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“निवारक क्षमता की पुनर्स्थापना: ईरानी उदाहरण” विषय पर स्टैनफ़ोर्ड के छात्रों के साथ विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो की नीतिगत चर्चा

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अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
जनवरी 13, 2020

 

हूवर संस्थान, स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय
पालो आल्टो, कैलिफ़ोर्निया

श्री गिलिगन: ये सब बहुत विस्तृत है, है न? (हंसी।) सुप्रभात। मेरा नाम टॉम गिलिगन है। मैं हूवर संस्थान का निदेशक हू। मैं चाहता हूं – मुझे आप सभी को अमेरिका के प्रधान राजनयिक का संदेश सुनने के लिए स्वागत करते हुए अपार हर्ष हो रहा है।

मैं विशेषकर यहां उपस्थित छात्रों, हमारे भावी नीति निर्माताओं, का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण चर्चा के लिए अपना समय निकाला।

आपमें से जो हूवर संस्थान से परिचित नहीं हैं उन्हें मैं बताना चाहूंगा कि हम आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक शासन को बढ़ावा देने वाले नीतिगत विचारों के निर्माण के लिए समर्पित अनुसंधान केंद्र हैं. हमारे करीब 100 वर्षों के इतिहास में, हमारे कार्य प्रत्यक्ष तौर पर उन नीतियों के लिए ज़िम्मेवार रहे हैं जोकि अमेरिका और पूरी दुनिया में अधिक स्वतंत्रता, लोकतंत्र और अवसरों की वजह बनी हैं।

हूवर संस्थान और स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय लंबे समय से आपसी समझ को बढ़ावा देने का मंच मुहैय्या कराने के वास्ते नीतिगत चर्चाओं के संयोजक रहे हैं, और मुझे खुशी हो रही है कि आज इतनी अधिक संख्या में आपलोगों ने देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कतिपय विदेश नीति मामलों पर एक विचारपूर्ण चर्चा में शामिल होने के लिए समय निकाला.

मुझे हमेशा इस बात का अहसास रहा है कि मैं एक विशेष जगह पर काम करता हूं क्योंकि और कहां आप कह सकते हैं कि आपके यहां विदेश मंत्रियों का क्लब है? हमारे 60वें और 66वें विदेश मंत्री जॉर्ज शुल्ज़ और कोंडोलीज़ा राइस हूवर के अध्येता हैं, और कोंडी आज प्रश्नोत्तर वाले सत्र को मॉडरेट करेंगी। शुक्रिया कोंडी, इस कार्य के लिए। और आज के हमारे मेहमान, निश्चय ही, जल्दी ही हमारे क्लब में शामिल हो सकते हैं। वह दक्षिण कैलिफ़ोर्निया के निवासी हैं, इसलिए इस बात पर नज़र रखें, हम देखते हैं कि कैसे होता है ये सब। (हंसी।)

हमारे आज के अतिथि ने वेस्ट प्वाइंट स्थित अमेरिकी सैनिक अकादमी से अपनी कक्षा में प्रथम रहते हुए पढ़ाई पूरी की, और बर्लिन की दीवार गिराए जाने से पहले साम्यवादी सीमाओं पर गश्ती करने वाले केवलरी अधिकारी के रूप में काम किया। उन्होंने अमेरिकी वायु – माफ करें, अमेरिकी सेना के चौथी इन्फ़ैंट्री डिविज़न की सातवीं केवलरी के द्वितीय स्क्वाड्रन में भी काम किया। सेना की नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से पढ़ाई की, और हार्वर्ड लॉ रिव्यू के संपादक के तौर पर भी काम किया। उन्होंने थेयर एरोस्पेस की स्थापना की और उसके सीईओ के रूप में एक दशक से अधिक समय तक काम किया, और बाद में सेंचुरी इंटरनेशल के अध्यक्ष बने।

प्रशासन में शामिल होने से पहले वह कंसास की चौथी संसदीय डिस्ट्रिक्ट से चौथी बार निर्वाचित सांसद की भूमिका निभा रहे थे। जनवरी 2017 से अप्रैल 2018 तक उन्होंने सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक का पद संभाला। अप्रैल 26, 2018 को उन्होंने राष्ट्र के 70वें विदेश मंत्री का पद संभाला। देवियों और सज्जनों, कृपया विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के स्वागत में मेरा साथ दें। (तालियां।)

