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विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो का संबोधन “ईरानी आवाज़ों का समर्थन”

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रोनल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल फाउंडेशन एंड लाइब्रेरी
जुलाई 22, 2018
सिमी वैली, कैलिफोर्निया

 

विदेश मंत्री पोम्पियो :  आप सभी का धन्यवाद। शुक्रिया। (तालियां।) बहुत-बहुत धन्यवाद। शुक्रिया, फ्रेड, इतनी उदारता से परिचय कराने के लिए। इससे मुझे याद आता है कि जब मैं नियुक्ति संबंधी पुष्टि प्रक्रिया से गुजर रहा था, वे उन सभी लोगों से संपर्क कर रहे थे जिनसे पूरी ज़िंदगी में मेरा संपर्क हुआ था, और उन्होंने उन युवकों में से एक को ढूंढ निकाला जो लॉस एमिगोस में मेरे साथ बास्केटबॉल खेलता था, और उसका कथन था – उन्होंने उससे मेरे बारे में पूछा कि मैं कितना अच्छा था। और उसने कहा, “ऐसा है, जो उनके पास है उन्होंने उसका अधिकतम उपयोग किया।” (ठहाके।)

धन्यवाद उदार परिचय कराने के लिए और धन्यवाद रोनल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल फाउंडेशन एंड लाइब्रेरी में मेरी मेज़बानी करने के लिए। ये बहुत खास जगह है और यहां आना मेरे लिए सम्मान की बात है।

मैं अपने मित्र टॉम का भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा आज रात यहां मेरा साथ देने के लिए। वह और मैं अनेक मिशनों पर साथ थे, और मैं आश्वस्त हूं कि हम आने वाले दिनों, सप्ताहों और वर्षों में ऐसा करना जारी रखेंगे।

और गवर्नर विल्सन को यहां देखना सुखद है। मैंने आपके लिए बहुत समय पहले कई बार वोट किया था। (ठहाके।)

और मुझे पता है आज शाम यहां ईरानी अमेरिकी समुदाय के भी अनेक सदस्य भी मौजूद हैं। ये अकेले दक्षिणी कैलिफोर्निया में रहने वाले ढाई लाख ईरानी अमेरिकियों का एक अंश मात्र है। हमारे साथ अमेरिका भर से आए अनेक ईरानी अमेरिकी मेहमान भी हैं। आपका धन्यवाद। मुझे आज शाम इंतज़ार रहेगा आपलोगों को सुनने का, आपकी दृष्टि से ईरान की स्थिति के बारे में और जानने, और यह समझने का कि आपके प्रियजन और दोस्त उस जगह किन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।

मुझे पता है कि ईरानी प्रवासी समुदाय विविधताओं भरा है। वे कई पंथों की पृष्ठभूमि से और समाज के विभिन्न तबकों से हैं, और यह अच्छी बात है, और सभी ईरानी अमेरिकी विभिन्न चीज़ों को एक जैसा नहीं देखते। लेकिन मैं समझता हूं सभी इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि ईरान में शासन ईरानी जनता के लिए दु:स्वप्न के समान रहा है, और यह महत्वपूर्ण है कि इस विषय पर आपकी एकता अन्य बातों पर आपके मतभेदों से प्रभावित नहीं होती है।

हमारे ईरानी अमेरिकी मित्रों, आज रात मैं आपको बताना चाहता हूं कि ट्रंप प्रशासन भी ईरान के लोगों के लिए वही सपने देखता है जो आप देखते हैं, और हमारी मेहनत और ईश्वर की कृपा से वो दिन सच साबित होगा। (तालियां।)

अगला साल ईरान में इस्लामी क्रांति के 40वीं वर्षगांठ का होगा। जैसाकि मैं थोड़ी देर में विस्तार से बताऊंगा, क्रांति का 40 वर्षों का फल कड़वा रहा है। लूटतंत्र के चालीस साल। आतंकवाद के समर्थन के लिए जनता का धन लुटाने के चालीस साल। अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज़ उठाने पर आम ईरानियों को जेल में डाले जाने के चालीस साल। पिछले 40 वर्षों के दौरान शासन ने क्यों खुद को इतने घृणित तरीके से संचालित किया और अपने ही लोगों को इन परिस्थितियों में ला खड़ा किया? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है।

इसका जवाब खुद शासन की क्रांतिकारी प्रकृति की बुनियाद में है। (तालियां।)

कट्टरपंथी जो 1979 में जबरन सत्ता में आए, आज संपूर्ण ईरानी समाज को इस्लामी क्रांति के सिद्धांतों के अनुरूप ढालने की आकांक्षा से प्रेरित हैं। यह शासन क्रांति को अन्य देशों में भी फैलाने के लिए, यदि ज़रूरी हुआ तो बलपूर्वक, भी कटिबद्ध है। स्वदेश और विदेशों में क्रांति का पूर्ण रूप से पालन शासन का अंतिम लक्ष्य है। इसी से उनका व्यवहार संचालित होता है। इस प्रकार 40 वर्षों तक ईरानी शासन ने ईरानी अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और राजनैतिक जीवन के सभी तत्वों को उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संगठित करने में व्यतीत कर दिए। शासन के लिए क्रांति की पूर्णता की राह में ईरानी जनता की समृद्धि, सुरक्षा और स्वतंत्रता का बलिदान स्वीकार्य है।

