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राजदूत ऐलिस वेल्स मीडिया के समक्ष

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जनवरी 17, 2018

 
 

राजदूत वेल्स: नमस्कार। इतनी सुबह यहां आने के लिए फिर से आपका धन्यवाद।

मैं कल हुई अपनी वार्ताओं पर चर्चा करने का अवसर चाहती थी जिनमें मैं, वास्तव में, अमेरिका के पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर महत्व पर ज़ोर देने में सक्षम रही। मैं 70 वर्षों के सहयोग को ऐसी अवधि के रूप में देखती हूं जब हमने, पाकिस्तान और अमेरिका ने, वास्तव में अक्सर इतिहास के महान अध्यायों में से कुछ को मिलकर लिखा। पाकिस्तान की आर्थिक सफलता के लिए हमने बहुत निवेश किया है। छह अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साथ हम पाकिस्तानी निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य हैं। पाकिस्तान को आर्थिक रूप से सफल बनाने की इस व्यापक रणनीति के तहत ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में काम करते हुए, मैं समझती हूं, हमने असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं, करीब 3,000 मेगावाट की ऊर्जा क्षमता जोड़ी है।

जब मैं पाकिस्तान के साथ हमारे सहयोग की अवधि पर नज़र डालती हूं, तो पाकिस्तान ने स्वास्थ्य, चिकित्सा और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में अपनी जनता की दशा में जो सुधार किया है, मैं समझती हूं हमने वास्तव में अहम योगदान करना चाहा था और किया। और उन 1300 स्कूलों की बात हो जिनके निर्माण या नवीकरण में हम सहायक रहे, या 2000 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क की, वास्तव में ठोस सुधार आज शायद सर्वाधिक केंद्रित दिखते हैं केंद्र शासित जनजातीय इलाकों, फाटा (FATA) में, जहां आतंकवाद के खिलाफ़ एक बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण जीत, पाकिस्तान सरकार की एक अहम जीत जिसमें इसने देश के इस महत्वपूर्ण भाग में अपने इलाकों और संप्रभुता को फिर से हासिल किया, के दौरान आंतरिक विस्थापन का शिकार बने लोगों को अपने घरों में वापस लौटाने के गंभीर प्रयासों में पाकिस्तान की सहायता में हम अबतक के सबसे बड़ा दानदाता हैं।

और हम इस तथ्य को नहीं भूल सकते कि हमने पिछले 40 वर्षों को दौरान बहुत करीब मिलकर काम किया है जब पाकिस्तान ने उसके यहां शरण लेने वाले लाखों अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए अच्छा पड़ोसी बनने की असाधारण चुनौती को सचमुच में स्वीकार किया। और इस प्रयास के तहत, हम यूएनएचसीआर के ज़रिए सबसे बड़ा दानदाता रहे हैं, यहां और इस पूरे क्षेत्र में, दोनों ही जगह न सिर्फ देश के बाहर रह रहे लोगों की सहायता के लिए कार्य करते हुए, बल्कि अपने वतन में सम्मानपूर्ण वापसी की उम्मीद करते लोगों की सहायता करते हुए भी।

और पाकिस्तान राष्ट्र के तौर पर आपने अल-क़ायदा, तालिबान और आइसिस के खिलाफ़ जंग शुरू की। हम इसमें पाकिस्तान के साथ रहे हैं। वर्ष 2002 से अब तक हमने कोलिशन सपोर्ट फंड्स (सीएसएफ) में 14 अरब डॉलर से अधिक दिए हैं। इन सहायता राशियों का दिया जाना हमारे गहरे हित में है क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ़ यह एक संयुक्त लड़ाई है, और हम पाकिस्तानी राष्ट्र और पाकिस्तानी जनता को निशाना बनाने वाले आतंकवादयों को उखाड़ फेंकने में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साहस और संकल्प को मानते हैं।

बेशक एक विदेशी सैन्य वित्तपोषण कार्यक्रम भी रहा है अच्छी मात्रा में, अरबों डॉलर में, यह भी संयुक्त लड़ाई के लिए। और इस सहायता से, हम समझते हैं अमेरिका ने सचमुच में पाकिस्तान के साथ संबंधों तथा एक लोकतांत्रिक और संपन्न राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान के भविष्य को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई है।

आज हम इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए अपनी साझेदारी के अगले चरण में वास्तव में ऐसी ही प्रतिबद्धता देखना चाह रहे हैं। वही निष्ठा, पाकिस्तान के पड़ोसियों पर हमला करने वाले आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए वही ऊर्जा। वास्तव में, हम अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी का दृष्टिकोण नहीं रखते। आतंकवादी क्षेत्रीय सुरक्षा को कमज़ोर करते हैं, वे समृद्धि को कम करते हैं, वे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को इस तरह नुकसान पहुंचाते हैं कि उसका राजनीतिक और आर्थिक दोनों प्रभाव पड़ता है। और इन आतंकवादी गुटों के खिलाफ अक्रियता वास्तव में पड़ोस के अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता को बढ़ावा देता है।  यह सीमा-पार आतंकवाद और हमले जो हम देखते हैं, उनमें से कुछ को बनाए रखने में मददगार है। इसी तरह के हमलों ने शरणार्थियों के लिए अपने घरों को लौटना मुश्किल बना दिया है। यह घरेलू अतिवाद को बढ़ाने में सहायक है। और इसका स्पष्टतया मतलब है शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, जोकि जनता चाहती है, के लिए कम संसाधन उपलब्ध रहना।

