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दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की प्रधान उप सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स की प्रेस वार्ता

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तत्काल जारी करने के लिए
जनवरी 24, 2020
अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
प्रेस संवाददाता कक्ष
वाशिंगटन, डी.सी.

 

सुश्री मॉर्गन ऑर्टेगस (प्रवक्ता): ये पूरी ब्रीफिंग ऑन रिकॉर्ड होगी। एलिस अभी-अभी वापस लौटी हैं। उनके पास अपने दौरे के बारी में रीडआउट है। ज़ाहिर है एक और दौरा होने वाला है, इसलिए उनके आरंभिक वक्तव्य के बाद हम जितना अधिक संभव होगा उतने सवालों के जवाब देने की कोशिश करेंगे।

आरंभ करें।

राजदूत एलिस वेल्स: बढ़िया। ये एक लंबा दौरा था, इसलिए एक लंबी आरंभिक टिप्पणी के लिए माफ़ी चाहूंगी, पर उसके बाद मुझे आपके सवालों के जवाब देने में खुशी होगी। तो मेरा पहला पड़ाव श्रीलंका था। एनएससी से राष्ट्रपति की उप सहायक लीसा कर्टिस मेरे साथ थीं। और जैसा कि आप जानते हैं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में श्रीलंका के पास कतिपय बेहद महत्वपूर्ण संसाधन हैं, और ये एक ऐसा देश है कि जिसका हिंद महासागर क्षेत्र में महत्व उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है। हमारी गत नवंबर में निर्वाचित राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे, उनके भाई और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे, और साथ ही विदेश मंत्री, तथा विपक्ष और तमिल राष्ट्रीय गठबंधन और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के साथ उपयोगी मुलाक़ातें हुईं। और मेरे ख्याल से खुद चुनाव भी उल्लेखनीय था। श्रीलंका एशिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है। चुनाव प्रतिस्पर्धात्मक था, यह निष्पक्ष था, और इसमें राष्ट्रपति राजपक्षे को स्पष्ट जनादेश मिला।

राष्ट्रपति के साथ बैठक में लीसा कर्टिस और मैंने उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप का एक पत्र सौंपा जिसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि हम श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को कितना महत्वपूर्ण मानते हैं, जोकि सुधार और सुलह की राह पर चल रहा है, और हमने राष्ट्रपति के बयान का स्वागत किया कि वह समस्त श्रीलंकाइयों का राष्ट्रपति बनना चाहते हैं।

हमारे स्पष्ट साझा हित हैं जिनमें हिंसक अतिवाद का सामना करना, नौवहन सुरक्षा को मज़बूत करना, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना, तथा एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अनुरूप निवेश और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना शामिल हैं. और आखिरकार, श्रीलंकाई गृहयुद्ध के घावों को भरने के अहम मुद्दे समेत साझा मूल्यों को मज़बूत करने में हमारी सफलता, हमारी साझेदारी की गुणवत्ता में प्रतिबिंबित होगी।

श्रीलंका से हम रायसीना संवाद के लिए नई दिल्ली गए। इस वार्षिक सम्मेलन की सफलता अंतरराष्ट्रीय मंच पर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के केंद्र में भारत की प्रमुख भूमिका को दर्शाता है। उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिंजर की भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री के साथ बैठकों में शामिल होने के अलावा हमने मुख्यतया विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और एनएससी के अधिकारियों से, और साथ ही विपक्ष और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की।

मैं समझती हूं ये स्पष्ट है कि पिछले दो दशकों के दौरान अपने विस्तृत होते सामरिक क्षितिज के कारण भारत ने निष्क्रिय विदेश नीति से दूर हटते हुए एक ऐसी नीति को अपनाया है जिसके तहत वह अपने हितों को कहीं अधिक उत्साह से उठाता है। और यह बात हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सर्वाधिक स्पष्ट दिखती है। नौवहन और नौसेना के क्षेत्रों में हमारे बीच बढ़ते सहयोग की बात हो, चतुर्पक्षीय क़्वाड की या भारत के ‘एक्ट ईस्ट’ नीति की, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर हमारे दृष्टिकोणों में वास्तव में कोई अंतर नहीं है। मैं समझती हूं कि रायसीना संवाद में उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिंजर द्वारा कैलिफ़ोर्निया से किलिमंजारो तक विस्तृत हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन किए जाने ने इस सामरिक सहयोग को और अधिक मज़बूत किया है।