आर्थिक रूप से, हम देख रहे हैं कि कैसे ईरानी जनता के कल्याण के मुकाबले वैचारिक एजेंडे को प्राथमिकता देने के शासन के फैसले ने ईरान को एक दीर्घकालीन आर्थिक पतन के चक्र में डाल दिया है। परमाणु समझौते के दौरान, ईरान का बढ़ा तेल राजस्व ईरानी जनता की स्थिति में सुधारने में लगाया जा सकता था। इसकी बजाय इसे आतंकवादियों, तानाशाहों और प्रतिनिधि मिलिशिया पर खर्च किया गया। आज, ईरानी शासन-प्रदत्त रियायतों के सहारे औसत हिज़बुल्ला लड़ाका ईरान की सड़कों पर तैनात ईरानी दमकलकर्मियों के मुकाबले दो से तीन गुना ज़्यादा कमाता है। शासन के कुप्रबंधन के कारण रियाल के मूल्य में भारी गिरावट आई है। ईरानी युवाओं में से एक तिहाई बेरोज़गार हैं, और एक तिहाई ईरानी अब गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं।

ईरान की आर्थिक स्थिति की विडंबना ये है कि जहां जनता नौकरियों और सुधार और अवसरों की गुहार लगा रही है, वहीं शासन में बैठे लोग अपनी जेबें भरने में लगे हुए है। ईरानी अर्थव्यस्था बढ़िया कर रही है – लेकिन तभी जब आप आभिजात्य वर्ग का राजनीतिक संपर्कों वाला सदस्य हों। दो वर्ष पहले, ईरानी जनता जायज़ तौर पर गुस्से में फूट पड़ी थी जब लीक किए गए बैंक कागज़ातों से पता चला कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बैंक खातों में असामान्य रूप से भारी मात्रा में धन पहुंच रहा था।

व्यापक भ्रष्टाचार के अनेकों उदाहरण मौजूद हैं। ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख सादिक लारिजानी का मामला ही लें। उनके पास कम से कम 30 करोड़ डॉलर की परिसंपत्तियां हैं। उन्होंने इतना पैसा सार्वजनिक धन का गबन कर उसे अपने बैंक खाते में स्थानांतरित कर बनाया है। ट्रंप प्रशासन ने लारिजानी पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में जनवरी में प्रतिबंध लगाए हैं, क्योंकि हम शासन से उच्चतम स्तर पर निपटने में नहीं डरते हैं। (तालियां।) मुझे सनकी कह लें – आप पहले व्यक्ति नहीं होंगे – पर मुझे थोड़ा संदेह है कि एक चोरी करने वाला ठग जिस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं, ईरान का शीर्षस्थ न्यायिक अधिकारी बनने लायक सही व्यक्ति है। (ठहाके और तालियां।) पूर्व रिवोल्युशनरी गार्ड (आईआरजीसी) अधिकारी और गृह मंत्री सादिक महसूली को “अरबपति जनरल” का नाम मिला हुआ है। वह ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दिनों में एक साधारण आईआरजीसी अधिकारी थे, जो अब अरबों डॉलर की हैसियत वाला बन चुके हैं। ये कैसे हुआ? किसी कारण उनमें आईआरजीसी के व्यावसायिक सहयोगियों से विनिर्माण और तेल व्यापार के लाभकारी अनुबंध प्राप्त करने की काबिलियत थी। इसका कुछ न कुछ संबंध उनके महमूद अहमदीनेजाद के कॉलेज के दिनों का दोस्त होने से भी सकता है। (ठहाके।)

अयातुल्ला लोग भी पीछे नहीं हैं। उनके पास भारी मात्रा में दौलत को देखते हुए, लगता है उनका संबंध धर्म के मुकाबले धन-दौलत से ज़्यादा है। इन पाखंडी पवित्र पुरुषों ने धरती के सर्वाधिक धनवान लोगों में शुमार होने के लिए हर तरह के गोरखधंधों की ईजाद कर रखी है, जबकि आमलोगों को मुश्किलों का सामना है।

ग्रैंड अयातुल्ला मकारम शिराज़ी को चीनी के अवैध व्यापार के लिए “शक्कर सुल्तान” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अवैध धंधों से 10 करोड़ डॉलर से ज़्यादा बनाए हैं। उन्होंने ईरान सरकार पर दबाव डालकर स्वदेशी चीनी उत्पादकों को मिलने वाली रियायतों को कम करा दिया, और बाज़ार को अपने आयाति चीनी से पाट दिया जो ज़्यादा महंगी है। इस तरह की गतिविधियां आम ईरानी के बेरोज़गार होने का कारण बनती हैं।

एक अन्य अयातुल्ला, जो पिछले 30 वर्षों से तेहरान में जुम्मे की नमाज की अगुआई करने वालों में शामिल है, ने सरकार से कई लाभकारी खदानें अपने फाउंडेशन के नाम स्थानांतरित करा ली। वह भी अब लाखों डॉलर के बराबर की हैसियत रखता है।

और ज्यादा लोगों को यह पता नहीं होगा, पर अयातुल्ला खमेनेई का अपना खुद का एक गुप्त हेज फंड है सेटाड नाम से, जो बी रेटिंग के साथ करीब 95 अरब डॉलर के बराबर है। यह धन करमुक्त है, गलत तरीकों से एकत्रित है, और इसका आईआरजीसी के गुप्त फंड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अयातुल्ला जो भी चाहे वो हजम कर अपना खज़ाना भरता है। वर्ष 2013 में सेटाड के एजेंटों ने एक 82-वर्षीया  बहाई महिला को उसके अपार्टमेंट से गायब कर दिया, और काफी उत्पीड़न के बाद उसकी संपत्ति जब्त कर ली। धार्मिक अल्पसंख्यकों और राजनीतिक विरोधियों से ज़मीन हथियाना इस फंड के आसान बात है, जिसका ज़मीन-जायदाद से लेकर दूरसंचार और शुतुरमुर्ग पालन तक, हर चीज़ में हित है। और ये सब अयातुल्ला खमनेई के आशीर्वाद से किया जाता है।

यह सूची बहुत लंबी है, पर हमें आज रात और भी जगह जाने हैं। ईरानी नेताओं के भ्रष्टाचार और दौलत के स्तर से ज़ाहिर होता है कि ईरान पर ऐसे समूह का शासन है जो सरकार कम माफिया ज़्यादा लगता है।

