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वारसॉ मंत्रिस्तरीय वार्ता में दोपहर के भोजन पर हुई बातचीत में उप-राष्ट्रपति पेंस द्वारा टिप्पणियाँ

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टिप्पणियाँ
14 फरवरी, 2019
विदेश नीति

 

PGE राष्ट्रीय स्टेडियम
वारसॉ, पोलैंड
दोपहर 12:34 CEST

उप राष्ट्रपति:   प्रधान मंत्री मोरवीसकी, प्रधानमंत्री नेतन्याहू, सेक्रेटरी पोम्पेयो, महामहिम: “मिडिल ईस्ट में शांति और सुरक्षा के भविष्य को बढ़ावा देने के लिए अपनी तरह की पहली मंत्रिस्तरीय वार्ता” के लिए आपके साथ जुड़ना एक सम्मान है, और मैं आप सभी के साथ यहां आकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।

जबकि मैं शुरुआत करता हूं, मुझे अभिवादन करने की अनुमति दें – यहां एकत्र हुए प्रत्येक राष्ट्र के मित्र और मिडिल ईस्ट में शांति और सुरक्षा के चैंपियन की ओर से शुभकामनाएं देने की अनुमति दें ।  मैं संयुक्त राज्य अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से शुभकामनाएं लाता हूं।

दो साल पहले, राष्ट्रपति ट्रम्प ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा की, जब उन्होंने मिडिल ईस्ट की यात्रा की।  वहां राष्ट्रपति ने पूरे क्षेत्र के 50 देशों के नेताओं का एक ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित किया था, जो कि अरब इस्लामिक अमेरिकी शिखर सम्मेलन था।

जैसा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने उस समय कहा था, “सभ्यता का जन्मस्थान एक नया पुनर्जागरण शुरू करने की प्रतीक्षा कर रहा है।”  उन्होंने हमें मिलकर काम करने की चुनौती दी, साथ ही उन्होंने कहा, “इतिहास का महान परीक्षण चरमपंथ पर और आतंकवाद पर विजय प्राप्त करना है”।

और मैं आज राष्ट्रपति की ओर से, 50 से अधिक देशों के नेताओं की एक और अभूतपूर्व सभा से, यह कहने के लिए खड़ा हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका उन सभी लोगों के साथ इस महान चुनौती का जवाब देने और हमारी साझी शांति की नियति को हासिल करने के लिए तैयार है।

हम में से प्रत्येक विभिन्न राष्ट्रों और संस्कृतियों से आते हैं।  हमारे लोग अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं।  वे इब्राहि की परंपरा से और उससे से भी परे के विभिन्न धर्मों में पक्का विश्वास रखते हैं। लेकिन हम सभी मिडिल ईस्ट में सुरक्षा और समृद्धि के उज्जवल भविष्य का निर्माण करने के लिए अपने मिशन में एकजुट हैं।

दशकों से, मिडिल ईस्ट के लोगों को पीड़ित किया गया, उनके देश को उन सुरक्षा खतरों ने अस्थिर और नष्ट कर दिया गया जो आज हमारे सामने मौजूद हैं – सांप्रदायिक- चलित नागरिक युद्धों से लेकर जानलेवा तानाशाही तक।

और कल रात, आधुनिक मिडिल ईस्ट के इतिहास में पहली बार, लगभग हर प्रमुख देश के प्रतिनिधियों ने संयुक्त चिंता के मामलों पर खुलकर और सार्वजनिक रूप से चर्चा की।

संयुक्त राज्य अमेरिका और पोलैंड एक उज्जवल भविष्य की उम्मीद के संकेत के रूप में सहयोग के इस बाहरी प्रतीक का स्वागत करते हैं जो मिडिल ईस्ट के देशों की प्रतीक्षा करता है।

हम एक बेहतर कल के वादे पर आज एक साथ इकट्ठा हुए हैं, और हम आम खतरों की वजह से जिनका हम सामना कर रहे हैं, के लिये आज एक साथ इकट्ठा हुए हैं।  और कोई भी खतरा कट्टरपंथी इस्लामवादी आतंकवाद और उस क्षेत्र से व्यापक दुनिया में निर्यात करने वाले सत्तावादी शासकों की तुलना में अधिक खतरनाक या अधिक ज़रूरी नहीं है।

कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद कोई सीमा नहीं जानता।  यह संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़रायल, और मिडिल ईस्ट और दुनिया भर के राष्ट्रों को लक्षित करता है।  यह ईसाईयों, यहूदियों और मुसलमानों के जीवन को नष्ट करते हुए किसी पंथ का सम्मान नहीं करता।  और कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद पाशविक बल के अलावा कोई वास्तविकता नहीं समझता है।

लगभग 200 वर्षों से, ओमान के साथ हमारी मित्रता और वाणिज्य की संधि के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका मिडिल ईस्ट में अच्छाई के लिए एक ताकत रहा है।

मेरे देश में पिछले प्रशासन ने भी अक्सर इस खतरे को कम करके आंका जो कि कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद अमेरिकी लोगों, हमारी मातृभूमि, हमारे सहयोगियों और हमारे सहयोगियों को पेश करता है।  उनकी निष्क्रियता ने U.S.S. कोल से लेकर;  11 सितंबर तक के आतंकवादी हमलों को देखा है; सीरिया और इराक से लेकर – बगदाद के उपनगरों तक पहुंचने ISIS के विस्तार को देखा है।  लेकिन जैसा कि पिछले दो वर्षों में दुनिया ने देखा है, राष्ट्रपति ट्रम्प के तहत, वे दिन खत्म हो गए हैं।

पहले दिन से, राष्ट्रपति ट्रम्प ने विश्व मंच पर अमेरिकी नेतृत्व को बहाल किया है।  और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को लागू करके, हमने अमेरिकी मातृभूमि की रक्षा करने, अमेरिकी समृद्धि को बढ़ावा देने, अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने और शक्ति के माध्यम से शांति को बनाए रखने के लिए निर्णायक कार्रवाई की है।

राष्ट्रपति ट्रम्प के नेतृत्व में, संयुक्त राज्य अमेरिका एक बार फिर से अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि को पहल दे रहा है।  लेकिन जैसा कि पिछले दो वर्षों ने दिखाया है, मिडिल ईस्ट और व्यापक दुनिया भर में, “अमेरिका फर्स्ट” का मतलब अकेला अमेरिका नहीं है।

और मिडिल ईस्ट में, संयुक्त राज्य अमेरिका, जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा, “राष्ट्रों का एक गठबंधन जो चरमपंथ को रोकने और हमारे बच्चों को भगवान का सम्मान करने वाले एक आशावादी भविष्य प्रदान करने के उद्देश्य को साझा करता है”, का निर्माण करने के लिए काम कर रहा है ।

और परिवर्तन की इन हवाओं को मिडिल ईस्ट में महसूस किया जा सकता है।  इज़रायल के प्रधानमंत्री खुले तौर पर ओमान का दौरा करते हैं।  अभी पिछले सप्ताह ही, पोप फ्रांसिस ने संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया।  लंबे समय से दुश्मन रहे देश अब भागीदार बन रहे हैं।  पुराने दुश्मनों को सहयोग करने के नए अवसर मिल रहे हैं।   और आईज़ैक और इश्माएल के वंशज आम हित के लिए एक साथ जुड़ रहे हैं जैसा पहले कभी नहीं हुआ।  यह ऐतिहासिक सम्मेलन इस सच्चाई का प्रमाण है कि एक नए युग की शुरुआत हुई है।

हमारे सहयोगियों के साथ मिलकर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने पृथ्वी के चेहरे से कट्टर इस्लामिक आतंकवाद को समाप्त करने के लिए हमारी सेना की पूरी ताकत लगा दी है।

