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प्रेस वार्ता के दौरान टिप्पणियां

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टिप्पणियां
माइक पोम्पियो
विदेश मंत्री
स्पेलमैन रूम, लोटे पैलेस होटल
न्यूयॉर्क सिटी
मई 31, 2018

 
 

विदेश मंत्री पोम्पियो: नमस्कार, सभी को। जैसा कि आप जानते हैं, वाइस चेयरमैन किम योंग-चोल से मेरी मुलाक़ात के अलावा, सिंगापुर और असैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) में हमारी टीमें हैं जो उत्तर कोरियाई समकक्षों के साथ राष्ट्रपति ट्रंप और चेयरमैन किम के सिंगापुर में अपेक्षित शिखर सम्मेलन की तैयारी में जुटी हैं। बैठकों की इन श्रृंखलाओं के ज़रिए, मुझे विश्वास है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

आज, वाइस चेयरमैन किम और मैंने चर्चा की कि कैसे हमारे देश साथ आ सकते हैं और हमारे दोनों नेताओं ने भविष्य को लेकर अपने दृष्टिकोणों, जिसे वे बेहद स्पष्टता से ज़ाहिर कर चुके हैं, से जो अद्वितीय अवसर निर्मित किया है उसका लाभ उठा सकते हैं। वाइस चेयरमैन किम योंग-चोल अब चेयरमैन किम जोंग-उन का निजी पत्र सौंपने के लिए वाशिंग्टन यात्रा की योजना बना रहे हैं।

प्रस्तावित शिखर सम्मेलन राष्ट्रपति ट्रंप और चेयरमैन किम के लिए अमेरिका और उत्तर कोरिया को शांति, समृद्धि और सुरक्षा के एक नए युग में ले जाने के लिए एक ऐतिहासिक अवसर प्रदान करता है। हमारे दोनों देशों के रिश्ते में यह एक एक महत्वपूर्ण क्षण है और इस मौके को गंवाना एक त्रासदी से कम नहीं होगा।

प्योंगयांग में चेयमैन किम जोंग-उन से और आज वाइस चेयरमैन किम योंग-चोल से अपनी बातचीत में, मैंने बिल्कुल स्पष्टता से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका के लक्ष्य बेहद एकरूप और ज़ाहिर हैं: कोरियाई प्रायद्वीप का पूर्ण, सत्यापनीय, और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किम जोंग-उन परमाणु निरस्त्रीकरण करते हैं, तो उत्तर कोरिया के सामने एक उज्ज्वल मार्ग होगा। हम एक मज़बूत, जुड़े, सुरक्षित और समृद्ध उत्तर कोरिया की कल्पना करते हैं जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को कायम रखता है पर राष्ट्रों के समुदाय से एकीकृत है।

हमें लगता है कि एक साथ काम करते हुए, अमेरिका और उत्तर कोरिया के लोग मित्रता और सहभागिता से परिभाषित भविष्य निर्मित कर सकते हैं, न कि अविश्वास और भय और धमकियों से। हम सचमुच आशा करते हैं कि चेयरमैन किम जोंग-उन भविष्य के इस सकारात्मक दृष्टिकोण को साझा करते हैं। हमें दोनों नेताओं के सिंगापुर शिखर सम्मेलन में, यदि यह हुआ तो, अपनी आंखें पूरी तरह खोले और भविष्य की संभावनाओं की स्पष्ट समझ के साथ भाग लेने की अपेक्षा है। यदि ये वार्ताएं सफल रहीं तो ये सचमुच ऐतिहासिक होंगी। हम दुनिया की दिशा बदलने वाले ज़िंदगी में एक बार आने वाले इस मौक़े को हासिल कर सकें, इसके लिए चेयरमैन किम जोंग-उन के साहसिक नेतृत्व की दरकार होगी।

राष्ट्रपति ट्रंप और मेरा मानना है कि चेयरमैन किम ऐसे नेता हैं जो इस तरह के फैसले ले सकते हैं, और आने वाले सप्ताहों और महीनों में हमारे पास यह देखने का अवसर होगा कि वास्तव में ऐसा है या नहीं।

