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धार्मिक स्वतंत्रता बढ़ाने के संबंध में मंत्रिस्तरीय वार्ता में अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी के प्रशासक मार्क ग्रीन की टिप्पणियाँ

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अंतर्राष्ट्रीय विकास के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका एजेंसी
प्रेस रिलेशंस का कार्यालय
तत्काल रिलीज के लिए
टिप्पणियां
26 जुलाई 2018

 

अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट
वाशिंगटन, DC

प्रशासक ग्रीन: धन्यवाद, सैम। सभी को मेरा नमस्कार। आप सभी के साथ होना सम्मान की बात है और आज के विश्व में पूजा करने की स्वतंत्रता के महत्व पर कुछ विचार प्रकट कर पाना और अधिक सम्मान की बात है। आप जानते हैं, मैं इसके बारे में कुछ दिन पहले सोच रहा था। ऐसी महान कहानी थी जो मैंने यहाँ वाशिंगटन में यहाँ एक सरकारी इमारत में किसी साइन के बारे में सुनी थी। इसमें यह लिखा था, “परमाणु हमले की स्थिति में, इस इमारत में प्रार्थना से संबंधित संघीय प्रतिबंध अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए जाएंगे।”

मै सेक्रेटरी पोम्पेयो और राजदूत ब्राउनबैक को यह सुनिश्चित करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ कि हम इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में बात करने के लिए बस ऐसे क्षण के लिए प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं। मैं यह कहूँगा कि कुछ प्रेक्षक यह जानना चाहेंगे कि अमेरिका इस मंत्रिस्तरीय वार्ता का आयोजन क्यों कर रहा है, क्यों धार्मिक स्वतंत्रता हमारे समय और ध्यान की हकदार है। निजी रूप से मेरे दृष्टिकोण से, और USAID के नेता के रूप में, बहुत से कारण हैं। अमेरिका में यहाँ हमारे लिए पहला और सर्वप्रथम, हमारी वैयक्तिक आस्था, परम्पराओं के अनुसार हमारे सृष्टा की पूजा करने की स्वतंत्रता हमारी राष्ट्रीय आत्म-पहचान का अनिवार्य भाग है।

अपने धर्म को स्वतंत्र रूप से मानना, आखिरकार ऐसी बात है जिसके कारण तीर्थ यात्री यूरोप में अत्याचार से भागकर हमारे समुद्र तटों पर आए। उनके आने के बाद, उन्होंने जल्द यह महसूस किया कि आस्था के लिए स्वतंत्रता आसान जीवन का आश्वासन नहीं देती है। उन्होंने कठिनाइयों का सामना किया, उन्होंने खतरों का सामना किया, लेकिन वे दृढ़ रहे और वे जीवित बच सके। और उनकी हारों और झटकों के बावजूद, नई, मुक्त भूमि में उनके द्वारा जीवन जारी रखने के उनके लिए बहुत मायने थे कि हमें उनसे महान अवकाश: थैंक्सगिविंग का अवकाश उत्तराधिकार के रूप में मिला।

बहुत वर्षों के बाद, हमारे एक महानतम राष्ट्रपति और बहुत से तरीकों में, आधुनिक समय में, उत्कृष्ट अमेरिकन, रोनाल्ड रेगन प्रायः अपने इस विश्वास के बारे में बात किया करते थे कि अमेरिका को एक पहाड़ी पर चमकता हुआ नगर बनने की आकांक्षा रखनी चाहिए, जो बाकी की दुनिया के लिए स्वतंत्रता का उदाहरण हो। बेशक, वे उनमें से एक तीर्थयात्री जॉन विनथ्रॉप की बात दोहरा रहे थे जो मैथ्यू के अनुसार न्यू टेस्टामेंट गॉस्पेल में उल्लिखित कथन को दोहरा रहे थे।