विदेश मंत्री पोम्पियो: आप सभी का शुक्रिया। आपको देखकर अच्छा लग रहा है। हर किसी के लिए ये बढ़िया दिन है? जब मौसम बढ़िया हो तो नाखुश होना मुश्किल हो जाता है। मैं दक्षिण कैलिफ़ोर्निया में बिताए बचपन के दिनों को थोड़ा-थोड़ा याद कर पा रहा हूं जब हर दिन ऐसा ही होता था। मुझे इस बात का भी अहसास है – टॉम, शुक्रिया मेरा परिचय कराने में इतनी उदारता दिखाने के लिए। जब मेरा 70वें विदेश मंत्री के रूप में परिचय कराया जाता है तो मुझे इस बात का भी अहसास रहता है कि राष्ट्रपति ट्रंप 45वें राष्ट्रपति हैं, इसलिए मेरे कार्यक्रम में इतनी अधिक संख्या में लोग उपस्थित हैं। (हंसी।)

और मैं कुछ विशेष व्यक्तियों का नाम लेना चाहूंगा। मुझे पता है कि पूर्व विदेश मंत्री राइस हमारे बीच हैं। टॉम, यहां मौजूद रहने के लिए आपका धन्यवाद। मेरे पूर्व सहयोगी और प्रिय मित्र जनरल मैकमास्टर भी हमारे बीच मौजूद हैं। यहां वापस आना और आपके साथ कैलिफ़ोर्निया में होना हमेशा बढ़िया लगता है।

आपको इस उल्लेखनीय संस्थान में पढ़ाई करने का असाधारण सौभाग्य प्राप्त है। आरंभ में यहां से पढ़ाई करने वालों में एक महान अमेरिकी भी थे, जिनके नाम पर इस संस्थान का हूवर संस्थान का नाम पड़ा है.

अमेरिका को इसकी असाधारण भव्यता प्रदान करने के लिए वह हमारी प्रशंसा के पात्र हैं। वह आयोवा के एक अनाथ व्यक्ति से ऊपर उठकर अमेरिका के राष्ट्रपति बने। वह एक मेधावी खनन इंजीनियर थे। मैंने खुद इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से लेकर चीन तक पूरी दुनिया की यात्रा की और अपनी खुद की मेहनत के बल पर संपत्ति अर्जित की।

जब प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ा, उन्होंने यूरोप में रह गए हज़ारों अमेरिकियों के बीच समन्वय में अपनी प्रतिभा का उपयोग किया और उन्हें अमेरिका वापस लाने में मदद की। इस काम में मिली सफलता ने उन्हें प्रथम विश्वयुद्ध और उसके बाद के दिनों में यूरोप को भुखमरी से बचाने के अभियान का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया। वह अमेरिकी मानवतावादी प्रयासों, जिसे हमने दशकों से चलाते रहे हैं, में सन्निहित तमाम विशेषताओं के प्रतीक हैं।

उन्होंने 1948 में, 74 वर्ष की उम्र में, अपने जन्मस्थान में बोलते हुए इस बात का ज़िक्र किया कि अमेरिका ने एक गरीब अनाथ लड़के के रूप में उन्हें क्या दिया था। उन्होंने कहा, “मेरे पास हर वो सम्मान है जिसकी कि कोई व्यक्ति आकांक्षा करता हो। पूरी धरती पर अमेरिका के अलावा कोई और स्थान नहीं है जहां हर किसी को जीवन में ये मौक़ा मिलता हो।”

मैं भी अक्सर ऐसा ही सोचता हूं। अमेरिका सचमुच में एक विशिष्ट देश है।

मैं सिर्फ पिछले कुछेक दिनों और हफ्तों में की गई कार्रवाइयों पर ही बात नहीं करना चाहता हूं, बल्कि मैं अमेरिका को सुरक्षित रखने और आपमें से हरेक की रक्षा करने के प्रयास में हमारे प्रशासन द्वारा किए गए तमाम कार्यों की बात करूंगा।

इस महीने की तीसरी तारीख़ को हमने दुनिया के सबसे ख़तरनाक आतंकवादियों में से एक को ख़त्म कर दिया।

