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मानवाधिकार और ईरानी शासन

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विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो का संबोधन
तत्काल जारी करने के लिए
दिसंबर 19, 2019
डीन एचेसन सभागार
वाशिंगटन डी.सी.

 

विदेश मंत्री पोम्पियो: धन्यवाद। सुप्रभात। आप सभी का धन्यवाद। सभी को नमस्कार। कैसा है आज आपका दिन? सब ठीक तो हैं?

यहां विदेश विभाग में ये एक महत्वपूर्ण दिन है, और यहां उपस्थित होने के लिए मैं आपका आभारी हूं। बॉब, उदारता से परिचय कराने के लिए धन्यवाद, और मुझे यहां अमेरिकी विदेश विभाग में आप सभी का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है।

मुझे ईरानी प्रवासी समुदाय के अपने दोस्तों की मेज़बानी करते हुए विशेष हर्ष हो रहा है। आपकी सफलता इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि पूरी क्षमता बाहर आने का अवसर मिलने पर ईरान के लोग क्या कुछ कर सकते हैं।

और बेशक, मैं श्रोताओं के बीच मौजूद उन बहादुर ईरानियों का खास स्वागत करना चाहूंगा जिन्होंने ईरानी शासन के उत्पीड़न को झेला है और उसका शिकार रहे हैं। आप सभी का धन्यवाद आज यहां हमारे बीच उपस्थित होने के लिए। ये मेरे लिए विनम्रता का क्षण है और आपकी उपस्थिति मेरे लिए सम्मान की बात है।

श्रोताओं की विविधता को देखकर मुझे अच्छा लग रहा है। हमारे बीच सांसद मौजूद हैं। हमारे सामने गैर-सरकारी संगठनों के समुदाय के तमाम लोग हैं जो ईरान के इस्लामी गणराज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

हमारे बीच विदेश नीति समुदाय के तमाम लोग, विदेश विभाग की हमारी टीम के बहुत सारे सदस्य और राजनयिक सेवा के लोग उपस्थित हैं।

आप सभी का यहां उपस्थित होने के लिए धन्यवाद।

मैं समझता हूं कि आज यहां उपस्थित श्रोताओं की विविधता और उनकी संख्या, ईरानी जनता और ईरानी सपनों को अमेरिका के समर्थन से जुड़ने की दुनिया की इच्छा के बारे में बहुत कुछ कहती है।

हम दुनिया में स्वतंत्रता के सबसे बड़े समर्थक के रूप में अमेरिका की विरासत को संभालने का काम करते हैं, जैसाकि हम अपने राष्ट्र की स्थापना के समय से ही कर रहे हैं।

जब हम ऐसा करते हैं, हम ईरानी जनता को बता रहे होते हैं कि पूरी दुनिया और अमेरिका में उनके मित्र हैं जो उनके साथ हो रही ज़्यादती के मद्देनज़र न्याय की मांग कर रहे हैं।

वास्तव में ईरानी सरकार द्वारा अपने ही लोगों के साथ किया जा रहा अन्याय और मानवाधिकारों का हनन ही वो मुद्दा है जिसने हम सभी को आज यहां एकजुट किया है, कि जिसके बारे में आज मैं आपके साथ कुछ मिनट बात करना चाहता हूं।

ईरानी शासन के नेताओं के लिए मेरा एक संदेश है:

यदि आप अपनी जनता और दुनिया से दोबारा सम्मान पाना चाहते हैं…

यदि आप कभी महान रहे अपने राष्ट्र के लिए स्थिरता और समृद्धि की कामना करते हैं…

तो आपको पहले अपने दिये हुए वादों को पूरा करना होगा। आपको लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान करना होगा।

इस संगोष्ठी, इस सभा के लिए अभी से बेहतर कोई अवसर नहीं हो सकता था। नवंबर में शुरू हुआ और फैला विरोध प्रदर्शन स्पष्ट संदेश देता है कि ईरानी लोग अब तंग आ चुके हैं। वे ऊब चुके हैं।