विनथ्रॉप ने वह विचार व्यक्त किया, पहाड़ी पर किसी नगर का चित्र, मैसाचुसेट्स में तीर्थयात्रियों के आने के बाद उनकी पहली सीख का केंद्रीय विषय, एक बार फिर से स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के नाम में जैसा कि हम सभी देखते हैं, उपयुक्त बैठता है। विनथ्रॉप के एक सौ पचास साल बाद, धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति वही समर्पण उस युवा अमेरिका के चरित्र के मध्य में देखा गया जिसे हमारे संस्थापकों ने हमारे संविधान में “अधिकारों का विधेयक” में पहली मद के रूप में संजोया। बहुत शाब्दिक रूप से पहली पंक्ति यह थी: “कांग्रेस धर्म की किसी स्थापना का सम्मान करने या इसके मुक्त रूप से पालन करने को रोकने के लिए कोई कानून नहीं बनाएगी।” इसे प्राय: “अमेरिका की पहली स्वतंत्रता” कहा जाता है।

और यह केवल इसे स्थापित करने के कारण नहीं है बल्कि यह हमारी उन सभी स्वतंत्रताओं, हमारी उन सभी अन्य स्वच्छंदताओं के लिए पूर्व-शर्त है जिसे हम बहुत प्रिय मानते हैं।

व्यक्ति और पूजा करने के उसके अधिकार पर सरकार की शक्ति पर सीमाओं की आवश्यकता की यह घोषणा अपने प्रकार की पहली बात थी और यह मानव सभ्यता को अमेरिका का महानतम उपहार है।

अब, इसका दूसरा कारण कि मेरे विचार में यह मंत्रिस्तरीय वार्ता बहुत महत्वपूर्ण है, वह यह है कि हम जिस धार्मिक स्वतंत्रता पर हम चर्चा कर रहे हैं, वह अमेरिका के समुद्र तटों से बहुत आगे जाती है, जैसा कि आप सभी जानते हैं। सरल शब्दों में, आज पूरे विश्व में करोड़ों आत्माएं यह पुरज़ोर रूप से महसूस करती हैं कि उनके आध्यात्मिक विश्वास उनके जीवन को प्रयोजन और अर्थ देते हैं। आस्था की परम्पराओं में उस वास्तविकता को पहचानने पर मानवजाति एक-दूसरे के और समीप आ सकती है। और पूजा करने के लिए एक-दूसरे के अधिकार की रक्षा करना वास्तव में एक-दूसरे की मानवता की रक्षा करना है।

USAID में, हम पूजा करने की स्वतंत्रता को हम ऐसी सरकार की खोज में एक आवश्यक तत्व मानते हैं जो नागरिक-केंद्रित और नागरिक-प्रतिक्रियाशील हो। इसे अभिव्यक्ति, एकत्रण, संघ की स्वतंत्रताओं और भेदभाव की स्वतंत्रताओं से अलग नहीं किया जा सकता; और इसका तीसरा कारण इसका अधिक व्यावहारिक कारण है कि USAID क्यों ऐसा मानता है कि यह विषय क्यों इतना सामयिक और महत्वपूर्ण है। हमारे मुख्य उद्देश्यों, हमारे मुख्य मिशन, चाहे यह विकास सहायता में हो या मानवीय राहत में, को पूरा करने के लिए एक एजेंसी के रूप में हमारे लिए, हमें समुदायों में ऐसे कोनों में पहुँचने की आवश्यकता है जहाँ सरकारें प्रभावी रूप से जा सकें या जहाँ उन्होंने न जाने का निर्णय कर लिया हो। हम ऐसे लोगों को छूने में अवश्य समर्थ होने चाहिए जिन्हें पीछे छोड़ दिया गया है, ऐसे लोग जिन्हें भुला दिया गया है। बहुत से परिवेशों में, आस्था के समुदाय, आस्था-आधारित संगठनों के साथ भागीदारी करने में समर्थ होने से हम बस वह करने में समर्थ हो जाते हैं।