हमने कट्टर इस्लामिक आतंकवादियों को उनकी शर्तों पर, उनकी धरती पर और हमारी अपनी शर्तों पर लड़ाई लड़ी है।  राष्ट्रपति ट्रम्प ने हमारे कमांडरों को क्षेत्र में ISIS को मारने और उन्हें हराने के लिए आवश्यक अधिकार दिए।  और हमारे सैन्य बलों की बहादुरी के चलते और हमारे 78 गठबंधन साझीदारों के प्रयासों के फलस्वरूप, हमने कई लाखों लोगों को आजाद करवाया है। इराकी, सीरियाई, अरब, कुर्द, मुस्लिम, ईसाई, पुरुष, महिलाएं और बच्चे।  और बहुत जल्द, ISIS की खिलाफत वाला इलाका भी उनके हाथ से निकल जाएगा।

इन उपलब्धियों को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि अमेरिका क्षेत्र में अपने साझेदारों को लड़ाई की कमान सौंपने के बाद अपनी फौजें वापस बुला लेगा।

यह काम करने के तरीके में बदालव है, मिशन में नहीं।  अमेरिका क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति बरकरार रखेगा।  हम मानते हैं कि खलीफा के अधिकार क्षेत्र पर दोबारा कब्जा कर लेना ही पर्याप्त नहीं है।  जैसा कि हम नए चरण में प्रवेश कर गए हैं, अमेरिका अपने सहयोगियों और उन लोगों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़ा रहेगा, जो इस अभियान में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं।

और अपने संगठन के सहयोगियों के साथ काम करते हुए हम ISIS के बाकी सदस्य जहां और जब भी दिखाई पड़ेंगे, उनका शिकार करना जारी रखेंगे।  और अमेरिका मिडिल ईस्ट की शांति, समृद्धि और मानवाधिकारों में प्रगति के लिए क्षेत्र में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मजबूती से खड़ा रहेगा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका इज़रायल और फलस्तीन के बीच स्थायी शांति की स्थापना के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

सीरिया में, राष्ट्रपति ट्रम्प ने हमारे फ्रांसीसी और ब्रिटिश सहयोगियों के साथ मिलकर सीरिया के रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का जवाब देने के लए अमेरिकी सैन्य ताकत का उपयोग किया।  और अमेरिका तथा हमारे सहयोगी निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को कभी बर्दास्त नहीं करेंगे।  हम असद शासन द्वारा आगे भी किसी तरह के रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

इन कार्रवाइयों और स्थितियों तथा कई अन्य के साथ, अमेरिका पुराने संबंधों को मज़बूत कर रहा है और नई साझेदारी बना रहा है।  राष्ट्रपति ट्रम्प एक ऐसे नेता हैं जो ताकत के बल पर मुक्त दुनिया का नेतृत्व करना चाहते हैं।  हम अपने सहयोगियों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे और अपने मूल्यों की रक्षा करेंगे।

अमेरिका अपने सहयोगी इज़रायल के साथ देने में कभी विफल नहीं होगा।  हम निर्दोष नागरिकों या मुक्त और स्वतंत्र प्रेस पर हमले को कभी माफ नहीं करेंगे, यहां तक कि हम जमाल खशोगी की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे तक लाने की मांग करते रहेंगे।

लेकिन आज हम यहां उसकी बदौलत हैं जो हमें एकजुट करता हैः मिडिल ईस्ट में सुरक्षा, समृद्धि, और मानवाधिकारों की प्रगति में हमारी साझा प्रतिबद्धता – और उस उज्जवल भविष्य के लिए इकलौते खतरे से लड़ाई की हमारी साझा जिम्मेदारी।

पिछली रात असाधारण थी।  इस ऐतिहासिक सम्मेलन के शुरू में ही क्षेत्र के नेता इस पर सहमत थे कि मिडिल ईस्ट में शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा इस्लामिक राष्ट्र ईरान है।

चालीस साल पहले इसी महीने में मुल्लों ने उस देश पर नियंत्रण कर लिया था।  और तब से हर साल, वे आतंकी संगठनों और मिलीशिया-हिजबुल्ला और हमास को समर्थन दिया है; मिसाइलों का निर्यात किया है; सीरिया, यमन और उससे भी आगे सघर्षों को भड़काया है।