मेरी आधिकारिक बैठकों में इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि गत दिसंबर में 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद में कूटनीतिक और रक्षा के क्षेत्रों में हुई प्रगति को कैसे आगे बढ़ाया जाए। रक्षा सहयोग, शांतिरक्षक अभियानों, अंतरिक्ष, आतंकवाद निवारक उपायों, व्यापार, जनता के स्तर पर परस्पर संपर्क आदि क्षेत्रों में जारी प्रगति के उल्लेख के साथ ही मैं नौसैनिक क्षेत्र में हमारे बीच सहयोग, खास कर सूचनाओं की साझेदारी, की गुणवत्ता और आवृति को रेखांकित करना चाहूंगी, जोकि अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है। हम निष्पक्ष और पारस्परिक व्यापार को बढ़ावा देने वाले व्यापार समझौते के लिए भी प्रयासरत हैं और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अब यूएसटीआर के मेरे सहयोगी दिल्ली में हैं।

इस दौरे ने हमें भारत के नागरिकता संशोधन कानून से संबंधित घटनाक्रमों के बारे में और अधिक जानकारी पाने का अवसर भी दिया, जिसकी ज़ोरदार लोकतांत्रिक पड़ताल चल रही है, चाहे ये सड़कों पर हो रही हो या ये विपक्ष, मीडिया और अदालतों द्वारा की जा रही हो। हम कानून के तहत समान संरक्षण के सिद्धांत के महत्व को रेखांकित करना जारी रखे हुए हैं।

जहां तक जम्मू कश्मीर की बात है, तो मुझे वहां क्रमिक रूप कदम उठाया जाता देख खुशी हुई। इन कदमों में कश्मीर में आंशिक रूप से इंटरनेट सेवाओं को बहाल किया जाना भी शामिल है। और मुझे पता है कि हमारे राजदूत तथा अन्य कई देशों के राजदूतों की जम्मू कश्मीर की यात्रा को प्रेस में विस्तृत कवरेज़ मिला। हम इसे एक उपयोगी कदम के रूप में देखते हैं। हम अपने राजनयिकों को नियमित रूप से कश्मीर जाने देने, और बिना किसी आरोप के हिरासत में रखे गए राजनीतिक नेताओं की रिहाई के लिए सरकार से आग्रह भी करते रहेंगे।

नई दिल्ली से, मैं इस्लामाबाद पहुंची जहां मैंने सरकार, सेना, सिविल सोसायटी और व्यवसाय जगत के अग्रणी लोगों से मुलाक़ात की। एजेंडे में शीर्ष पर ये सवाल था कि अफ़ग़ानिस्तान और पूरे क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने में मिल रही सफलता के अनुरूप हम द्विपक्षीय संबंधों को कैसे विकसित कर सकते हैं।

हम अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हैं, और अफ़ग़ानिस्तान में टिकाऊ सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान के हाथों में महत्वपूर्ण डोर है।

मैंने वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (एफएटीएफ) के तहत अपने आतंकवाद निवारक वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। हम पाकिस्तान को एफएटीएफ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि वह अपनी कार्य योजना संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सके। एफ़एटीएफ कार्य योजना की पूर्णता आर्थिक सुधार के पाकिस्तान के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें कि इसका आईएमएफ से संबद्ध कार्यक्रम भी शामिल हैं, साथ ही यह पाकिस्तान को अपने यहां मौजूद सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के निरंतर और अपरिवर्तनीय कार्रवाई करने का भी अवसर देता है।

दावोस में राष्ट्रपति की प्रधानमंत्री ख़ान के साथ गर्मजोशी और रचनात्मकता भरी मुलाक़ात जैसे उच्चस्तरीय संपर्क हों या अंतरराष्ट्रीय सैनिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को दोबारा शुरू किया जाना, हमें पाकिस्तान से अपने संबंधों में स्पष्ट प्रगति दिखी है।