इसलिए कल बहुत पेशेवर और रचनात्मक बैठकों में मेरा संदेश था कि हम हरेक आतंकवादी की आतंकवाद के उपयोग की क्षमता को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, इनमें तालिबान और हक़्क़ानी नेटवर्क जैसे समूह शामिल हैं। हम कहीं भी, किसी भी देश द्वारा किसी भी देश के खिलाफ प्रतिनिधि के रूप में आतंकवादी के इस्तेमाल का विरोध करते हैं, क्योंकि हमें नहीं लगता कि कानून आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में आतंकवाद की कोई जगह है।

साथ ही, हम बलूचिस्तान समेत पाकिस्तान के भीतर कहीं भी अलगाववाद को बढ़ावा देने के किसी भी प्रयास के बिल्कुल खिलाफ हैं। हम बलूची अलगाववाद का समर्थन नहीं करते हैं। मानवाधिकारों संबंधी चिंताओं का समाधान किया जाता है और उनका शांतिपूर्ण समाधान होना चहिए।

राष्ट्रपति ने अगस्त में जो दक्षिण एशिया रणनीति घोषित की वह वास्तव में अमेरिका और पाकिस्तान के लिए मिलकर काम करने का अवसर है और हमें लगता है कि यह संबंध अहम है क्योंकि पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण देश है। आप जल्दी ही पांचवां सबसे बड़ा देश बनने जा रहे हैं, 20 करोड़ की आबादी, बढ़ते मध्यम वर्ग और उद्यमी वर्ग, और हम पाकिस्तानी-अमेरिकियों और अमेरिका में उनकी भूमिका को देखते हैं और हम उन संबंधों को देखते हैं जो जो हमने विस्तृत शैक्षिक विनिमय कार्यक्रमों के ज़रिए बनाए हैं, इनमें पाकिस्तान के भीतर 22,000 लोगों का पूर्व-छात्र नेटवर्क शामिल है। हम ऐसे ही रिश्ते बनाना चाहते हैं, क्योंकि हम पाकिस्तान को बातचीत के ज़रिए राजनीतिक समाधान के प्रयासों को सुगम करने में अग्रणी देखना चाहते हैं जोकि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता लाने में सहायक होगा।

तो मैं यहीं रुकती हूं और आपके सवाल लेती हूं।

मीडिया: आपका बहुत धन्यवाद। मैं थोड़ा और समझना चाहूंगा। आपने कहा कि आप अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी को नहीं मानती हैं। आप यहां पाकिस्तान में नहीं देखतीं? आपकी नीति क्या है?

राजदूत वेल्स: हमारी नीति है कि वे नहीं हैं, आपके पास अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी नहीं हो सकते। आतंकवाद नहीं है –

मीडिया: आपको लगता है पाकिस्तान में कुछ अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी हैं।

राजदूत वेल्स: नहीं। हम ऐसे देशों के खिलाफ हैं जो कुछ आतंकवादी प्रतिनिधि समूहों को एक वैध उद्देश्य को पूरा करने वाला और कुछ को नष्ट किए जाने लायक के रूप में विभेद करने का प्रयास करते हैं। इसके विपरीत, सभी आतंकवादी बलों का मुकाबला किए जाने की ज़रूरत है। यह दावे जारी रखने का वैध तरीका नहीं है।

मीडिया: आपने आतंकवाद और अतिवाद के खिलाफ़ पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है, लेकिन साथ ही, ऐसा लगता है, वाशिंग्टन से विभिन्न स्तरों पर आ रहे बयानों में ज़ोर दिया जाता है कि पाकिस्तान पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है। पाकिस्तान खुद अपनी तरफ से इन आतंकवादियों को हटाने का प्रयास नहीं कर रहा है, इसलिए यह बहुत ही विरोधाभासी दिखता है।

राजदूत वेल्स: हम अंतर देखते हैं पाकिस्तान द्वारा पाकिस्तानी राष्ट्र और जनता को लक्ष्य बनाने वाले आतंकवादी समूहों को हराने के लिए लड़ी जा रही असाधारण लड़ाई, और इस तरह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और जेयूए का सामना करने में। हम समान फोकस और संकल्प देखना चाहेंगे अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ जो पड़ोसियों पर हमले के लिए पाकिस्तानी भूमि का उपयोग कर रहे हैं।

तो फिर से कहूं तो पाकिस्तान ने खासकर फाटा (FATA) को वापस लेने में जो कुछ उपलब्धि पाई उसके लिए हम इसका सम्मान करते हैं। हम उस प्रयास में एक मज़बूत साझीदार रहे हैं। और हम अफ़ग़ानिस्तान को स्थिर करने और क्षेत्रीय स्थिरता लाने में सहायता के लिए पाकिस्तान के साथ साझेदारी का एक रास्ता ढूंढना चाहेंगे।

मीडिया: आपने कहा कि अमेरिका हाउसिंग के क्षेत्र में सबसे बड़े दानदाता के रूप में पाकिस्तान की मदद कर रहा है। अब भी पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में लाखों शरणार्थी रह रहे हैं। संयोगवश मैं खैबर पख्तूख्वा से हूं और हमारे समाज में सचमुच, आप जानती हैं, आप कह सकती हैं कि यह [अस्पष्ट] क्योंकि हमें नुकसान पहुंचा [अस्पष्ट] 80 के दशक से ही वहां रहते हुए। आपको बताऊं, दो पीढ़ियां, वे पाकिस्तान में पली-बढ़ी हैं। और जब अमेरिका सरकार आरोप लगाती है कि कुछ लोग हैं, वो सीमा पार जाते हैं, वे सीमा के पार क्रियाकलाप करते हैं, वे वापस पाकिस्तान आ जाते हैं। जब भी हम पाकिस्तानी अधिकारियों से बात करते हैं वे कहते हैं कि हम इन [अस्पष्ट] से छुटकारा पाना चाहते हैं जोकि यहां रह रहे हैं। वे इन्हें अपनी खुद की जगह मानते हैं। और हमारा मानना है कि जो भी आते हैं, जो भी सीमा पार करते हैं, उनके, एक बहुत बढ़िया माहौल, अच्छे लोग जो उन्हें जगह देते हैं।

तो जब हम जिम्मेदार [अस्पष्ट] से बात करते हैं, वे अब कहते हैं कि वे चाहते हैं कि शरणार्थी अपने देशों को वापस लौट जाएं। क्या अमेरिका यहां रह रहे शरणार्थियों को वापस उनके अपने घर लौटाने में हमारी सहायता करने को तैयार है? और वहां शांति है, अफ़ग़ानिस्तान में एकजुटता की सरकार है। आपका इस बारे में क्या मानना है? क्या अमेरिका इसमें सहायता करने को तैयार है? [अस्पष्ट]?