वे ईरानी शासन की आर्थिक नाकामियों से तंग आ चुके हैं।

वे लूटतंत्र से तंग आ चुके हैं। 

और वे तंग आ चुके हैं एक ऐसे शासन से जो उन्हें उस बुनियादी और मौलिक मानव गरिमा से वंचित रखता है जोकि हम सभी को अपनी मानव प्रकृति की वजह से मिलती है।

ये किसी एक आयु वर्ग की बात नहीं है। अपनी आवाज़ उठाने वाले किसी एक वर्ग या लिंग के नहीं हैं।

वो हैं तेहरान की छात्राएं।

वो हैं मशहद के शिक्षक।

वो हैं मेहरशहर के युवक।

उन युवकों में से एक था पुया बख्तियारी। पुया एक ज़िंदादिल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर था, जिसे एल्विस का गाना “कान्ट हेल्प फॉलिंग इन लव विद यू” पसंद था, और वह, अपने ही शब्दों में, अपराधी और भ्रष्ट ईरानी नेतृत्व से ऊब चुका था.

पिछले महीने, वह अपने देशवासियों के साथ विरोध प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरा था. पुया की मां नाहिद भी विरोध प्रदर्शन में उसके साथ थीं। उन्होंने तय किया था कि साथ रहने के लिए वे एक-दूसरे का हाथ थामे रहेंगे, लेकिन जैसा कि आपने वीडियो में देखा, आपने देखा वहां अफरातफरी मची हुई थी। और जब सुरक्षा बलों ने भीड़ पर हमले करने शुरू कर दिए, वे एक-दूसरे से बिछुड़ गए।

फिर नाहिद को उस स्थिति का सामना करना पड़ा जो किसी भी मां-बाप के लिए सबसे बुरा दु:स्वप्न होता है। उन्होंने देखा कि साथ के प्रदर्शनकारी उनके बेटे के बेजान शरीर को थामे हुए हैं। उसे ईरानी शासन के सुरक्षा बलों ने सिर में गोली मार दी थी।

आज नाहिद अनेक अन्य माता-पिताओं की तरह, ईरान के अनेक अन्य बेहतरीन लोगों की तरह शोक मना रही हैं। पर वह ये भी कहती हैं, “अब पुया के आदर्श मेरे आदर्श हैं… मैं ईरान की जनता की आज़ादी को देखना और जश्न मनाना चाहती हूं।”

आज नाहिद जैसे बहुत से ईरानी गुस्से में हैं। यह भावना काफी लंबे समय से उबाल ले रही थी। अयातुल्ला और उसके क्रूर चेलों, जिन्होने रोष के जो बीज 40 साल पहले बोए थे, उन्हे अब बदलना होगा।

1979 में अपने पागलपन में उन्होंने खुले दिमाग वाले, उद्यमी और बेहतरीन ईरानी लोगों पर इस्लामी गणतंत्रीय क्रांति थोप दी थी।

आज भी ईरानी शासन विचारों पर नियंत्रण के लिए, अभिव्यक्ति पर नियंत्रण के लिए, और वास्तव में ज़िंदगियों पर नियंत्रण के लिए बेताब है।

पिछले साल के कुछ उदाहरणों को देखते हैं:

मार्च में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन तीन महिलाएं तेहरान मेट्रो पर फूल बांट रही थीं। उन्होंने हिजाब नहीं पहने थे।

शासन ने उन्हें 16 से 23 वर्षों तक क़ैद की सज़ा सुना दी। उन पर सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने और ‘नैतिक भ्रष्टाचार’ के आरोप लगाए गए।

दो महीने बाद, मई में, ईरानी सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के शिशु देखभाल केंद्रों में मुस्लिम बच्चों के साथ काम करने पर पाबंदी लगा दी।

अभी पिछले ही हफ्ते कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने, बस कुछ दिन पहले, रिपोर्ट जारी की है कि ईरान में इस वक़्त 11 पत्रकारों को क़ैद में रखा गया है। ईरान का खुफिया मंत्रालय ईरान के पत्रकारों के उम्रदराज़ परिजनों को डराने-धमकाने का अभियान चलाए हुए है।