ईरानी शासन दुनियाभर में सरकार प्रायोजित आतंकवाद की अगुवाई कर रहा है।  उन्होंने अमेरिकी दूतावासों पर हमले किए, सैकड़ों अमेरिकी सैनिकों की हत्या की, और यहां तक कि आज भी अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के नागरिकों को बंधक बनाकर रखा है।

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को बेशर्मी से धता बताया है, प्रस्तावों का उल्लंघन किया है, और यूरोपीय जमीन पर आतंकी हमलों की साजिश रची है।

जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा, “ईरानी शासन ने अपने लोगों के हकों को मारकर अराजकता और आतंकवाद को धन मुहैया कराया है।”

तेहरान की तानाशाही सत्ता ने सभा करने और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचला है, धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताया है, महिलाओं पर अत्याचार किए हैं, समलैंगिकों को फांसी पर लटकाया है, और खुलेआम इज़रायल को खत्म करने की वकालत करती है।  अयातुल्ला खुमैनी ने खुद कहा है, “इज़रायल को नक्शे से मिटाना ईरानी इस्लामिक गणराज्य का मिशन है।”

आज दिन बाद के पहर में, मेरी पत्नी और मैं यहूदी जवानों के स्मारक स्थल वारसॉ घेटो (बस्ती) पर माल्यार्पण करेंगे।  और कल, हम आस्वित्ज़ के अपने पहले दौरे पर नरसंहार के शहीदों को अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित करेंगे।

नाज़ी कब्जे वाले काले समय से पोलैंड को लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि यहूदी विरोधी भावना सिर्फ गलत ही नहीं है, बल्कि यह बुराई भी है।  और यहूदी विरोधी भावना जब भी और जहां कहीं भी पैदा हो उसका निश्चित रूप से प्रतिकार होना चाहिए, और दुनिया भर में उसकी हर हाल में निंदा होनी चाहिए।

लेकिन, अपनी घृणित भाषा के अलावा ईरानी शासन खुलेआम दूसरे नरसंहार की वकालत करता है और इसे हासिल करने के लिए साधन जुटाने में भी लगा है।  ईरान अयातुल्ला की आधुनिक तानाशाही के अंतर्गत प्राचीन फारसी सल्तनत को कायम करना चाहता है।  जैसा कि हम कह रहे हैं, ईरान अपनी सेना और अपनी विचारधारा के प्रसार के लिए इराक, सीरिया, और लेबनान से होते हुए एक प्रभावशाली गलियारा बनाना चाहता है।  और इसके लिए उसने हर तरफ बर्बादी के निशान छोड़े हैं।

सीरिया में, ईरानी सैनिक असद सरकार की मदद कर रहे हैं, अपने ही लोगों के खिलाफ तानाशाह की क्रूर लड़ाई को बढ़ावा दे रहे हैं।

लेबनान में, ईरान अपने छद्म संगठन हिजबुल्ला के ज़रिए आधुनिक तकनीक वाले एक लाख से ज्यादा रॉकेट और मिसाइलों का जखीरा बना रखा है।

यमन में, सरकार के खिलाफ लड़ाई छेड़ने वाले हूती विद्रोहियों को रॉकेट दे रहा है, पूरे देश में अराजकता फैला रखा है।

और इराक में, ईरान समर्थित मिलीशिया ने इराकी सरकार के समानांतर व्यवस्था बना रखी है – अमेरिकी हितों को निशाना बना रहे हैं, अल्पसंख्यकों को धमका रहे हैं, और ISIS के अत्याचारों से मुक्त होने के बाद संभलने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भेजी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद पर डाका डाल रहे हैं।

और इसके अलावा पूरे क्षेत्र में ईरान के दखल के चलते असाधारण मानवीय संकट पैदा हो गया है।  सीरिया में, 5.7 मिलियन लोगों को अपने घरों को छोड़कर भागना पड़ा है।

यमन में, एक मिलियन से ज्यादा लोग हैजे की चपेट में हैं, लाखों लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।  भूखमरी की ऐसी हालत है कि हर दस मिनट में एक बच्चे की मौत हो रही है। इन मौतों को रोका जा सकता है।

