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बाल संस्थानीकरण और मानव तस्करी

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अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस बात से सहमत है कि एक पारिवारिक देखभाल वाली व्यवस्था, या एक ऐसा वैकल्पिक समाधान जो कि उचित और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील है, बच्चों के विकास, कल्याण, और सुरक्षा के लिए सर्वाधिक अनुकूल वातावरण है।  किसी बच्चे को परिवार से हटाना सिर्फ एक अस्थायी, अंतिम उपाय माना जाना चाहिए।  अध्ययनों में पाया गया है कि बच्चों के लिए चलने वाले सरकारी और निजी दोनों तरह के आवासीय संस्थान, या अनाथाश्रम और मनोचिकित्सा वार्ड जैसे स्थान जो कि परिवार आधारित व्यवस्था प्रस्तुत नहीं करते, पारिवारिक वातावरण में मिलने वाला वह भावनात्मक साहचर्य और देखरेख नहीं प्रदान कर सकते जो स्वस्थ संज्ञानात्मक विकास के लिए पूर्व शर्त है। फिर भी, दुनियाभर में लगभग आठ मिलियन बच्चे इन सुविधाओं में रहते हैं, इसके बावजूद कि इनमें से अनुमानित 80 से 90 प्रतिशत बच्चों के माता-पिता में से कोई एक जीवित है।  आवासीय संस्थानों में रहने के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव, सामाजिक अलगाव और अक्सर सरकारों की ओर से घटिया नियामक निगरानी मिलकर, इन बच्चों को मानव तस्करी के लिए अत्यधिक असुरक्षित परिस्थितियों

में रख रहे हैं।  

सरकार द्वारा संचालित सुविधाओं सहित, संस्थागत देखभाल वाले बच्चे तस्करों के लिए आसान शिकार हो सकते हैं।  अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में भी, आवासीय संस्थान, किसी बच्चे की भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता को पूरा नहीं करते जो आमतौर पर परिवार के सदस्यों या नियमित देखभालकर्ता द्वारा प्राप्त होती है जिसके साथ बच्चा एक लगाव विकसित कर सकता है।  बच्चे खासतौर पर तब असुरक्षित होते हैं जब तस्कर स्थायी पालक हस्तियों की अनुपस्थिति से उपजे इस भावनात्मक बंधन की कमी को जानते हैं और इसका फायदा उठाते हैं।  इसके अतिरिक्त, आवासीय संस्थानों के कठोर नियम और सामाजिक अलगाव तस्करों को एक रणनीतिक लाभ पेश करते हैं, क्योंकि वे बच्चों को भागने पर विवश कर सकते हैं और उनका शोषण करने के तरीके ढूंढ सकते हैं।

खराब प्रबंधन सुविधाओं में बच्चों पर मानव तस्करी का खतरा अधिक होता है जो कि तस्करों को बेधड़क इन सुविधाओं में या इनके आसपास संचालन करने देते हैं।  ऐसे आवासीय संस्थान जिनकी मिलीभगत होती है या सीधे मानव तस्करी में शामिल होते हैं, वे बच्चों तक निर्बाध पहुंच का फायदा उठाते हैं, वे जानते हैं कि बच्चे मदद के लिए किसी के पास नहीं जा सकते।  ओशिनिया, मध्य अमेरिका, और पूर्वी यूरोप सहित कई अनाथाश्रमों को हाल ही के वर्षों में वेश्यालय के रूप में दोहरा काम करने पर प्रतिबंधित किया गया है।  एक मामले में, एक अनाथाश्रम के बच्चों के साथ-साथ कई अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ ने उस मामले की विस्तृत रिपोर्ट की जिसमें स्टाफ द्वारा कुछ लड़कियों को, खासतौर पर जो ग्रामीण या मूलनिवासी समुदायों से थीं, जबरन रात में बाहर व्यावसायिक यौनकर्म के लिए मजबूर किया जाता था।  नागरिक समाज से जुड़े समूहों द्वारा भी आवासीय संस्थानों में ज़बरिया मजदूरी की पहचान की गई है, एक मामले में विकलांग बच्चों के एक अनाथाश्रम का स्टाफ “कार्य चिकित्सा” के नाम पर बच्चों को भवन निर्माण परियोजनाओं में सहायता करने और गंदे कालीनों की सफाई करने जैसे अन्य खतरनाक कामों के लिए मज़बूर करता था।  कई देशों में, इन बच्चों से आसपास के गांवों के घरों में घरेलू काम करवाया जाता है या खेतों में मजदूरी करवाई जाती है।