मैंने हमारे बीच आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के मुद्दे पर विस्तृत बातचीत की, खास कर जब अमेरिका पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है, सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है, और ऐतिहासिक रूप से उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेशक है। ऊर्जा और कृषि के क्षेत्र में परस्पर तालमेल स्पष्ट है, और पाकिस्तानी बाज़ार को अमेरिकी निवेश के लिए खोले जाने से रोज़गार और धन पैदा होता है, वो भी गुणवत्ता से समझौता किए बिना या भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिए बिना।

हम पाकिस्तानी खरीदारों के 10 शिष्टमंडलों का स्वागत करने और 2020 में पांच क्षेत्रीय व्यापार प्रदर्शनियों के लिए तैयार हैं, जोकि अमेरिका और पाकिस्तान की कंपनियों के बीच संबंधों को मज़बूत करेगा। विश्व बैंक द्वारा 2019 में पाकिस्तान को सुधार कार्यक्रमों के आधार पर दुनिया के 10 शीर्ष देशों में शामिल किए जाने में प्रधानमंत्री ख़ान के आर्थिक सुधार प्रयासों का प्रमुख योगदान है।

आखिरी उल्लेखनीय बात वो है जिसकी घोषणा आज ही की गई है कि विदेश मंत्री पोम्पियो यूरोप दौरे के बाद 1-3 फरवरी तक कज़ाखस्तान और उज़बेकिस्तान की यात्रा करेंगे। विदेश मंत्री को मध्य एशिया की यात्रा के दौरान आर्थिक, सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। वह मध्य एशिया के देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता, और क्षेत्रीय अखंडता के लिए हमारी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करेंगे।

मैं अपनी बात यहीं ख़त्म करती हूं और आपके सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हूं।

सुश्री ऑर्टेगस: पूछिए, मैट।

प्रश्न: अच्छा मैं – धन्यवाद। मैं जानता हूं कि ये आपका कार्यक्षेत्र नहीं है – मैं उत्तर कोरिया के बारे में सवाल करने जा रहा हूं। नहीं। (हंसी।) मैं मज़ाक कर रहा हूं।

सुश्री ऑर्टेगस: आपके पास नहीं था –

प्रश्न: पर यदि संभव हो तो क्या आप हमें बताएंगी कि आपके अनुसार अफ़ग़ानिस्तान शांति समझौते को लेकर मौजूदा स्थिति क्या है?

राजदूत वेल्स: मेरा मतलब, मैं इतना भर ही कह सकती हूं कि राजदूत खलीलज़ाद और उनकी टीम दोहा में  हैं। वे तालिबान को अपने बलों में कटौती करने की प्रतिबद्धता जताने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि विभिन्न अफ़ग़ान पक्ष वार्ता के लिए तैयार हो सकें। और इस तरह प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

सुश्री ऑर्टेगस: ओके।

प्रश्न: क्या मैं इसी से जुड़ा एक छोटा-सा सवाल पूछ सकता हूं?

सुश्री ऑर्टेगस: हां, पूछिए।

प्रश्न: माफ करें। क्या आप अफ़ग़ानिस्तान से आ रही तालिबान की हिंसा में वृद्धि की खबरों पर यक़ीन करती हैं? अभी पिछली रात ही ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि तालिबान चरमंपथी आम नागरिकों और एएनएसएफ के सदस्यों को मार रहे हैं। क्या इन रिपोर्टों पर आपकी नज़र पड़ी है? क्या आप इसकी पुष्टि कर सकती हैं – 

राजदूत वेल्स: मैंने देखी है, और हिंसा थमी नहीं है। ज़ाहिर है इससे स्पष्ट हो जाता है कि शांति प्रक्रिया क्यों ज़रूरी है और अफ़ग़ान जनता क्यों शांति चाहती है। इससे हिंसा और आमलोगों पर हमले में तालिबान को संकोच नहीं होने की बात भी पता चलती है।

प्रश्न: मैंने ये इसलिए पूछा कि जैसाकि हम जानते हैं, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि यदि हिंसा जारी रही तो वह कुछ वार्ताओं को स्थगित कर देंगे, और इससे शांति प्रक्रिया की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

राजदूत वेल्स: और, इसीलिए हिंसा में कमी पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जिसे कि अफ़ग़ान जनता देख सके, महसूस कर सके और उसकी सराहना कर सके।

सुश्री ऑर्टेगस: पूछिए।

प्रश्न: सीपीईसी और पाकिस्तान के ऊपर आपके बयानों से पाकिस्तान और चीन निश्चय ही परेशान हैं। इस पर वहां मचे बवाल के बाद अब आप कुछ कहना चाहेंगी?