ये कुछ उदाहरण, झलकियां भर हैं – शासन द्वारा 40 वर्षों से जनता के प्रति प्रदर्शित तिरस्कार भाव की झलकियां, ईरान की आंतरिक व्यवस्था को असंतुलित करने वाला तिरस्कार, ऐसा तिरस्कार जो इसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करता है और दुनिया भर के स्वतंत्रताप्रेमी लोगों की नज़रों में ईरान को एक ख़ारिज राष्ट्र बनाता है।

इस दुर्व्यवहार में एक बड़ा पाखंड भी है। इसलिए शासन द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के कई मामले इसके अपने ही घरेलू कानूनों को धता बताते हैं।

चालीस साल पहले इस महीने, शासन ने वर्तमान ईरानी संविधान को अपनाया था; वह अब भी लागू है।

संविधान के अनुच्छेद 9 में कहा गया है कि, “किसी भी व्यक्ति, समूह, या अधिकारी को ईरान की राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और सैन्य स्वतंत्रता या क्षेत्रीय अखंडता का तनिक भी उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।”

लेकिन – जैसा कि इराक और लेबनान में प्रदर्शनकारी कह रहे हैं – ईरान ने उनके साथ ठीक यही किया है। कितना बड़ा पाखंड है।

उसी संविधान के अनुच्छेद 14 में कहा गया है कि “ईरान के इस्लामी गणराज्य की सरकार और सभी मुसलमानों का कर्तव्य है कि गैर-मुसलमानों के साथ नैतिक मानदंडों के अनुरूप व्यवहार करें …और उनके मानवाधिकारों का सम्मान करें।”

पर यहूदियों, और ईसाइयों, और पारसियों – सभी ईरान में कानूनन मान्यता प्राप्त संप्रदाय हैं – को पूर्ण आज़ादी नहीं दी गई है।

क्रिसमस जब बस एक सप्ताह दूर है, मैं विक्टर बेट-टमराज़ को याद किए बिना नहीं रह सकता। वह एक ईसाई पादरी हैं जिनके घर पर लगभग पांच साल पहले एक क्रिसमस समारोह के दौरान छापा मारा गया था। वह और उनकी पत्नी और उनका बेटा सभी जमानत पर हैं, और जेल की सजा के खिलाफ अपील कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि उनकी बेटी डबरिना आज यहां हमारे साथ है। डबरिना, हमारे बीच उपस्थित होने के लिए धन्यवाद। (तालियां।)

वही दस्तावेज, वही संविधान, कहता है, “ईरान के सभी लोग, जिस किसी भी जातीय समूह या जनजाति के हों, उन्हें समान अधिकार प्राप्त हैं।” लेकिन शासन ईरान में कई जातीय अल्पसंख्यकों को दूसरे या तीसरे दर्ज़े का नागरिक मानता है।

संविधान का अनुच्छेद 27 सार्वजनिक रूप से एकत्रित होने और जुलूस निकालने की अनुमति देता है, लेकिन जब नागरिक अपनी आवाज़ उठाते हैं तभी वास्तव में उन पर शासन का हथौड़ा गिरता है।

उन हज़ारों ईरानियों की सोचें जिन्हें 1988 के विरोध प्रदर्शनों के बाद जेलों में मृत्युदंड दे दिया गया था। उन छात्रों का स्मरण करें जिन्हें 1999 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कत्ल कर दिया गया था।

और फिर 2009 के विरोध प्रदर्शनों की सोचें। हम सभी को “मेरा वोट कहां गया?” की पुकार की याद होगी। उन विरोध प्रदर्शनों में भी रक्तपात हुआ और सजाएं दी गईं – एविन जेल जैसी जगहों में भुगतने के लिए।

आज भी वही कहानी है।

नवंबर के मध्य से ईरानी शासन ने सैंकड़ो की संख्या में प्रदर्शनकारियों को मार डाला है, शायद 1,000 से अधिक को। शासन ने देश के भीतर जारी आतंक की झलक दुनिया तक नहीं पहुंचने देने के कोशिश में बुनियादी संचार साधन इंटरनेट को बंद कर दिया।

मैं कल्पना नहीं कर सकता, पर शासन क्या वास्तव में ये सोचता है कि ये रास्ता समृद्धि और ताकत का है? मैं नहीं समझता। मैं समझता हूं कि उनका नज़रिया अलग है।