इराक में, भले ही ISIS खलीफा का खात्मा हो गया है, 1.8 मिलियन से ज्यादा इराकी अभी अपने घरों को नहीं लौटे हैं।

मिडिल ईस्ट में सताए गए लोगों की दुर्दशा और उनके उत्पीड़कों के खतरों के चलते अमेरिका को कार्रवाई करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।

हमारे बहादुर सैनिकों को धन्यवाद, जिनके चलते पांच मिलियन लोग अब ISIS के चंगुल से मुक्त हैं।

और अमेरिकी लोगों की उदारता के चलते, अमेरिका मिडिल ईस्ट में कई तरह के संकटों से जूझ रहे पीड़ितों को $9 बिलियन से ज्यादा का मानवीय सहयोग और नागरिक सहायता उपलब्ध करा चुका है – पृथ्वी पर किसी भी एक देश द्वारा मुहैया कराई गई मदद से यह ज्यादा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका मिडिल ईस्ट में भलाई की एक ताकत के रूप में रहा है।  लेकिन ईरान में मुल्ला शासन के तहत, वहां के लोगों के लिए, भ्रष्टाचार के 40 साल, अत्याचार के 40 साल, आतंकवाद के 40 साल, और असफलता के 40 साल रहे हैं।

और बहुत लंबे समय से, अमेरिका कट्टरपंथी इस्लामवाद के खतरे को दूर करने की कोशिशों में जुटा है, जो इस्लाम के शिया और सुन्नी दोनों ही धड़ों में मौजूद है; एक ऐसा कट्टरवाद जो विरोध और विचलन को कुचल देना चाहता है।

पूर्व प्रशासन की किसी भी कीमत पर शांति बहाली की इच्छा के चलते हमारे साझा दुश्मन-मिडिल ईस्ट में हमारे सहयोगियों और साझेदारों के दुश्मन-को अपने मन मुताबिक मोल-तोल करने का मौका दे दिया।

लेकिन, इस प्रशासन के पहले दिन से ही, राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के भले लोगों के साथ और उन पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ खड़े होने का वादा किया था।  और ठीक वैसा ही हमने किया भी।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के विनाशकारी परमाणु समझौते से हटकर अपने वादे को पूरा भी किया।  तथाकथित संयुक्त विस्तृत कार्ययोजना भी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोक पाई।  इसने ईरान द्वारा विनाशकारी हथियारों को हासिल करने की तारीख में थोड़ा विलंब करने भर का काम किया।

और उल्लेखनीय रूप से, कल रात इसी सम्मेलन को संबोधित करने वाले लोगों ने यह भी बताया कि JCPOA पर हस्ताक्षर करने के बाद ईरान की आक्रामकता बढ़ी ही कम नहीं हुई।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने उन प्रतिबंधों को फिर से लागू किया है जिन्हें पहले ही कभी नहीं उठाया जाना चाहिए था और हमने ईरानी शासन को उसके अपने ब्रांड के आतंक के वित्तपोषण और दुनिया भर में विनाश को रोकने के लिए एक नया अभियान शुरू किया है।

और उसके बाद, संयुक्त अरब अमीरात ने ईरानी कंडेंसेट का आयात रद्द कर दिया।  बहरीन अपने देश में सक्रिय ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के छिपे हुए लोगों को उजागर किया है, और वह क्षेत्र में ईरान की अवैध समुद्री गतिविधियों को रोकने के लिए काम कर रहा है।  और दुनिया भर के देश ईरानी तेल आयात घटाकर शून्य तक ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

लेकिन अफसोस, हमारे कुछ यूरोपीय सहयोगी इतना अधिक सहयोग नहीं दे रहे हैं।  असल में, उन्होंने हमारे प्रतिबंधों को तोड़ने का तंत्र खड़ा करने के प्रयास की अगुवाई की है।

ठीक दो हफ्ते पहले, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने एक ऐसे वित्तपोषण तंत्र के निर्माण की घोषणा की है जो ऐसे मिलते-जुलते लेनदेन की निगरानी के लिए तैयार किया गया है जो कि ईयू कारोबारों और ईरान के मध्य प्रतिबंध योग्य अंतर्राष्ट्रीय भुगतानों को बदल देगा।