संस्थागत जटिलता, सुविधा के लिए बच्चों की भर्ती के चलन की अति तक भी पहुंच सकती है। “बच्चा ढूंढने वाले” स्थानीय गांवों और समुदायों में जाते हैं – अक्सर वहां जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा, गरीबी, या सामाजिक भेदभाव से प्रभावित होते हैं – और माता-पिता से उनके बच्चों के लिए शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, संरक्षण और स्वास्थ्य देखभाल का वादा करते हैं। इन वादों को पूरा करने के बजाय, कई अनाथाश्रम

ज्यादा दान को प्रोत्साहित करने के लिए संभावित दानदाताओं के लिए शो में प्रदर्शन करने या उनके साथ बातचीत करने और खेलने के लिए मज़बूर करके पैसा उगाही करने के लिए बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।  अनाथाश्रमों ने दानदाताओं से अधिक सहानुभूति और पैसे उगाहने के लिए बच्चों को खराब सेहत की स्थिति में भी रखा है।

अपनी छुट्टियों में परोपकारी तत्व शामिल करने की इच्छुक विदेशी यात्री अक्सर अनाथाश्रमों में “स्वयंसेवा” में भाग लेते हैं, जिसे बच्चों की पैरवी करने वाले संगठनों और सरकारों ने हानिकारक के रूप में दर्ज किया है।  बगैर उचित प्रशिक्षण के थोड़े समय के लिए इन सुविधाओं में स्वयंसेवा आगे और भावनात्मक तनाव तथा सुरक्षित संबंधों के अस्थायी और अनियमित अनुभव से प्रभावित, पहले से ही लगाव के मुद्दे पर संवेदनशील बच्चों में परित्यक्तता की भावना भी पैदा कर सकती है।  इसके अतिरिक्त, यह दुर्लभ ही है कि इन स्वयंसेवकों की पृष्ठभूमि की जांच की जाती हो, जो कि बच्चों के आपराधिक अभिप्राय वाले लोगों के संपर्क में आने के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।  स्वयंसेवा के ना केवल बच्चों के लिए अनपेक्षित परिणाम हैं, बल्कि अनाथाश्रमों को स्वयंसेवकों द्वारा भुगतान की गई कार्यक्रम फीस या पर्यटकों द्वारा दिया गया दान, अधिक सुविधाएं शुरू करने के लिए कुटिल अनाथाश्रम संचालकों को कमाई बढ़ाने के लिए बच्चों की भर्ती के काम को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ये अनाथाश्रम सुविधाएं बच्चों की भर्ती के लिए झूठे वादों का उपयोग करके बाल तस्करी से जुड़े गिरोहों को मदद करते हैं और दान से फायदा उठाने के लिए उनका शोषण करते हैं।  यह प्रचलन नेपाल, कंबोडिया, और हेटी जैसे कई देशों में अच्छी तरह से दस्तावेज़ों में दर्ज किया गया है।  

जब एक बच्चा कोई आवासीय संस्थान छोड़ता है या बड़ा हो जाने पर निकलता है, तब भी मानव तस्करी के लिए वह असुरक्षित बना रहता है, कुछ हद तक शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान के कारण इनमें से कई बच्चे परेशान हुए हैं।  आवासीय संस्थानों का सामाजिक अलगाव अक्सर बच्चों को स्थायी, दीर्घकालीन पारिवारिक या सामाजिक संबंध बनाने से रोकता है।  बच्चों को एक सामाजिक सहायता नेटवर्क विकसित करने, उपयुक्त शिक्षा प्राप्त करने, सामान्य जीवन या सामाजिक परिस्थितियों का अनुभव करने, और संज्ञानात्मक तर्क और समस्या-समाधान कौशल के उपयोग के अभ्यास करने से वंचित करके, आवासीय संस्थान उन लोगों को तस्करों की साजिश के प्रति और असुरक्षित बना देते हैं जो संस्थागत देखभाल से दूर जा रहे हैं। इन बच्चों की अधिक असुरक्षित स्थिति को पहचानकर कुछ तस्कर, इंतज़ार करते हैं और उनको निशाना बनाते हैं जो कि संस्थानों को छोड़ देते हैं या बड़े होने पर निकल जाते हैं।