विदेश नीति की बात करें तो ईरानी शासन के क्रांति के निर्यात के मिशन का परिणाम है विदेशो में दशक भर से जारी विचारधारा-प्रेरित हिंसा और अस्थिरता का अभियान। असद, लेबनानी हिज़बुल्ला, हमास, इराक़ के शिया उग्रवादी समूह, और यमने के हूथियों को शासन ने अरबों की नकदी खिलाई है जबकि ईरानी जनता “सीरिया छोड़ो, हमारी सुध लो” जैसे नारे लगा रहे हैं।

मध्यपूर्व में हमारे सहयोगी देश ईरानी साइबर हमलों और फारस की खाड़ी में उसके धमकाने वाले तेवरों से परेशान हैं। ईरानी शासन और उसके सहयोगियों ने पूरे यूरोप और मध्यपूर्व में मौजूदा शासन से असंतुष्ट लोगों का खून बहाया है।

निसंदेह, हमारे यूरोपीय मित्र राष्ट्र ईरानी शासन समर्थित आतंकवाद से सुरक्षित नहीं हैं। इसी महीने वियना में एक ईरानी “राजनयिक” को गिरफ्तार किया गया और उस पर एक बम के निर्माण के लिए आतंकवादियों को विस्फोटकों की आपूर्ति करने का आरोप लगाया गया। फ्रांस की एक राजनीतिक रैली में उस बम का धमाका कराए जाने की साज़िश की गई थी। इससे शासन के बारे में आपको सारी ज़रूरी सूचनाएं मिल जाती हैं: एक ओर वे परमाणु समझौते में बने रहने के लिए यूरोप को राज़ी करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इसी के साथ वे यूरोप के बीचोंबीच आतंकवादी हमले की गुप्त योजनाएं बना रहे हैं।

और चूंकि अमेरिका का मुकाबला करना और इजरायल को नष्ट करना ईरानी शासन की विचारधारा के केंद्र में है, इसने इन दोनों ही देशों और इनके नागरिकों के खिलाफ हिंसा और आतंकवाद की कई वारदातों को या तो अंजाम दिया है या उनमें सहयोग किया है। सिर्फ एक उदाहरण दें तो इराक़ में लगभग एक हज़ार अमेरिकी सैनिक ईरान निर्मित बारुदी सुरंगों की चपेट में आकर मरे और घायल हुए हैं।

आज, अनेक अमेरिकी नागरिक ईरान के भीतर या तो हिरासत में हैं या फिर लापता। बक़र नमाज़ी, शियामक नमाज़ी और शियुई वैंग को ईरानी शासन ने अनुचित तरीके से आज तक बंदी बना रखा है, और बॉब लेविन्सन ईरान में 11 वर्षों से लापता हैं। ऐसे और भी मामले हैं। और ट्रंप प्रशासन में हम इतने दिनों से अनुचित तरीके से हिरासत में रखे गए अमेरिकियों को वापस लाने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं। (तालियां।)

श्रोताओं में से एक: (चिल्ला कर।) राष्ट्रपति ट्रंप बच्चों को जेल में डालते हैं। ट्रंप-पेंस शासन बच्चों को अगवा कर रहा है। ट्रंप और पेंस –

विदेश मंत्री पोम्पियो: बावजूद शासन के –

श्रोता:  (चिल्लाने वाले श्रोता से अस्वीकृति जताना।)

श्रोताओं में से एक:  (चिल्लाना।)

श्रोता:  (चिल्लाने वाले श्रोता से अस्वीकृति जताना।)

श्रोताओं में से एक:  (चिल्लाना।)

श्रोता:  अमेरिका, अमेरिका, अमेरिका, अमेरिका।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  धन्यवाद।

श्रोताओं में से एक:  (चिल्लाना।)

विदेश मंत्री पोम्पियो: काश ऐसा होता – काश अभिव्यक्ति की इतनी स्वतंत्रता ईरान में होती। (खुशी व्यक्त करना और तालियां।)

आप जानते हैं, ईरानी शासन की शत्रुता के स्पष्ट रिकॉर्ड के बावजूद अमेरिका और अन्य देशों ने वर्षों तक राजनीतिक रूप से उदार नेता की पहचान का प्रयास किया। यह ईरानी यूनीकॉर्न ढूंढने जैसा है। (ठहाका।) शासन के क्रांतिकारी लक्ष्यों और हिंसक कृत्य करने की इच्छा ने ईरान का नेतृत्व करने लायक एक भी व्यक्ति को आगे नहीं आने दिया है जिसे किसी भी तरह से उदार या राजनेता कहा जा सके।

कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रपति रुहानी और विदेश मंत्री ज़रीफ़ उस श्रेणी में आते हैं। पर सच्चाई ये है कि ये लोग अयातुल्लाओं की अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी के कृत्यों के लिए चमकदार मुखौटे मात्र हैं। उनके परमाणु समझौते ने उन्हें उदार नहीं बनाया था; इसने उन्हें भेड़ की खाल ओढ़ा भेड़िया बना दिया। दुनिया भर की सरकारें चिंता करती हैं कि ईरान से तकरार करने से उदारवादियों की स्थिति कमज़ोर होती है, पर शासन के भीतर के ये तथाकथित उदारवादी अब भी अमेरिका-विरोधी और पश्चिम-विरोधी एजेंडा वाले हिंसक इस्लामी क्रांतिकारी ही हैं। आपको इसे परखने के लिए सिर्फ उनके ही शब्दों पर गौर करने की ज़रूरत है। वैसे देखें तो सबूतों से यही ज़ाहिर होता है कि उनका एजेंडा एक तरह से ईरान-विरोधी एजेंडा भी है।

