rss

गलत मुकदमेबाज़ी और भविष्य में उत्पीड़न से पीड़ितों की रक्षा करना

English English, العربية العربية, Français Français, Português Português, Русский Русский, Español Español, اردو اردو, 中文 (中国) 中文 (中国)

वर्षों से मानव तस्करी संबंधी रिपोर्ट ने पूरी कानून प्रवर्तन प्रक्रिया में मानव तस्करी के पीड़ितों की रक्षा के महत्व को विस्तारपूर्वक दर्शाया है। पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण का एक केंद्रीय सिद्धांत यह है कि तस्करी के पीड़ितों को ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए अपराधी के रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, जो कि उनके शिकार के प्रत्यक्ष परिणाम हैं।

मानव तस्करी के केन्द्र में किसी व्यक्ति का शोषण करने के लिए बल का प्रयोग, धोखाधड़ी या जबरदस्ती करना होता है। मानव तस्कर उन पीड़ितों पर ऐसी नियंत्रण शक्ति का प्रयोग करते है कि तस्करों के लाभ के लिए पीड़ित ऐसी गतिविधियों को पूरा कर सकें। मानव तस्कर प्रायः पीड़ितों को वेश्यावृत्ति, पॉकेटमारी, या नशीली दवाओं की तस्करी और इनकी खेती करने जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करते हैं।

कानून प्रवर्तन प्राधिकरण प्रायः आपराधिक संदिग्धों को नज़रबंद करने या गिरफ्तार करते समय मानव तस्करी के पीड़ितों की उचित जांच और पहचान करने में विफल रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप, जब पीड़ित को उस अपराध में शामिल होने के लिए दंडित किया जाता है जिसे करने के लिए मानव तस्करों ने पीड़ितों को विवश किया था, तो इससे वह पीड़ित फिर से शिकार बन सकता है।

अन्याय का आलम यह होता है कि यह आपराधिक रिकॉर्ड पीड़ितों पर उनके पूरे जीवन काल पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है – उदाहरणस्वरूप, यौन तस्करी में बचा व्यक्ति जो वेश्यावृत्ति के लिए पूर्व गिरफ्तारी के कारण अपार्टमेंट किराए पर नहीं ले सकता; या वह पीड़ित व्यक्ति, जिसे किसी आपराधिक गिरोह द्वारा नशीली दवाओं की चोरी या बेचने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उसका आपराधिक रिकॉर्ड बन जाता है और वह कोई काम नहीं तलाश पाता है। यहाँ तक कि यदि तस्करी से पीड़ित को कभी भी आरोपों का सामना नहीं करना पड़ा हो, या यदि आरोपों को हटा लिया जाता है, फिर भी गिरफ्तारी का रिकॉर्ड और कलंक पीड़ित पर उसके निवास, उसके रोजगार के अवसर, और दूसरे उसके साथ कैसा व्यवहार करते है, पर प्रभाव डालते रहते है।

जबकि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध (पालेर्मो प्रोटोकॉल) के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को पूरित करते हुए व्यक्तियों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की तस्करी को रोकने, दमन करने और दंडित करने संबंधी संयुक्त राष्ट्र प्रोटोकॉल (पलेरमो प्रोटोकॉल), विशेष रूप से तस्करी से पीड़ितों के गैर-आपराधीकरण का उल्लेख नहीं करता है, वहीं अनुच्छेद 2(b) में यह कहा गया है कि प्रोटोकॉल के उद्देश्यों में से एक “इस तरह की तस्करी के पीड़ितों को उनके मानवाधिकारों के प्रति पूर्ण सम्मान सहित रक्षा और सहायता करना” है। इसके अलावा, मानव तस्करी संबंधी कार्य समूह, जो अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के पक्षकारों के सम्मेलन को सलाह देता है, ने वर्ष 2009 में निम्नलिखित की सिफारिश की थी:

“मानव तस्करी किए गए व्यक्तियों को गैर-सजा और उनकी गैर-मुकदमेबाज़ी सुनिश्चित करने के संबंध में, राज्यों के पक्षकारों को यह करना चाहिए: (क) व्यक्ति के स्तर पर तस्करी के पीड़ितों की पहचान करने और ऐसे पीड़ितों की सहायता करने के लिए उचित प्रक्रियाएं स्थापित करना; (ख) अपने घरेलू कानून के अनुसार, तस्करी किए गए व्यक्ति के रूप में उनकी स्थिति के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप उनके द्वारा किए गए गैरकानूनी कार्यों के लिए तस्करी किए गए व्यक्तियों को दंडित नहीं करना या मुकदमा नहीं चलाना क्योंकि उन्हें ऐसे गैरकानूनी कार्य करने के लिए मजबूर किया गया था।”

अमेरिका के तस्करी पीड़ित संरक्षण अधिनियम में काँग्रेस ने स्थापित किया कि

“तस्करी के गंभीर रूपों से पीड़ितों को अवैध रूप से तस्करी के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप किए गए गैरकानूनी कार्यों, जैसे झूठे दस्तावेजों का उपयोग करना, दस्तावेज़ों के बिना देश में प्रवेश करना, या दस्तावेज़ों के बिना काम करने, के लिए अनुचित रूप से कैद नहीं करना चाहिए, जुर्माना नहीं लगाना चाहिए, या अन्यथा दंडित नहीं किया जाना चाहिए।”

यूरोपीय परिषद् और EU ने ऐसी लिखतें अपनाई हैं जो इस गैर-सजा सिद्धांत को मान्यता देती हैं। मानव तस्करी रोकने और इसका सामना करने संबंधी 2011 EU निर्देश का अनुच्छेद 8 यह प्रावधान करता है:

