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डायमंड प्रिंसेस पर्यटन पोत से अमेरिकी नागरिकों के स्वदेश आगमन पर मीडिया ब्रीफ़िंग

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अमेरिकी विदेश विभाग
तत्काल जारी करने के लिए
डॉ. रॉबर्ट कैडलेक, अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग में तैयारी और प्रतिक्रिया मामलों के सहायक स्वास्थ्य मंत्री
डॉ. विलियम वॉल्टर्स, अमेरिकी विदेश विभाग के चिकित्सा सेवा ब्यूरो में ऑपरेशनल मेडिसिन निदेशालय के कार्यकारी निदेशक और प्रबंध निदेशक
कार्ल रिश, विदेश विभाग के कोंसुलर मामलों के ब्यूरो में सहायक विदेश मंत्री
टेलीकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए
फरवरी 18, 2020

 

श्री ब्राउन: नमस्कार और डायमंड प्रिंसेस पर्यटन पोत से अमेरिकी नागरिकों को स्वदेश लाए जाने के बारे में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ़्रेंस कॉल में शामिल होने के लिए आपका धन्यवाद। मैं, केल ब्राउन, अमेरिकी विदेश विभाग में उप प्रवक्ता हूं, और मैं इस कॉल का समन्वय करूंगा।

आज हमारे साथ हैं डॉ. रॉबर्ट कैडलेक, अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग में तैयारी और प्रतिक्रिया मामलों के सहायक स्वास्थ्य मंत्री; डॉ. विलियम वॉल्टर्स, अमेरिकी विदेश विभाग के चिकित्सा सेवा ब्यूरो में ऑपरेशनल मेडिसिन निदेशालय के कार्यकारी निदेशक और प्रबंध निदेशक; और कार्ल रिश, विदेश विभाग के कोंसुलर मामलों के ब्यूरो में सहायक विदेश मंत्री।

आज की ब्रीफ़िंग औपचारिक होगी। कॉल की समाप्ति तक इस ब्रीफ़िंग के अंश प्रसारित करने की मनाही होगी।

हम सीमित संख्या में सवालों के जवाब भी दे सकेंगे। इसलिए कार्यकुशलता के मद्देनज़र हम आपसे अनुरोध करेंगे कि सवाल पूछने के लिए आप आरंभिक बयान की समाप्ति का इंतज़ार नहीं करें, बल्कि इसी समय पहले एक और फिर शून्य को दबाएं।

मैं अब ये कॉल अपने वक्ताओं को सौंपता हूं, जो आरंभिक टिप्पणियों से इस ब्रीफ़िंग की शुरुआत करेंगे. और थोड़ा रूककर हम आपके सवाल लेंगे।

डॉ. कैडलेक।

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: आप सभी का धन्यवाद। मैं डॉ. बॉब कैडलेक हूं, अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग में तैयारी और प्रतिक्रिया मामलों का सहायक स्वास्थ्य मंत्री (एएसपीआर)। मैं आपको एएसपीआर और विदेश विभाग के ऑपरेशनल मेडिसिन निदेशालय के संयुक्त अभियान का संक्षिप्त परिचय देना चाहता हूं जो कि डायमंड प्रिंसेस से हमारे लोगों को लाने के लिए चलाया गया।

मैं डायमंड प्रिंसेस पर अमेरिकी चिकित्सा सहायता दलों और संक्रामक रोग विशेषज्ञों को अपने राष्ट्रीय आपदा चिकित्सा दलों के साथ काम करने के वास्ते तैनाती में असाधारण मदद करने, तथा पोत पर मौजूद अमेरिकियों की देखभाल करने और उन्हें स्वदेश लाने का फ़ैसला किए जाने के बाद आवश्यकतानुसार उनकी सहायता और सहयोग के लिए जापान सरकार और उसके स्वास्थ्य मंत्रालय का आभार भी व्यक्त करता हूं।

इससे जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ हमारे करीब 18 महीनों के कार्यक्रम का समापन हुआ है। हम आगामी मार्च में इसी तरह के परिदृश्य को लेकर अभ्यास करने वाले थे: आपदा या आपात स्थिति के मौक़े पर आप जापान से अमेरिकियों को कैसे वापस लाएंगे? और, उस पोत से अमेरिकियों को सुरक्षित और कुशलतापूर्वक बाहर निकालने में हमारी दक्षता के रूप में हमें हमारे साझा कार्यक्रम का पूरा फ़ायदा मिला है।