शासन के इस्लामी क्रांति का पूर्ण अनुपालन का मतलब यह है कि यह ईरानी समाज में ऐसे किसी विचार को सहन नहीं कर सकता जोकि उसके विरोधाभासी हो या उसे कमज़ोर करता हो – इसके विपरीत जैसाकि हमने आज शाम यहां देखा। इसी कारण ईरानी शासन ने दशकों तक निर्दयता से अपने ही लोगों के मानवाधिकारों, गरिमा और बुनियादी आज़ादी का हनन किया है।

यही कारण है कि ईरानी पुलिस ने एक किशोरवय की ईरानी जिमनास्ट को डांस करते हुए इंस्टाग्राम वीडियो पोस्ट करने पर हिरासत में ले लिया।

यही कारण है कि ईरानी शासन ने सैंकड़ो अहवाज़ियों, ईरान के अरब समुदाय के लोग, को गिरफ्तार कर लेती है जब वे अपनी भाषा और अपने बुनियादी विश्वासों का सम्मान किए जाने की मांग करते हैं। ईरान की नैतिकता पुलिस सड़क पर महिलाओं के ऊपर कोड़े बरसाती है और हिजाब नहीं पहने वाली औरतों को गिरफ्तार करती है।

“सफेद बुधवार” आंदोलन की एक कार्यकर्ता को हिजाब पहनने की अनिवार्यता का विरोध करने पर हाल ही में 20 साल कैद की सज़ा सुनाई गई।

इस्लामी क्रांति को कायम रखने की आकांक्षा का परिणाम ईरान में खास कर धार्मिक स्वतंत्रता के दमन के रूप में सामने आया है, कई बार बर्बरता के रूप में। पिछले महीने, एक सामान्य व्यक्ति, बस चालक, दो बच्चों के पिता, और ईरानी गोनाबाड़ी सूफी दरवेश समुदाय के सदस्य को मौत की सज़ा सुनाई गई। सुरक्षा बलों और दरवेशों के बीच झड़प के बाद संदेहास्पद आरोपों के आधार पर उसे सज़ा सुनाई गई। कथित तौर पर निहायत पक्षपातपूर्ण मुकदमे के दौरान और उससे पहले उसे किसी वकील से नहीं मिलने दिया गया। यह व्यक्ति, श्री सालास ने – और उनके समर्थकों ने – शुरू से ही खुद को निर्दोष बताया और कथित रूप से ज़िक्र किया कि प्रताड़ना के ज़रिए उनसे कथित अपराध की स्वीकारोक्ति ली गई। दुखद है कि 18 जून को शासन ने श्री सालास को जेल की भीतर फांसी पर लटका दिया।

उनकी मौत फरवरी में आरंभ एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा थी, जब अपने सहधर्मियों को रिहा किए जाने की मांग करने वाले 300 सूफियों को अन्यायपूर्ण ढंग से गिरफ्तार कर लिया गया। इस समय, सैंकड़ो सूफी मुसलमान अपनी धार्मिक आस्था के कारण ईरानी जेलों में बंद हैं। ऐसी खबरें हैं शासन के निर्दयी सुरक्षा बलों के हाथों कई सूफियों की मौत भी हुई हैं।

क़ैद किए गए सूफियों में उनके 91-वर्षीय नेता डॉ. नूर अली ताबनदेह शामिल हैं, जो करीब चार महीनों से अपने घर में नज़रबंद रखे गए हैं। उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की ज़रूरत है।

शासन की धार्मिक असहिष्णुता सिर्फ सूफी मुसलमानों के प्रति ही नहीं है। यही बात ईरान के ईसाइयों, यहूदियों, सुन्नियों, बहाइयों और ज़रथ्रुस्टियों तथा अन्य कई समूहों के सदस्यों के साथ भी है जो इस भय के साथ जी रहे हैं कि उनकी अगली प्रार्थना कहीं अंतिम प्रार्थना न बन जाए।

ईरान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में हमें जो बात सबसे पीड़ादायक लगती है वह ये कि देश में उनकी उपस्थिति इस शासन से कहीं पहले से है। वे प्राचीन और जीवंत ईरानी सभ्यता के समृद्ध तानेबाने का ऐतिहासिक हिस्सा हैं। असहिष्णु, काले चोगे वाले लठैतों ने इस तानेबाने को नष्ट कर दिया है। जब अन्य धार्मिक मतों को दबाया जा रहा हो, ईरान की छवि अयातुल्लों और आईआरजीसी की छवियों से बनती है।

सरकार की तमाम नाकामियों, भ्रष्टाचार और अधिकारों की अनदेखी के विरोध में दिसंबर से ही ईरानी सड़कों पर उतर रहे हैं जो 1979 के बाद से ईरान में सबसे ज़्यादा दिन तक चलने वाले और शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन हैं।  कुछ नारे लगाते हैं, “जनता बनी भिखारी, मुल्ला बने खुदा।” कुछ अन्य ने तेहरान के ग्रैंड बाज़ार को बंद कराने का विकल्प चुना। अलग-अलग समूहों की शिकायतें अलग-अलग भले ही हों, पर असंतोष जताने वालों के बीच एक समानता है: उनके साथ क्रांतिकारी शासन दुर्व्यवहार करता रहा है। ईरानी गरिमा, जवाबदेही और सम्मान के साथ शासित होना चाहते हैं। (तालियां।)

शाशन का – यह महत्वपूर्ण है। इन शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ शासन की बर्बर प्रतिक्रिया उस असहिष्णुता को प्रदर्शित करती है जिसे इसके क्रांतिकारी दृष्टिकोण ने पैदा किया है। गत जनवरी में, शासन ने नए साल का स्वागत अपने ही 5,000 लोगों की गिरफ्तारी से किया। वे शांतिपूर्ण ढंग से बेहतर जीवन की मांग कर रहे थे। इनमें से सैंकड़ो अब भी भी जेल में बंद बताए जाते हैं, और अनेक अपनी सरकार के हाथों मारे गए हैं। शासन के नेता निष्ठुरता से इन्हें आत्महत्या करार देते हैं।

कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि ईरानी शासन की विचारधारा ने अनेकों ईरानियों को क्रोधित किया है और वे अपनी मातृभूमि को एक “सामान्य” देश नहीं कह सकते हैं। वे जानते हैं कि एक संविधान जिसमें इस्लामी क्रांति के निर्यात और पड़ोसी देशों के विनाश और नागरिकता पर प्रतिबंधों की बात हो, वह सामान्य नहीं हो सकता। सामान्य ईरानी जानता है कि उनकी सरकार द्वारा अपने ही लोगों प्रताड़ित करना सामान्य नहीं है। संयुक्तराष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के कई चक्र सामान्य नहीं कहे जा सकते। अमेरिका मुर्दाबाद और इजरायल मुर्दाबाद के नारे सामान्य नहीं हैं। इसी तरह आतंक का समर्थन करने वाले राष्ट्रों में पहला होना भी असामान्य है।

कई बार लगता है कि दुनिया ईरानी शासन की स्वदेश में निरंकुशता और विदेशों में हिंसक अभियानों को लेकर असंवेदनशील हो गई है, पर ईरान के गौरवशाली लोग अपनी सरकार के तमाम अत्याचारों को लेकर चुप नहीं बैठ रहे हैं। और राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका भी चुप नहीं बैठेगा। (तालियां।)

इन विरोध प्रदर्शनों और शासन की 40 वर्षों की निरंकुशता के मद्देनज़र, ईरान की जनता के लिए मेरा एक संदेश है: अमेरिका आपकी सुनता है; अमेरिका आपका समर्थन करता है; अमेरिका आपके साथ है।

जब अमेरिकी पथरीली ज़मीन से स्वतंत्रता के कोंपलों को बाहर आते देखता है हम अपनी एकजुटता व्यक्त करते हैं, क्योंकि हमने भी कुछ साल पहले एक मुक्त देश बनने के लिए पहला कठिन कदम उठाया है।

इसी समय, अमेरिका एक कूटनीतिक और वित्तीय दबाव अभियान चला रहा है धन आपूर्ति के उन साधनों को काटने के लिए जिसका उपयोग शासन खुद को धनवान बनाने तथा मौत और विनाश के समर्थन में करता है। (तालियां।) हमारा दायित्व है पैसे बनाने और उसे स्थानांतरित करने की शासन की क्षमता के खिलाफ अधिकतम दबाव पैदा कना, और हम ऐसा करेंगे। इस अभियान के केंद्र में है ईरान के बैंकिंग और ऊर्जा सेक्टरों पर प्रतिबंधों की पुनर्बहाली।

जैसाकि हमें पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान बताया है, हमारा फोकस उन देशों के साथ मिलकर काम करने पर है जो ईरान से कच्चा तेल खरीदते हैं, ताकि 4 नवंबर तक आयात जितना संभव हो शून्य के उतना करीब आ सके। शून्य। (तालियां।) हाल ही में, इस अभियान के तहत हमने बहरीनी शिया मिलिशिया संगठन सराया अल-अशतर को आतंकवादी संगठन नामित किया, तथा यूएई के साथ मिलकर हमने एक करेंसी एक्सचेंज नेटवर्क को बाधित किया जिसके ज़रिए लाखों डॉलर आईआरजीसी को जा रहे थे।

अभी और भी कदम उठाए जाएंगे। शासन के नेता – खास कर जो आईआजीसी और क़सम सुलेमानी जैसे क़ुद्स फोर्स के शीर्ष पर हैं – को उनके बुरे निर्णयों के पीड़ादायक परिणाम भुगतने पड़ेंगे। (तालियां।) हम प्रत्येक राष्ट्र से, हर राष्ट्र जो ईरान के विध्वंसकारी व्यवहार से तंग आ चुका है, दबाव अभियान का हिस्सा बनने की अपील कर रहे हैं। यह विशेषकर मध्यपूर्व और यूरोप में हमारे मित्र राष्ट्रों के लिए है, जो खुद हिंसक शासन की गतिविधियों से दशकों तक आतंकित रहे हैं।

और आपको जानना चाहिए कि अमेरिका ईरान के भीतर एयरवेव्स पर और ऑनलाइन अपना संदेश फैलाने से पीछे नहीं हटेगा। पिछले 40 वर्षों से ईरानी लोगों ने अपने नेताओं से यही सुना है कि अमेरिका ‘बड़ा शैतान’ है। मुझे नहीं लगता वे अब इस फेक न्यूज़ को और सुनना चाहते हैं। (ठहाके और तालियां।)

आज, हर चौथा ईरानी – 1.4 करोड़ लोग – हर सप्ताह अमेरिकी प्रसारणों को देखता या सुनता है। और अब शासन के झूठ की पोल खोलना और ईरानी जनता से मित्रता की हमारी गहरी इच्छा को दोहराना पहले से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। इसी समय, हमारा ब्रॉडकास्टिंग बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीबीजी) नए कदम उठा रहा है ताकि ईरानी लोग इंटरनेट सेंसरशिप से भी पार पा सकें। बीबीजी एक चौबीसों घंटे वाला फारसी-भाषी टीवी चैनल भी शुरू कर रहा है। यह टेलीविजन के साथ ही रेडियो, डिजिटल और सोशल मीडिया फॉर्मेट में भी काम करेगा, ताकि ईरान के भीतर आम ईरानी और पूरी दुनिया में ईरानी जान सकें कि अमेरिका उनके साथ खड़ा है। (तालियां।)

और अंत में, अमेरिका मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने और उन लोगों का साथ देने से पीछे नहीं हटेगा जिन्हें कि चुप कराया जा रहा है।