प्रतिक्रियास्वरूप, सरकारें बच्चों को ऐसी असुरक्षित स्थितियों से बचाने के लिए कदम उठा सकती हैं, शुरुआत उन परिवारों से की जा सकती है जो अपने बच्चों को भोजन, शिक्षा, और स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराने में कठिनाई महसूस करते हैं और नतीजतन अपने बच्चों की निगरानी खोने के जोखिम में हैं।  साथ ही, जब भी उचित हो, सरकार संस्थागत देखभाल के ऊपर परिवार-आधारित देखभाल के विकल्प को विकसित, समन्वयित और प्रोत्साहित कर सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण निकायों को बाल गृहों की कड़ी निगरानी की मांग करनी चाहिए, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को पूरा करें और उनके लिए आपराधिक दोषसिद्धि लागू करें जो सरकारी सुविधाओं में या उनके पास तस्करी को सहूलियत देते हैं या फिर इसे अंजाम देते हैं। सरकारें विकलांग बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने और परिवार के साथ रहने वाले बच्चों को प्रोत्साहन देने के लिए पालक अधिकार और क्षमताओं को मज़बूत करने हेतु अपने कानूनों का मूल्यांकन भी कर सकती हैं जबकि यह बच्चों के सर्वोत्तम हित में है।   दानदाता देश यह सुनिश्चित कर सकते हैं विदेशी सहायता उन कार्यक्रमों या कदमों को प्राथमिकता से सहयोग दें जो परिवार आधारित देखभाल को सुरक्षित रखते हैं और उन आवासीय संस्थानों का समर्थन नहीं करें जो कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं।  दानदाता देश विदेशों में आवासीय संस्थानों को धन मुहैया कराने वाले संगठनों और धर्मार्थियों की निगरानी बढ़ाने के उपायों पर भी विचार सकते हैं। इसके अलावा, जागरूकता बढ़ाने वाले प्रयास अनाथाश्रमों में स्वयंसेवा को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया अभियानों का प्रतिरोध कर सकते हैं, साथ ही नेक-इरादों वाले समूहों जैसे पर्यटन कंपनियों और धार्मिक समूहों को भी शिक्षित कर सकते हैं जो कि अनजाने में आवासीय संस्थानों में बच्चों की मांग को बनाए रखते हैं।

संस्थागत देखभाल से स्थानांतरित होकर पारिवारिक देखभाल वाली सेटिंग में जाने के प्रादर्श की भी अपनी चुनौतियां हैं, शुरुआत इस बात को पहचानने से होती है कि परिवार के सदस्य मानव तस्करी में संलग्न हो सकते हैं और उस समाधान को विकसित करने के लिए संसाधनों और विशेषज्ञता तलाशना जो कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सर्वाधिक अनुकूल हो।  अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने स्वीकार किया है कि कुछ सामुदायिक देखभाल विकल्प, जैसे छोटे सामूहिक घर और नातेदारी और सामुदायिक देखभाल, जहां उचित हो, एक पारिवारिक व्यवस्था में स्थायी भर्ती की दिशा में काम करते हुए, विकल्प के रूप में सेवा दे सकते हैं।  आफ्टरकेयर यानी बाद में की जाने वाली देखभाल संबंधी योजनाएं जिनमें सामुदायिक संसाधनों से निरंतर सहयोग शामिल है, बाहर निकलने के बाद भी बच्चों को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। ये व्यवस्थाएं बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव, के साथ ही मानव तस्करी के प्रति उनकी असुरक्षा को कम कर सकती हैं यदि उन्हें अल्पकालिक और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखा जाए, जिसमें बच्चों की वैकल्पिक देखभाल के लिए यूएन दिशानिर्देश (संयुक्त राष्ट्र आम सभा A/RES/64/14223 (2010)) शामिल हैं।  इन जोखिमों को अभिलेख में दर्ज करने वाले शोध की गहराई सरकारों के लिए संस्थागत देखभाल से पारगमन कैसे करें इस बात के निर्धारण के लिए मजबूर करने वाले कारणों के रूप में खड़ी है, जबकि संस्थागत देखभाल से सफल वयस्क स्थिति में पारगमन करने वाले बच्चों को संसाधन भी उपलब्ध करा रही है।  


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/j/tip/rls/fs/2018/283540.htm
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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