राजदूत वेल्स: देखिए, आपने सुना होगा, विदेश मंत्री पोम्पियो ने ‘वन बेल्ट वन रोड’ कार्यक्रम को लेकर हमारी चिंताओं को अधिक विस्तार से पेश किया था, और वन बेल्ट वन रोड के तहत परियोजनाओं में अक्सर टिकाऊपन, श्रम और पर्यावरण संबंधी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं किया जाता है। और पाकिस्तान में मैं ये दलील दे रही थी कि अवसर मौजूद हैं और अमेरिकी निवेश के लिए, अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के लिए अवसर होने चाहिए, और निर्माताओं की पाकिस्तानी बाज़ार में रुचि है। एक्सॉन-मोबिल, एक्सलेरेट, कारगिल, हनीवेल, सब बड़े नए निवेश में लगे हुए हैं। उबर ने पाकिस्तानी युवाओं के लिए 80,000 रोज़गार पैदा किए हैं।

इसलिए, जैसा कि हम पूरी दुनिया में करते हैं, पाकिस्तान में हमने दलील दी कि आपको ‘सतर्क खरीदार’ वाले सिद्धांत का पालन करना चाहिए. पाकिस्तान एक खरीदार है, ये चीन की तरफ से कोई अनुदान सहायता नहीं है, ये कर्ज़ है, जिसमें अक्सर रियायती वित्तीय प्रावधान नहीं होते हैं। और पाकिस्तान को इसकी शर्तों पर ध्यान देना चाहिए, ये सुनिश्चित करने के लिए कि उसे अपने पैसे का अधिकतम फायदा मिल सके, जोकि सर्वाधिक आर्थिक समृद्धि ला सके।

प्रश्न: तो वो जो कह रहे हैं, आप उसका खंडन नहीं कर रही हैं? वे वास्तव में उस बात को लेकर विरोध कर रहे हैं?

राजदूत वेल्स: क्या –

प्रश्न: वो वास्तव में विरोध कर रहे हैं – जैसे विदेश सेवा के अधिकारी कह रहे हैं – ये उनके स्थानीय या राष्ट्रीय मामलों में दखलअंदाज़ी है।

सुश्री ऑर्टेगस: आपका कहना है कि चीन ऐसा बोल रहा है?

प्रश्न: वे इसको समर्थन दे रहे हैं।

सुश्री ऑर्टेगस: मैं नहीं समझती – क्या है – तो सवाल क्या है?

प्रश्न: क्या इसे स्थानीय मामलों में, सरकारी मामलों में या पाकिस्तान के मामलों में हस्तक्षेप माना जाएगा?

राजदूत वेल्स: बिल्कुल नहीं। ये पाकिस्तान का संप्रभु अधिकार है कि वह तय करे कि उसे कैसा निवेश चाहिए और किन शर्तों पर। और पाकिस्तान के एक दोस्त के रूप में, हम निश्चय ही अपील करेंगे कि वो ऐसी निवेश परियोजनाएं स्वीकार करे जोकि धन पैदा करें, जिनसे रोज़गार मिले और जो टिकाऊ हो, और हमें लगता है कि पाकिस्तानी बाज़ार के लिए हमारे पास अच्छे विकल्प हैं।

प्रश्न: शुक्रिया, राजदूत।

सुश्री ऑर्टेगस: पूछिए।

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि पाकिस्तान के एफएटीएफ प्रावधानों या शर्तों को पूरा नहीं करने की स्थिति में आईएमएफ की सहायता प्रभावित हो सकती है?