मैं अब डॉ. वॉल्टर्स से आग्रह करूंगा कि वे इस अभियान पर थोड़ा प्रकाश डालें क्योंकि इसका संबंध हवाई अभियानों से है और विदेश विभाग की इसमें अहम भूमिका रही है।

डॉ. वॉल्टर्स: शुक्रिया, डॉ. कैडलेक।

मैं विदेश विभाग से डॉ. वॉल्टर्स हूं।

चिकित्सा सेवा ब्यूरो का ऑपरेशनल मेडिसिन निदेशालय इनलोगों को स्वदेश लाने के हवाई मिशन के लिए उत्तरदायी है।

हम एएसपीआर के साथ बहुत गहरे जुड़कर काम करते हैं। पिछले कुछ दिनों में ये हमारी छठी उड़ान है। हमने चीन के वुहान से उड़ानें संचालित कीं, और अब ये उड़ानें।

इसकी योजना कई दिनों से बनाई जा रही थी। और एक बार राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने आगे कदम बढ़ाने का फ़ैसला कर लिया, तो हमने निश्चयपूर्वक अपने साझेदारों के साथ मिलकर इस काम को पूरा किया।

मैं जापान सरकार के लिए डॉ. कैडलेक द्वारा व्यक्त आभार को दोहराना चाहूंगा। वे इस वायरस को लेकर बहुत अनिश्चितता का सामना कर रहे थे, और हम उनके सहयोग की प्रशंसा करते हैं।

जो विमान रवाना हुए वो – विमान कैलिटा एयर समूह से कॉन्ट्रैक्ट पर लिए गए हैं। ऐसा कार्टर्सविल, जॉर्जिया स्थित फीनिक्स एयर समूह के साथ हमारे करार के तहत हुआ है, और हम अत्यंत संक्रामक रोगाणु से संक्रमित रोगियों के प्रबंधन के लिए पिछले कई वर्षों से इस करार का उपयोग कर रहे हैं।

विमान अटलांटा हार्ट्सफ़ील्ड से रवाना होकर सीधे टोक्यो के हनेदा एयरपोर्ट पहुंचे, और फिर रोगियों को सौंपा गया और एएसपीआर एवं उनके वहां मौजूद उसके कार्मिकों और दूतावास स्थित विदेश विभाग के कार्मिकों ने, और फिर विमान पर विदेश विभाग के कार्मिकों ने संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा किया।

हनेदा एयरपोर्ट से रवाना होकर पहला विमान सीधे ट्रेविस एयरफ़ोर्स बेस गया। इसमें रक्षा विभाग के नॉर्थकॉम और ज़ाहिर है एचएचएस-एएसपीआर, एचएचएस-सीडीसी और विदेश विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

दूसरा विमान हनेदा से रवाना होकर सीधे टेक्सस के लैकलैंड एयरफ़ोर्स बेस पर पहुंचा। दोनों जगहों पर यात्रियों को विमान से उतार लिया गया, और फिर उच्च जोख़िम वाले कई रोगियों को उन्हीं विमानों से नेब्रास्का विश्वविद्यालय की देखरेख में रखने के लिए ओमाहा, नेब्रास्का रवाना किया गया।

विमान इस समय विसंक्रमण कार्य के लिए अटलांटा के रास्ते में हैं। इसके बाद विमानों को उनकी कंपनी की सेवा में सौंप दिया जाएगा।

विमान से उतारे जाने के बाद बाक़ी यात्रियों को कैसे रखा जाएगा, इस पर रोशनी डालने के लिए एक बार फिर डॉ. कैडलेक।

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: शुक्रिया डॉ. वॉल्टर्स। बिल्कुल संक्षेप में बताना चाहूंगा कि पोत से बस पर और बस से विमान पर लाए जाने के दौरान यात्रियों की कई बार स्क्रीनिंग की गई। फिर ट्रेविस और लैकलैंड के गंतव्य स्थलों पर पहुंचने पर यात्रियों की और भी गहन मेडिकल जांच की गई। साथ ही, उनसे पहले के स्वास्थ्य और मौजूदा शारीरिक लक्षणों के बारे में प्रश्नावली पूरी कराई गई।

