अपने हर एक भड़काऊ परीक्षण से, वे और भी ज्यादा अलग-थलग पड़ जाएंगे।

22 से भी ज्यादा देशों ने उत्तर कोरिया के राजनयिकों को अपने यहां से लौटा दिया है।  और कुछ के लिए, यह ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई नहीं देता, लेकिन छोटे देशों के लिए जहां शायद बहुत ज्यादा आर्थिक प्रभाव न हो, यह एक और महत्वपूर्ण संकेत है।  तो पेरू से लेकर स्पेन और इटली से लेकर पुर्तगाल तक तमाम देशों ने भी अपने राजनयिक संबंध खत्म कर लिए हैं।  और हम जानते हैं कि जब राजनयिक वापस आते हैं तो सरकार क्या महसूस करती है क्योंकि वे उस कार्यालय का प्रतिनिधित्व कहीं और भी नहीं कर रहे, यह आगे बाकी विश्व से उनके संपर्कों को और भी अलग-थलग करता जा रहा है।

ये सभी काफी महत्वपूर्ण कदम हैं, फिर से, हर कदम जो आप उठा रहे हैं उससे यह प्रतिबंध और सुदृढ़ हो रहा है, आप खुद को और ज्यादा अलग-थलग कर रहे हैं और आप अपनी सुरक्षा मजबूत नहीं कर रहे हैं, बल्कि आप अपनी सुरक्षा को कमजोर कर रहे हैं।  इन सबकी सफलता के लिए अमेरिका, कोरिया गणराज्य और जापान के बीच मौजूदा त्रिपक्षीय संबंधों की मजबूती बहुत महत्वपूर्ण है।  यह इलाके के सुरक्षा ढांचे के लिए आधार है और हम इसे जारी रखेंगे और हम आपसी अभ्यास को जारी रखेंगे ताकि हम किसी भी संभावित सैन्य प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहें जिसकी जरूरत पड़ सकती है।

इन प्रतिबंधों का प्रवर्तन सीधे संस्थाओं से भी आगे चला गया है, लेकिन हमने व्यक्तियों और दूसरी संस्थाओं को भी प्रतिबंधित किया है, जिसमें बैंक शामिल हैं – कुछ बैंक चीन में और अन्य जगहों पर हैं – जो कि उत्तरी कोरिया पर लगे इन प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे हैं।  तो कहीं भी अगर हम देखते हैं कि उत्तर कोरिया बचाव का रास्ता खोज रहा है या फिर इन  प्रतिबंधों को दरकिनार करने के नए तरीके खोज रहा है, तो हम उन्हें भी बंद करने की कोशिश करेंगे।

समय लगातार बीतते जा रहा है और हर एक अतिरिक्त परीक्षण के साथ, उत्तर कोरिया अपने कार्यक्रम की प्रगति प्रदर्शित कर रहा है।  सबसे ताजा अंतर्महाद्वीपीय प्राक्षेपिक प्रक्षेपास्त्र (आईसीबीएम) परीक्षण, मैं सोचता हूं, यह प्रदर्शित करता है कि उनके पास सचमुच अपने कार्यक्रम की प्रगति जारी रखने की क्षमता है, और हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि वे ऐसा ही एकीकृत परमाणु हथियार प्रणाली से जुड़े अन्य तत्वों के साथ भी कर रहे हैं।  तो हम चाहते हैं कि उत्तर कोरिया – वार्ता के लिए मेज पर आए।  जब भी वे चाहें, हम वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें मेज पर आना होगा और उन्हें मेज पर इस नज़रिये के साथ आना होगा कि वे एक अलग विकल्प रखना चाहते हैं।

इस बीच, हमारी सैन्य तैयारी मजबूत है।  परिस्थितियों के मद्देनजर, राष्ट्रपति ने हमारे सैन्य रणनीतिकारों को किसी भी आकस्मिकता की पूरी सीमा के साथ उपलब्ध रहने को कहा है, और वे तैयार हैं।  जैसा कि मैने लोगों से कई बार कहा है, मैं हमारे राजनयिक प्रयास जारी रखूंगा, जब तक कि पहला बम नहीं गिराया जाता।  मैं इस बात के लिए आश्वस्त रहने वाला हूं कि हम सफल होने वाले हैं, लेकिन मैं इसलिए भी आश्वस्त हूं कि सेक्रेटरी मैटिस सफल रहेंगे अगर यह उनके कार्यकाल के दौरान खत्म हो जाता है।

चीन के प्रति सम्मान के साथ, उत्तर कोरिया ने सचमुच चीन के इस नए प्रशासन के साथ हमारी व्यस्तताओं का प्रतिनिधित्व किया है।  देश के बाहर मेरी पहली यात्रा जापान, दक्षिण कोरिया और चीन की थी, यह उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर नीति के पहले गठजोड़ की शुरुआत थी, रणनीतिक सहनशीलता की समाप्ति।  कई अर्थों में, यह, मैं समझता हूं, संयोग रहा, क्योंकि इसने इस प्रशासन को इसके चीन के साथ पहले गठजोड़ में ऐसा कुछ तलाशने की अनुमति दी जिसमें हम साथ मिलकर काम कर सकें।  और जब हमने यह समझा कि हमारी नीतियां समान थीं और हमारे उद्देश्य भी एक जैसे थे, तब उसने हमें ऐसा मंच प्रदान किया जिससे शुरुआत से गठबंधन की एक सकारात्मक राह बनी।

जैसा कि आप सभी जानते हैं – अमेरिका और चीन के संबंधों का इतिहास – निक्सन की यात्रा के समय शुरू हुई संबंधों की ऐतिहासिक शुरुआत से परिभाषित किया जाता है।  और इसने अमेरिका और चीन को बहुत कुछ दिया और इसने बाकी दुनिया को भी बहुत कुछ दिया।  लेकिन समय बदल गया है।  चीन ने अपनी आर्थिक ताकत बढ़ा ली है।  और कई अर्थों में, बीजिंग ओलम्पिक की सफलता से शायद बाकी दुनिया के प्रति चीन में एक नए आत्मविश्वास और आगे की एक नई राह का जन्म हुआ।

मेरे विचार से अमेरिका और चीन, हम दोनों ही, अब उसकी तलाश कर रहे हैं जो अमेरिका-चीन संबंधों को अगले 50 सालों के लिए परिभाषित करे, क्योंकि वह संबंध जो कि “एक चीन” नीति और तीन संयुक्त शासकीय घोषणाओं के ज़रिए परिभाषित हुआ था उसने सभी को बहुत कुछ दिया है।  चीन दुनिया में एक आर्थिक ताकत के रूप में उभरा है।  और हालांकि वे लगातार खुद को एक विकासशील देश के रूप में बताना पसंद करते हैं क्योंकि उनके पास सैकड़ों मिलियन लोग हैं जिन्हें अभी भी गरीबी से बाहर आने की ज़रूरत है, मगर वे पारंपरिक अर्थों में एक विकासशील देश नहीं हैं।  उनके पास एक अर्थव्यवस्था है जो बहुत विशाल है, और सचमुच उसका दुनिया के बाज़ार पर प्रभाव है।  लेकिन जैसे चीन का उदय हुआ, अमेरिका और चीन के व्यापारिक संबंधों के साथ साथ चीन और दूसरे देशों के व्यापारिक संबंधों में कई असमानताएं पैदा हो गईं जिनका समाधान होना चाहिए।

तो मार- ए- लागो में पधारे राष्ट्रपति शी के साथ पहले सम्मेलन में चीन के साथ गठजोड़ पर, हमने चीनियों के साथ आपसी दृष्टिकोणों को समझने और आदान-प्रदान के तरीके खोजने की शुरुआत करने का काम किया, वह भी पहले के मुकाबले बहुत ही ज्यादा उच्च स्तर पर।  जैसा कि आपमें से अधिकांश जानते हैं, पिछले कई सालों में चीन के साथ बहुत से संवाद तंत्र रहे हैं।  मेरे विचार में, जब हम, जब मैं स्टेट डिपार्टमेंट में आया, तब हमारे बीच विभिन्न स्तरों पर 26 अलग-अलग संवाद चल रहे थे।  हमारा नज़रिया था कि हमें इन संवादों को अपनी सरकारों के बीच और उच्च स्तर पर ले जाना चाहिए, जो कि अंतिम निर्णय करने वालों के काफी करीब हों।