हम जब भी संयुक्तराष्ट्र के समक्ष और ईरान के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले अपने सहयोगी देशों से बात करेंगे, मानवाधिकार उल्लंघनों के ईरान के रिकॉर्ड पर अपनी चिंता को उठाते रहेंगे। हम ये स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि दुनिया देख रही है, और शासन अपने ही लोगों को सर्वाधिक प्रताड़ित पीड़ित बनाना जारी रखे हुए है, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। (तालियां।)

और अब श्रोताओं में शामिल प्रत्येक व्यक्ति और अपने अंतरराष्ट्रीय साझीदारों से ईरानी शासन के उत्पीड़नों को उजागर करने और ईरानी लोगों की सहायता के हमारे प्रयासों में मदद करने की अपील करता हूं।

हमारे इन प्रयासों का लक्ष्य है एक दिन ईरान में ईरानियों को उसी गुणवत्ता की ज़िंदगी का आनंद लेते देखना जोकि अमेरिका में ईरानियों को उपलब्ध है। (खुशी और तालियां।)

अमेरिका में ईरानियों को सारी स्वतंत्रता मिलती है और सरकार इनकी सुरक्षा करती है, इन्हें कुचलती नहीं। वे अपने और अपने परिवारों के हित में सबसे बढ़िया आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र हैं, और वे अपने देश पर गर्व कर सकते हैं और अपने धार्मिक मतों का अपनी इच्छानुसार पालन कर सकते हैं।

हमारे साथ यहां ऐसे कुछ लोग हैं, जिनकी मैं चर्चा करना चाहता हूं, जो उन चीज़ों के प्रतीक हैं जिनकी हम ईरानी जनता से उम्मीद करते हैं।

गोली अमेरी स्टैनफोर्ड के फ्रेशमैन के रूप में अमेरिका आई थी। उन्होंने सफल कंपनियां बनाई हैं और विदेश विभाग एवं संयुक्तराष्ट्र में काम कर चुकी हैं।

सूज़न अज़िज़ादेह 1979 में अपना सबकुछ छोड़ अमेरिका आने को बाध्य हुई थी। और आज वह इरानी अमेरिकी यहूदी फेडरेशन की नेता हैं। (खुशी और तालियां।)

माकन डेलरहीम – मैंने देख लिया – अपने परिवार के साथ जब अमेरिका आए तो वह मात्र 10 वर्ष के थे। (तालियां।) आज वह न्याय विभाग में सहायक अटॉर्नी जनरल हैं – बहुत अद्भुत। (तालियां।)

हम उम्मीद है कि अमेरिका में प्रवासियों के बीच गोली और सूज़न और माकन और अन्य ईरानी अमेरिकियों की सफलताएं तमाम अमेरिकियों को याद दिलाती हैं कि अपने लोगों का सम्मान करने तथा जवाबदेही के साथ शासन करने वाली सरकार के अधीन कितना कुछ संभव है। ईरानियों को बेहतर ज़िंदगी पाने के लिए अपनी मातृभूमि छोड़ने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। (तालियां।)

वैसे तो आखिरकार ईरानी जनता को ही अपने देश की दिशा निश्चित करनी होगी, अमेरिका, अपनी खुद की स्वतंत्रताओं की भावना में, ईरानी जनता की अब तक उपेक्षित आवाज़ का साथ देगा। हम उम्मीद करते हैं कि आखिरकार ईरानी शासन ईरान के भीतर और विदेशों में अपने व्यवहार में सार्थक बदलाव करेगा। जैसा राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, हम ईरान के शासन के साथ बात करने को इच्छुक हैं, पर अमेरिकी दबाव से राहत तभी आएगी जब हम तेहरान की नीतियों में ठोस, प्रदर्शित और सतत बदलाव देखेंगे।

मैंने सोचा मैं आज का संबोधन उचित तरीके से समाप्त करूंगा उस व्यक्ति के शब्दों के साथ जिसने निरंतर स्वतंत्रता और सम्मान की ज़रूरत कहीं ज़्यादा अच्छी तरह की जैसा कि मैं शायद ही कभी कर पाऊं, राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन। (तालियां।)

1982 में, राष्ट्रपति रीगन ने ब्रितानी संसद में एक भाषण दिया जो वेस्टमिंस्टर एड्रेस के रूप में जाना गया। उन्होंने पश्चिमी सरकारों से दुनिया भर में ऐसे लोगों की सहायता की अपील की जो अत्याचार और अन्याय से मुक्त होना चाहते हैं। उनका बताया कारण सरल और शक्तिशाली था। उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता सिर्फ कुछ भाग्यशाली लोगों का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि हर इंसान का अविच्छेद्य अधिकार और सार्वभौम अधिकार है।”

इसीलिए हम सभी सरकारों से भी अपील करते हैं वे एक क्रांतिकारी शासन के साथ अपने संबंधों को तोड़ें और शीघ्र ईरानी जनता की सहायता के लिए आगे आएं। (तालियां।) उसी दिन, उसी संबोधन में, राष्ट्रपति रीगन ने कहा, “आइए हम खुद से पूछें: ‘हम खुद को किस तरह का लोग समझते हैं?’ और आइए हम जवाब दें, ‘स्वतंत्र लोग, स्वतंत्रता के काबिल, और न सिर्फ स्वतंत्र रहने के लिए प्रतिबद्ध, बल्कि स्वतंत्रता प्राप्त में दूसरों की मदद के लिए भी।’”

आज, अमेरिका अन्यायपूर्ण शासन करने वालों द्वारा ईरानी जनता पर किए जा रहे अत्याचार की निंदा करता है, और हम गर्व से ईरान में उनलोगों की आवाज़ को ताकत देते हैं जो उन अविच्छेद्य और सार्वभौम मानवाधिकारों की अनदेखी किए जाने पर रोक और इसकी बजाय इन्हें सम्मान मिलते देखना चाहते हैं। हम इस जानकारी के साथ यह करते हैं कि सड़कों पर और बाज़ारों में बहुत से लोग उनलोगों की आवाज़ बनते हैं जिन्हें शासन ने विगत वर्षों में स्थाई रूप से चुप कर दिया है – जिनके प्रियजन भी होंगे जो आज रात यहां श्रोताओं के बीच उपस्थित हैं।