वे इस योजना को “विशेष प्रयोजन यान” कहते हैं।  हम इसे ईरान के हत्यारे क्रांतिकारी शासन के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों को तोड़ने का एक प्रयास कहते हैं।  यह एक अविवेकपूर्ण कदम है जो सिर्फ ईरान को मज़बूत बनाएगा, यूरोपीय संघ यानी ईयू को कमज़ोर करेगा और यूरोप तथा अमेरिका के बीच खाई को और अधिक चौड़ा करेगा।

कुछ लोग दलील देते हैं कि ईरान समझौते की संकीर्ण शर्तों के साथ तकनीकी रूप से अनुपालन में है।  लेकिन मुद्दा अनुपालन नहीं है; बल्कि समझौता ही मुद्दा है।

आज, ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध इतिहास में सबसे कठोर हैं और तब तक ऐसे ही सख्त बने रहेंगे जब तक कि ईरान अपना खतरनाक और अस्थिरता फैलाने वाला व्यवहार बदल नहीं देता।  जैसा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है, “वहां काफी अधिक तकलीफ, मौत और बर्बादी होती रही है।  आइए, अब इसे खत्म करें।”

वह समय आ गया है जब हमारे यूरोपीय साथी हमारे और ईरानी लोगों के साथ खड़े हों; क्षेत्र में हमारे सहयोगियों और दोस्तों के साथ खड़े हों।  हमारे यूरोपीय भागीदारों के लिए ईरान परमाणु समझौते से हटने और हमारे साथ जुड़ने का समय आ गया है क्योंकि हम ईरानी लोगों, उस क्षेत्र और दुनिया को वह शांति, सुरक्षा और आज़ादी देना चाहते हैं, जिसके वे सर्वथा योग्य हैं।

हमें इस अवसर को कतई हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।  जून 2009 में, सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए ईरानी शासन ने एक चुनाव चोरी से हथिया लिया, पिछले प्रशासन ने उस वक्त अपनी आवाज़ उठाने से इन्कार कर दिया था जब ईरानी लोग इस चुनाव चोरी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। इसे ही “ग्रीन मूवमेंट” कहा गया।  तब तक कुछ नहीं किया गया जब तक कि अमेरिकी कांग्रेस ने ईरानी लोगों को अपना समर्थन नहीं दे दिया।

कांग्रेस के एक सदस्य के रूप में, यह मेरा विशेषाधिकार था कि मैं एक निष्पक्ष प्रस्ताव पेश करूं जो कि ज़बर्दस्त बहुमत से पारित हो गया जिसने अमेरिकी लोगों का समर्थन दिखाया, और उसके बाद ही हमारे प्रशासन इसके अनुसरण में आया।  लेकिन जल्द ही, अयातुल्ला और उनके गुर्गों ने स्वतंत्रता-प्रेमी ईरानियों की हत्या, कैद और उन्हें भयभीत करने के लिए दुनिया की कायरता का इस्तेमाल इसे ढकने के लिए किया।

दुनिया ने पिछली बार ईरानी शासन से मुकाबला करने का अवसर गंवा दिया, लेकिन इस बार नहीं।  इस बार, हम सभी को मज़बूती से खड़ा होना होगा।  चूंकि ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, जैसा कि ईरानी लोग सड़कों पर उतर जाते हैं, स्वतंत्रता-प्रेमी देशों को ईरानी शासन को उस बुराई और हिंसा के प्रति जिम्मेदार ठहराने के लिए एक साथ खड़ा होना होगा, जो अपने लोगों, इस क्षेत्र और व्यापक दुनिया के खिलाफ होती है।

इसलिए यहां एकत्र आप सभी जो मिडिल ईस्ट में शांति और सुरक्षा के लिए इस नज़रिए को साझा करते हैं, मैं आपको संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति और अमेरिकी लोगों की ओर से एक वादा करता हूं: यदि आप इस अच्छे काम के लिए हमारे साथ खड़े होंगे, तो हम भी आपके साथ खड़े होंगे।  एक साथ मिलकर, हम एक साझा भविष्य को गले लगाएंगे, जो कि विगत की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं पर निर्मित होगा।