तो हमने चार महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय संवाद शुरू किए, उन प्रतिनिधियों के साथ जो चीन की तरफ से राष्ट्रपति शी और हमारी तरफ से राष्ट्रपति ट्रम्प के काफी करीब थे।  ये चार संवाद हमारी तरफ से कैबिनेट स्तर के सेक्रेटरी और चीन की तरफ से भी इसी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में किए जा रहे हैं।  इस रणनीतिक और राजनयिक संवाद की अध्यक्षता सेक्रेटरी मैटिस और मेरे द्वारा की जा रही है और यह संवाद सचमुच उन क्षेत्रों की खोज के लिए है जिनमें हम साथ काम कर सकें और उन क्षेत्रों की तलाश के लिए जिनमें हमारे मतभेद हैं, और हम आशान्वित हैं कि खोज की इस प्रक्रिया में जो समय के साथ परिणाम निकलेगा उससे हमें इन नवीन संबंधों को परिभाषित करने में मदद मिलेगी।  दूसरे संवाद अर्थ और व्यापार, कानूनों के प्रवर्तन और साइबर, और लोगों से लोगों के बीच संवाद हैं।  सभी चार संवाद पिछले पूरे साल चलते रहे और इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि इनके परिणाम ज़रूर निकलेंगे, इनके परिणाम राष्ट्रपति ट्रम्प के बीजिंग सम्मेलन में उनके चीन दौरे के समय सूचित किए गए थे।

तो मेरे विचार से चीन के साथ अपने संबंधों का सम्मान करते हुए, हमारे पास अब एक काफी सक्रिय तंत्र है जिसमें हम जटिल विषयों को मेज पर रख सकते हैं।  और हमारे बीच मतभेद भी हैं, जैसे की दक्षिण चीन सागर और चीन के ढांचों के निर्माण, इन ढांचों के सैन्यीकरण और ये किस तरह से इलाके में हमारे सहयोगियों पर प्रभाव डाल रहे हैं और साथ ही मुक्त और स्वतंत्र व्यापार के संदर्भ में भी।  जैसा कि हमने चीनियों से कहा, हम उम्मीद करते हैं कि हम इन खास गतिविधियों को ठंडे बस्ते में डालने का रास्ता तलाश कर लेंगे।  कि क्या हम इसे उलट सकते हैं बाद में देखने के लिए।  लेकिन यह स्वीकार्य नहीं है – यह हमें स्वीकार्य नहीं है कि इन द्वीपों का लगातार विकास किया जाए और सैन्य उपयोग के लिए तो बिल्कुल नहीं।

दक्षिण पूर्व एशिया में हमने – हमने एक नीति प्रस्तुत की थी, कोई ज्यादा समय पहले नहीं, एक मुक्त और स्वतंत्र हिंद-प्रशांत को लेकर, और इसका निर्माण चीन की वन बेल्ट वन रोड नीति के प्रति हमारे कुछ नज़रिये के आधार पर हुआ था।  हम समझते हैं चीन की वन बेल्ट वन रोड नीति, ऐसी नीति है जिसे उन्हें अपने आर्थिक विकास के लिए जारी रखनी पड़ेगी, और हमारी नीतियां चीन के आर्थिक विकास में शामिल नहीं होना चाहतीं।  लेकिन हमारे नजरिये में, चीन का आर्थिक विकास, अंतर्राष्ट्रीय नियम कायदों के अंतर्गत होना चाहिए, और लगता है कि वन बेल्ट, वन रोड अपने खुद के नियम कायदे परिभाषित करना चाहती है।  मैं वन बेल्ट, वन रोड पर सेक्रेटरी मैटिस की टिप्पणी को उद्धृत करना चाहूंगा।  चीन के लिए, उन्होंने कहा है:  खैर, अमेरिका और बाकी विश्व के पास कई ऐसी पट्टियां और कई सड़कें हैं, और कोई भी देश यह तय नहीं कर सकता कि वे क्या हैं।  तो एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र का मतलब है कि सभी देशों की पहुंच अपने आर्थिक विकास को जारी रखने और क्षेत्र से होकर व्यापार करने तक है।

स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भाग के तौर पर हमने भारत के साथ अपनी सहभागिता बढ़ाई है।  लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारे त्रिपक्षीय संबंध जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच रहे हैं, और अब हम इस बात का प्रयास कर रहे हैं कि ये संबंध चतुष्पक्षीय हो जाएं और भारत भी इसमें शामिल हो क्योंकि भारत की उभरती अर्थव्यवस्था के महत्व के साथ ही मैं समझता हूं कि हमारी साझा राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण हम भारत के साथ हैं।

इराक और सीरिया में ISIS आंदोलन को जल्द से जल्द परास्त करने की मुहिम में, जब राष्ट्रपति ने कार्यभार लिया तब उन्होंने इराक और सीरिया में ISIS के साथ चल रही लड़ाई की नीति में सार्थक बदलाव किए और मौके पर मौजूद हमारे सैन्य कमांडरों को ज्यादा अधिकार दिए ताकि वे इस लड़ाई को जीतने के लिए तत्काल युद्ध क्षेत्र में ही निर्णय ले सकें।  दूसरों के साथ और जरिए खरीद के रक्षा मंत्रालय के नजरिए को पूरी तरह लागू करने के बाद सेना अपने अधिकारों के साथ वास्तव में सार्थक उपलब्धियाँ हासिल करना शुरू कर चुकी है।  जैसा कि आज हम सब जानते हैं, प्रधानमंत्री अबादी ने हाल ही में इराक में ISIS की हार की घोषणा की है।  हम अभी भी सीरिया में ISIS को हरा रहे हैं, लेकिन इसमें काफी प्रगति हुई है।

सैन्य सफलता के परिणामस्वरूप, स्टेट डिपार्टमेंट में हमें बहुत जल्द इस सफलता के साथ उन कूटनीतिक योजनाओं को बनाने पर भी ध्यान देना होगा जो कि ISIS की हार के बाद आने वाली हैं, और हमने इसका अधिकांश अमल गठबंधन के जरिए ISIS को परास्त करने में भी किया है, इस गठबंधन में 74 सदस्यों, 68 देशों के साथ नाटो, इंटरपोल, यूरोपीय संघ जैसे संगठन और अन्य लोग शामिल हैं।

इराक और सीरिया में साढ़े सात मिलियन लोग अब ISIS के चंगुल से मुक्त हो चुके हैं। उनके लड़ाकों के कब्जे में रहा 95 प्रतिशत इलाका अब आजाद कराया जा चुका है।  हमारा प्रयास आजाद हो चुके इन इलाकों में स्थायित्व लाना और दोबारा ISIS का कब्जा होने से रोकना तो है ही साथ ही स्थानीय गुटों के बीच किसी किस्म का टकराव फिर से पैदा होने से रोकना भी है।

इसलिए रक्षा मंत्रालय के साथ हमारा काम युद्धभूमि से विवाद शांत करना और इलाके में स्थायित्व लाना है, और हमने जॉर्डन और रूस के साथ मिलकर सीरिया में विवाद मुक्त क्षेत्र (डी-एस्कलेशन ज़ोन) बनाने में सफलता पाई है जिससे फिर से एक और गृह युद्ध होने से बचाव हुआ है। ये सभी कदम सीरिया में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2254 को लागू करने की दिशा में हैं, जो संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में सीरिया में नए संविधान और चुनाव का आह्वान करता है, जिसमें सभी सीरियाई विस्थापित मतदान करेंगे।  तो इसमें लड़ाई की वजह से विस्थापित सीरियाई लोगों का मतदान शामिल है, चाहे वे गृह युद्ध या फिर ISIS के दखल के कारण विस्थापित हुए हों।

वियतनाम के दनांग शहर में हुए एशिया-प्रशांत महासागरीय आर्थिक सहयोग सम्मेलन यानी एपेक में राष्ट्रपति ट्रम्प और राष्ट्रपति पुतिन के द्वारा एक बहुत ही महत्वपूर्ण संयुक्त बयान जारी किया गया था, जिसमें दोनों ही नेताओं ने एकीकृत, संपूर्ण, लोकतांत्रिक और स्वतंत्र सीरिया सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।  जेनेवा में परिष्कृत विपक्षी प्रतिनिधित्व के साथ फिर से बातचीत की शुरुआत हो चुकी है।  और हमने रूस से कहा कि वे सरकार की भागीदारी इस बातचीत में सुनिश्चित करें, और असद सरकार बातचीत में शामिल रही।  और अब हम बातचीत की मेज पर सभी को रखना चाहते हैं।  जहां तक हो सकेगा हम रूस और सीरिया के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे, लड़ाई और हिंसा की समाप्ति, इलाके में स्थायित्व और सीरिया के के लिए प्रस्ताव को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रहेंगे जो कि जेनेवा शांति प्रक्रिया का परिणाम होगा।