आपमें से बहुतों को शायद सीरिया में लाखों लोगों के विस्थापित होने और वहां हज़ारों की तादाद में लोगों के मारे जाने की, यमन में भुखमरी और हैजा की महामारी की, तथा शिया प्रभाव वाले इलाक़ों से लगे लेबनान और इराक़ में शिया मिलिशियाओं द्वारा लोकतांत्रिक शासनों को अस्थिर किए जाने की जानकारी होगी।

ईरानी शासन और सीधे क़ासिम सुलेमानी की निगरानी में उसके प्रतिनिधि संगठनों ने इन सारी मुसीबतों को पैदा किया है। तभी तो सुलेमानी के मारे जाने की ख़बर सुनने के बाद हज़ारों इराक़ी जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। निश्चय ही और भी काफी लोग इस जश्न में शामिल होते, लेकिन उन्हें ईरान समर्थित बाकी गुंडों का भय था, जिनमें से अनेक कुछ दिन पहले वहां अमेरिकी दूतावास के दरवाज़ों के पास देखे गए थे, वे उनकी पिटाई कर सकते थे या उन्हें जेल में डाल सकते थे या उनकी जान ले सकते थे।

इस समय – आप देख सकते हैं – ईरानी जनता सड़कों पर उतरी हुई है। वे भी खुद पर भारी ख़तरों के बावजूद बड़ी संख्या में मौजूद हैं। वे सुलेमानी की तस्वीर वाले पोस्टरों और होर्डिंगों को जला रहे हैं और चिल्ला रहे हैं, “सुलेमानी एक हत्यारा है।” उन्हें पता है कि उसकी उनके उत्पीड़न में प्रमुख भूमिका थी। और स्वतंत्रता एवं न्याय की उनकी मांग में, अयातुल्ला और उसके लोगों तथा ईरान इस्लामी गणतंत्र के भीतर उन्होंने जो कुछ भी नष्ट किया है उसे लेकर उनके उचित गुस्से में अमेरिका उनके साथ है। मैं राष्ट्रपति ट्रंप के आग्रह को दोहराना चाहता हूं कि ईरान एक भी प्रदर्शनकारी को नुक़सान नहीं पहुंचाए। मैं उम्मीद करता हूं हर कोई ऐसा ही करेगा। हमने पूरी दुनिया और क्षेत्र में अपने सहयोगियों से यही बात दोहराने को कहा है।

ओसामा बिन लादेन के अलावा कोई और आतंकवादी नहीं था जो अमेरिकियों की जान लेने में क़ासिम सुलेमानी से बढ़कर हो, जिसने 600 से अधिक अमेरिकी देशभक्तों की जान ली थी। मैं उनमें से कुछ युवाओं को जानता था।

वह इराक़ में अभी हाल में अमेरिकी बलों पर हुए हमलों का साज़िशकर्ता था, इनमें गत वर्ष 27 दिसंबर को हुआ हमला शामिल है जिसमें एक अमेरिकी की मौत हो गई थी।

उसने दूतावास पर, बग़दाद में विदेश विभाग के लिए काम करने वाले लोगों पर 31 दिसंबर के हमले का आदेश दिया था। और मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि उसके अब ख़तरा नहीं होने के कारण दुनिया पहले से अधिक सुरक्षित है।

पर मैं इसे एक व्यापक संदर्भ में रखना चाहता हूं कि हम क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बारे में एक बड़ी रणनीति है।

राष्ट्रपति ट्रंप और हम राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के लोग इस्लामी गणतंत्र के खिलाफ़ फिर से निवारक क्षमता को स्थापित कर रहे हैं – वास्तविक निवारक क्षमता। सामरिक शब्दावली में, निवारक क्षमता का सरल मतलब होता है दूसरे पक्ष को भरोसा दिलाना कि उसे किसी ख़ास व्यवहार के फायदों के मुक़ाबले उसकी कहीं अधिक क़ीमत चुकानी पड़ेगी। इसमें विश्वसनीयता की ज़रूरत होती है; वास्तव में, यह इसी पर निर्भर करती है। आपके विरोधी को पता होना चाहिए कि आपके पास न सिर्फ क़ीमत वसूलने की क्षमता है, बल्कि सचमुच में आप ऐसा करने के इच्छुक भी हैं।