आस्था-आधारित भागीदारों का प्रायः उन भुलाए गए समुदायों में अनूठे रूप से विश्वास किया जाता है। वे उन नेटवर्कों और संसाधनों और अंतर्दृष्टियों का उपयोग कर सकते हैं जो हमें ऐसे तरीकों से पहुँचने में सहायता करते हैं जिन तक हम अन्यथा न पहुँच पाते। धार्मिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यह आस्था-आधारित समूहों को उनके आवश्यक आस्था चरित्र को गंवाए बिना USAID और अन्यों के साथ कार्य करने में समर्थ बनाती है।

एक चौथा कारण, और संभवतः आज सबसे स्पष्ट कारण, यह मंत्रालय महत्वपूर्ण है क्योंकि असहिष्णुता ने प्रायः हिंसा और अत्याचार को बढ़ावा दिया है और जब हम यहाँ इस सुंदर नगर में एकत्र हो रहे हैं, तब हमें यह याद रखना है। पूरे इतिहास में नेताओं, सायरस महान से लेकर थॉमस जैफरसन तक, ने बार-बार हमें चेतावनी दी है कि धार्मिक सहिष्णुता को प्रोत्साहित करने में सतर्कता की आवश्यकता स्वयं स्वतंत्रता के बरकरार रहने के लिए आवश्यक है।

सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया को हथियारों से लैस करने के क्षेत्र में, ऐसी असहिष्णुता के खतरे कभी भी इससे बड़े नहीं रहे हैं, कभी भी इतने अधिक महत्वपूर्ण नहीं रहे हैं। यह वह अंतिम कारण है जो मैंने हालिया कुछ यात्राओं में बहुत उन्मुक्त रूप से, बहुत स्पष्ट रूप से देखा है जिसका राजदूत ब्राउनबैक ने उल्लेख किया है। जैसा कि उन्होंने पिछले महीने ज़िक्र किया, वे और मैं तथा अन्य व्यक्ति उप राष्ट्रपति पेंस के निर्देश पर उत्तरी इराक में एक प्रतिनिधिमंडल दौरे पर गए। हमारा मिशन कष्ट को बेहतर रूप से समझना था जिसका बहुत से व्यक्तियों ने अत्यधिक असहिष्णुता के परिणामस्वरूप सामना किया है। हम ISIS के कुछ पीड़ितों के यहाँ गए: ईसाई, यज़ीदी और अन्य अल्पसंख्यक समूह। जो कहानियाँ हमने सुनीं, वो दिल को चीरने वाली थीं।

जब इस्लामिक स्टेट ने चार वर्ष पहले इराक के तेल्सकुफ कस्बे पर कब्ज़ा किया, तब आतंकवादियों ने स्थानीय चेलडीन कैथोलिक चर्च की बेअदबी की और सभा में मौजूद व्यक्तियों का ठीक वेदिका पर ही सिर काट दिया। और वह वध उस नरसंहार का बस एक अंश था जो ISIS ने अपने तथाकथित खलीफत में ईसाइयों और अन्य कमज़ोर धार्मिक समूहों के विरुद्ध आरंभ किया था। उनके भयंकर, अमानवीय हमलों ने क्षेत्र के कछ सबसे प्राचीन आस्था समुदायों का लगभग नाश कर दिया। लगभग 90 प्रतिशत ईसाई पिछले 15 वर्षों में पूरे के पूरे ऐसे गाँवों को खाली करते हुए ईराक से भाग खड़े हुए हैं जो वहाँ 1,000 से अधिक वर्षों से मौजूद थे।