इराक में सभी इलाकों को मुक्त कराने का काम पूरा हो चुका है, और दोनों ही कार्रवाइयों में हमने इराक में ISIS की राजधानी वाला इलाका मोसुल और सीरिया में राक्का पर फिर से कब्जा कर लिया है।  मैं सोचता हूं कि अरब देशों के साथ इराक की पूर्व सहभागिता इराक के भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण रही है साथ ही यह इराक की लोकतांत्रिक सरकार और इराक की अखंडता बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।  ISIS के साथ लड़ाई में अरब देशों की सहभागिता ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तीन दशकों से भी अधिक समय से जब अरब देशों के बगदाद के साथ रिश्ते थे, और सऊदी लोगों ने सबसे पहले आर्थिक वार्ताओं और सलाहकार परिषदों के गठन की शुरुआत की थी।  उन्होंने दो जगहों पर सीमा पार आवागमन को फिर से खोल दिया है। वे बगदाद और रियाद के बीच विमान सेवा फिर से शुरू कर रहे हें। वे सभी इराकियों को यह संदेश देना और याद दिलाना चाहते हैं कि इराकी भी अरब हैं और उन्हें अरब देशों के साथ फिर से सहभागिता और एकता बढ़ानी चाहिए।

सऊदी औऱ इराकियों के बीच सलाहकार परिषदें पहले से रही हैं और जनवरी में दूसरा पुनर्निर्माण सम्मेलन कुवैत में होने जा रहा है। इन सभी कवायदों का मकसद बगदाद और इराकियों को ये समझाना है कि दक्षिण में आपके मित्र हैं जो आपको अपने देश के पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापित करने में मदद करना चाहते हैं।

खास बात यह है, कि हमारी नीति भी हमेशा से एक एकीकृत इराक की रही है।  और जैसा कि आप जानते हैं, कुछ महीनों पहले कुर्दिश क्षेत्रीय प्राधिकारियों द्वारा स्वतंत्रता के लिए शुरु किया गया जनमत संग्रह इस एकता के लिए नुकसानदायक है।  हम बगदाद और अरबिल के बीच शांति और एकता की बहाली की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहे हैं, और हम दोनों के बीच शांति को समर्थन देते हैं। हम इराकी संविधान के अंतर्गत सहयोग को भी समर्थन देते हैं जो कि कभी पूरी तरह लागू नहीं हो सका।  और हमारा समर्थन है और हमने कहा था कि हम कुर्द लोगों के साथ पूरी तरह इराकी संविधान लागू करने के लिए उनके समर्थन में खड़े हैं, जो कि जब पूरी तरह लागू हो जाएगा तो उससे उन कई समस्याओं का समाधान होगा जो पिछले कुछ समय से कुर्द लोगों के साथ पेश आ रही हैं और हम उम्मीद करते हैं कि यह इराक को एकीकरण की ओर ले जाएगा।

आतंकवाद से मुकाबले के विस्तार में फिर से मैं रियाद में हुए राष्ट्रपति के ऐतिहासिक सम्मेलन की बात करना चाहता हूं जहां पर उन्होंने दुनिया भर के मुस्लिम देशों के 68 नेताओं को संबोधित किया था, उन्होंने कहा था कि हिंसक उग्रवाद की समस्या को आप ही सुलझा सकते हैं।  अमेरिका इसे नहीं सुलझा सकता।  हम इसे सुलझाने में आपकी मदद कर सकते हैं, लेकिन दुनिया भर के मुस्लिम नेताओं को इसे हल करना पड़ेगा।

इस सम्मेलन में दो बहुत ही महत्वपूर्ण संकल्प किए गए : सऊदी अरब में हिंसक उग्रवाद से मुकाबले के लिए एक केंद्र बनाया जाए और एक केंद्र आतंकवाद के आर्थिक तंत्र को बाधित करने के लिए बनाया जाए।  ये दोनों की केंद्र अब स्थापित हो चुके हैं और ये न केवल आतंकवाद के जमीनी खात्मे बल्कि साइबर स्पेस में भी उनके मुकाबले की दिशा में काम कर रहे हैं।  हिंसक उग्रवाद से मुकाबले के लिए बने केंद्र में ऐसे कई लोग हैं जो सोशल मीडिया पर नज़र रखते हैं, वे आतंकियों के संदेशों को न केवल पकड़ते हैं बल्कि उनके विरोध में भी संदेश बनाते हें ताकि हिंसक उग्रवाद से संबंधित संदेशों का मुकाबला किया जा सके।

यह भी काफी महत्वपूर्ण है – और हमारी सऊदी लोगों से बातचीत हुई है- कि वे इन संदेशों को मस्जिदों में भी प्रसारित करें, वे इन संदेशों को मदरसों में भी प्रसारित करें और वे इन संदेशों को स्कूलों की पठन सामग्रियों में भी शामिल करें।  सऊदी लोग अब नई सामग्री प्रकाशित कर रहे हैं।  वे पुरानी सामग्री वापस मंगा रहे हैं।  लेकिन हमें हिंसक उग्रवाद के इन संदेशों पर काबू पाने के लिए काफी काम करना है।

आतंकवादियों के अर्थ तंत्र (वित्तपोषण) का मुकाबला करने के लिए स्थापित केंद्र भी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की मदद के लिए काफी बड़ा संस्थान है और यह दुनिया भर के अन्य सूचना स्रोतों से जुड़ रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आतंकवादी गतिविधियों के समर्थन के लिए दुनियाभर में राशि कैसे इधर से उधर पहुंचाई जा रही है।  पुनश्च, हम जमीनी लड़ाई जीत सकते हैं लेकिन अगर हम साइबर स्पेस में सफल नहीं हो पाते हैं और हम आतंकी तंत्र की पुनर्स्थापना को नहीं रोक पाते हैं तो वे किसी और जगह पर पैदा हो जाएंगे, जैसा कि हमने लीबिया में देखा है, जैसा कि हमने उन्हें मिंडानाओ में पैदा होते देखा है, जैसा कि हमने उन्हें साहेल में पैदा होते देखा है।

ISIS को खत्म करने की वैश्विक मुहिम और आतंकवाद को खत्म करने की वैश्विक मुहिम राष्ट्रपति की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है, और इसी वजह से हमें दक्षिण एशिया, अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और भारत को लेकर नीति बनानी पड़ी है।  और इस नीति का नज़रिया दरअसल एक क्षेत्रीय नज़रिया था।  राष्ट्रपति ने एक निर्णय लिया और नीति घोषित की कि हम अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगे, हम तालिबान हराने की लड़ाई में अपनी सहभागिता बनाए रखेंगे, और इसमें लगने वाला समय और प्रयास शर्तों पर आधारित होंगे।  उन्होंने कहा कि यह कोई खाली चेक नहीं है।  यह हमेशा के लिए नहीं है, तो अफगान सरकार को समझने की ज़रूरत है कि उन्हें अपने सुधार कार्यक्रम जारी रखने होंगे और उन्हें ऐसा वातावरण निर्मित करना होगा जिसमें अफगानिस्तान के सभी स्थानीय समूह शामिल हों, जहां पर एक संवैधानिक सरकार के गठन में तालिबान भी सहभागी हो  बशर्ते वह आतंकवाद खत्म करने, लड़ाई बंद करने और वार्ता के लिए तैयार हो।

तो शर्तों पर आधारित नज़रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि तालिबान इस बात को जान ले कि आप युद्धक्षेत्र में नहीं जीत सकते और आगे का रास्ता सुलह की प्रक्रिया में शामिल होने और अंतत: अफगानिस्तान में सरकार में शामिल होने से ही होकर गुजरता है।