शीतयुद्ध के दौर में मैं एक युवा सैनिक था। भले ही आपके पास दुनिया की महानतम सेना हो, पर यदि आप अपने सामरिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए उसे काम में लेने को तैयार नहीं हैं तो फिर उसका कोई फायदा नहीं।

जैसाकि आपके विद्वानों में से एक विक्टर डेविस हैन्सन ने कहा था, “निवारक क्षमता को स्थापित करना मुश्किल होता है और उसे खोना आसान।”

और हमें ईमानदारी से ये बात स्वीकार करनी चाहिए। दशकों तक, दोनों ही राजनीतिक दलों के अमेरिकी प्रशासनों ने कभी भी ईरान के खिलाफ़, हमें सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी, निवारक क्षमता तैयार करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए थे। खुद जेसीपीओए – परमाणु समझौते – ने स्थिति को बदतर किया है। इसने ईरानी शासन के लिए पैसे बनाना संभव किया है, इसने अयातुल्लाओं के लिए धन के स्रोत तैयार कर दिए हैं जिससे कि वे शिया मिलिशिया नेटवर्क तैयार कर सकें, वही नेटवर्क जिसने एक अमेरिकी की हत्या की और बग़दाद में हमारे दूतावास के लिए बड़ा ख़तरा खड़ा कर दिया। इन प्रयासों को बाधित करने के बजाय समझौते ने ईरान को परमाणु हथियारों के स्पष्ट रास्ते पर भी ला खड़ा किया, जिसके बारे में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी टिप्पणी की शुरूआत की थी कि हमारे रहते ऐसा कभी नहीं होगा।

तो हमने क्या किया? हमने कूटनीतिक अलगाव, आर्थिक दबाव और सैनिक निवारक क्षमता बनाने का एक अभियान शुरू किया।

इसके लक्ष्य दोहरे हैं। सबसे पहले, हम ईरानी शासन को संसाधनों से वंचित करना चाहते हैं, दुनिया भर में इनकी घटिया गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक संसाधन। और दूसरे, हम बस ये चाहते हैं कि ईरान एक सामान्य राष्ट्र की तरह व्यवहार करे। बस नॉर्वे की तरह हो जाए, है कि नहीं? (हंसी।)

कूटनीतिक रूप से कहें तो मित्र देशों और साझेदारों ने हमारा साथ दिया है। वे नौवहन पर ईरानी हमलों को रोकने के लिए आज हमारे साथ फ़ारस की खाड़ी में होर्मुज़ जलसंधि की गश्त लगा रहे हैं। हमें भूलना नहीं चाहिए कि विगत महीने में ईरानियों ने इस जलसंधि में कितने पोतों को पकड़ा है।

जर्मनी, फ्रांस और इटली ने महान एयर नामक कंपनी पर यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं। ये एक ईरानी विमान कंपनी है जो ईरानी सैनिक साज़ो-सामान को लड़ाई के क्षेत्रों में पहुंचाने का काम करती है।

अर्जेंटीना और ब्रिटेन दोनों ने ही हिज़बुल्ला को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।

और आखिरकार आपने भी ईरानी तेल राजस्व में करीब 80 प्रतिशत की कटौती करने के लिए हमारे आर्थिक दबाव को देखा। हम बाकी 20 प्रतिशत को भी ख़त्म करने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हैं।

राष्ट्रपति रुहानी ने ख़ुद कहा था कि हमारी गतिविधियों के कारण ईरानी सरकार को क़रीब 200 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा और निवेश का नुक़सान हुआ है। ये वो धन है, जिसका बड़ा हिस्सा उन गतिविधियों में लगाया जाता, जो आपके और आपके नागरिकों को ख़तरे में डाल सकता था।

और आप भी इसे देख सकते हैं। ईरान के लोग अपना पैसा चुराए जाने के कारण अपनी ही सरकार से लगातार नाराज़ होते जा रहे हैं। साथ ही उन्हें इसकी भी नाराज़गी है कि हिंसक तरीक़े से सरकार अपने प्रभाव का प्रसार कर रही है और इसका भारी भरकम ख़र्च उन पर पड़ता है।

सैनिक दृष्टि से देखें, तो हमने ईरानियों को बार-बार चेतावनी दी है। मैंने निजी रूप से भी उन्हें चेतावनी दी है कि अगर किसी भी हमले में अमेरिकी लोगों की जान गई, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