यज़ीदी जनसंख्या द्वारा एक अन्य प्राचीन आस्था का पालन किए जाने पर समान तरीके से कमी की गई और हमला किया गया। हमारा प्रतिनिधिमंडल केरेमलैश में एक अत्यधिक नष्ट चर्च में गया जहाँ हमने धार्मिक नेताओं की अपवित्र की गई कब्रें देखीं। बैल टॉवर — स्वयं चर्च को अत्यधिक नुकसान पहुँचाया गया था, लेकिन ISIS के दुष्ट कब्ज़े के दौरान किसी प्रकार बैल टॉवर, घंटी सुरक्षित बची रही। जब हम वहाँ थे, तब यह वास्तव में बजी, मानो यह कह रही हो कि धार्मिक स्वतंत्रता को इतनी आसानी से नष्ट नहीं किया जा सकता है। हम जीवित बचे यज़ीदी लोगों के यहाँ भी गए और मैं उस IDP कैम्प में एक माँ की आँखों में देखना कभी नहीं भूल पाऊँगा; वह अपने करीबी परिवार के कुछ सदस्यों की नियति के बारे में नहीं बता सकी। और इसके बाद उसने हमें फोटो दिखाए, हालाँकि हमने किसी तरीके से इन्हें खोजने में उसकी सहायता की।

अनियंत्रित धार्मिक असहिष्णुता ऐसी दिखती है।

यह कहा गया है कि धार्मिक स्वतंत्रता की हमारी प्रतिबद्धता का सबसे सच्चा मापदंड वह प्राथमिकता है जो हम इस सिद्धांत पर दृढ़ रहकर अन्य लोगों की आस्था की रक्षा करने को देते हैं कि एक आस्था पर हमला, अंततः सभी आस्थाओं पर हमला है। और यह उन कारणों में से एक कारण है कि हममें से बहुत से व्यक्ति बर्मा के रोहिंग्या समुदाय की पीड़ा से इतने हिल गए हैं।

कुछ महीने पहले मैंने कम से कम 700,000 ऐसे मुस्लिम रोहिंग्या में से कुछ के यहाँ जाने के लिए बर्मा और बांगलादेश की यात्रा की जो राखिने राज्यों में अपने घरों से व्यथित होकर भागकर कॉक्स बाज़ार की तुलनात्मक रूप से सुरक्षित स्थिति में पहुँच गए हैं। जैसा कि हमारे स्टेट डिपार्टमेंट और अन्य स्रोतों ने अनुमान लगाया है, रोहिंग्या को जातीय सफाई: गैर-कानूनी हत्याओं, बलात्कारों, उत्पीड़न, पिटाई, मनमानी गिरफ्तारी, विस्थापन, सम्पत्ति के नाश द्वारा सताया गया है — यह सब कुछ असहिष्णुता और सम्प्रदायवादी घृणा के कारण हुआ है।

मैं बर्मा में, सिटवे के पास एक IDP कैम्प में गया और ऐसे लोगों से मिला जिन्हें वहाँ छह वर्षों से रखा गया था। वे सरकार के विशेष, लिखित अनुमोदन के बिना अपने घर नहीं लौट सकते थे या कहीं अन्य जगह की यात्रा नहीं कर सकते थे। वे दानी लोगों द्वारा दिए गए भोजन के राशन का सेवन करके जीवित बचे थे और उन्हें स्वास्थ्य देखरेख उपलब्ध नहीं थी। USAID के प्रशासक के रूप में मेरे कार्यकाल का सबसे कठिन पल उस कैम्प में एक युवा मुसलमान पिता की आँखों में देखना था, जैसा कि उसने काफी दर्द भरे लहजे में कहा कि उसके बेटे का जीवन में बस वह चौकसी वाला वातावरण ही रहा है। वह शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकता था, और उसे जो खाना दिया जाता था, वह भी केवल अजनबियों द्वारा ही दिया जाता था। उसके भविष्य में उन्नति की कोई संभावना नहीं थी। मैंने कभी भी किसी की आँखों में इतनी गहरी निराशा नहीं देखी है। कभी नहीं। यह सब मात्र उसकी आस्था और जातीयता के कारण।

धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला हमेशा परस्पर-धार्मिक रूप नहीं लेता हैं। कभी-कभी वह केवल समुदाय को अपनी इच्छा के अनुसार झुकाने की कोशिश हेतु सत्तावादी शासन द्वारा की गई कार्रवाई होती हैं। समुदाय को राजनीतिक रूप से अपनी विशेषता और सिद्धांतों को आत्मसमर्पण करने हेतु मजबूर करने की कोशिश करने के लिए होता है, जैसा वह तानाशाह चाहता है । मियामी होकर जाते समय पिछले हफ्ते ही मैंने स्थानीय निकारागुआन समुदाय के नेताओं से पहली बार सुना, मैंने हाल में फिलहाल निकारागुआ में होने वाली क्रूरता और चल रही हिंसा के बारे में सुना, जैसा अब हम बात कर रहे हैं। हर दिन बढ़ती मौत के साथ 350 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। चर्च और पादरी, जो यह मानते हैं कि उनकी आस्था उन्हें शांति लाने और मध्यस्थता करने की कोशिश करने का आह्वान करती है, और अब इन्हीं गतिविधियों के लिए उन पर हमले हो रहे हैं। क्योंकि पादरी उस शासन के अत्याचारों के दौरान सामने खड़े होने के इच्छुक नहीं थे, इसलिए डैनियल ओर्टेगा ने रोमन कैथोलिक चर्च को “कूप-माँगर्स” कहा था।

मियामी में निकारागुआन ने मुझे यह भी बताया कि कैसे ओर्टेगा के अर्धसैनिक बलों ने रेवरेंड गुतिरेज़ के स्थानीय चर्च पर हमला किया है। गोलियों की बौछार के बीच, फादर गुतिरेज़ ने एक स्थानीय रेडियो स्टेशन को फोन किया और आँसुओं में डुबने से पहले, उन्होंने कहा, “वे चर्चों को दूषित कर रहे हैं।” सरकार हमें मार रही है।” निकारागुआन बिशप बेज ने हाल ही में किए गए एक ट्वीट में कहा, “निकारागुआ की सरकार उस सीमा को पार करती है – जो अमानवीय और अनैतिक है । नागरिकों, ज्यादातर छात्रों, के खिलाफ आपराधिक दमन हर दृष्टिकोण से निंदाजनक है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय उदासीन नहीं हो सकता है। ” वे सही हैं। हम उदासीन नहीं हो सकते हैं, और हमें कतई उदासीन नहीं होना चाहिए, खासकर क्योंकि हम धार्मिक स्वतंत्रता में विश्वास रखते हैं।

और इसलिए आज का सवाल, और इस मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए असली सवाल यह है कि हम कैसे ढांढस बंधाते हैं? हम सहायता कैसे करते हैं? ज़ाहिर तौर पर सबसे पहले, मंत्रिस्तरीय वार्ता स्वयं है, जो अपनी प्रकार का पहला है। आप में से इतने सारे लोग बहुत दूर से बहुत सारी आस्था परंपराओं से यहाँ उपस्थित हैं, जो दुनिया के लिए एक शक्तिशाली संकेत है। धार्मिक स्वतंत्रता मायने रखती है। धार्मिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है। धार्मिक स्वतंत्रता एक सार्वभौमिक इच्छा है, और इसके समर्थक जागरूक हो रहे हैं। यह मंत्रिस्तरीय वार्ता जो बात कहता है और जो घोषणाएं हम जारी करते हैं, वे संदेश जो हममें से प्रत्येक घर वापस ले कर जाते हैं, वे उन समुदायों को ढांढस बंधाते हैं जो हमारे द्वारा बात करने के दौरान दुखों का सामना कर रहे हैं। बेशक, आशा अपर्याप्त है अगर इसे कार्रवाई में नहीं बदला जाता है।