इन प्रक्रियाओं के बाद यात्रियों को उन अड्डों पर ही अलग करके रखा गया है। ट्रेविस बेस पर आए यात्रियों में से तीन ने शरीर का तापमान बढ़ने की शिकायत की और उन्हें जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया कि इसके क्या कारण हो सकते हैं।

ये लोग अगले 14 दिन रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) और एएसपीआर की संयुक्त निगरानी और देखरेख में समय बिताएंगे, जहां उनके स्वास्थ्य पर नज़र रखी जाएगी। और 14 दिनों के बाद उन्हें अपने-अपने घरों को जाने की अनुमति दी जाएगी।

इसी के साथ मैं यहां रुकूंगा और साथ ही ये भी कहना चाहूंगा कि कई रोगियों – माफ़ करें, 10 यात्रियों – और उनके जीवन साथी को अलग-थलग रखने के लिए ओमाहा स्थित नेब्रास्का विश्वविद्यालय में भी भेजा गया है।

श्री ब्राउन: ठीक है। अब हम सवालों के जवाब के लिए कुछ मिनट देंगे। सबसे पहले सीएनएन की जेनिफ़र हैंसलर।

प्रश्न: (अस्पष्ट) को अन्य यात्रियों से अलग रखा गया? और क्या आपके पास इस बात की जानकारी है कि कितने अमेरिकी अब भी डायमंड प्रिंसेस पर हैं और मोटे तौर पर कितने दुनिया भर में और जगहों पर अलग-थलग रखे गए हैं?

श्री ब्राउन: जेनिफ़र, क्या आप अपना सवाल दोहरा सकती हैं? लगता है शुरू का हिस्सा सुनाई नहीं पड़ा है।

प्रश्न: हां, माफ़ करें। क्या आप थोड़ा विस्तार से बताएंगे कि कैसे कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को इन उड़ानों में अपने साथ के यात्रियों से अलग रखा गया? और मोटे तौर पर, कितने अमेरिकी अब भी डायमंड प्रिंसेस पर मौजूद हैं? कंबोडिया में वेस्टर्डम के यात्रियों में से कितने वहां रह गए हैं, और उनका कोई संदेश मिला है?

डॉ. वॉल्टर्सहां, मैं डॉ. वॉल्टर्स बोल रहा हूं। तो जो तरीका है – विमान का उपयोग, और प्रभावित रोगियों को बिठाया जाना, इस मामले में कोरोना वायरस से संक्रमित यात्रियों को, उन्हें विशेष रूप से, जानबूझ कर, विगत वर्षों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा सम्मिलित रूप से तय प्रक्रियाओं के अनुरूप रखा जाता है।

747 विमान विशालकाय होता है, और इसे विभिन्न खंडों में बांट दिया गया है। विमान में वायु का प्रसार सामने से पीछे की ओर होता है, और चालक दल के सदस्य सामने वाले हिस्से में होते हैं, जिसे कि हम सुरक्षित हिस्सा मान सकते हैं। उसके पीछे यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होती है। और फिर विमान के पिछले हिस्से में हम 18 सीटें लेते हैं, जोकि अलगाव वाला हिस्सा निर्दिष्ट किया जाता है। चूंकि ये मालवाहक विमान है, इसलिए हमारे पास सीटों को व्यवस्थित करने और सीटों के खंड को चारों ओर प्लास्टिक का आवरण लगाने की पर्याप्त गुंजाइश होती है। प्लास्टिक का ये आवरण करीब 10 फ़ीट ऊंचा होता है, और उसमें एक प्रवेश का और पीछे की तरफ एक निकास का रास्ता होता है। तो इस तरह संक्रमण के किसी तरह के प्रसार से यात्रियों और चालक दल, दोनों की रक्षा होती है। अलगाव वाले खंड में मौजूद यात्रियों से कोई भी संपर्क एक सोची-विचारी रणनीति के तहत किया जाता है – यह पूर्व नियोजित तरीके से और सतर्कतापूर्वक किया जाता है।

जब ये घटनाक्रम सामने आया, स्वदेश लाए गए हर यात्री की एक चिकित्सा अधिकारी, या नर्स, या अमेरिकी सरकार के लिए कार्यरत नर्स ने पोत से उतरने से पहले जांच की। यात्रियों में कोई कोरोना वायरस से पीड़ित ज्ञात रोगी नहीं था। इसलिए हमने जिन लोगों की निकासी की, इस प्रकरण में 338 यात्री, उनके बारे में ये मानने का कोई कारण नहीं था कि उनके लैब परीक्षण में संक्रमण निकला हो, और उन्हें वहां से निकाला गया और उनमें रोग का कोई लक्षण नहीं दिख रहा था।