और उन्होंने हमारी परीक्षा ली जैसा कि उन्होंने पहले की सरकारों की भी कई बार परीक्षा ली थी। पहले की गई ढिलाई से उन्हें प्रोत्साहन मिला।

लेकिन 27 दिसंबर को. सुलेमानी के निर्देश पर जो हुआ, हमने उसे बदल दिया। 31 दिसंबर को ईरान समर्थित मिलिशिया ने बग़दाद में हमारे दूतावास पर हमला किया और हमने उनके लिए उस गणित को बदल दिया।

ज्वाइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के प्रमुख ने इस बारे में शायद सबसे सही कहा। अगर हमने क़ासिम सुलेमानी पर हमला नहीं किया होता, अगर हमने राष्ट्रपति ट्रंप से ये सिफारिश नहीं की होती, ईरानी शासन पर हम उसके बुरे फैसले की भारी क़ीमत नहीं थोपते, तो हम ‘आपराधिक लापरवाही’ कर रहे होते।

क़ासिम सुलेमानी को पता था कि अमेरिकी लोगों की जान बचाना हमारी प्रतिबद्धता है।

और ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और हम आभारी हैं कि किसी की जान नहीं गई। हम अमेरिका और हमारे सैनिकों पर किसी भी हमले की गंभीरता को कभी कम करके नहीं आंकेंगे।

लेकिन कार्रवाई की तीव्रता को देखते हुए, ईरान की सरकार अब ये बात समझ गई होगी कि अगर कभी भी अमेरिकी लोगों की जान पर ख़तरा पैदा होगा, तो हम क्या करेंगे। अगर ईरान ने तनाव बढ़ाया, तो हम अपनी शर्तों पर इसे ख़त्म करेंगे।

पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वक्तव्य में इस निवारक क्षमता को फिर से स्पष्ट कर दिया था। इन दिनों ईरान परमाणु समझौते से हटने के बारे में शोर कर रहा है। इसी वजह से राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए पहले कुछ शब्दों में ये बातें कही थी। उन्होंने कहा था- “जब तक मैं अमरीका का राष्ट्रपति हूं, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी।“ उनकी इस घोषणा के पीछे दुनिया की सबसे प्रभावी निवारक क्षमता है।

जब तक ईरान अपनी आतंकवादी गतिविधियां नहीं रोकता, इसका वादा नहीं करता कि वह परमाणु हथियार कभी नहीं बनाएगा और निरीक्षण की अनुमति नहीं देता, जिससे दुनिया को ये भरोसा हो कि ऐसा नहीं होगा, तब तक हमारी ओर से पाबंदियां जारी रहेंगी।

ईरान को लेकर अब हमारी स्थिति काफ़ी मज़बूत है। ऐसी अच्छी स्थिति पहले कभी नहीं थी और ईरान जैसी स्थिति में आज है, वो भी पहले ऐसी स्थिति में नहीं था।

हमने अपनी निवारक क्षमता को फिर से स्थापित किया है, लेकिन हम ये जानते हैं कि ये हमेशा के लिए नहीं है। ख़तरा बना हुआ है। हम इसे लेकर प्रतिबद्ध हैं कि बचाव का ये रास्ता हम न गंवाएं। सभी मामलों में हमे ऐसा ही करना है।

दुनियाभर में आज़ादी और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हमें ऐसा करना पड़ेगा। यही राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यों का पूरा आशय है- हमारी सेना को अब तक की सबसे मज़बूत सेना बनाना।

हमने न सिर्फ़ ईरान में, बल्कि अन्य जगहों में भी देखा, जहां अमेरिकी निवारक क्षमता कमज़ोर थी। हमने 2014 में क्राइमिया पर रूस का कब्ज़ा होते देखा और यूक्रेन के ख़िलाफ़ आक्रमकता का समर्थन भी देखा, क्योंकि वहां निवारक क्षमता कमज़ोर थी। अब हमने यूक्रेन की सेना को घातक समर्थन देना फिर शुरू कर दिया है।