राजदूत वेल्स: सबसे पहले, मैं पाकिस्तान की प्रशंसा करना चाहूंगी पिछले 40 वर्षों के दौरान लाखों शरणार्थियों को रखने के लिए। यह पाकिस्तान का एक असाधारण कदम रहा है जिसकी वित्तीय और सामाजिक दोनों तरह की कीमतें हैं, और अग्रणी अंतरराष्ट्रीय दानदाता के तौर पर हमने विगत 40 वर्षों के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध के सबसे दुखद अध्यायों या आनुषंगिक परिणामों में से एक का सामना करने के लिए पाकिस्तान की मदद का प्रयास किया है। इसलिए मैं समझती हूं कि पाकिस्तान, पाकिस्तान की सरकार, पाकिस्तान के लोग तारीफ के हकदार हैं।

हम शरणार्थियों की वापसी का समर्थन करते हैं क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान उन्हें वापस लेने और आत्मसात करने में सक्षम है। उदाहरण के लिए हमने 2016 में बड़ी संख्या में शरणार्थियों को अफ़ग़ानिस्तान जाते देखा। दुर्भाग्य से, उनमें से कई वास्तव में वापस अपने गृहनगरों तक कभी नहीं पहुंच पाए। वे सुरक्षा स्थितियों के कारण अफ़ग़ानिस्तान के भीतर विस्थापित रहते हैं जिसके कारण वापस इधर आनेवालों की नई खेप तैयार होती है, या इससे अफ़ग़ानिस्तान के भीतर अस्थिरता पैदा होती है।

इसलिए हम शरणार्थियों की गरिमापूर्ण वापसी देखना चाहेंगे, इसके लिए बेहतर सुरक्षा की ज़रूरत है, इसके लिए ज़रूरत है अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नौकरियां या घर जैसी सुविधाएं प्रदान करने में अफ़ग़ानिस्तान की सहायता करने की जोकि शरणार्थियों के लिए वापसी संभव बनाती हैं। लेकिन जब तक अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई जारी है, मैं नहीं समझती शरणार्थियों की पूर्ण वापसी तब तक संभव है। इसलिए इसकी जगह, हम उन पहलुओं पर काम कर रहे हैं, पाकिस्तान की मदद करना जो शरणार्थियों की मेजबानी करना जारी रखे हुए है और पाकिस्तान से आग्रह करना कि शरण देना जारी रखने के साथ ही वह अफ़ग़ानिस्तान के भीतर शरणार्थियों की वापसी के लिए स्थितियां तैयार करने के लिए लगनपूर्वक काम करे।

मीडिया: पाकिस्तान में आपका स्वागत है। मेरा नाम [मिनिसी] है। मैं यहां एक टेलीविज़न [अस्पष्ट] का प्रतिनिधित्व करता हूं।

मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि हाल ही में अमेरिका ने अपनी सहायता रोक दी है। मुझे पता है कि मांगों में से एक है हक़्क़ानी नेटवर्क पर चोट करना। इस विषय में और क्या जानकारी है, अमेरिका की मांग पर पाकिस्तान को क्या करना चाहिए? पाकिस्तान से सहयोग के मामले में आप और क्या विचार कर रही हैं?

राजदूत वेल्स: मुझे मांग शब्द पसंद नहीं है। मेरी समझ से से हम जो चाहते हैं वो यह कि कैसे हम साझेदारी को आगे बढ़ाएं। हम जानते हैं कि हम मिलकर काम कर सकते हैं। हम जानते हैं कि हमारे बीच ऐतिहासिक साझेदारी है और हमने आतंकवाद के खिलाफ़ कार्रवाई समेत कई क्षेत्रों में बड़े परिणाम हासिल किए हैं। इसलिए दक्षिण एशिया रणनीति के तहत हम साथ मिलकर एक स्थिर अफ़ग़ानिस्तान में अपने सुरक्षा हितों को पूरा करने में पाकिस्तान की मदद करने के लिए एक रास्ता ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं, प्रोत्साहन देने के लिए और तालिबान के आकलन को बदलने के लिए कि कैसे वे अपनी शिकायतों को बेहतर ढंग से दूर कर सकते हैं।

हमारा मानना है कि वार्ता की मेज पर तालिबान के लिए भी जगह है। अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य में तालिबान के लिए जगह है। पर यह लड़ाई के मैदान में हासिल नहीं की जा सकती। यह राजनीतिक वार्ताओं के ज़रिए ही हासिल हो सकती है। और हम समझते हैं, तालिबान की उन उम्मीदों और कार्रवाइयों को नया रूप देने में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वर्तमान में, स्थगन का, और यह स्थगन है। यह बंद किया जाना नहीं है। हम उन सारे कारणों के चलते जिसका कि मैंने उल्लेख किया है, हम पाकिस्तान के साथ काम करना चाहते हैं कि पाकिस्तान इस लड़ाई में क्या करता है और क्या कर सकता है।