हमने उन्हें पोत से उतारा। जब निकाले जाने की प्रक्रिया में वे पोत से नीचे आए तो ये प्रक्रिया सरकार द्वारा संचालित थी। उन्हें बचाकर निकाला जा रहा था और ये एक तय प्रक्रिया के तहत हो रहा था। उन्हें बसों में चढ़ाया गया, और वो करीब 15 बसें एक साथ समूह में आगे बढ़ीं। इस काफ़िले को जापानी सुरक्षा बलों और पुलिस की सुरक्षा मिली हुई थी। और एक बार जब वे बस में बैठ गए और बसें चल पड़ी, तब जाकर हमें जापान सरकार की तरफ से संक्रमित रोगियों के बारे में सूचना दी गई।

अब, इस बात को समझें कि जापान सरकार बेहतरीन काम कर रही है, इस अभूतपूर्व घटनाक्रम को मैनेज करने की कोशिश कर रही है, ऐसे में जबकि वायरस के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि हमें हर रोज़ नया कुछ सीखने को मिल रहा है। पर हमें एक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा जब लोग निकासी की प्रक्रिया में शामिल थे, वे बसों में बैठ चुके थे, वे विमान की तरफ चल पड़े थे।

जब बसें – और ये अबाध रास्ता था। जब बसें विमान के पास आईं तो कोरोना वायरस से संक्रमित पर बाह्य लक्षणों की अनुपस्थिति वाले इन लोगों को बसों से उतारा गया और उन्हें विमान के अलग किए गए खंड में ले जाया गया, जो शेष यात्रियों से उन्हें अलग रखने के लिए विमान का सबसे सुरक्षित हिस्सा था, और ताकि हमें कुछ निर्णय लेने के लिए कुछ समय मिल सके।

मैंने सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक से संपर्क किया। हमारी बातचीत हुई, और विषय ये था: हमारे पास एक तय प्रक्रिया है जिसे हमने पूर्व की उड़ानों में उन तमाम यात्रियों पर लागू किया था कि जिनमें कि लक्षण दिख रहे थे – या, इस मामले में, कोई नई जानकारी – जोकि उनके लिए जोख़िम बढ़ाती हो, तो नियम ये है कि निकासी की इस प्रक्रिया की शेष अवधि के लिए उन्हें अलग निर्धारित खंड में रखा जाए।

अब सवाल सिर्फ ये था: क्या इनलोगों की निकासी की जा रही है? और क्या हमने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया? और दोनों का ही जवाब हां था। हां, इन लोगों की निकासी हो रही है। हमने उन्हें निकासी की प्रक्रिया में शामिल कर लिया है, और हमारे पास इस काम के लिए एक योजना है। क्या हम योजना को लागू करें? और इसका जवाब था- हां।

और इसलिए फैसले लेने के लिए समय निकालने तक उन्हें अलगाव वाले खंड में रखा गया, और उन्हें उस हिस्से में इसलिए रखा गया क्योंकि उनमें अलग रखे जाने वाले लोगों के लिए निर्धारित लक्षण दिख रहे थे। और, अलगाव वाले खंड में रखे जाने के बाद यात्रियों या चालक दल को उनसे किसी तरह का अतिरिक्त ख़तरा नहीं था।

डॉ. कैडलेक, मुझे नहीं पता पर क्या आप कुछ जोड़ना चाहेंगे।

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: हां, मैं बस एक बात जोड़ना चाहता हूं। वायरस और रोगियों के इस विशेष समूह, या दल, से जुड़े इस असाधारण घटनाक्रम और अनिश्चितता के चलते, विशेषकर उम्र और पहले के उनके रोगों के संदर्भ में, एएएसपीआर ने विदेश विभाग की मेडिकल टीम में दो संक्रामक रोग विशेषज्ञों को शामिल किया। इनमें से एक नेब्रास्का विश्वविद्यालय से और दूसरा बोस्टन के मास जेनरल हॉस्पिटल से है, जिन्हें ना सिर्फ 2003 में सार्स वायरस के मामलों को संभालने का व्यापक अनुभव है, बल्कि वे इबोला के कई मामलों को भी संभाल चुके हैं।