राजदूत वेल्स: मेरा मतलब, ये तो स्पष्ट है कि यदि पाकिस्तान ने एफएटीएफ के दायित्वों को पूरा नहीं किया या नाकाम रहा और ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया, तो ये पाकिस्तान के आर्थिक सुधार कार्यक्रम और निवेशकों को आकर्षित करने की इसकी क्षमता के लिए घातक होगा। हम एफएटीएफ के दायित्वों को पूरा करने की दिशा में पाकिस्तान की प्रगति को देखकर खुश हैं। इस समय बीजिंग में एक बैठक चल रही है जहां पाकिस्तान कार्यदल के समक्ष अपने कार्यों को गिना रहा है। इसलिए मैं मूल्यांकन का काम कार्यदल पर छोड़ती हूं। लेकिन पाकिस्तान अर्थव्यवस्था में सुधार तथा उग्रवादियों को अपनी बैंकिंग प्रणाली या पाकिस्तानी ज़मीन के इस्तेमाल के अवसर कम करने, दोनों के ही बारे में जितने अधिक प्रमाण उपलब्ध कराएगा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और व्यवसाय जगत में पाकिस्तान के साथ काम करने के लिए उतना ही अधिक आत्मविश्वास पैदा होगा।

प्रश्न: क्योंकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री पिछले सप्ताह यहीं थे और उन्होंने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से निकालने में अमेरिका से प्रयास तेज़ करने की अपील की थी।

राजदूत वेल्स: देखिए, एफएटीएफ एक तकनीकी प्रक्रिया है। पाकिस्तान को एक कार्य योजना दी गई है। सवाल उसमें तय शर्तों को पूरा करने का है, और ऐसा अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में सभी देशों से अपेक्षित है। इसलिए ये कोई राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है, पर हम निश्चय ही इन दायित्वों के कार्यान्वयन में पाकिस्तान के साथ सहयोग करने और उसकी मदद करने के लिए तैयार हैं।

सुश्री ऑर्टेगस: अच्छा। कोनर।

प्रश्न: राजदूत वेल्स, मैं इधर पीछे हूं। दो सवाल, यदि इजाज़त हो तो। पहला सवाल: अफ़ग़ानिस्तान को कतिपय आर्थिक सहायता रोकने के फैसले के बाद वहां कोई प्रगति हुई है? क्या आपने ग़नी प्रशासन की तरह से कोई रचनात्मक पहलकदमी देखी है? यदि नहीं, तो क्या आप अन्य वित्तीय सहायताओं को निलंबित करने पर विचार कर रही हैं?

और दूसरा सवाल, मेरे ख्याल से वहां राष्ट्रीय चुनाव हुए चार महीने बीत चुके हैं। क्या आपको स्पष्ट जनादेश नहीं आने पर चिंता हुई है, और आप किस स्थिति में दोबारा मतगणना या नए चुनावों की सिफारिश करेंगी?

राजदूत वेल्स: भ्रष्टाचार से मुक़ाबला अफ़ग़ानिस्तान में हमारे सारे कार्यक्रमों का प्रमुख अवयव है। हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अमेरिकी करदाताओं के पैसों का सही इस्तेमाल हो और उसके अपेक्षित परिणाम मिले। हम दान दाताओं के डॉलर के असर को बढ़ाने के तरीकों की निरंतर खोज करते रहते हैं। इसलिए विदेश मंत्री पोम्पियो ने जब कमी वाले क्षेत्रों का उल्लेख किया तो उसमें अफ़ग़ानिस्तान में व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर हमारी चिंताओं का इजहार था। मुझे खुशी हुई है कि विदेशमंत्री ने जिन क्षेत्रों पर ज़ोर दिया था उनमें एक में हमें अफ़ग़ानिस्तान की सरकार द्वारा की गई प्रगति नज़र आई, और सहायता के 60 मिलियन डॉलर जारी किए जा सके। निश्चय ही हम सरकार तथा सहायता पाने या कार्यान्वयन वाली अन्य संस्थाओं को प्रोत्साहित करते हैं कि वे कम होती आर्थिक सहायता के अधिकतम फायदे के लिए इस्तेमाल का हरसंभव प्रयास करें – अफ़ग़ानिस्तान को आत्मनिर्भर बनने और निजी सेक्टर के विकास के लिए परिवर्तन लाना होगा।