यह अमेरिका की उम्मीद है कि ईरान का अगले 40 वर्षों का इतिहास ईरानी लोगों के लिए दमन और भय से नहीं – बल्कि स्वतंत्रता और संतुष्टि से जाना जाएगा।

धन्यवाद। (तालियां।)

गवर्नर विल्सन: आपने सभी सवालों के जवाब दे दिए।

विदेश मंत्री पोम्पियो: हम एक और स्विंग लेंगे। धन्यवाद।

गवर्नर विल्सन: विदेश मंत्री, मेरे पास आपके लिए कुछ सवाल थे, पर वास्तव में आपने लगभग सभी के जवाब बहुत खूबसूरती से दे दिए हैं।

विदेश मंत्री पोम्पियो: हम देखेंगे कि मैं वही जवाब दे सकता हूं, यदि नहीं – मेरे सामने टिप्पणियां पड़ी हैं। (ठहाके।)

गवर्नर विल्सन: ठीक है, मैं बस एक से शुरू करता हूं। क्या यह यथार्थवादी सोच है कि ईरानी लोग भविष्य में कभी, जिसे हम निकट भविष्य कहते हैं, अपने देश का नियंत्रण दोबारा अपने हाथ में ले सकेंगे?

विदेश मंत्री पोम्पियो: बेशक। (तालियां।) हां, ज़रूर। मैं हमेशा उनलोगों को याद दिलाता हूं जो इसे असंभव मानते हैं या जो समय की माप घंटों में नहीं शताब्दियों में होने की सोचते हैं, मैं हमेशा उनसे कहता हूं कि चीज़ें बदलती हैं। कुछ असंबद्ध क्षण होते हैं। ऐसे पल आते हैं जब अनपेक्षित, अप्रत्याशित चीजें होती हैं। हमारी क्रांति उनमें से एक होगी। मैं गिनाते रह सकता हूं। आप सब भी उनके नाम ले सकते हैं।

हमें सही पल का पता नहीं। हमें उस दिन का पता नहीं जब ईरानी शासन का व्यवहार बदल जाएगा। पर हम उन कार्यों को जानते हैं जिसे करना दुनिया का दायित्व है ताकि जब सही समय आए, उस अवसर के फलीभूत होने की संभावना और बढ़ जाए।

गवर्नर विल्सन:  क्या आप अपने उत्कृष्ट भाषण को संश्लेषित करेंगे और वास्तव में कुछ शब्दों में कहेंगे कि आपको ईरानी सरकार के भीतर उस परिवर्तन को लाने का सबसे अच्छा तरीका क्या लगता है और कैसे ट्रम्प प्रशासन ईरानी लोगों को इस वर्तमान दमनकारी प्रशासन से मुक्त होने के संघर्ष में वहां मदद कर रहा है?

विदेश मंत्री पोम्पियो: तो राष्ट्रपति ट्रंप इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हैं, न सिर्फ संदेश को लेकर बल्कि इस तथ्य को लेकर भी कि यह प्रशासन के लिए भी सचमुच की प्राथमिकता है। मैं समझता हूं यह महत्वपूर्ण है। आप लक्ष्य तय कर सकते हैं, लेकिन उसे प्राथमिकताओं में ऊंची जगह नहीं देंगे तो ध्यान में रखने की अवधि छोटी होती है और संसाधन सीमित हैं। राष्ट्रपति ने इसे असाधारण रूप से महत्वपूर्ण विषयों में रखा है।

हमारी टीम के लिए तय मिशन स्पष्ट हैं। यह है दुनिया भर में आतंकवाद का प्रसार जारी रखने और ईरान के भीतर लोगों को स्वतंत्रता नहीं देने जोकि उनका हक है, वाले ईरानी नेतृत्व को संसाधनों, धन, फंड, क्षमता से दूर रखना। कैसा रहा यह 30 सेकेंड में? (ठहाके।)

गवर्नर विल्सन:  बहुत बढ़िया था। (तालियां।) कुछ लोगों के बीच ये धारणा है कि ईरानी, छात्रों और वैध आगंतुकों समेत, यात्रा प्रतिबंधों के कारण अमेरिकी वीज़ा नहीं प्राप्त कर सकते हैं। क्या आप स्पष्ट करेंगे कि ईरानी सिविल सोसायटी के आगंतुकों के बारे में अमेरिकी नीति क्या है?

विदेश मंत्री पोम्पियो: निश्चित रूप से, मुझे ऐसा करने में खुशी होगी। तो राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन कई देशों के संबंध में स्पष्ट कर दिया है जो हमें पर्याप्त जानकारी प्रदान नहीं कर रहे थे, जिनसे हमें अमेरिकी सुरक्षा पर खतरा था, हम उन देशों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि वे उन सूचनाओं को उपलब्ध करा सकें जो हमें चाहिए। ईरान हमें बुनियादी डेटा-शेयरिंग सिस्टम उपलब्ध कराने से इंकार कर रहा है, जो सैकड़ों देशों – या, माफ करें, दर्जनों देश ने हमें पहले से ही उपलब्ध करा चुके हैं। हम चाहेंगे कि ईरान भी ऐसा करे।

हम अभी भी छात्रों को अमेरिका आने की इजाजत देते हैं। बहुत सारे छात्र हैं। मुझे यकीन है कि आज रात यहां यहां पढ़ रहे ईरानी छात्र भी हैं। हम इसका स्वागत करते हैं। लेकिन इस प्रशासन की प्राथमिक नीतियों में से एक है कि हम उन सभी लोगों की उचित पड़ताल करें जो हमारे देश में आते हैं ताकि हम अपने अमेरिका को सुरक्षित रख सकें। यही योजना है। यही नीति है। (तालियां।)