आपके कुछ सवालों के जवाब देकर हमें खुशी होगी।

सुश्री नौअर्ट: हमारा पहला सवाल – और कृपया हरेक एक ही सवाल पूछें – ब्लूमबर्ग के निक वाडम्स की ओर से। निक, पूछिए।

प्रश्न: धन्यवाद। विदेश मंत्री महोदय, गत रात विदेश विभाग ने हमें बताया कि शिखर सम्मेलन हो उससे पहले अमेरिका को उत्तर कोरिया से एक ऐतिहासिक प्रतिबद्धता की अपेक्षा है। आज आपने किम योंग-चोल से बातचीत जल्दी ही समाप्त कर दी। क्या आप बताएंगे कि आपने ऐसा क्यों किया? क्या आपको जिस प्रतिबद्धता की उम्मीद थी वो मिली और क्या अमेरिका और उत्तर कोरिया अब इस बात पर सहमत हैं कि परमाणु निरस्त्रीकरण का अर्थ क्या होगा?

विदेश मंत्री पोम्पियो: तो यह एक (अस्पष्ट) मामला है। हमने बातचीत जल्दी समाप्त नहीं की। हमारे पास कुछ निश्चित मामले थे हम जिसे कवर करना सुनिश्चित करना चाहते थे, ऐसे विषय जिनके बारे में हमने सुनिश्चित किया कि हम अपनी अपेक्षाओं को स्पष्ट करें और बदले में हमसे उनकी अपेक्षाओं को। हम ऐसा कर पाए। यह एक कठिन, कठिन चुनौती है। इस बारे में गलतफहमी में नहीं रहें। अभी बहुत काम किए जाने हैं। और हमने यहां प्रगति की और साथ ही अन्य स्थानों पर भी प्रगति की जहां वार्ताएं चल रही हैं। हमें पूरा समय मिला जितना आज न्यूयॉर्क सिटी में हमारी मौजूदगी के दौरान हासिल की जा सकने वाली प्रगति के लिए हमें चाहिए था।

सुश्री नौअर्ट: हमारा अगला सवाल द वॉल स्ट्रीट जर्नल के माइकल गॉर्डन की तरफ से।

प्रश्न: महोदय, इसी से जुड़ी बात, विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी – वही व्यक्ति जिसने कल रात हमसे बात की – संकेत दिया है कि अमेरिका उत्तर कोरिया को यह समझाने की उम्मीद करता है कि उसकी सुरक्षा परमाणु हथियारों पर निर्भर नहीं करती है। अब तक आपकी उनके साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं और आपने उनके साथ कई घंटे गुजारे हैं। आपको लगता है कि आप वैसा कर पाने में सफल रहे हैं, या इस विषय को निपटाने में कठिनाई ही वह कारण है कि राष्ट्रपति ट्रंप अब दो या तीन शिखर सम्मेलनों की संभावनाओं की बात कर रहे हैं, एक ही बैठक में इन विषयों को सुलझाने के प्रयास भर की नहीं?

विदेश मंत्री पोम्पियो: हां, ये – देखिए, इस बारे में कोई गलतफहमी नहीं रखिए। राष्ट्रपति ट्रंप, यह प्रशासन अच्छी तरह समझता है कि यह समस्या कितनी कठिन है। लंबा इतिहास है इस बात का कि उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को अपने शासन तंत्र को ज़रूरी सुरक्षा मुहैय्या कराने वाले कार्यक्रम के रूप में देखा है। अब प्रयास ऐसे कुछ विचारों पर सहमति बनाने का है जिससे उत्तर कोरिया को राष्ट्रपति ट्रंप की कही बात पर भरोसा हो जाए। यदि हम ये हासिल करने में सक्षम रहे, यदि उत्तर कोरियाई वास्तव में परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए तैयार हो जाते हैं – इसमें उनके परमाणु कार्यक्रम के सारे तत्व शामिल हैं – यदि हम उन्हें इसका भरोसा दिला पाए, कि वास्तव में उनकी सुरक्षा बढ़ती है, कि वास्तव में उनकी सुरक्षा को असली खतरा परमाणु हथियारों के कार्यक्रम को पकड़े रहने से है, न कि इसके विपरीत। हमने इसको लेकर काफी बातचीत की है। असल परीक्षा, वास्तव में, तब आएगी जब हम वास्तव में इसे हासिल करेंगे, पर कई वार्ताएं हो रही हैं कि हम कैसे आगे बढ़ेंगे, आगे का रास्ता क्या होगा ताकि हम दोनों ही चीज़ें हासिल कर सकें, परमाणु निरस्त्रीकरण जिसकी कि दुनिया उत्तर कोरिया से मांग करती है और सुरक्षा का आश्वासन जो कि उन्हें चाहिए होगा ताकि वे हमें यह हासिल करने दे सकें।