मीडिया: स्पष्ट करना चाहता हूं कि आप पाकिस्तान से चाहती हैं कि वह तालिबान को वार्ता की मेज पर लाने में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे, और वास्तव में इसकी उम्मीद नहीं कर रही हैं कि, कह सकते हैं, तालिबान, पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ़ कार्रवाई करें या हक़्क़ानी नेटवर्क या अफ़ग़ानिस्तान में हमला कर सकने वाले अन्य आतंकवादी समूहों पर लगाम लगाएं।

राजदूत वेल्स: जैसाकि मैंने कहा, हम नहीं समझते कि आतंकवादी समूहों के लिए कोई वैध भूमिका है। आतंकवाद राजनीतिक अभिव्यक्ति का वैध तरीका नहीं है। इसलिए अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी जैसी कोई बात नहीं है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान हमारे साथ काम करे जैसाकि हमने अतीत में किया था, अल-क़ायदा और टीटीपी के खिलाफ़, हमारे साथ काम करे तालिबान और हक़्क़ानी नेटवर्क और अन्य आतंकवादी समूहों को रोकने में जोकि पाकिस्तानी भूमि का इस्तेमाल करते हैं। और कई कारण हैं कि हम मानते हैं कि पड़ोस में एक स्थिर अफ़ग़ानिस्तान का होना, शरणार्थियों की वापसी संभव बनाने के लिए एक शांति प्रक्रिया को शुरू करने में मदद करना, पाकिस्तान के रणनीतिक हित में है।

तो हम 16 वर्षों की हिंसा के बाद वार्ता की मेज पर कैसे पहुंचेंगे? और इस बारे में हम समझते हैं कि इन संगठनों में से कुछ की उम्मीदों और कार्रवाइयों को नया रूप देने पाकिस्तान एक आधिकारिक भूमिका निभा सकता है।

मीडिया: आपकी कल की वार्ताओं के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु? क्या आप इस बारे में बात करना चाहेंगी? और दूसरी बात, क्या आप इस खबर पर कोई टिप्पणी करना चाहेंगी कि [अस्पष्ट] सरकार और तालिबान के बीच इस्तांबुल में कुछ बैठकें हुई हैं?

राजदूत वेल्स: कल की बैठकें बहुत पेशेवर थीं, और हमारे बीच विचारों का अच्छा आदान-प्रदान हुआ। मैंने सामने आई प्रेस रिपोर्टों को देखा है, द्विपक्षीय संबंधों के बारे में विस्तृत विषयों पर चर्चा हुई। मैं फिर कहूंगी, मेरे मन में अपने सहयोगियों के प्रति बहुत सम्मान है, और मुझे दक्षिण एशिया रणनीति और हम इससे क्या हासिल करना चाहते हैं, इसकी समीक्षा का अवसर पाना अच्छा लगा।

मुझे इस्तांबुल वार्ताओं की कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है, लेकिन मैं कहना चाहूंगी कि आमतौर पर, हम विभिन्न पक्षों के बीच बातचीत का समर्थन करते हैं। हम मानते हैं कि अंतत: नहीं, जीत लड़ाई के मैदान पर हासिल नहीं की जा सकती है, यह वार्ताओं की मेज पर ही हासिल होगी।

मीडिया: मेरा सवाल, आपको पता हो कि कुछ ट्वीट्स ने बहुत [अस्पष्ट] पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों के बीच। उसके बाद [अस्पष्ट] पाकिस्तान में, विदेश मंत्री और पाकिस्तान के प्रवक्ता समेत कुछ महत्वपूर्ण सरकारी अधिकारियों ने, वे दावा कर रहे हैं कि यदि अमेरिका समझता है कि पाकिस्तान दोहरी चाल चल रहा है, जैसाकि श्री मैकमस्टर और कई अन्य शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि पाकिस्तान दोहरी चाल चल रहा है, जबकि अमेरिकी खुफ़िया तंत्र पाकिस्तान के साथ सूचनाएं साझा नहीं कर रहा है कि हक़्क़ानी नेटवर्क [अस्पष्ट] पाकिस्तान में कहीं छुपा है। इस स्थान पर। और जबकि वे यह सूचना साझा नहीं कर रहे, तो फिर वे सार्वजनिक बयान क्यों जारी कर रहे हैं कि पाकिस्तान दोहरी चाल चल रहा है?

राजदूत वेल्स:  मैं समझती हूं कि —

मीडिया:  मैं कहना चाहता हूं कि आपलोग दोहरी चाल वाले आरोपों के बारे में कोई सबूत क्यों नहीं दे रहे।

राजदूत वेल्स: हमारी पाकिस्तान सरकार के साथ इस बारे में लंबे समय से बात चल रही है। यह नया मुद्दा नहीं है। हम पिछले 16 वर्षों से अफ़ग़ानिस्तान पर काम करते रहे हैं और अफ़ग़ानिस्तान की चर्चा करते रहे हैं, और इसके पहले, निश्चय ही, सोवियत विरोधी प्रयासों में उनका निकट सहयोग।

इसलिए वार्ताएं जारी हैं। मैं समझती हूं आपने जो देखा वह हताशा है कि हम ऐसी साझेदारी बनाने में कामयाब नहीं रहे जो लड़ाई के मैदान में मौजूद पक्षों के आकलन को असरदार ढंग से बदल दे, बातचीत के ज़रिए राजनीतिक समाधान के लिए उनकी प्रतिबद्धता हासिल कर सके।