चीन का भी दक्षिण चीन सागर में द्वीप निर्माण करना और उसके द्वारा अमेरिका के सहयोगियों पर दबाव डालने की खुली कोशिश से निवारक क्षमता कमज़ोर हुई। ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण चीन सागर में नौसैनिक अभ्यासों को बढाया है, साथ ही इस पूरे क्षेत्र में हमारे सहयोगियों और मित्रों और साझेदारों ने भी ऐसा किया है। 

आपने देखा, रूस ने भी एक संधि की अनदेखी की। हम अपने नैटो सहयोगियों के सर्वसम्मत समर्थन से आइएनएफ से हट गए क्योंकि द्विपक्षीय समझौते का अनुपालन केवल एक ही पार्टी कर रही थी। हमें लगता है कि यह, फिर से, अमेरिका की रक्षा करने की विश्वसनीयता और निवारक क्षमता को बहाल करता है।

ये सब अकेले नहीं होता है। यही कारण है कि राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया है कि नैटो के सदस्य अपनी ज़िम्मेदारी निभायें और भार साझा करें। दुनिया भर में स्वतंत्रता की रक्षा के लिए 2024 के अंत तक नैटो के संसाधनों में करीब 400 बिलियन डॉलर की वृद्धि की जायेगी। यह हमारे सहयोगियों को प्रोत्साहित करने के अमेरिकी प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है कि हम सभी मिलकर क्या हासिल कर सकते हैं।

वर्षों तक, चीन ने अपने बाजारों तक अमेरिकी उत्पादों की पहुंच को प्रतिबंधित करके रखा, जबकि वो हमारे यहां अपने सामान की पहुंच की मांग करता रहा। मैं एक छोटा व्यवसायी रहा हूं। मेरा एक छोटा सा ऑफिस था शंघाई में। हमने स्पष्ट कर दिया है कि हम चीन के साथ उचित और पारस्परिक व्यापार व्यवस्था ही चाहते हैं। हम इसकी मांग करेंगे। मुझे उम्मीद है, अगले कुछ घंटों में, हम एक महत्वपूर्ण समझौते के पहले भाग पर हस्ताक्षर कर लेंगे जिससे अमेरिकी नागरिकों के जीवन में सुधार होगा, यहां हमारे नागरिकों के वेतन में वृद्धि होगी, और हमारे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध बढ़ेंगे, ऐसी शर्तों पर जोकि चीन तथा अमेरीका दोनों के हित में होंगे।

एक दूसरा मिशन भी है। चीन ने भारी मात्रा में अमेरिकी खोजों की चोरी की है, इसी तरह के कैंपसों में हुई खोजों की जहांकि मैं अभी खड़ा हूं – आनुवंशिक इंजीनियरिंग से विकसित फसल के बीजों से लेकर सेल्फ-ड्राइविंग कार प्रौद्योगिकी तक सभी कुछ। उन्होंने ये सब चीज़ें चुराई हैं। उन्हें निवेश करने या ख़तरे उठाने की ज़रूरत नहीं पड़ी।

हम ये सुनिश्चित करने के लिए प्रगति कर रहे हैं कि समझौते का अगला भाग बौद्धिक संपदा संरक्षण को लेकर चीनी व्यापार समझौते के पहले भाग के मुक़ाबले बेहतर होगा।

मैं यहीं अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा क्योंकि मैं जितना अधिक संभव हो आपके सवालों का जवाब देना चाहता हूं। देखिए, हमें नहीं पता कि हमारे निवारक क्षमता विकसित करते जाने पर ईरानी शासन की प्रतिक्रिया क्या होगी। यदि हम सही विकल्प चुनते हैं और ऐसी स्थिति में पहुंचते हैं जहांकि हमारे बीच परस्पर सम्मान का भाव हो, तो ये दुनिया के लिए एक अच्छी बात होगी।

हम उम्मीद करते हैं कि ईरान इस्लामी गणतंत्र का नेतृत्व हमारे विचारों से सहमत होगा, और हम उम्मीद करते हैं कि हम यहां स्वदेश में सुरक्षा की स्थिति बेहतर करने तथा मध्य पूर्व और पूरी दुनिया में स्थिरता के लिए इसे हासिल कर सकते हैं।

मुझे आज यहां बुलाने के लिए आप सभी का धन्यवादा। मैं आपके सवालों का इंतज़ार कर रहा हूं।

(तालियां।)


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/the-restoration-of-deterrence-the-iranian-example/
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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