सुश्री नौअर्ट: अगला सवाल एबीसी न्यूज़ की मार्था रैडत्ज़ का।

प्रश्न: विदेश मंत्री पोम्पियो, आप इसे प्रस्तावित शिखर सम्मेलन कहते हैं। क्या कल हम जान पाएंगे कि यह होगा? और ये भी, कि आपने वाइस चेयरमैन की आंखों में झांका। आप उनके साथ कमरे में रहे। प्रगति किस आधार पर हुई? यह इतनी उतार-चढ़ाव वाली यात्रा रही है। शिखर सम्मेलन रद्द था; हम क्रोध और आवेश की अवस्था से इस ओर आए हैं। इसलिए बताएं कि इस बदलाव का कारण क्या रहा, और क्या आपको चिंता है कि आप फिर से पुरानी स्थिति में जा सकते हैं?

विदेश मंत्री पोम्पियो: मार्था, मुझे चेयरमैन किम जोंग-उन से दो बार और अब किम योंग-चोल से तीन बार मिलने का मौका मिल चुका है। मैंने दोनों के ही साथ खासा समय बिताया है। मुझे लगता है वे ऐसे भावी रास्ते पर सोच-विचार कर रहे हैं जहां वे एक सामरिक दिशा परिवर्तन कर सकें, ऐसा परिवर्तन जिसके लिए उनका देश इससे पहले तैयार नहीं था। यह ज़ाहिर है उनका फैसला होगा। उनको ऐसा करना होगा। उन्हें चयन करना होगा – जैसा कि मैंने अभी बताया, उन्हें एक मार्ग चुनना होगा जो उससे बुनियादी रूप से अलग होगा जिस पर कि उनका देश दशकों तक चला है। इस पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि रास्ते में ऐसे पल आएंगे जब लगेगा कि यह आसान नहीं होगा, कि ऐसी बातें सामने आएंगी जो कठिन लगेंगी और ऐसे समय आएंगे जब राह में अवरोध दिखेगा और कई बार, शायद, यह अलंघ्य भी लगेगा।

हमारा मिशन अविश्वसनीय रूप से स्पष्ट है। यह है आगे बढ़ते रहने का – राष्ट्रपति ने मुझे इस मान्यता को परखने के लिए आगे बढ़ते रहने का निर्देश दिया है कि हम परिणाम हासिल कर सकते हैं। इसलिए मुझे पता है कि हर कोई इस पर मिनट-दर-मिनट और हर घंटे नज़र रख रहा है। यह ऐसी प्रक्रिया होने वाली है जिसमें आगे बढ़ने के लिए हमें अनेकों दिन और सप्ताह लगेंगे। कठिन क्षण आएंगे, मुश्किल समय आएंगे। मेरी उनसे कई मुश्किल वार्ताएं हो चुकी हैं। वे मुझे भी ना कह चुके हैं। ऐसा है – हमें दशकों से इस चुनौती का सामना है, और इसलिए किसी को उन क्षणों में चकित, या भयभीत होने या घबराने की ज़रूरत नहीं है जब ऐसा लगे कि चुनौतियां और कठिनाइयां हैं, ऐसे मतभेद हैं जिन्हें दूर नहीं किया जा सकता। हमारा मिशन उन्हें दूर करने का है ताकि हम इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल कर सकें।

प्रश्न: और प्रस्तावित शिखर सम्मेलन के बारे में, क्या हम कल जान पाएंगे कि वास्तव में शिखर सम्मेलन होगा?