USAID में, चूँकि हम वास्तव में धार्मिक स्वतंत्रता को मूल मानव अधिकार के रूप में देखते हैं, इसलिए हम धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले कानूनों को सुदृढ़ बनाने और लागू करने के लिए धार्मिक नफरत फैलाने वाले भाषण और परस्पर-आस्था संघर्ष को समाप्त करने वाले कार्यक्रमों का समर्थन कर रहे हैं, और इसके लिए काम करने वाले सिविल सोसायटी की क्षमता बढ़ाने का समर्थन कर रहे हैं। यह समर्थन तकनीकी सहायता के रूप में, और हाँ, सिविल सोसायटी के लिए वित्तीय सहायता के रूप में परिलक्षित होता है।

तीसरा, हम अपने काम में हमारे साथ साझेदारी करने के लिए छोटे गैर सरकारी संगठनों (NGO) और सिविल सोसाइटी समूहो सहित संगठनों के लिए आसान बनाने हेतु हमारी साझेदारी और अधिप्राप्ति प्रक्रिया में सुधार कर रहे हैं, ताकि आप में से कई – हमारे काम में हमारे साथ साझेदारी कर सके। हम आपसे पहले संपर्क करेंगे, आपके विचारों पर अधिक प्रभावी रूप से विचार करेंगे, कागजी कार्रवाई में विलंब को कम करेंगे, हम आपकी ताकत और क्षमताओं का उपयोग करने के तरीके का पता लगाएंगे। संक्षेप में, न केवल दरवाजा खुला रहेगा; बल्कि “स्वागत” संकेत भी रहेगा।

चौथा, हमें उन सभी चीजों को करने की ज़रूरत है, जो हम धार्मिक असहिष्णुता की सबसे खराब अभिव्यक्तियों को रोकने के लिए कर सकते हैं, इससे पहले कि वे अपने बदसूरत सिरों को उठाएं, इससे पहले कि वे नुकसान पहुंचाए और नाश करें। नुकसान हो जाने पर बहुत देर हो जाएगी। इसलिए, हम उन देशों में क्षमता और प्रतिबद्धता को मापने के लिए मैट्रिक्स को इकट्ठा करने का भी काम कर रहे हैं, जहाँ हम काम करते हैं। और इनमें से कुछ मैट्रिक्स उदार लोकतंत्र, सिविल सोसाइटी की क्षमता और सरकारी नीतियों का समावेशन जैसी चीजों पर विशेष रूप से देखते हैं। और हम मानते हैं कि असहिष्णुता के बढ़ने पर ये सूक्ष्म संकेत और चेतावनियों के रूप में कार्य कर सकते हैं। आधिकारिक घुसपैठ – हम जानते हैं कि इनका हमेशा अनुमान नहीं लगाया जा सकता हैं, या यहाँ तक कि रोका भी नहीं जा सकता है, लेकिन हमारे लिए सतर्क रहने के अलावा और कोई बहाना नहीं है।

और अंत में, USAID में, दूसरों के साथ साझेदारी में, हमारा लक्ष्य जातीय और धार्मिक बहुलतावाद को मजबूत और सुदृढ़ करना है, जहाँ यह ऐतिहासिक रूप से विद्यमान रहा है। यह आस्था के विषय के बारे में नहीं है; यह कभी नहीं है। यह अनेक आस्था की परंपराओं के लिए समाज की सहिष्णुता के बारे में है। हमारा मानना है कि धार्मिक बहुलतावाद, जो सांस्कृतिक मोज़ेक का हिस्सा है, हम मानते हैं कि यह विकास के साथ-साथ हमारे मूल्यों की अभिव्यक्ति के रूप में संरक्षित करने योग्य है।

और इस काम के लिए सबसे स्पष्ट मामलों में से एक उत्तरी इराक में है। इसलिए, अधिकांश इराकी अल्पसंख्यक समूहों को “घटक समूह” के रूप में संदर्भित करते हैं। और मुझे यह समझ में नहीं आया कि इसका मतलब क्या था; मुझे इसका महत्व समझ में नहीं आया। और कोई मेरे पास आया और बोला, ” अरबी में इसका एक बहुत ही खास और शक्तिशाली अर्थ है। इसका तात्पर्य है कि इराकी समाज उस राष्ट्रीय मोज़ेक के ईसाई और यज़ीदी घटकों के बिना अधूरा है। ”