मैं समझती हूं आप अफ़ग़ानिस्तान सरकार के बयानों में शांति और वार्ताओं के लिए प्रतिबद्धता पाएंगे। पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान आपने अफ़ग़ानिस्तान में महत्वपूर्ण सम्मेलन देखे। उच्चतर शांति परिषद का एक संवाददाता सम्मेलन जिसमें तालिबान से बातचीत की अफ़ग़ानिस्तान सरकार की इच्छा पर ज़ोर दिया गया। आपने दिसंबर के उत्तरार्द्ध में [अस्पष्ट] के सैंकड़ो सदस्यों की बैठक देखी, उन्होंने ने भी देश में शांति के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। आप फरवरी के उत्तरार्द्ध में देखेंगे कि राष्ट्रपति ग़नी इस प्रक्रिया के तहत शांति के लिए अफ़ग़ानिस्तान के दृष्टिकोण पर काबुल में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बैठक की मेजबानी करेंगे।

इसलिए मैं समझती हूं कि यह एक अवसर है जब अमेरिका की नई दक्षिण एशिया रणनीति के तहत अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य को लेकर हमने अपना संकल्प दोहराया है, अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया है कि कैसे वह तालिबान को रचनात्मक प्रक्रिया में जोड़े, अफ़ग़ानिस्तान में हमारी उपस्थिति और वहां शांति के लिए हमारी प्रतिबद्धता का लाभ उठाए और तालिबान के साथ काम करने के लिए उनसे बात करने का अफ़ग़ान सरकार का संकल्प है।

इसलिए हमें जिस बात पर ध्यान देना है, वह है कि कैसे आगे बढ़ें।

मीडिया:  आपकी नई दक्षिण एशिया नीति का एक तत्व है भारत के लिए आपकी [अस्पष्ट] जो इस्लामाबाद में बड़ी चिंता का कारण बनी है। और पाकिस्तानी मानते हैं कि आप भारत के साथ एक नई मित्रता शुरू कर रहे हैं जो पाकिस्तान के प्रति शत्रुतापूर्ण है, और यह काफी समस्याएं खड़ी कर रहा है।

राजदूत वेल्स: भारत और पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के साथ हमारे रिश्ते अपने दम पर हैं। निश्चय ही हम दूसरों के नुकसान के लिए किसी संबंध को नहीं बढ़ाते। और हमें विभिन्न क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी को पाकिस्तानी हितों के खिलाफ़ नहीं पाते हैं।

इसके विपरीत, हम भारत को इसकी विकास सहायता के लिए देखते हैं, उदाहरण के लिए अफ़ग़ानिस्तान में इसने सड़क और बांध और स्कूल बनाने और नौकरशाहों को प्रशिक्षण देने में मदद दी है, और यह बढ़िया है, और यह देश में स्थिरता लाने में सहायक है।

हम कभी भी अफ़ग़ानिस्तान का पाकिस्तान के खिलाफ़ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई में इस्तेमाल नहीं होने देंगे, और इसलिए आप हमें अफ़ग़ानिस्तान के भीतर टीटीपी को, जेयूए को निशाना बनाते देख रहे हैं। हम पाकिस्तान से लड़ रहे आतंकवादियों का मुकाबला करेंगे।

मीडिया: पाक-अमेरिका रिश्ता [अस्पष्ट] बहुत उतार-चढ़ाव भरा दिखता है। कभी अमेरिका इसके बारे में सकारात्मक नज़र आता है, जैसे कल हुई बैठकें। लेकिन 2018 की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सामान्यतया फाटा (FATA) के बारे में, राष्ट्रपति ट्रंप का ट्वीट सामने आया और इसपर पाकिस्तान में भारी प्रतिक्रिया हुई। खासकर [अस्पष्ट] राजनयिक और मीडिया चर्चाएं। उन मुद्दों पर अनेक कार्यक्रम हुए।

इसलिए मैं सोच रहा था कि आपने उल्लेख किया पाकिस्तान की सड़कों के निर्माण में अमेरिका की सक्रिय भागीदारी की, फाटा में बुनियादी सुविधाओं, सामाजिक और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास में। पर पाकिस्तान में बहुत लोग मानते हैं कि अमेरिका पाकिस्तान को मात्र अफ़ग़ानिस्तान में शांति की निगाह से देखता है। ये सारी वार्ता प्रक्रियाएं, सारी सहायता राशि। आपने 14 अरब डॉलर की सीएसएफ सहायता दिए जाने का उल्लेख किया।

ऐसा क्यों है कि हमारे संबंध [अस्पष्ट] छह, सात दशक पुराने हैं, पर अब भी 2018 में हम हमेशा बात करते हैं कि ये संबंध, इन संबंधों में कोई स्थायित्व नहीं है। क्या आप [अस्पष्ट] रणनीतिक वार्ता प्रक्रिया लंबित है? यह जारी है या यह – [समग्र] वार्ता प्रक्रिया, यह शुरू की गई थी। अब इस समय क्या यह लंबित है या सक्रिय है?

राजदूत वेल्स:  रणनीतिक वार्ता, समग्र वार्ता, ओबामा प्रशासन की कूटनीतिक संरचना थी। और अब एक नया प्रशासन है। और ट्रंप प्रशासन के तहत आपको जो दिखता है वह है बेहद गहन बातचीत। विदेश मंत्री टिलरसन की यात्रा, रक्षा मंत्री मैटिस की यात्रा, जनरल वोटेल की यात्रा। हम नियमित रूप से शीर्ष स्तर पर पाकिस्तान के साथ बातचीत कर रहे हैं। और इसलिए मैं समझती हूं वार्ता के चैनल बहुत खुले हैं।

मैं समझती हूं अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को बारीकी से समझने के लिए शायद हमें पीएचडी डिग्री की ज़रूरत होगी और इस सुबह हमारे पास उसके लिए समय नहीं है।