मैं अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और प्रतिबद्धताओं से ईरान के मुंह मोड़ने के बारे में भी यही सवाल पूछता हूं।

ईरान अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का एक संस्थापक सदस्य है। लेकिन वहां का शासन पैसे की चोरी करता है, लोगों के पेंशन के पैसों को चूसता है। यह पैसा नागरिकों से उनके परिवारों की देखभाल करने के नाम पर ले लिया जाता है और इसे सीरिया और यमन के रेत में गोला-बारूदों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। श्रमिकों को संगठित करने वालों को खोज-खोज कर क़ैद किया जाता है और प्रताड़ित किया जाता है।

मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा में कहा गया है कि “किसी को भी यातना नहीं दी जा सकती” या “मनमाने तौर पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, और न ही हिरासत में रखा जा सकता है या निर्वासित किया जा सकता है।” परंतु ज़रा सोचिए ईरान के बहाई समुदाय के बारे में, सुन्नी अल्पसंख्यकों, या यहां तक कि गैर-धार्मिक व्यक्तियों के बारे जिन्हें अपनी विश्वास या बुनियादी मान्यताओं के कारण लगातार जेल और यातना और मृत्युदंड का सामना करना पडता है।

और ईरान नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय समझौते में भी शामिल है। यह बोलना भी विडंबनापूर्ण लगता है।

फिर भी, ईरान नौ वर्ष की लड़कियों और 13 वर्ष की उम्र के लड़कों को मृत्युदंड दिए जाने की अनुमति देता है। वास्तव में, दो 17 वर्षीय लड़कों को कथित तौर पर पिछले साल ही गुपचुप तरीके से मार डाला गया था। और हमने पिछले 30 दिनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर अचानक गोलियां बरसाकर हत्या करते देखा है।

हमें ये देखकर बहुत दुख होता है कि एक निर्दयी और भ्रष्ट अभिजात वर्ग प्राचीन और गौरवशाली अतीत वाले लोगों का अपमान कर रहा है। अन्यायपूर्ण शासकों के कारण ईरानी राष्ट्र को गरीबी के दलदल में डूबते हुए देखकर हम दुखी होते रहते हैं।

लेकिन जितनी भी मुश्किल स्थिति हो, जैसा कि मैंने अभी वर्णन किया – और ये सब केवल सतही तौर पर ही मैंने बताया है – स्थिति निराशाजनक नहीं है। ईरानी लोगों का एक मज़बूत मित्र है, ईरानी अच्छे लोग हैं और उनमें जीवन के लिए जोश भरा हुआ है।

यह दोस्त आशा का एक अद्वितीय ध्रुव तारा है उन सभी उत्पीड़ितों और उनकी आवाज़, उनके लेखन, उनके विश्वास और उनके आदर्शों के लिए।

अमेरिका ईरानी लोगों के साथ खड़ा रहेगा और वर्तमान में राष्ट्रपति ट्रम्प के शासनकाल में उनके साथ खड़ा है। (तालियां।)

हमारा जनसमर्थन, हमारा नैतिक समर्थन महत्वपूर्ण है। न्याय के लिए हमारी मांगें महत्व रखती हैं, वास्तविक अर्थव्यवस्था वाला एक सामान्य राष्ट्र, जो जवाबदेह हो, उसकी मांग महत्व रखती हैं।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 2009 में जब ऐसा अवसर आया, अमेरिकियों ने उसका फायदा नहीं उठाया। यह राजनीतिक बात नहीं है। यह बात सर्वोत्तम विकल्प की है और जोकि हम ईरानी लोगों के लिए चाहते हैं। देखिए, केवल ईरानी शासन का तुष्टिकरण काम नहीं आने वाला है।

हमारे प्रशासन ने कुछ बिल्कुल अलग किया है।

हमने ईरानी लोगों से कहा है कि वे हमें शासन की क्रूरता के सबूत भेजें।

हम वो सब प्रकाश में ला रहे हैं जिसे अयातुल्ला हरसंभव तरीके से दबाकर रखना चाहते हैं। अब तक हमें 36,000 से अधिक प्रकार की जानकारियां मिली हैं, और हम उनमें से प्रत्येक पर काम कर रहे हैं।