इस क्षेत्रीय दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण भाग हमारा पाकिस्तान से संबंध भी है।  अमेरिका और पाकिस्तान के बीच अच्छे संबंधों का लंबा इतिहास रहा है, लेकिन बीते कुछ दशकों में यह संबंध खराब हुआ है, इसलिए अब हमारी पाकिस्तान से बातचीत यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हमारी उनसे साफ तौर पर उम्मीदें हैं, यह कि हमारी चिंता दरअसल पाकिस्तान के स्थायित्व को लेकर है।  पाकिस्तान ने कई आतंकवादी संगठऩों को अपने यहां सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करवाया है, और ये संगठन आकार और प्रभाव में बढ़ते जा रहे हैं, कई मौकों पर मैंने पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं से भी कहा है कि आप भी निशाना हो सकते हैं और वे अपना ध्यान काबुल से हटाकर इस्लामाबाद पर केंद्रित करें तो ज्यादा बेहतर होगा।

हम पाकिस्तान के साथ मिलकर उनकी सीमा के भीतर चल रहे आतंकवाद को खत्म करने में भी काम करना चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान को हक्कानी और दूसरे नेटवर्क के साथ अपने संबंधों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।  मैं समझता हूं कि यह संबंध जो कि शायद उनके नज़रिये, एक दशक पहले कुछ अच्छी वजहों से शुरू हुए होंगे, लेकिन अब इन संबंधों में सतर्कता की ज़रूरत है क्योंकि अगर उन्होंने ध्यान नहीं रखा, तो पाकिस्तान का अपने देश पर से नियंत्रण समाप्त होने जा रहा है।  हम उनके साथ सकारात्मक तरीके से काम करना चाहते हैं।  हम उनके साथ सूचनाओं को साझा करना चाहते हैं और हम चाहते हैं कि वे सफल हों।  लेकिन हम वर्तमान हालात में संबंध जारी नहीं रख सकते हैं जबकि आतंकवादी संगठन पाकिस्तान के भीतर सुरक्षित पनाह पा रहे हैं।

मैं नाटो और यूरोपीय संबंधों पर भी शीघ्रता से कुछ बात करना चाहता हूं, और यह राष्ट्रपति की पिछली यात्रा से भी संबंधित है।  और मैं सोचता हूं कि महत्वपूर्ण बात यह है कि अटलांटिक गठबंधन हमेशा की तरह मजबूत है, इससे अप्रभावित रहते हुए कि लोग इसका जिक्र किस रूप में करते हैं या इसके बारे में क्या लिखना चाहते हैं।  और मैं अभी यूरोप में सप्ताह भर बिताकर लौटा हूं, जहां दो दिन ब्रुसेल्स और नाटो में और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ बैठक की।  मैं OSCE  की बैठक के लिए वियना में था और इसके बाद एक पूरा दिन पेरिस में रहा।  पिछले सप्ताह मैं जहां भी गया हर मुलाकात में, अभी भी अमेरिका और यूरोप के हमारे सभी भागीदारों और सहयोगियों के बीच मजबूत गठजोड़ दिखा।  और सभी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर हम दोनों की जबर्दस्त एकता है, जो कि सुरक्षा के मुद्दे हैं, आर्थिक और व्यापारिक मुद्दे हैं।

और ऐसे ढेरों मसले हैं जिनमें हमें साथ काम करना है, और हमारे यूरोपीय सहयोगियों के लिए राष्ट्रपति का साफ संदेश है कि हम आपके साथ हैं।  हम आपके साथ रहेंगे।  लेकिन खासतौर पर नाटो में – और हम अनुच्छेद 5 का संकल्प पूरा करेंगे – लेकिन नाटो के हमारे सहयोगियों और सदस्य देशों के लिए, आप अमेरिकी लोगों को उससे ज्यादा आपके नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए नहीं कह सकते हैं जितना आप खुद रखते हैं।

और राष्ट्रपति इस भार की साझेदारी को लेकर भी बेहद साफ हैं, कि अमेरिकी लोग आने वाले कई सालों तक इस भार का बड़ा हिस्सा वहन नहीं कर सकते, और हर किसी को इसमें अपना हिस्सा स्वेच्छा से वहन करना चाहिए।  नाटो में यह समझौता है कि सभी देश अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत सुरक्षा के लिए खर्च करेंगे, और राष्ट्रपति सभी देशों पर ऐसा करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

कई देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं।  नाटो की आमदनी और खर्च इस साल लगभग 8 प्रतिशत बढ़ा है, और दूसरे लोगों ने भी अपना सुरक्षा खर्च बढ़ाने का संकल्प और योजनाएं प्रस्तुत की हैं।  इससे नाटो को दक्षिण से मिल रही धमकियों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा रखने में मदद मिलेगी, यह वह क्षेत्र है जहां पर हमने नाटो से ध्यान केंद्रित करने को कहा है, आतंकवाद, क्योंकि यूरोपीय देश ISIS के कारण पैदा हुई शरणार्थियों की समस्या से सबसे ज्यादा महसूस कर रहे हैं, साथ ही पूर्व और रूस की ओर से मिलने वाली धमकियों के कारण मुझे रूस आना पड़ा।

मैं समझता हूं कि राष्ट्रपति का नज़रिया इस बारे में बिलकुल साफ है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि अमेरिका और रूस के बीच कार्यकारी संबंध हों।  जो कि आज की स्थिति में हमारे नहीं हैं।  और मैने कुछ मुद्दों पर बात की है जहां पर हम सीरिया में सहयोग कर रहे हैं।  लेकिन यूक्रेन में रूस के आक्रमण को हम स्वीकार नहीं कर सकते।  जैसा कि हमने पिछले सप्ताह यूरोप में दूसरे लोगों को भी संकेत दिया था कि, यह एक चीज है जिसमें देशों को किसी विवाद में किसी एक पक्ष का चुनाव करना है।  रूस ने बशर अल-असद का पक्ष लेना तय किया है, हमने पक्ष नहीं लेना तय किया है।  लेकिन जब आप दूसरे देश पर हमला करते हैं और उनका इलाका ले लेते हैं, तब हम नहीं कर सकते – ऐसे में हम खड़े देखते नहीं रह सकते।  और यही वह आधार है जब इस आक्रमण के परिणामस्वरूप अमेरिका और यूरोप ने रूस पर काफी कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, और यह व्यवस्था तब तक नहीं बदलेगी जब तक कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का हल नहीं निकलता और यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता वापस नहीं आती।

हम पूर्वी यूक्रेन में जारी गतिरोध को दूर करने और मिन्स्क समझौते को लागू करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।  जब राष्ट्रपति ने पदभार संभाला तब ये वार्ताएं ठंडे बस्ते में थीं।  हमारी पहली बैठकों में – राष्ट्रपति पुतिन के साथ मेरी पहली बैठक में, उन्होंने पूछा कि क्या हम सीधे काम करने के लिए किसी को नियुक्त कर सकते हैं – उनके साथ, क्रेमलिन के साथ, यह देखने के लिए कि हम इन वार्ताओं को फिर से शुरू कर सकते हैं या फिर कोई गतिविधि दोबारा शुरू कर सकते हैं।  मैंने पूर्व नाटो राजदूत कर्ट वोल्कर को यह काम देखने के लिए नियुक्त किया है।  जो काम हम तुरंत कर रहे हैं – और वह है कि हम पूर्वी यूक्रेन पर ध्यान दे रहे हैं क्योंकि पूर्वी यूक्रेन में हिंसा जारी है।  2016 की तुलना में 2017 में नागरिकों के मारे जाने की घटनाएं अधिकतम हुईं हैं, संघर्ष विराम के उल्लंघन के मामले 60 फीसदी तक बढ़ गए, हमें किसी भी सूरत में पूर्वी यूक्रेन में हिंसा को खत्म करना होगा।  तो हमारी प्राथमिकता हिंसा को खत्म करना, पूर्वी यूक्रेन में चल रही मारकाट को रोकना है, हम और रूस साथ मिलकर इस पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या हम संयुक्त राष्ट्र की शांति टुकड़ी के लिए जारी होने वाले आदेशपत्र पर किसी समझौते पर तैयार हो सकते हैं जो इस हिंसा को खत्म करेगा।  फिर हम दूसरे उन मुद्दों पर भी आ सकते हैं जिन्हें लागू किया ही जाना है।

कीव में अपने सुधार कार्यों को बनाए रखने के लिए सरकार को बहुत कुछ करना है और मिन्स्क के तहत किए गए अपने वादों को पूरा करना है।  रूस को विद्रोही बलों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करना ही है जिन्हें वह पूर्वी यूक्रेन में इस हिंसा को खत्म करने में सहयोग दे रहा है और हमें वापस मिन्स्क समझौते के तहत प्रगति की ओर ले जा रहा है।  हम क्रीमिया के मुद्दे पर लौटेंगे।  मैं जानता हूं कि राष्ट्रपति पुतिन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मुद्दा बातचीत के लिए नहीं चुना गया है।  यह किसी न किसी बिंदु पर होगा।  लेकिन आज, हम पूर्वी यूक्रेन में हिंसा को रोकना चाहते हैं और आइए देखते हैं कि यदि हम उसे सुलझा सकें।