विदेश मंत्री पोम्पियो: मालूम नहीं। इसका जवाब मालूम नहीं।

सुश्री नौअर्ट: और हमारा अंतिम सवाल फॉक्स न्यूज़ के एडम शैपिरो की तरफ से।

विदेश मंत्री पोम्पियो: बस इतना कहना चाहूंगा, मार्था, कि हम शायद कल नहीं जान पाएं, मैं आपको बताना चाहूंगा कि परिस्थितियां बनाने को लेकर हमने पिछले 72 घंटे में वास्तविक प्रगति की है, ठीक – इसलिए आपका सवाल असल में इन परिस्थितियों से जुड़ता है। ये परिस्थितियां राष्ट्रपति ट्रंप और चेयरमैन किम जोंग-उन को एक स्थान पर लाती हैं जहां हमें लगता है दोनों के मिलने से वास्तविक प्रगति हो सकती है। वैसी स्थिति का कोई मतलब नहीं जब हमें नहीं लगता हो कि उन्हें एक साथ लाने का कोई वास्तविक अवसर है। हमने इसे लेकर पिछले 72 घंटों में वास्तविक प्रगति की है।

सुश्री नौअर्ट: और एडम फॉक्स से।

प्रश्न: विदेश मंत्री पोम्पियो, आप प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की बात करते हैं, तो मेरा सवाल इसी बारे में और हमारे मित्र राष्ट्रों पर असर के बारे में है। अमेरिका की चिंताएं क्या हैं दक्षिण कोरिया और हमारे एशियाई मित्र राष्ट्रों, जैसे जापान, को और बड़े, शायद, चीनी प्रभाव में डालने को लेकर, यदि समझौते के तहत भविष्य में दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में कमी होती है?

विदेश मंत्री पोम्पियो: मैं इस बारे में आज नहीं बोलने जा रहा, न ही वार्ताओं के दौरान कभी भी उन चीजों के बारे में कि समझौते का रूप क्या होगा। ये सब – ये वैसी चीज़ें हैं जिन्हें रोक कर रखना चाहिए ताकि नेताओं को सही फैसले लेने के लिए आवश्यक पूरी स्वतंत्रता हो। इसलिए सैन्य कमी के बारे में, ज़ाहिर है यह रक्षा विभाग का विषय है। मैं इस बारे में आज नहीं बोलने जा रहा।

जो मैं कह सकता हूं वह ये: मैं समझता हूं, मैं कोई 30 दिनों से विदेश मंत्री हूं। उत्तर कोरिया से संबंधित इस समस्या के समाधान के हमारे तरीके को लेकर दक्षिण कोरियाइयों, जापानियों और अमेरिका के बीच कोई मतभेद नहीं है। मैंने वहां अपने समकक्षों से बात की है, मैंने वहां राष्ट्रपति मून से बात की है। हम उनकी चिंताओं को समझते हैं। हम उनके समक्ष आ सकने वाले खतरों को समझते हैं। और हम जिस समझौते तक पहुंचेंगे उससे जो परिणाम निकलेगा उसमें इनमें से प्रत्येक देश भी शामिल हो सकते हैं।

प्रश्न: पर एक शून्य निर्मित होने की संभावना है, एक बेहतर समझौते के अभाव में, जिसे भरने के लिए चीन आगे आ सकता है, यह आर्थिक हो, राजनीतिक, या सैन्य?

विदेश मंत्री पोम्पियो: आज चीनी पूरी दुनिया में घूम रहे हैं। इसे समझना होगा। इसका हर जगह वास्तविक खतरा है, सिर्फ इसी खास क्षेत्र में नहीं। हम इसे लेकर जागरूक हैं, और मैं – मुझे विश्वास है कि उत्तर कोरिया को लेकर हम जिन बातों पर चर्चा कर रहे हैं वह इस खतरे को किसी महत्वपूर्ण स्तर तक नहीं बढ़ाएगा। हम क्षेत्र में अपने सबसे अहम मित्र राष्ट्रों दक्षिण कोरियाइयों या जापानियों के साथ ऐसा नहीं करेंगे।

सुश्री नौअर्ट: ओके, सभी का धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो: आपका बहुत शुक्रिया।

सुश्री नौअर्ट: आप सबका बहुत शुक्रिया। आप सभी से मिलकर अच्छा लगा।

प्रश्न: क्या हम सिंगापुर जा रहे हैं?


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/secretary/remarks/2018/05/282892.htm
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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