पर मेरे लिए निराशा की एक बात ये है कि एक गठजोड़ समर्थन कोष (सीएसएफ) है, लेकिन साथ ही पाकिस्तान के एक लोकतांत्रिक और संपन्न राष्ट्र के रूप में विकास के लिए एक अच्छा-खाशा और स्थायी एवं पक्का समर्थन है। निवेश, बीते वर्षों में 12 अरब डॉलर का निवेश हुआ। और मुझे अच्छा लगता काश मैं और अधिक पाकिस्तानियों को ये समझता देख पाती कि हम आपके देश में कितना गहरा निवेश किए हुए हैं।

यहां बता दूं कि ये कर्ज नहीं हैं। ये अनुदान हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हम पाकिस्तान के महत्व को जानते हैं और हम जनता और लोकतंत्र के रूप में पाकिस्तान को महत्वपूर्ण मानते हैं। और ये तथ्य कि एक राष्ट्रपति से एक लोकतांत्रिक परिवर्तन हुआ था, शांतिपूर्ण, यह एक शानदार उपलब्धि है। और अमेरिका हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है जब यह एक लोकतांत्रिक देश के रूप में विकसित हुआ।

इसलिए हैं, हम, हमारे संबंधों में यह चिंता का क्षण है कि हम आतंकवाद के इस दूसरे क्षेत्र के खिलाफ़ एक प्रभावी साझेदारी नहीं कर पाए हैं। और यह हमारी ओर से एक अहम संकेत और हताशा का प्रदर्शन था क्योंकि पाकिस्तान को जो कुछ भी हमने दिया, गठजोड़ समर्थन कोष समेत, पूरी तरह हमारे में हित में रहा है क्योंकि हम समान लड़ाई में एकसाथ हैं। और ये तथ्य कि हम अब ये संकेत दे रहे हैं, हमारी नाखुशी को दर्शाता है कि हमारी चिंता के एक बहुत गंभीर मुद्दे, पाकिस्तान की भूमि का उपयोग कर सकने वाले ये आतंकवादी बल, से निपटने के लिए हम एक नई राह बनाने में सक्षम नहीं रहे हैं।

इसलिए यह गंभीर बात है। मैं गंभीर बातचीत को कम करके आंकना नहीं चाहती, यह एक गंभीर चर्चा थी। पर हम वार्ता में अच्छे-खासे इतिहास के साथ आए। और अच्छा-खासा इतिहास जो दर्शाता है कि हम मिलकर काम कर सकते हैं। हम [अस्पष्ट] ढूंढ सकते हैं। तो हम इसे कैसे करें?

मीडिया:  यदि आपको प्राथमिकता तय करनी होती, आपको क्या लगता है अमेरिकी प्रशासन सबसे पहले क्या देखना चाहेगा? अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में कमी, या वार्ता की मेज पर तालिबान?

राजदूत वेल्स:  मैं समझती हूं ये परस्पर जुड़े हुए हैं। जब आप तालिबान को वार्ता की मेज पर लाने की बात करते हैं तो मैं समझती हूं यह संबद्ध पक्षों द्वारा हिंसा कम करने और एक-दूसरे से बात करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मेल-मिलाप और बातचीत की प्रक्रिया के बारे में मैं कहना चाहूंगी कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बातचीत के लिए कभी कोई पूर्वशर्त नहीं रखी है। इसकी जगह हमने कहा कि प्रक्रिया के अंत में आतंकवाद का त्याग होना चाहिए। इस प्रक्रिया के अंत में संविधान के लिए समर्थन होना चाहिए। प्रक्रिया के अंत में हिंसा बंद होनी चाहिए।

इसलिए बातचीत को लेकर या किन परिस्थितियों में वार्ता हो इसपर हमारा बेहद लचीला रुख है। हमारा अफ़ग़ानिस्तान सरकार के प्रयासों को पूरा समर्थन है। हमारा मानना है कि कोई भी शांति प्रक्रिया अफ़ग़ानिस्तान सरकार की सरपरस्ती और नेतृत्व में हो, और हम इन प्रयासों में साझेदारी के लिए उनके साथ हैं।

मीडिया:  मैं हाल में कई बार अफ़ग़ानिस्तान गया हूं, खासकर 15 दिन पहले। हम काबुल में सरकार के कई शीर्ष अधिकारियों से मिले, और उन्होंने तालिबान के उन सारे गुटों के बारे में पुष्टि की जो शांति प्रक्रिया का समर्थन करते हैं, या जो बातचीत में भाग लेने के इच्छुक हैं। उनका लड़ाकू बल दाएश को चला रहा है। और दूसरी तरफ मैं श्री [करज़ई] समेत कई सांसदों से भी मिला, कैसे खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि अमेरिकी बल अफ़ग़ानिस्तान में दाएश की मदद कर रहे हैं। और निश्चय ही राष्ट्रपति ग़नी से, वह इस दावे का खंडन करते हैं।

पर अफ़ग़ानिस्तान में इस बात का अहसास है कि पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा की बाड़ाबंदी ज़रूरी है ताकि पाकिस्तान अमेरिका और अन्य को, जोकि आरोप लगाते हैं, कह सके कि अब हमारी पक्की सीमा है और हम किसी को सीमा पार करने की अनुमति नहीं देंगे।

तो पाकिस्तान के साथ सीमा पर बाड़ाबंदी के बारे में आपका क्या रुख है [अस्पष्ट]?