रूस के साथ दूसरे क्षेत्रों में, जहां हमारे साझा आतंकविरोधी हित जुड़े हैं हम साथ मिलकर काम करने की संभावना देख रहे हैं।  हम जानते हैं कि हमें रूस के हाइब्रिड युद्ध के साथ हुए समझौते को जारी रखना है।  हमने यह अपने चुनावों में महसूस किया था और अब हमारे पास कई सारे यूरोपीय देशों से मिली रिपोर्टें हैं कि वे भी इसी प्रभाव को देख रहे हैं।  मुझे ये नहीं समझ आता कि आखिर क्यों रूस सोचता है कि दूसरे देशों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को नाकाम करना उसके अपने हित में है।  आपको क्या हासिल करने की उम्मीद है?  मैं यह नहीं समझ सकता और कोई अन्य इस सवाल का जवाब देने में सक्षम नहीं है।  लेकिन हम यह स्पष्ट करते हैं कि हम इसे देखते हैं, इसे खत्म करने की आवश्यकता है, इसे रोकने की आवश्यकता है, और यह हमारे संबंधों को फिर से सामान्य करने की राह में भी आता है।

हमने अपने रूसी समकक्ष के साथ एक बहुत सक्रिय संवाद बनाए रखा है, बहुत मज़बूत सामरिक संवाद, बहुत मजबूत कूटनीतिक संवाद।  इसलिए हम इस बातचीत को जारी रखने जा रहे हैं, लेकिन जैसे कि हमने अपने रूसी समकक्ष को कह दिया है कि हमें कुछ अच्छी खबर की आवश्यकता है।  हमें इस संबंध में कुछ बेहतर घटित होने की आवश्यकता है, और आज हम किसी पर भी उंगली नहीं उठा सकते।  हम इंतजार कर रहे हैं।  हम इंतजार कर रहे हैं।

तो आखिर में, पश्चिमी गोलार्ध में, जिन बातों पर हमारी चिंताएं हमेशा रही हैं उनमें स्पष्ट तौर पर केंद्रीय अमेरिका से पलायन, मैक्सिको से पलायन, कई तरह के अपराधों में शामिल संगठन, ख़ासतौर पर नशे से जुड़े हुए कारोबार, जो कि मानव-तस्करी व्यापार में भी शामिल रहते हैं।  लेकिन हम केंद्रीय और दक्षिणी अमेरिका में भी बहुत सारे अवसर देखते हैं।  हमने मैक्सिको के साथ कई तरह के अपराधों में शामिल संगठनों को लेकर सार्थक संवाद विकसित किया है।  हम इस सप्ताह मंत्री स्तर पर दूसरी पारी की मेज़बानी कर रहे हैं।  हमने इस वर्ष मियामी में केंद्रीय अमेरिका सुरक्षा और समृद्धि पर एक समारोह, उनके साथ मिलकर आयोजित किया है।  हम वेनेजुएला की स्थिति पर भी OAS और लिमा समूह दोनों के ज़रिये मिलकर साथ काम कर रहे हैं।

मैं क्यूबा और दूसरे क्षेत्रों पर भी विचार कर सकता हूं, लेकिन मैं वहां बहुत सारा समय खर्च करने नहीं जा रहा।  मैं उन मामलों को एक सवाल में लेने को तैयार हूं।  और अफ्रीका में, हमारा ध्यान वास्तव में दो प्राथमिक कार्यक्षेत्र में रहा: अफ्रीका में उभरते हुए मजबूत आतंकी संगठनों पर नज़र बनाए रखना, लेकिन इसके साथ ही सूडान और अफ्रीका के दूसरे क्षेत्रों में दिख रहे मानवीय संकट पर भी ध्यान दे रहे हैं।

तो ये सचमुच एक बहुत व्यस्त वर्ष रहा।  मेरे लिए ये रोचक रहा कि कुछ लोग जानना चाह रहे थे कि स्टेट डिपार्टमेंट में कुछ भी नहीं घटित हो रहा क्योंकि मैं इस खाली की जा चुकी इमारत में घूम रहा हूं और उन हॉल से नीचे उतरते हुए अपने जूतों की गूंज को सुन रहा हूं।  (हंसते हैं।)  आज सुबह स्टेट डिपार्टमेंट और स्टेट डिपार्टमेंट के सभी सहकर्मियों के साथ एक बड़ी बैठक की।  हमने इस वर्ष को लेकर पुनर्विचार किया।  हमने विदेश मंत्रालय को फिर से डिजाइन किए जाने के बारे में बात की।  और हां, मेरे पास बहुत सारे रिक्त पद हैं।  उनके लिए मेरे पास नामित उम्मीदवार भी हैं।  मैं उन्हें सही जगह पर ज़रूर लाना चाहूंगा।  इससे बड़ा फर्क पड़ता है।

लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि स्टेट डिपार्टमेंट में काम कर रहे लोगों की उत्कृष्टता और उनका करियर, विदेश सेवा अधिकारियों के रूप में करियर, राजदूत संबंधी भूमिकाओं में सेवा दे चुके लोग – वे लक्ष्य को लेकर समर्पित लोग हैं और अपने कर्तव्य के लिए आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।  वे एक कार्यकारी भूमिका में भी हो सकते हैं।  वे इसकी जिम्मेदारी लेते हैं।  वे सीधा इन मुद्दों की तह में जाते हैं।  वे कुछ और नहीं बल्कि राष्ट्रपति की नीतियों को सहयोग देने वाले हैं, वे आधार बिंदु जिन्हें लागू करना ही होता है।  और मुझे पता है कि उनमें से बहुत सारे लोगों के लिए ये आसान नहीं है क्योंकि वे पूर्व के प्रशासन के तहत निर्धारित नीतियों को कार्यान्वित कर चुके हैं।  हम अब एक अलग दिशा में जाने वाले हैं।  लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं, राष्ट्रपति के लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को समझने और उस पर काम करने की उनकी योग्यताएं और उनकी जो समझदारी है – और तब हम उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे – ये वो बात है जो विदेश मंत्रालय के सभी लोगों को पता है, और आज सुबह हमने इस पर काफी बातें की हैं।  मैं उनकी उपलब्धियों पर बहुत गर्वान्वित महसूस करता हूं।  ये सभी मुद्दे जिन पर मैंने बात की – मैं इस पर गौर करूंगा और आपसे इस पर बात करूंगा – कुछ ऐसे ब्यूरो रहे जिन्होंने राष्ट्रपति की नीतियों को नए तरीके से लाने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए पूरे वर्ष इस पर कार्य किया।  मेरे पास इस समय जो टीम है उनके साथ मैं बहुत ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करता हूं, इसमें कुछ और लोगों को जोड़ कर हम इस टीम को और मजबूत बनाएंगे।

लेकिन मैं अपने पुराने दोस्त स्टीफन हेडली के साथ ठहर कर कुछ देर बातें करना चाहता हूं, हम उस बारे में बात करेंगे जिन पर वह बात करना चाहते हैं, संभव है कि जिन पर आप बात करना चाहते हैं ये उससे कहीं अधिक हो।  लेकिन मैं सोचता हूं कि जो महत्वपूर्ण बात मुझे कहनी चाहिए – जिसे मैं सरसरी तौर पर देखता हूं – मैं लगभग उनमें से किन्हीं भी दो या तीन को उठाकर व्हाइटबोर्ड पर रखता हूं, जिनमें से सभी एक दूसरे को छूते हैं।  और इसी तरह बहुत सारे लोग – जब मैं लोगों से उनके बारे में बात करता हूं यह बहुत रोचक होता है, अच्छा,तुम किसी खास क्षेत्र में क्या कर चुके हो, यह उनका वर्गीकरण है।  और यह ऐसी दुनिया नहीं रही जो खुद का वर्गीकरण करने दे।  वहां बहुत सारे अंतर्संबंध हैं, वहां बहुत सारे प्रतिच्छेदन हैं, अगर आप सचमुच इसको एक बार के लिए और हमेशा के लिए सुलझाना चाहते हैं तो इनकी पहचान करना बहुत ज़रूरी है।