हमने इन कहानियों को सुना है, हमने इन कहानियों को देखा है।

हमने उनके चेहरे देखे हैं।

वो चेहरे – पीड़ितों के चेहरे – उनको भुलाया नहीं जाएगा, और अपराधियों के चेहरों का पीछा किया जाएगा।

ईरानी शासन के मानवाधिकार उल्लंघन अस्वीकार्य कहे जाने से भी बदतर हैं। वो अमानवीय हैं और वो गलत हैं।

और वो दुनिया के महान लोगों में से एक माने जाने वालों की आश्चर्यजनक ऊर्जा, उद्यमशीलता और आत्मा को मूल रूप से दबाते हैं।

इसलिए आज हम ईरानी शासन का आह्वान करते हैं कि वे किसी भी सरकार का जो पहला कर्तव्य होता है उसे पूरा करें: अपने लोगों के साथ बुनियादी गरिमा के साथ पेश आएं, जोकि सम्पूर्ण मानव जाति के परिवार और हरेक सदस्य का हक है। 

अपने खुद के संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करें।

एक सामान्य देश की तरह कार्य करें।

अपने लोगों की असीम क्षमताओं को खिलने दें।

हम ये सब चाहते हैं, हम सैद्धांतिक रूप से इस सबकी मांग करते हैं, परंतु इसके साथ ही हम शासन को सहज बुद्धि का भी संदेश देना चाहते हैं.

सच्ची समृद्धि ईरान में केवल तब ही आ पाएगी, जब आप अपने लोगों को आतंकित करना और उन्हें जेल में डालना बंद करेंगे।

असल में, मैं शासन से आग्रह करूंगा कि वे शिराज़ के फारसी कवि सादी के शब्दों पर गौर करें: “वो शासक जो अपने लोगों के दिलों को बर्बाद करता है, वह अपने लिए जो समृद्धि चाहता है, उस समृद्धि को केवल सपनों में ही देख सकता है”।

और यह साबित करने के लिए कि हम जो कहते हैं उसे गंभीरता से पूरा करते हैं, आज मैं ईरानी लोगों के समर्थन में कई नए कदमों की घोषणा कर रहा हूं:

सबसे पहले, मैंने अंतरराट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत ईरान को दोबारा खास चिंता वाला देश घोषित कर दिया है। दुनिया को पता होना चाहिए कि ईरान बुनियादी धार्मिक स्वतंत्रताओं का घोर उल्लंघन करने वाले राष्ट्रों में शामिल है।

दूसरे, आज अमेरिकी वित्त विभाग दो ईरानी जजों मोहम्मद मोग़ीसे और अब्दुलग़ासिम सलावती पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। (तालियां।)

मोग़ीसे ने जो घृणित काम किए हैं उनमें एक था मानवाधिकार वकील और महिला अधिकार कार्यकर्ता नसरीन सोतुदेह को 33 वर्षों की क़ैद और 148 कोड़ों की सज़ा सुनाना।

और सलावती ने एक अमेरिकी नागरिक शियु वांग को जासूसी के झूठे आरोपों में 10 वर्ष की क़ैद की सजा सुनाई। हमें खुशी है कि हम शियु को छुड़ा पाए, पर उन्हें सजा सुनाए जाने या जेल भेजे जाने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए थी।

सलावती ने सैंकड़ो राजनीतिक बंदियों को सजा सुनाई है। वह शासन के इशारों पर काम करता है। उसने पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल भेजा है – या उससे भी बुरा, मौत की सज़ा दी है। वह न्याय का निष्पक्ष सहयोगी नहीं, बल्कि सत्ता के हाथों में उत्पीड़न का एक साधन है। और आज उस पर अमेरिका की पाबंदी लग गई है। (तालियां।)

और तीसरी बात, आव्रजन एवं राष्ट्रीयता अधिनियम के तहत, हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दुर्व्यवहार करने, उन्हें हिरासत में लेने या उनकी हत्या करने, या अभिव्यक्ति और सभा करने की स्वतंत्रता के उनके अधिकारों में बाधक बनने वाले मौजूदा और भूतपूर्व ईरानी अधिकारियों और व्यक्तियों को वीज़ा देने पर रोक लगा रहे हैं।