गवर्नर विल्सन:  खशायद एक अनावश्यक आशावादी विचार, पर अमेरिका और ईरान के बीच सुलह का आधार क्या हो सकता है?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  तो यह हमेशा संभव है। (ठहाके।) और राष्ट्रपति ने इस तथ्य को स्पष्ट कर दिया है कि – मुझे मजाक नहीं करना चाहिए था। राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसा चाहेंग, वह इसका स्वागत करेंगे। मैंने प्योंगयांग की तीन यात्राएं कर चुका हूं, एक ऐसा शासन जिसने अपने नागरिकों से इस तरह का व्यवहार किया है जो उन्हें उनकी स्वतंत्रता नहीं देता।

राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर हम यह परिवर्तन देख सकें, यदि हम नेतृत्व को अपना कल्याण और अपने लोगों का कल्याण सुनिश्चित करने के बारे में रणनीतिक निर्णय लेने के लिए राज़ी कर सकें, तब हम बातचीत करने के लिए और कैसे आगे बढ़ा जाए इस पर चर्चा के लिए तैयार हैं। करें कि यह कैसे आगे बढ़ सकता है। राष्ट्रपति ने कम से कम एक बार, या शायद एक से अधिक बार कहा है कि वह ईरान में नेतृत्व के साथ ऐसा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक नहीं जब तक ईरानी शासन में प्रत्यक्ष, ठोस, अपरिवर्तनीय परिवर्तन नहीं होते, जो मुझे अभी होता नहीं दिख रहा। लेकिन मैं आशावान हूं। (तालियां।)

गवर्नर विल्सन:  और छात्रों के लिए आपकी सलाह क्या होगी – आशा है कि आज श्रोताओं में से कई – जो इस प्रयास का हिस्सा बनना चाहेंगे और विदेश विभाग में करियर बनाना चाहेंगे। कैसे वे अच्छी तैयारी कर सकते हैं और उन्हें किन चुनौतियों का अनुमान लगाना चाहिए?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  तो सभी मेहनती, प्रतिभाशाली, देशभक्त बच्चों का अमेरिका की महान कूटनीतिक टीम का हिस्सा बनने के लिए स्वागत है। यह असाधारण सम्मान की बात है। मैं 12 सप्ताह से, लगभग आज के दिन तक, विदेश मंत्री हूं। हमारी टीम ज़बरदस्त है। उनके लिए मेरी सीख उससे अलग नहीं होगी जो मैंने अपने बेटे को दी। यदि वह यहां होता तो आंखें तरेर रहा होता। (ठहाके।)

मेहनत करो, पढ़ो, जहां भी जाओ सच कहो। हमारे यहां अनेक लोग ऐसे हैं जो अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, जिन्होंने दूसरे देशों में समय बिताए हैं और जो दूसरी संस्कृतियों के बारे में सीखने में सक्षम हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम इन योग्यताओं को विदेश विभाग में जगह दें। ये ऐसी बातें हैं जिनके बारे में कॉलेज या आगे की शिक्षा पा रहे युवाओं को सोचना चाहिए जो अमेरिकी राजनयिक के रूप में काम करने का शानदार, उत्साहपूर्ण, संतुष्टि वाला महत्वपूर्ण करियर अपनाना चाहते हैं, और हम उनका स्वागत करते हैं। आपक state.gov पर जाएं। इसे ढूंढना आसान है। प्रतिभाशाली युवा अमेरिकियों के लिए हमारे यहां काफी स्थान हैं, जहां आकर वे हमारी बेहतरीन टीम का हिस्सा बनें। (तालियां।)

गवर्नर विल्सन: विदेश मंत्री महोदय, आपने पूरी स्पष्टता से अपनी बात कही, और यह, मैं समझता हूं हम सबको स्पष्ट है जिन्हें यहां श्रोताओं के रूप में, और इस भवन में उपस्थित होने का सौभाग्य मिला जो रोनल्ड रीगन की विरासत के संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए समर्पित है, जिसे आप उन सबसे बेहतर समझते हैं जिनके संपर्क में मैं लंबे समय में आया हूं। (तालियां।)

हमें, मैं समझता हूं, दोनों को याद है कि इस देश के लिए एक नाज़ुक क्षण में उन्होंने कहा, एक मुस्कान के साथ, “विश्वास करो, पर सत्यापित करो।” (ठहाके।) और मुझे लगता है आपका संदेश बहुत स्पष्ट था, और मैं धन्यवाद करता हूं आपकी विशिष्ट सेवाओं के लिए जो आपने उस क्षण से ही दीं जब आपने प्वाइंट नंबर एक अपनी कक्षा में छोड़ दी। मैं इसे बहुत प्रभावशाली मानता हूं। (तालियां।)

और वह प्रतिद्वंद्वी जो भी था जिसके विरुद्ध आप लॉस एमिगोस में बास्केटबॉल खेल रहे थे, मुझे लगता है उसे कहना था, जब उसने कहा, “ऐसा है, जो उनके पास है उन्होंने उसका अधिकतम उपयोग किया,” आपने दिमाग और साहस और स्पष्टवादिता वाले देवता की देन का अधिकतम उपयोग किया। हम भाग्यवान हैं कि आप हमारे बीच आए।

विदेश मंत्री पोम्पियो: धन्यवाद, पीट। आपकी कृपा। (तालियां।) शुक्रिया। आपका आभार।

गवर्नर विल्सन:  मैंने ईमानदारी से कही।

विदेश मंत्री पोम्पियो: आपकी कृपा। धन्यवाद, सर। (तालियां।)


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/secretary/remarks/2018/07/284292.htm
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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