तो इसमें थोड़ा अधिक समय लगता है।  यह कठिन काम है।  लेकिन इस बेहद जटिल दुनिया में, जहां हम खुद को पाते हैं, यही व्यवहार कुशलता है, जिसमें बहुत ज्यादा संघर्ष चल रहे हैं।  जीवन में हमारा लक्ष्य शांत रहना और इनमें से कुछ संघर्षों को खत्म करना है।  जैसा मैंने स्टेट डिपार्टमेंट के लोगों को बताया है, दूसरों को यही बताया है कि जब मैं हर सुबह उठता हूं तो खुद से यही पहला सवाल पूछता हूं:  कि आज मैं किसी जिंदगी को कैसे बचा सकता हूं।  क्योंकि हमने कई संघर्षों में बहुत सी जिंदगियों को खोया है।  धन्यवाद।  (तालियाँ बजती हैं।)

श्रीमान हेडली:  खैर, यह बहुत बढ़िया था।

सेक्रेटरी टिलरसन:  यह एक सैर थी।  (हंसते हैं।)

श्रीमान हेडली:  यह बहुत बढ़िया था, और आपको प्रशासन की नीतियों को इस तरह समझाते हुए एक मंच पर देखना अच्छा लगता है।  मैं देश भर में और दुनिया भर में बहुत सी यात्रा करता हूं, और यह सवाल हर किसी के होठों पर है:  ट्रंप प्रशासन क्या नीति X,Y और Z को लागू करेगा?  और आपने इसे बहुत ही ठोस तरीके से निर्धारित किया है, और मुझे कहना चाहूंगा, तैयार किए हुए टेक्स्ट के बोझ के बिना, जो वास्तव में मुद्दों के बारे में आपकी महारत को दर्शाता है।  इसलिए बधाई हो, और आपको इस पर और अधिक संवाद स्थापित करते हुए देखना अच्छा लगता है।  देश और दुनिया इसे बारे में सुनना चाहते हैं और कोई भी इसे आपसे बेहतर नहीं कर सकता।

मैं इसे भी दर्शाना चाहता हूं कि मुझे लगता है कि आपने इस धारणा की हिस्सेदारी राष्ट्र के केंद्र में डाल दी है – प्रशासन गठबंधनों में विश्वास नहीं करता है।  यह थोड़ी देर के लिए प्रशासन की नाक में दम कर रहा है, और मुझे लगता है कि आपने इसे बहुत स्पष्ट किया है कि आप यह मानते हैं कि गठबंधन इस देश के लिए अनूठा संसाधन हैं और जिसमें से कुछ को अपनी कूटनीति में बहुत सक्रिय रूप से उपयोग करने का इरादा रखते हैं।

सेक्रेटरी टिलरसन:  सचमुच।

श्रीमान हेडली:  ISIS पर रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से प्रभावशाली है।  सेक्रेटरी के जाने से पहले हमारे पास लगभग 15 मिनट होगें, जो कि बहुत अधिक समय नहीं है, और यहां बहुत सारे सवाल हैं जिनके बारे में बात करनी है। इसलिए मैं इनमें से कुछ प्रश्नों को समूह में पूंछने का प्रयास करने जा रहा हूं —

सेक्रेटरी टिलरसन:  अवश्य।

श्रीमान हेडली:  — शायद उनमें से तीन या चार का उत्तर मिल जाए, और मुझे आपके साथ चलने दें।

चूंकि यह दक्षिण कोरिया और एशिया पर केंद्रित सम्मेलन है, इसलिए हमें उत्तर कोरिया से शुरू करना चाहिए।  इस विषय पर मेरे संभवतः 10 प्रश्न हैं।  जो दो चीजों पर केंद्रित हैं मैं इन्हें आपके साथ कवर करना चाहता हूं:  पहला, कूटनीति के माध्यम से परमाणु ऊर्जा प्राप्ति में सक्षम होने के बारे में आप कितने आशावादी हैं?  और अगर आप आशावादी हैं, तो हम कूटनीति कब शुरू करते हैं?  एक नज़रिया जो वास्तव में प्रशासन के लोगों के बीच है और क्या उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने की अनुमति देनी चाहिए – प्रतिबंधों को बढ़ाकर, उत्तर कोरिया पर अधिक दबाव डालने के लिए  चीन पर दबाव डालना, रूस को तंबू में लाने के लिए क्या चीन को काटने का विकल्प हो सकता है।  और यह सही दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन आपके विचार में, हम बातचीत के लिए कब आते हैं?  और क्या कोई पूर्व शर्त है?  और एक बात, जाहिर है कि लोग इसके बारे में चिंतित हैं:  उत्तर कोरिया का कहना है कि परमाणु ऊर्जा पर बात करने के लिए वे मेज पर नहीं आएंगे; हमारी स्थिति यह है कि यही एक चीज बात करने के लायक है।

आप उससे कैसे उबरते हैं?  तो क्या आप इस बारे में बात कर सकते हैं कि राजनयिक प्रक्रिया कैसे  व्यक्त की जा सकती है?

सेक्रेटरी टिलरसन:  ठीक है, पहले तो मैं यही कहूंगा कि कूटनीति हो रही है।  ऐसा हो रहा है।  वास्तव में, प्रतिबंध की पूरी व्यवस्था, दबाव की कोशिशें कूटनीति का ही हिस्सा हैं, इसे उत्तर कोरिया की ओर से ऐसे समझा गया है कि दुनिया इसे स्वीकार नहीं करती है, जिसे वे समझते हैं कि इसे जारी रखने पर महज अलगाव ही बना रहता है।  इस प्रकार यह कूटनीति ही है, और यही थी – और नीति की शुरुआत में यह सोच समझकर लिया गया फैसला था, जैसे सरलता से फोन उठाया गया और फरवरी में किम-जॉन्ग को कॉल की गई – और मार्च में जब हम पहली बार आगे बढ़ रहे थे और कह रहे थे, “हम उनके परमाणु परीक्षणों को पसंद नहीं करते जो आप कर रहे हैं।  क्या हम बैठ सकते हैं और बात कर सकते हैं,’’ संभवतः कोई भी बात करने के लिए तैयार नहीं हो रहा था।

इस प्रकार मुझे लगता है कि हम राय बना ली थी और हमने पिछली कोशिशों और वार्ताओं पर गौर किया था, और राष्ट्रपति ने कई बार ऐसा किया था, और हमने दूसरों द्वारा की गई कोशिशों को देखा और नाकाम रहे, और उत्तरी कोरियाइयों ने हमेशा ही ऐसी वार्ताओं के साथ खेल ही किया।  और वे कभी भी भरोसेमंद साबित नहीं हुए।  इसलिए हम इस बार सख्ती से प्रतिबंध की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया, लेकिन हम तभी सफल हुए जब हम व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी सुनिश्चित करने में कामयाब रहे।  इस प्रकार यह अमेरिका और कुछ अन्य देश ही नहीं थे, बल्कि इसमें व्यापक भागीदारी पर आधारित थी और इसमें गंभीर तरीके से चीन और रूस की सक्रिय भागीदारी भी रही थी।  और यह वास्तव में चीन के साथ वार्ता की शुरुआत थी और काफी हद तक यह फैसला चीन की भागीदारी पर टिका हुआ था।  और मैं आपको बताऊंगा, हमारे फैसले में उनकी भागीदारी रही थी; उन्होंने भी प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू किया था।  यही वजह है कि इसका प्रभाव हो रहा है।

राष्ट्रपति चीन को तेल की आपूर्ति बंद करते हुए देखना चाहेंगे।  पिछली बार उत्तर कोरिया बात के लिए तैयार हुआ था, इसकी वजह चीन द्वारा तेल की आपूर्ति रोकना रही थी।  तीन दिन बाद, उत्तर कोरिया वार्ता के लिए सामने था।  और राष्ट्रपति को लगता है कि हम वास्तव में उसी स्थिति में हैं।  इसलिए वह तेल के मामले में और काम करने के लिए चीन पर दबाव बना रहे हैं।