राजदूत वेल्स: पहले आइसिस पर, मैं आइसिस को अमेरिका के समर्थन के आरोप को सिरे से खारिज़ करती हूं। यह बेतुका है। इसपर मुझे क्रोध आता है क्योंकि पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान से लड़ाई के मुकाबले अधिक संख्या में अमेरिकी सैनिक आइसिस से लड़ते हुए मारे गए थे। और यदि आप हमारे प्रयासों को देखें तो हमने आइसिस के खिलाफ़ 1400 से ज्यादा अभियान संचालित किए, नंगरहार में आइसिस को नौ जिलों से कम कर तीन से पांच में सीमित करने में हम सक्षम रहे। आपको पता है, कि लड़ाई जारी है और आइसिस एक गंभीर खतरा है। मैं समझती हूं हम मुकाबला करने की ज़रूरत पर पाकिस्तान के साथ पूरा एकजुट हैं। पर अमेरिका आइसिस को समूल उखाड़ने और नष्ट करने के लिए कृतसंकल्प है, और हम इराक़ और सीरिया में पराजित आइसिस के तत्वों को, बचेखुचे लोगों को [अस्पष्ट] किसी और देश में पनपने नहीं दे सकते हैं। इसलिए यह वास्तव में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दायित्व है आइसिस का हर जगह मुकाबला करना, अफ़ग़ानिस्तान समेत, जो हम कर रहे हैं।

जहां तक बाड़ाबंदी की बात है, मैं समझती हूं हम सीमा प्रबंधन के प्रयासों का मज़बूती से समर्थन करते हैं और मानते हैं कि इस पर अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान सरकारों के बीच विचार-विमर्श होना चाहिए। और हमारी बड़ी सफलताएं, रिज़ॉल्यूट समर्थन बलों के समर्थन से या अमेरिका के समर्थन से, या जब आपने हैमर एंड एन्विल अभियानों का समन्वय किया, जोकि हमने देखा, उदाहरण के लिए, मैं समझती हूं जनवरी 2017 में, खैबर-3 अभियान। हो सकता है मैंने नाम गलत लिया हो।

पर सीमा के दोनों ओर के पक्षों में समन्वय था। और तब आप असरदार ढंग से दबाव बना सकते हैं।

असंगठित प्रयास मैं समझती हूं गलतफहमी और कभी-कभी अविश्वास पैदा करते हैं। इसलिए हम अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सरकारों से दृढ़ता से आग्रह करेंगे कि वे सीमा के प्रबंधन के लिए मिलकर काम करें। क्योंकि ज़ाहिर है, मैं समझती हूं बीते वर्षों में हम सबने सीमा की खुली प्रकृति और उसके दुरुपयोग को देखा है।

मीडिया: एक बात जो पाकिस्तानी नेतृत्व ने कहा है, सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने कहा है, कि उनका तालिबान पर अब पहले जैसा असर नहीं है। मैं जानता हूं कि आपकी सरकार उम्मीद करती है वे उन्हें वार्ता की मेज पर लेकर आएं। आप उनसे ये करने की उम्मीद कैसे करती हैं जब उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा है कि उनका [अस्पष्ट] नहीं है?

राजदूत वेल्स: पाकिस्तान से कोई नहीं कह रहा कि वह तालिबान को वार्ता की मेज पर लेकर आए। मैं समझती हूं कि हम पाकिस्तान के साथ साझेदारी चाहते हैं तालिबान के आकलन को बदलने में। और तालिबान ने अब तक ठुकराया है, सिरे से खारिज़ किया है, अफ़ग़ानिस्तान सरकार से बातचीत के प्रस्ताव को। और अफ़ग़ानिस्तान सरकार वैध संस्था है, हमारे द्वारा, आपकी सरकार द्वारा, संयुक्तराष्ट्र द्वारा, इस क्षेत्र में सबके द्वारा स्वीकृत वैधानिक संस्था। इसलिए आज तक तालिबान यह स्वीकार करने का बिल्कुल पहला कदम उठाने को तैयार नहीं है कि यह उनका समकक्ष है जिनके साथ उन्हें वार्ता करनी पड़ेगी।

इसलिए हम समझते हैं कि पाकिस्तान के लिए करने को बहुत कुछ है –

मीडिया:  आप आश्चर्यचकित हैं?

राजदूत वेल्स:  मैं समझती हूं इन मुद्दों पर लंबे समय से हमारे और पाकिस्तान सरकार के बीच चर्चा चल रही है, लेकिन आप मानेंगे कि –

मीडिया:  क्या आप कुछ विश्लेषकों के इस आकलन को मानती हैं कि अपने भावी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अमेरिका [अस्पष्ट] में बहुत लंबे समय तक रहना चाहता है। और अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध खत्म नहीं होने देना चाहता है।

राजदूत वेल्स:  मुझे साज़िश के सिद्धांत पर हमेशा आश्चर्य होता है, क्योंकि आपको दो बिल्कुल अलग अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इससे अलग बात कही है। राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि हम बाहर निकल रहे हैं। और उन्होंने आपको यह भी बताया कि हम कब जा रहे हैं। और उन्होंने इतनी तेज़ी से सैनिक बाहर निकाले कि आधुनिक इतिहास में उसकी कोई मिसाल नहीं। और हमने क्या घटित हुए देखा? क्या तालिबान ने कहा था कि चलो हमारी सत्ता में वापसी पर बात करें? नहीं। तालिबान ने अपनी लड़ाई तेज कर दी क्योंकि उनकी तब भी यही मान्यता थी कि वे बीचोंबीच से शासन कर सकते हैं और अफ़ग़ानिस्तान पर शासन कर सकते हैं।

इसके बाद आपने राष्ट्रपति ट्रंप को आते और आपसे राष्ट्र के नाम टेलीविजन पर संबोधन में यह कहते सुना कि वह अफ़ग़ानिस्तान से निकलना चाहते हैं। उन्होंने चुनाव अभियान में इसे मुद्दा बनाया था। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ा। उन्होंने छह महीने तक नीतिगत विचार-विमर्श किया। और अंतत:, राष्ट्रपति ओबामा की तरह, निष्कर्ष निकाला कि हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप हमें ऐसे अफ़ग़ानिस्तान को छोड़ने की ज़रूरत है जहां स्थिरता हो और जहां शांति हो।