इसलिए, इराकी नेता इसे मानते हैं। हमें उन्हें अपने देश के लिए उनकी संकल्पना को साकार करने में उनकी मदद करनी चाहिए। आखिरकार, यह ISIS शासन की बुराइयों से पहले था। इस तरह ईसाईयों, यज़ीदियों और अन्य अल्पसंख्यकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान देते हुए, राहत और समर्थन प्रदान कर USAID उत्तरी इराक में तेजी से आगे बढ़ने के लिए काम कर रहा है, ताकि वे घर लौट सकें और अपने जीवन और अपने समुदायों का पुनर्निर्माण कर सकें।

वर्ष 2017 के अक्टूबर से, U.S. सरकार ने बुनियादी सहायता उपलब्ध कराने और जीवन रक्षा सहायता, स्कूलों तथा अस्पतालों, पॉवर स्टेशनों और कुओं जैसी चीजों का पुनर्निर्माण करने के लिए मानवीय और स्थिरीकरण सहायता में लगभग $118 मिलियन को सहायता राशि दी है – आजीविका का उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है। यह निधि बेशक आस्था का पुनर्निर्माण नहीं कर सकती है, न ही यह मस्जिदों या धार्मिक स्थलों या चर्चों का पुनर्निर्माण कर सकती है। लेकिन अगर हम इसे सही तरीके से करते हैं, आप और मैं एक साथ काम करते है, तो उनमें शायद कुछ आशा का संचार हो सकता है।

और अधिक करना है। न केवल उत्तरी इराक के लिए, बल्कि कहीं और के लिए भी। हम हमले के दौरान भी धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति काम करेंगे। और अगर मैं यहाँ यह उल्लेख नहीं करता हूँ तो यह मेरी अशिष्टता होगी कि यह वह क्षेत्र है जहाँ आस्था-आधारित संगठनों के साथ वह साझेदारियाँ अपरिवर्तनीय हैं। यह एकमात्र तरीका है, जिससे यह काम बन सकेगा। यह एकमात्र तरीका है जिससे हम प्रभावी होंगे।

जैसे-जैसे मैं समापन की ओर बढ़ता हूँ, और जब हम आज अपना संवाद समाप्त करते हैं, मैं वास्तव में इस ऐतिहासिक मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए सेक्रेटरी पोम्पेयो और राजदूत ब्राउनबैक का पुनः धन्यवाद करता हूँ। और मैं इस काम के लिए इतनी शिद्दत से काम करने वाले उप राष्ट्रपति पेंस का धन्यवाद करता हूँ, और उस काम के लिए भी, जिस काम को करने की हम कोशिश कर रहे हैं। रोनाल्ड रेगन ने एक बार कहा था, “स्वतंत्रता तभी प्रगति करती है, जब धर्म उल्लासपूर्ण होता है।” आज हम उस संकल्पना की पुनः पुष्टि करते हैं। आज, हम इसकी रक्षा में हमारी भूमिका की पुनः पुष्टि करते हैं।

मैं आप सभी को यहाँ आने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं; मैं आपके द्वारा किए गए हर कार्य के लिए आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ। अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप जो भी करने जा रहा हूँ, मैं उस सभी के लिए आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ। यह यात्रा का मात्र एक और कदम है, जिसे हम सभी को उठाना ही होगा। यदि ऐसा करने में हम नाकाम होते है, जैसा कि थॉमस जैफरसन ने हमें चेतावनी दी थी, जैसा कि महान सायरस ने चेतावनी दी थी, तो इससे हमारी स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न हो जाएगा। धन्यवाद।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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