बात कब शुरू होती है?  कूटनीति के लिहाज से हमने कहा है कि हम उत्तर कोरिया से कभी भी बात करने के लिए तैयार हैं और बात करना चाहेंगे, और बिना किसी पूर्व शर्त के लिए पहली बैठक के लिए तैयार हैं।  चलिए बस बैठक करते हैं और हम इस बारे में बात कर सकते हैं कि आप क्या चाहते हैं।  हम इस बारे में बात कर सकते हैं कि क्या यह स्क्वायर टेबल या राउंड टेबल होने जा रही है, जिसके लिए आप भी उत्साहित हैं।  लेकिन क्या हम कम से कम बैठ सकते हैं और एक दूसरे को आंखों में आंखें डालकर देख सकते हैं?  और तभी हम एक खाका खींच सकते हैं, जिस दिशा में हम आगे काम कर सकते हैं।  मुझे नहीं लगता कि यह कहना यथार्थपरक नहीं है कि आप अपना कार्यक्रम छोड़कर बातचीत के लिए आगे आएं तो हम बात शुरू करने जा रहे हैं।  उन्होंने इस दिशा में खासा निवेश किया है।  और राष्ट्रपति इस दिशा में खासे यथार्थवादी हैं।

और यह कुछ ऐसा है कि आप मेलजोल की प्रक्रिया को कैसे शुरू करते हैं, क्योंकि हम उत्तर कोरिया में एक नए नेता के साथ रूबरू हो रहे हैं जो अभी तक किसी के साथ नहीं जुड़ा है।  और वह न तो अपने पिता की तरह है, न ही अपने दादा की तरह, और हम उसके बारे में ज्यादा नहीं जानते कि क्या वह उनके साथ जुड़ना पसंद करेगा।  और यही वजह है कि मैं सोचता हूं कि बातचीत शुरू करने का खाका कैसे तैयार किया जाए, पहले मुझे जानना है कि मेरे सामने कौन है।  मुझे उनके बारे में कुछ जानने की ज़रूरत है।  मुझे समझना है कि वे बातचीत को कैसे आगे बढ़ाते हैं और वे क्या सोचते हैं।  जैसे कि हम सभी जानते हैं कि किसी समझौते पर राजी होना कई मसलों पर बातचीत की इच्छा पर निर्भर है।  चलिए बातचीत के लिए कई बातों को सामने रखते हैं।  और आप बातचीत के लिए किन मुद्दों को सामने रखना चाहते हैं?  और हम आपको बताएंगे कि हम किन मुद्दों पर बात करना चाहते हैं  और अहम बात यह है कि हम बात शुरू करें।

इस पूरे मामले में कोई शर्त है तो वह यही है कि यह वार्ता खासी मुश्किल होने जा रही है, यदि आप बातचीत के मध्य में आप किसी अन्य डिवाइस यानी हथियार के परीक्षण का फैसला लेते हैं।  यह बातचीत मुश्किल होने जा रही है, यदि आप वार्ता के मध्य में कोई और मिसाइल छोड़ने का फैसला लेते हैं।  इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें स्पष्ट तौर पर समझते हैं कि यदि हम बात करने जा रहे हैं तो हमें कुछ समय के लिए शांत रहना है।  हमें शांत रहने की ज़रूरत है या इसे सकारात्मक वार्ता बनाना खासा मुश्किल होने जा रहा है।

और हम उन्हें इशारा कर रहे हैं कि हमें शांति काल की ज़रूरत है।  आपको हमें बताने की ज़रूरत है कि आप बात करना चाहते हैं।  दरवाजे खुले हुए हैं।  लेकिन जब आप हमें बताएंगे कि आप बातचीत के लिए तैयार हैं तो हम ऐसा करके दिखाएंगे।

श्रीमान हेडली:  सही है।  चलिए मैं आपसे दूसरा सवाल पूछता हूं।  सेना के इस्तेमाल की काफी बातें हुई हैं।  कुछ लोगों ने कहा कि प्रायद्वीप पर सेना के इस्तेमाल से लड़ाई की संभावना 40 प्रतिशत है।  ठीक है, कभी-कभार मैं चतुराई से लोगों से कहता हूँ कि लोगों का इस तरह से बात करना राष्ट्रपति की नीतियों की सफलता का संकेत है, क्योंकि वह वास्तव में लोगों को समझाते हैं कि समस्या का समाधान हकीकत में अहम है और उत्तर कोरिया व चीन दोनों का ध्यान खींचने की प्रक्रिया का हिस्सा है।  दूसरी तरफ, ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने इसके जोखिम और चिंताओं का उल्लेख किया है और उदाहरण के लिए एक चिंता किम जोंग के साथ ही, जिन्हें हम नहीं जानते हैं और जो काफी हद तक अलग-थलग है, और एक हद तक वह सोच सकते हैं कि अमेरिका उसकी सेना और फिर उसकी जगह लेने के लिए आ रहा है।

तो सरकार के हवाले से जब प्रवक्ता कहते हैं कि सैन्य विकल्प खुले हुए हैं तो सैन्य बलों के आमने-सामने आने की संभावनाओं को कैसे देखते हैं?  वे किसके बारे में बात कर रहे हैं?

सेक्रेटरी टिलरसन:  हां, मैं समझता हूं कि इस प्रकार के राजनयिक प्रयास की सफलता के लिए थोड़ा बहुत सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी रखा जाना चाहिए, और यह सिर्फ धमकी के लिए ही नहीं हो सकती।  यह एक विश्वसनीय विकल्प होना चाहिए।  और राष्ट्रपति ने भी शुरू से ही अनुरोध किया है कि परमाणु हथियारों से संपन्न उत्तरी कोरिया के खतरे, मैं, जानता हूं, बहुत सारे लोग अब सवाल पूछने लगे हैं, इसको देखते हुए क्यों न हमें एक रोकथाम की रणनीति तैयार रखनी चाहिए।  आपको यह रणनीति रूस के लिए रखनी होगी, यही रणनीति चीन के लिए भी रखनी होगी और दूसरों के लिए भी यही रणनीति रखनी होगी।  और अंतर यह है कि, उत्तरी कोरिया के पूर्व के बर्ताव से यह स्पष्ट हो गया है कि वह परमाणु हथियारों को सिर्फ बचाव के लिए नहीं रखेगा।  उनके  लिए यह एक व्यावसायिक साधन बन जाएगा।  क्योंकि हम इस तरह के तत्वों को पहले ही व्यावसायिक बाज़ार में देख चुके हैं।  और जब हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां हमारे सबसे बड़े शत्रु देश से इतर छोटे समूह हैं, हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते हैं।  हम ऐसे किसी राष्ट्र को स्वीकार नहीं कर सकते हैं, जिसका किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय कायदे कानूनों को नहीं मानने का स्थापित इतिहास रहा है।  हालांकि, निश्चित तौर पर सोवियत संघ के मामले में ऐसा नहीं था।  चीन के मामले में भी निश्चिततौर पर ऐसा नहीं है।  परमाणु शक्ति संपन्न दूसरे देशों के मामले में भी निश्चित तौर पर ऐसा नहीं है।  ये देश वो हैं जो अंतरराष्ट्रीय कायदे कानूनों का पालन करते रहे हैं।  उत्तर कोरिया का कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है।  सच तो यह है कि उसका रिकॉर्ड इससे एकदम उलट है।  और यही कारण है कि राष्ट्रपति और मैं खुद, उनके इस आकलन से सहमत हैं कि हम परमाणु शक्ति संपन्न उत्तर कोरिया को स्वीकार नहीं कर सकते, और मैं समझता हूं कि यही आसपड़ोस के देशों की भी नीति है।

इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि राजनयिक प्रयासों के साथ ही एक विश्वसनीय सैन्य विकल्प भी मौजूद रहे।  और हां, कई ऐसे सैन्य विकल्प हैं, जिन्हें मेरे असफल रहने पर तैयार किया जा सकता है।  इसीलिए मैं कहता हूं कि हमें कठोर परिश्रम करना होगा, ताकि हम असफल न हों।  और राष्ट्रपति भी यही चाहते हैं, और उन्होंने हमारे राजयनिक प्रयासों को प्रोत्साहित भी किया है।  लेकिन, मेरा मानना है कि उन्होंने इस तरह के खतरे से अमेरिका और अपने सहयोगियों को बचाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लिया है, और वह यह सुनिश्चित कर देना चाहते हैं कि उनके पास ऐसा कोई परमाणु हथियार ही नहीं हो जिसकी पहुंच अमेरिका तक हो सके।