यह विचार करना उल्लेखनीय है कि करीब 4,000 साल पहले कसदियों के उर में अपना घर छोड़ने और उत्तर की एक लंबी यात्रा शुरू करने के लिए बुलाया गया था।  उसने कोई राजमुकुट नहीं पहना था।  उसके पास कोई सेना नहीं थी।  उसने कोई चमत्कार नहीं किए।  उसने कोई भविष्यवाणी नहीं की।  फिर भी उससे वादा किया गया था, उन प्राचीन शब्दों में, “उतनी बड़ी संख्या में वंशज जितने कि आकाश में तारे।”

आज, यहूदी, ईसाई और मुसलमान – पृथ्वी की आधी से अधिक आबादी और मिडिल ईस्ट के लगभग सभी लोग – अपनी आस्था में अब्राहम को अपना पूर्वज होने का दावा करते हैं।  और इसलिए वह है।

और जैसा कि हम इस ऐतिहासिक सम्मेलन में एकत्र हुए हैं, मेरा मानना है कि उस अब्राहम से जुड़ी परंपरा की बुनियाद पर, हम सभी लोगों और मिडिल ईस्ट के सभी धर्मों के उज्जवल भविष्य के लिए एक मजबूत आधार पा सकते हैं।  और यह हमारी कल्पना का हिस्सा भर नहीं होती है।  ऐसा असल में हो रहा है, हमारे बोलते वक्त भी।

हमें इसके उदाहण के रूप में जेरूशलम के पुराने शहर से और आगे देखने की आवश्यकता नहीं है कि जो कि इस पूरे क्षेत्र के लिए सच हो सकता है।  वहां, हम तीन महान धर्मों के अनुयायियों को एक-दूसरे के निरंतर संपर्क में देख रहे हैं।  हम देख रहे हैं कि प्रत्येक आस्था नए रूप में जीवंत हो रही है और हर दिन नया रूप ले रही है।

हरम अल-शरीफ में, हम युवा मुसलमानों के प्रार्थना में झुके सिर देख रहे हैं।  चर्च ऑफ सेपुका में, हम एक ईसाई बच्चे को बपतिस्मा होते देख रहे हैं।  और वेस्टर्न वॉल में, हम एक यहूदी लड़के का बार मित्ज़वाह देख रहे हैं।  हम वहां जो देखते हैं, उसे हासिल कर सकते हैं और पूरे मिडिल ईस्ट में रह सकते हैं।  यही राष्ट्रपति ट्रम्प का विज़न है।  और यही हमारे देश और दुनिया भर में शांतिप्रिय लोगों की आशा और आकांक्षा है।

तो आज आप सब के साथ रहना सम्मान की बात है।  यहां एकत्र सभी महामहिमों को; और हमारे मेजबान देश पोलैंड को हम शुक्रिया कहते हैं।  यहां मौजूद रहने के लिए आपको धन्यवाद।

और जो कोई भी संदेह करता है कि क्या आखिरकार मिडिल ईस्ट में शांति आ सकती है, तो मुझे लगता है कि हम उस वादे को अच्छी तरह समझेंगे जो उस आदमी से किया गया था जिसका मैंने जिक्र किया था जिसने इतनी सदियों पहले वह यात्रा की थी।  यह उन प्राचीन शब्दों में एक वादा था, कि “मैं आपको यकीनन आशीषों से नवाजूंगा।”

मेरे मन-मस्तिष्क को पूर्ण विश्वास है कि हम उस आशीर्वाद पर इस क्षेत्र और दुनिया के सभी लोगों की खातिर हमारे लिए और हमारी समृद्धि के लिए नए सिरे से दावा कर सकते हैं।  अगर हम यह दावा आस्था से करते हैं और यह दावा एक साथ करते हैं, तो मुझे विश्वास है कि ईश्वर यकीनन हमें शांति से नवाजेगा।  तो शुरुआत करें।  धन्यवाद, भगवान आपका भला करे।  (तालियाँ बजती हैं।)

समाप्ति


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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