जहां तक चुनाव की बात है, तो मैं समझती हूं ये बेहद महत्वपूर्ण है कि उम्मीदवार तय प्रक्रिया का पालन करें। स्वतंत्र चुनाव आयोग और निर्वाचन शिकायत आयोग चुनाव कानून के अनुसार काम कर रहे हैं। वे चुनावी दावों का निपटारा कर रहे हैं। निर्वाचन शिकायत आयोग ने उन मतदान केंद्रों की पहचान कर ली है जहां कि लिए मत-पत्रों की दोबारा गिनती की मांग आई है। यह प्रकिया चल रही है। इसलिए हमारा संदेश ये है कि प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है सही ढंग से पूरा करना।

सुश्री ऑर्टेगस: और कोई सवाल?

प्रश्न: वो कौन सा क्षेत्र है जिसके बारे में आपने ज़िक्र किया कि आपको कुछ प्रगति दिखी और इस कारण 60 मिलियन डॉलर जारी किए जा सके?

राजदूत वेल्स: हां, हम आपको इस बारे में जानकारी देंगे। मुझे वो कार्यक्रम एकदम से याद नहीं आ रहा, पर हमारा स्टाफ आपको ये जानकारी दे सकता है।

प्रश्न: क्या कुछ बड़ा या ऐसी कोई बात है जो कज़ाखस्तान के आगामी दौरे के बारे में आप बताना चाहेंगी या जितना आप बता चुकी हैं उससे अधिक कुछ? क्या वहां – कज़ाखस्तान और उज़बेकिस्तान – में ऐसा कुछ है कि जिसकी हम अपेक्षा या उम्मीद करें?

राजदूत वेल्स: मैं समझती हूं विदेश मंत्री का दौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि ये प्रशासन की मध्य एशिया रणनीति के संदर्भ में हो रहा है, जिसका जल्दी ही कार्यान्वयन शुरू होगा, जिसमें, एक बार फिर, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और मध्य एशियाई देशों की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण समर्थन दिया गया है। वह सी5 बैठक की मेज़बानी करेंगे जिसमें मध्य एशिया के सारे विदेश मंत्री भाग लेंगे। एक साल के भीतर वह दूसरी बार ये बैठक आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने ये रेखांकित किया है कि हम मध्य एशियाई देशों की एक क्षेत्रीय पहचान विकसित करने को महत्व देते हैं। हम ये ऐसे दौर में कर रहे हैं जब हम क्षेत्रीय संपर्क विकसित करने और अफ़ग़ानिस्तान को दोबारा क्षेत्र से जोड़ने के वास्ते उनके साथ बहुत निकटता से काम कर रहे हैं।

इसलिए व्यापार और निवेश तथा अफ़ग़ानिस्तान के लिए समर्थन बढ़ाने में बहुत प्रगति हुई है, वो भी ऐसे समय जब राष्ट्रपति करीमोव के निधन और क्षेत्रीय एकता पर राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव के अलग रुख के चलते उज़बेकिस्तान खुला है और क्षेत्र के आधुनिकीकरण को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

प्रश्न: पर मेरी समझ से पहले जब भी सी5 की बैठक हुई है उन्होंने आमतौर पर सी5 के भीतर व्यापार और सुरक्षा बढ़ाने, आतंकवाद विरोधी कदमों और इसी तरह के विषयों पर चर्चा हुई है। क्या इस बार ये भी –

राजदूत वेल्स: और साथ ही –

प्रश्न: अच्छा, हां। अफ़ग़ानिस्तान को भी ले लें। पर क्या अमेरिका के बारे में कुछ भी है – जोकि सी5 के भीतर कम और सी5-अमेरिका के बारे में अधिक हो?

राजदूत वेल्स: हां, मैं समझती हूं आतंकवाद के खिलाफ़ सहयोग। हमने देखा है कि मध्य एशिया अग्रणी – वे विदेशी आतंकवादी लड़ाकों को दोबारा समाज में शामिल करने की दृष्टि से अग्रणी देश हैं। कज़ाखस्तान ने 600 लड़ाकों और उनके परिजनों को वापस लिया है, उज़बेकिस्तान ने सौ से ऊपर को और ताजिकिस्तान ने भी करीब सौ को वापस लिया है। और वास्तव में यही देश इस पुनर्समायोजन प्रक्रिया से मिली सीख के बारे में हमें बताएंगे। इसलिए सीटी एक अहम हिस्सा होगा। क्षेत्रीय आर्थिक संबद्धता एक और विषय होगा। और उसके बाद आर्थिक आधुनिकीकरण, जिनमें क्षेत्री विद्युत बाज़ार स्थापित करने की एक नई परियोजना भी शामिल होगी।

प्रश्न: क्या आप भी उस दौरे पर जा रही हैं?