श्रीमान हेडली:  हमारे पास वक्त बहुत कम है और हम ढेर सारे मुद्दों को कवर कर सकते हैं।  मैं इसी मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने जा रहा हूं और मैं इसे पूर विस्तार से समाहित करने की कोशिश करूंगा और आपको दो चीजें दूंगा, प्रतिक्रिया जताने के लिए, और उसके बाद हम इसे समेट लेंगे।  एक तो चीन को लेकर है।  बहुत सारे लोग कह रहे  हैं कि चीन इस बात को लेकर चिंतित है कि अगर वह उत्तर कोरिया पर बहुत अधिक दबाव डालता है तो वहां की सत्ता भरभरा जाएगी।  इसका मतलब होगा कि शरणार्थी सीमा पार कर जाएंगे, और यह भी हो सकता है कि अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेना उत्तर कोरियाई क्षेत्र में घुस जाए।  और बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो चीन के साथ उत्त स्तरीय रणनीतिक बातचीत की आवश्यकता पर बातें कर रहे हैं, ताकि आपात स्थिति पैदा होने पर चीन और अमेरिका को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसको लेकर एक आपसी समझ बन सके।

हमें सार्वजनिक रूप से कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे उनमें भरोसा जग सके।  संभावनाएं क्या हैं?  क्या अमेरिका-चीन के संबंध – और मैं आपसे इस बारे में विस्तार में जाने के लिए नहीं कह रहा हूं, लेकिन क्या अमेरिका और चीन के संबंध इस अवस्था में हैं जहां इस तरह की बातचीत संभव है?  और दूसरी बात, हमने रूस की बात नहीं की है, क्योंकि चीन जितना दबाव उत्तर कोरिया पर डालेगा और उसके संसाधनों में कटौती करेगा, संभव है कि रूस आए और उस कमी को दूर कर दे।  क्या रूस इस प्रयास में हमारे साथ है?  और क्या उत्तर कोरिया को लेकर आप रूस के साथ थोड़ा भी कूटनीतिक बात कर  सकते हैं?

सेक्रेटरी टिलरसनठीक है, पहले मुझे चीन को लेकर सवालों का जवाब देने दीजिए।  और मैंने और सेक्रेटरी मैटिस ने अपने चीनी समकक्ष के साथ उच्च स्तरीय वार्ता और कूटनीतिक और रणनीतिक बातचीत की है, और इसमें वास्तव में ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ चेयरमैन डनफोर्ड, जनरल डनफोर और उनके चीनी समकक्ष भी शामिल थे।  हमारी बातचीत इन मुद्दों पर हुई और हमने एक आपसी समझ बनाने की कोशिश की कि पहला, अगर उत्तर कोरिया में सरकार गिरती तो सीमा पार से आने वाले शरणार्थियों को लेकर चीन की चिंताओं को हम कितना समझते हैं।  इस तरह के हालात से निपटने के लिए चीन तैयारी में भी जुट गया है।  मैं समझता हूं कि यह कुछ ऐसा है जिससे वे निपट सकते हैं।  मैं नहीं समझता हूं कि यह खतरा बहुत खास है, जैसा कि दूसरे उसे देख रहे हैं।  मैं इसे खारिज नहीं करना चाहता, लेकिन यह एक ऐसा मामला भी नहीं है जिसे संभाला न जा सके।  और उन्होंने ऐसे हालात से निपटने के लिए तैयारियां शुरू भी कर दी हैं।

हमारे बीच उस हालात को लेकर भी बातचीत हुई है कि अगर उत्तर कोरिया के अंदर कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनका बाहर की गतिविधियों से कुछ लेना-देना नहीं हो और उससे आंतरिक अस्थिरता पैदा हो जाए, तो हमारे लिए सबसे अहम हो जाएगा कि हम उन परमाणु हथियारों को अपने कब्जे में ले लें, जिसे वे विकसित कर चुके हैं और यह सुनिश्चित करें कि ये हथियार उन लोगों के हाथ नहीं लगने पाएं, जिनके हाथ हम नहीं लगने देना चाहते।  चीन के साथ हमारी इस पर भी बातचीत हुई है कि कैसे यह काम किया जा सकता है।

एशिया के पहले दौरे के दौरान मैंने जान-बूझ कर चार संभावनाओं को व्यक्त किया था:  कि हम सत्ता परिवर्तन नहीं चाहते, हम नहीं चाहते कि सरकार गिरे, हम कोरियाई प्रायद्वीप में तेजी से बिखराव नहीं चाहते हैं, हम ऐसी कोई वजह भी नहीं तलाश रहे हैं ताकि हम अपनी तरफ से असैन्य क्षेत्र करार दिए गए क्षेत्र के उत्तर में अपनी सेना भेजें।  हमारे बीच इसको लेकर भी बातचीत हुई है कि अगर ऐसा कुछ होता है कि हमें सीमा पार करनी पड़ती है, हमने चीन को आश्वस्त किया है कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे तब हम वापस चले जाएंगे और 38वीं अक्षांश रेखा के दक्षिण में वापस हो जाएंगे।  यही हमारा वादा है, जो हमने उनके साथ किया है।

हमारा एक मात्र उद्देश्य कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार रहित बनाना है, इसके अलावा हमारी कोई मंशा नहीं है।  और इन सभी वार्ताओं और बातचीत, हम शायद उत्तर कोरिया के लोगों के लिए एक अलग कल का निर्माण कर सकते हैं, क्योंकि मौजूदा समय में वे लोग ही सबसे ज्यादा उदास और चिंतित हैं।

जहां तक रूस की भागीदारी की बात है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लेकर रूस हमेशा से बहुत ही सहायक रहा है।  वे उन्हें वीटो लगा सकते थे।  वे उन्हें अवरुद्ध कर सकते थे, लेकिन उन्होंने नहीं किया।  मुझे लगता है कि प्रतिबंधों को कार्यान्वित करने पर, यह हमारे लिए स्पष्ट नहीं है कि हम इन्हें पूरी तरह कैसे लागू करेंगे।  हम जानते हैं कि कुछ उल्लंघन हैं।  ये देखने में कठोर नहीं होते हैं।  हम देखते हैं कि वे क्या हैं, और विशेष रूप से हमारे हो चुके हैं – मेरी विदेश मंत्री लावरोव से विशिष्ट मुद्दों पर कई बातचीत हुई थी, जिसे हम देखते हैं कि हम उनसे कहेंगे कि वे इन्हें बंद कर दें।  किसी एक विशेष से जबर्दस्ती काम लेना।  यहां बड़ी संख्या है – जो कुछ 35,000 के आसपास है – उत्तर कोरियाई आज तक रूस में काम कर रहे हैं।  रूस में श्रमिकों की कमी है।  उनके पूर्व में आर्थिक विकास है, विशेष रूप से वे उस पर काम कर रहे हैं।  इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें उनकी आर्थिक हिस्सेदारी है।  लेकिन यह प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को भी कम कर रहा है।  इसलिए हम अपने रूसी समकक्षों के साथ विशेष रूप से बात करते हैं कि हम पूछते हैं कि वे क्या करते हैं।

सुरक्षा परिषद में वे कमोबेश, फिर से, वे प्रतिबंधों के प्रति बहुत सहायक रहे हैं।  उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए जो उन्हें लगता है कि वे कितने प्रभावशाली हो सकते हैं।  लेकिन हमें रूस के समर्थन की आवश्यकता है।  और जब हम इस बिंदु पर पहुंचते हैं तो हम वास्तव में इस समस्या को सुलझाना शुरू करने जा रहे हैं, तो हमें सभी पड़ोसियों की ज़रूरत होगी, जैसा कि मैं इसे कहता हूं।  और यह कोरिया गणराज्य में हमारे सहयोगियों के लिए महत्वपूर्ण, स्पष्ट रूप से, सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण होने वाला है, लेकिन यह जापान, रूस, चीन के लिए महत्वपूर्ण होगा, हर कोई राजनयिक वार्ता के आसपास राजनयिक वार्ता की सफलता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

श्रीमान हेडली:  अब हम कार्यक्रम के अंत में पहुंच गए हैं।  मैं अपने कोरियाई प्रतिभागियों और भागीदार, कोरिया फाउंडेशन और अटलांटिक काउंसिल का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।  और विशेष रूप से – डॉ. मियोन ओह, आज आपने हमारी बैठक के लिए शानदार काम किया है।  मैं आने के लिए आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं, और शाम को सेक्रेटरी टिलरसन को धन्यवाद देने के लिए कृपया मेरे साथ शामिल हों।  (तालियाँ बजती हैं।)


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/secretary/remarks/2017/12/276570.htm
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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