“सदस्य देश, अपनी कानूनी प्रणालियों के बुनियादी सिद्धांतों के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करेंगे कि सक्षम प्राधिकारी ऐसे मानव तस्करी के पीड़ितों पर उनके आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मुकदमेबाज़ी या जुर्माना नहीं लगाने के लिए सक्षम होंगे, जिसके लिए पीड़ित को अनुच्छेद 2 में उल्लिखित किसी भी कार्य [अर्थात, मानव तस्करी से संबंधित अपराध] के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप अपराध करने के लिए मजबूर किया गया हो।”

न्याय और उपयुक्त सुधारात्मक उपाय तक पहुँच के तहत धारा IV, अनुच्छेद 2.6 में OSCE देशों के मानव तस्करी का सामना करने संबधी कार्य योजना में गैर-बाध्यकारी 2013 परिशिष्ट:

“2.6 यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय करते हुए, जहाँ भी उचित हो, THB [मानव तस्करी] के पहचाने गए पीड़ितों को गैरकानूनी गतिविधियों में उनकी भागीदारी के लिए दंडित न किया जाए जिनमें उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया हो।”

अध्याय IV, अनुच्छेद 14 (7) के तहत मानव तस्करी, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध ASEAN कन्वेंशन यह प्रावधान करता है:

“प्रत्येक पक्षकार, अपने घरेलू कानूनों, नियमों, विनियमों और नीतियों के अधीन, और उचित मामलों में, तस्करी के शिकार व्यक्तियों पर उन लोगों द्वारा किए गए गैरकानूनी कार्यों के लिए आपराधिक या प्रशासनिक रूप से ज़िम्मेदार नहीं ठहराए जाने पर विचार करेंगे, यदि ऐसे कार्य तस्करी के कार्यों से सीधे संबंधित हैं ।”

मानव तस्करी से पीड़ितों की कारगर रूप से पहचान करना, जिनमें गैरकानूनी अपराध करने वाले सम्मिलित हो सकते हैं, पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण का मूल है। मानव तस्करी से पीड़ित द्वारा अपने पीड़ित होने के बारे में रिपोर्ट करने की अधिक संभावना तब हो सकती है, जब उन्हें विश्वास हो कि ऐसा करने से उनकी गिरफ्तारी या उन पर मुकदमेबाज़ी नहीं होगी। इसका परिणाम यह होगा कि यह सरकार द्वारा पीड़ितों को संरक्षण और सहायता प्रदान करने के साथ-साथ तस्करी के मामलों की जाँच और मुकदमा चलाने के लिए अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सहायक होगा। आगे पीड़ित होने से रोकने के लिए मानव तस्करी से पीड़ितों की शुरुआती पहचान आवश्यक है और इससे उन्हें जल्द से जल्द इससे मुक्ति पाने की प्रक्रिया शुरू करने में मदद मिलेगी।

VACATUR

वर्ष 2010 में, न्यूयॉर्क मानव तस्करी से बचे व्यक्तियों के लिए वेश्यावृत्ति अपराधों के लिए उनके अपराधों से मुक्त करने संबंधी कानून पारित करने वाला पहला अमेरिकी राज्य बन गया। वर्ष 2013 में, फ्लोरिडा का कानून “किए गए अपराध के लिए किसी भी सजा” को हटाने संबंधी प्रावधान करते हुए और भी आगे बढ़ गया। मानव तस्करी का शिकार।” मार्च 2018 तक, 39 राज्यों में vacatur कानून थे जिनसे बचे हुए लोगों को उनकी तस्करी की स्थिति के परिणामस्वरूप अदालत के आदेश को खारिज करवाने या उनके विरुद्ध दर्ज आपराधिक सजाओं को समाप्त करवाना संभव हुआ।

Vacatur “तथ्यात्मक निर्दोषिता” की औपचारिक मान्यता है। Vacatur कानून वयस्कों और बच्चों दोनों पर लागू होने चाहिए, बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति को आपराधिक गतिविधि के लिए बाध्य किया गया, धोखा दिया गया या मजबूर किया गया हो, को उस गतिविधि के लिए सहमति देने वाला नहीं माना जाना चाहिए। राज्यों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इन कानूनों में ऐसी दोषसिद्धियाँ होनी चाहिए जिनमें अनेक प्रकार के ऐसे अहिंसक अपराध सम्मिलित हों जिन्हें करने के लिए पीड़ितों को बाध्य किया गया हो ।

इन कानूनों से न केवल पीड़ित पिछले अन्यायों को सही कर पाते हैं, बल्कि इससे मानव तस्करी पीड़ितों को सही जीवनयापन पुनः प्राप्त करने और अपने जीवन के पुनर्निर्माण में मदद मिलती है। Vacatur तस्करी से बचे किसी व्यक्ति की रोजगार पाने की क्षमता बढ़ाता है, जिससे उनका आर्थिक जोखिम और फिर से तस्करी होने का खतरा कम हो जाता है। किसी vacatur कानून की अनुपस्थिति में, मानव तस्करी पीड़ित व्यक्ति स्थायी रूप से पूर्व अपराधी के रूप में देखे जाने के लिए अभिशप्त हो जाते हैं जिससे उनके जीवन का पुनर्निर्माण करने के उनके प्रयास कई तरह से संकट में पड़ जाते हैं।


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/j/tip/rls/fs/2018/283555.htm
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
ईमेल अपडेट्स
अपडेट्स के लिए साइन-अप करने या अपने सब्सक्राइबर प्राथमिकताओं तक पहुंचने के लिए कृपया नीचे अपनी संपर्क जानकारी डालें