राजदूत वेल्स: मैं जा रही हूं।

प्रश्न:  कैलिफोर्निया से किलिमंजारो तक की बात किसने की थी?

राजदूत वेल्स: मैं समझती हूं ये मज़ेदार है।

सुश्री ऑर्टेगस: मुझे ये पंक्ति पसंद आई।

राजदूत वेल्स: ये बॉलीवुड से हॉलीवुड हुआ करता था, और अब – (हंसी)। नहीं, पर क्या यह –

सुश्री ऑर्टेगस: मैं इसका श्रेय लेने का दावा करना चाहती हूं।

राजदूत वेल्स: पर यह किस बात को दर्शाता है – पर आपका शुक्रिया इस पर गौर करने के लिए, क्योंकि ये जो – (हंसी)। क्योंकि यह जिस बात को दर्शाता है –

प्रश्न: सिवाय ये कि आपको कैलिफ़ोर्निया को ‘के’ से लिखना पड़ता है। (हंसी।)

राजदूत वेल्स: नहीं, पर ये एक पारिभाषिक बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि आरंभ में हिंद-प्रशांत की चर्चा करते हुए हमने हॉलीवुड से बॉलीवुड की बात की थी और इसकी सीमा भारत की पश्चिमी सीमा को माना था। और अब हमने हिंद-प्रशांत की अपनी परिभाषा को जापान और भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिला दिया है, और इसलिए सारे क्वाड सदस्यों का हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर एक जैसा दृष्टिकोण है, कम-से-कम भौगोलिक रूप से।

प्रश्न: और इसलिए उन्होंने हिंद-प्रशांत की परिभाषा को पूर्वी अफ्रीका तक पहुंचा दिया?

राजदूत वेल्स: म्म-हम्म।

सुश्री ऑर्टेगस: ठीक है, हम –

प्रश्न: क्या मैं एक और सवाल पूछ सकता हूं? माफ़ करें, मैं देर से आया। माफ़ करें।

सुश्री ऑर्टेगस: बिल्कुल, पूछिए।

प्रश्न: मुझे पता है मेंने शुरू की कुछ बातें सुन नहीं पाया, पर अफ़ग़ानिस्तान में इसी साल मारे गए अमेरिकी सैनिकों के संदर्भ में सवाल है कि खास तौर से इसका शांति वार्ताओं पर क्या असर पड़ा?

सुश्री ऑर्टेगस: मैं समझती हूं उन्होंने पहले ही इसका जवाब दे दिया था, इसलिए हम आपको इसकी प्रतिलिपि भेज देंगे।

फ्रांसेस्को।

प्रश्न: मैं ये सोच रहा था कि यदि आप दोहा में अमेरिका-तालेबान वार्ताओं के बारे में बता सकतीं, ऑफ द रिकॉर्ड ही सही।

सुश्री ऑर्टेगस: नहीं, पर कोशिश करने के लिए धन्यवाद। नहीं। पर चेक करूंगी और देखूंगी कि क्या उनके पास है, और हम कुछ ही मिनटों में वापस आ जाएंगे।

प्रश्न: वैसे मैं समझता हूं मैंने 60 मिलियन वाला ढूंढ निकाला।

राजदूत वेल्स: सच में?

प्रश्न: क्या ये राष्ट्रीय खरीद प्राधिकरण है? ये लेखा और वित्त प्रबंधन में पारदर्शिता संबंधित चिंताओं के कारण रोक लिया गया था?

राजदूत वेल्स: हां, हां।

सुश्री ऑर्टेगस: धन्यवाद।

राजदूत वेल्स: धन्यवाद। (हंसी।) आपको भर्ती किया जाता है। आपको भर्ती किया जाता है। (हंसी।)


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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