हमारी कार्रवाई के तहत इन लोगों के परिवार के सदस्यों को वीज़ा देने पर भी पाबंदी लग जाएगी। पूरे ईरान के नागरिकों द्वारा हमें जो सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, वह हमारे लिए अमूल्य साबित होगी क्योंकि हम इनके आधार पर ईरान के लोगों को स्वतंत्रता और न्याय से वंचित रखने वाले लोगों पर सचमुच का दबाव डाल सकेंगे और उन्हें जवाबदेह ठहरा सकेंगे। (तालियां।)

लोगों के बच्चों को मारने वाले हत्यारों को अपने बच्चों को पढ़ने के लिए अमेरिका भेजने की अनुमति नहीं होगी। (तालियाँ और जयकार।)

ये गंभीर उपाय हैं, वे विचारशील उपाय हैं जिन्हें लागू करने में हमें थोड़ा समय लगा। लेकिन मैं चाहता हूं कि ईरान के लोगों को पता चले कि हमेशा ऐसा ही हो ये ज़रूरी नहीं है।

यदि ईरानी शासन सभी ईरानियों के अधिकारों का सम्मान करता है, वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता है, तो वह अपने ही नागरिकों से सम्मान वापस पा सकता है।

वह दुनिया की नजर में एक गैरकानूनी शासन होने के काले धब्बे को हटा सकता है।

और – बहुत महत्वपूर्ण बात है – वह अपने लोगों के लिए भी सतत समृद्धि और शांति वापस ला सकता है। मैं समझता हूं इन नेताओं को पता होना चाहिए कि उनकी जनता इसकी मांग कर रही है।

हर देश की समृद्धि की राह स्वदेश से ही शुरू होती है। और जब संप्रभु राष्ट्रों के नेता अपने राष्ट्र और अपने नागरिकों के हितों को आगे रखेंगे, तो हमारा सामूहिक भविष्य अधिक उज्जवल होगा। (तालियां।) हमारे लोग अधिक खुशहाल होंगे। बुनियादी स्वतंत्रताओं का सम्मान किया जाएगा। हमारी साझेदारियां अधिक मज़बूत होंगी।

जरा सोचें कि हमारे दो देशों के बीच क्या होगा। राष्ट्रपति अक्सर इसकी चर्चा करते हैं।

एक दिन, यहां वाशिंगटन में ईरानी दूतावास के दरवाज़ों पर लगे ताले तोड़े जा सकते हैं।

एक दिन, ईरान एयर सीधे ल़ॉस एंजिल्स या ह्यूस्टन की उड़ान भर सकती है. सभी को लॉस एंजिल्स एयरपोर्ट का अनुभव भुगतना चाहिए। (ठहाके।)

एक दिन – एक दिन, हमारे नेता एक-दूसरे से सद्भावना के साथ मिल सकेंगे, न कि विरोधियों के रूप में। क्या ही क्षण होगा जब हम उन पलों को जी सकेंगे।

मैं प्रार्थना और उम्मीद करता हूं कि वो दिन जल्दी आएगा। हम, आप सभी के साथ मिलकर, इसे संभव करने के लिए काम कर रहे हैं, और मैं आशा करता हूं कि ईरानी शासन शीघ्र ही ये सब होने देने के लिए रास्ते के अवरोधों को हटाएगा।

पर जो भी हो, मैं ईरान के लोगों से वही बात कहना चाहता हूं जो मैं कई महीनों से कह रहा हूं और जब तक ज़रूरी हुआ, मैं आगे भी कहता रहूंगा:

अमेरिका आपकी आवाज़ सुन सकता है। 

अमेरिका आपका समर्थन करता है। 

अमेरिका आपके साथ खड़ा है। 

हम ये आपकी ख़ातिर कर रहे हैं…

आज़ादी की ख़ातिर…

बुनियादी मानव गरिमा के ख़ातिर…

सम्मान के ख़ातिर। 

आज यहां उपस्थित होने के लिए धन्यवाद। 

ईश्वर ईरान के लोगों को आशीष दे।

और ईश्वर अमेरिका के लोगों को आशीष दे। धन्यवाद। (तालियां।)


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/human-rights-and-the-iranian-regime/
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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