इसलिए मैं समझती हूं इस क्षेत्र के लिए दक्षिण एशिया रणनीति की खूबसूरती इस बात में है कि हम अफ़ग़ानिस्तान की दीर्घकालीन स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम तालिबान को जीतने नहीं देने के लिए कृतसंकल्प हैं। और यही वो आकलन है जिसे हमें लगता है तालिबान के इस संघर्ष के प्रति दृष्टिकोण को बदलना चाहिए। पर यदि वे इस युद्ध को नहीं जीत सकते हैं, हम उन्हें जीतने से रोक सकते हैं और हम उन्हें बढ़त बनाने से रोक सकते हैं। आपको पता है, कैसे वे अपना खुद के वैध हितों को हासिल करते हैं? यहां प्रत्येक पक्ष के वैध हित हैं, पर उनपर फैसला वार्ता की मेज पर होना है, और इस रणनीति के तहत ये हमारी प्रतिबद्धता है।

मीडिया:  आपने [अस्पष्ट] अफ़ग़ानिस्तान में [17] वर्षों की सैन्य कार्रवाई की बात की। आपने खुद अपना आकलन किया है? क्या अमेरिकी बल आज अफ़ग़ानिस्तान में टिकेंगे? क्या आप अफ़गानिस्तान में युद्ध जीत रही हैं? आपको पता है, कुछ ज़िम्मेदारियां हैं, [अस्पष्ट]। क्योंकि ऐसी रिपोर्टें हैं कि अब भी अफ़ग़ानिस्तान का 43 फीसदी इलाका ग़नी प्रशासन के नियंत्रण में नहीं है, और वे काबुल तक सीमित हैं। इसलिए कुछ सुदृढ़ीकरण, समझ [अस्पष्ट]। हमने उत्तरी बलूचिस्तान में काफी बढ़त बनाई है [अस्पष्ट] अभियान सफलतापूर्वक पूरा हुआ। दूसरी ओर का क्या हाल है?

राजदूत वेल्स:  मैं समझती हूं इस प्रशासन ने ये निष्कर्ष निकाला कि एक समय-सीमा के विरुद्ध सैनिकों को निकालने की पहल नाकाम रही थी और यह अस्थिरकारी थी और इसने तालिबान को अपना प्रभाव फैलाने का मौका दिया था।

मैं उन आंकड़ो को लेकर सतर्कता बरतूंगी। भले ही तालिबान 40 फीसदी के आसपास इलाकों पर नियंत्रण रखता हो, आबादी के हिसाब से यह 10 या 11 प्रतिशत बैठता है। और किसी भी तरह से तालिबान अफ़ग़ानिस्तान की जनता के बहुमत का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

मुझे लगता है यदि आप एशिया फाउंडेशन के वार्षिक सर्वेक्षण को देखें मात्र पांच फीसदी लोगों ने तालिबान या तालिबान के लक्ष्यों के प्रति किसी तरह की सहानुभूति प्रदर्शित की। मेरा मतलब तालिबान जिन बातों का प्रतिनिधित्व करता है उनके खिलाफ अफ़ग़ानिस्तान में एक तरह से राष्ट्रीय सर्वसम्मति है।

इसके बाद भी, वे अफ़ग़ानिस्तान के सामाजिक और राजनीतिक तानेबाने का हिस्सा हैं, और हमारा मानना है कि वार्ता की मेज पर उनकी एक भूमिका है, नरमपंथी तालिबान की, जो राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार हैं।

आज यह एक बहुत अलग तरह का युद्ध है। आपको पता है कि अफ़ग़ान राष्ट्रीय बल अपने देश के लिए लड़ और मर रहे हैं। अमेरिकी बल वहां प्रशिक्षण, सलाह और सहायता के लिए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीति के तहत हम अपने कुछ अधिकारों को बढ़ाने के लिए तैयार हैं, तालिबान को लक्ष्य करने में ज्यादा सक्रिय और आक्रामक होने की उनकी क्षमता को बढ़ाने के लिए। पर अंतत: खुद अफ़ग़ान ही अपने देश के लिए लड़ रहे हैं और हम उनकी लड़ाई को समर्थन दे रहे हैं।

मीडिया:  फिर से पाकिस्तान की बात करते हैं, और आपने हमें लोकतांत्रिक प्रक्रिया जारी रखने के लिए बधाई दी। जबकि, हम आज ऐसी स्थिति में हैं जहां सत्तारूढ़ पार्टी कहती है, और एक धारणा बनाई है इसने कि सेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खत्म करना चाहती है।

पाकिस्तान में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जारी रहने को लेकर अमेरिका कितना चिंतित है?

राजदूत वेल्स:  मैं समझती हूं हम पाकिस्तान में होनेवाले चुनावों का इंतजार कर रहे हैं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया जारी है और हम आग्रह करते हैं कि जो भी विवाद सामने आते हैं उन्हें लोकतांत्रिक तरीकों से सुलझाया जाए।

इसलिए हम न्यायिक प्रक्रिया का और इसे पूरा होने देने का समर्थन करते हैं। इसलिए मुझे लगता है हम संस्थाओं को कार्य करते देख रहे हैं और हम लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज का समर्थन करते हैं।

मीडिया:  क्या आप उन महत्वपूर्ण पाकिस्तानी अधिकारियों का नाम बता सकती हैं जिनसे अपनी यात्रा के दौरान आप मिली हैं? मैं सिर्फ नाम जानना चाहता हूं।

राजदूत वेल्स:  कल विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय और अन्य के साथ मेरा अनेक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

आपका बहुत धन्यवाद। मैं सराहना करती हूं।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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