इसलिए हमारे पास पूरी उड़ान के दौरान इन पर नज़र रखने के लिए विशेषज्ञता वाले अतिरिक्त अनुभवी लोग थे। वे न सिर्फ उड़ान में साथ रहे, बल्कि उन्होंने पोत पर भी यात्रियों की जांच की थी, और पूरी फ्लाइट में उन्होंने उनकी निगरानी की। इसलिए हमें लगा कि इन रोगियों के मूल्यांकन और उनकी देखभाल के लिए हमारे पास बहुत ही अनुभवी विशेषज्ञ हैं।

डॉ. वॉल्टर्स: जहां तक आपके सवाल के शेष भाग की बात है, तो हम इस समय करीब 60 अमेरिकी नागरिकों पर नज़र रख रहे हैं, जोकि अब भी जापान में हैं। और हम 200 से थोड़ा अधिक अमेरिकी नागरिकों पर कंबोडिया में नज़र रख रहे हैं जिन्हें आगे की यात्रा करनी है, जिनमें से 92 कंबोडिया में वेस्टर्डम नामक पोत पर हैं।

श्री ब्राउन: ठीक है, अब अगला सवाल लेते हैं। आप ब्लूमबर्ग न्यूज़ के शॉन डोनैन की लाइन खोल सकते हैं।

ऑपरेटर: शॉन डोनैन आपकी लाइन खोल दी गई है। कृपया अपना सवाल पूछें।

 प्रश्न: नमस्कार, इस कॉल के लिए आपका शुक्रिया। मैं कंबोडिया में वेस्टर्डम की स्थिति पर थोड़ी और जानकारी पाना चाहूंगा। जब आप कहते हैं कि 200 से थोड़ी अधिक संख्या में अमेरिकी नागरिकों पर अभी कंबोडिया में नज़र रख रहे हैं तो क्या वे सब एक ही जगह पर हैं? क्या वे वहां से विभिन्न दिशाओं में निकल रहे हैं?

हमें रात में एशिया से ख़बर मिली कि मलेशिया में उड़ान से आई एक महिला में वायरस पाए गए हैं। क्या आप चिंतित हैं कि इनमें से कुछ मामले शायद कंबोडिया से आए हों? हम कंबोडिया की स्थिति को थोड़ा और विस्तार से समझना चाहते हैं।

डॉ. वॉल्टर्स: अच्छा। तो हम जिन अमेरिकी नागरिकों पर नज़र रख रहे हैं उनमें से 92 अब भी वेस्टर्डम पोत पर हैं, जबकि 260 नोम पेन्ह में होटलों में हैं। लगभग 300 अमेरिकी नागरिक कंबोडिया से निकल चुके हैं, पर कंबोडिया सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की जांच के बाद ही।

कुआलालंपुर के अस्पताल में भर्ती दंपति ही वेस्टर्डम पोत से लौटे ऐसे यात्री हैं जिनमें वायरस संक्रमण पाया गया है।

ज़ाहिर है, हर कोई वेस्टर्डम पर मौजूद अमेरिकी नागरिकों और अन्य यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित है, और उस पोत के यात्रियों से संपर्क करने और बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरसंभव कोशिशें की जा रही हैं।

श्री ब्राउन: ठीक है। अब न्यूयॉर्क टाइम्स के एड वोंग की लाइन खोलते हैं।

ऑपरेटर: एड वोंग की लाइन खोल दी गई है।

प्रश्न: इस कॉल के लिए आप सभी का धन्यवाद। हमारा एक पूरक सवाल है – तय प्रक्रिया के संबंध में डॉ. वॉल्टर द्वारा दी गई जानकारी से जुड़ा सवाल।

तो यात्रियों की जांच के लिए अमेरिकी चिकित्साकर्मी थे। मुझे लगता है, आपके कहे पर गौर करने के बाद, कि उन्होंने कोई विशिष्ट परीक्षण नहीं किए, लेकिन जापानी चिकित्साकर्मियों ने कोरोना वायरस को लेकर कोई जांच की।

और फिर, उस जांच के परिणाम निगेटिव रहे, पर फिर उस परिणाम को लेकर विचार बदल गया? या जांच रिपोर्ट अभी आई भी नहीं थी और यात्रियों को निकाला जाने लगा? और यदि ऐसा हुआ, तो भला जांच रिपोर्ट आने से पहले वे यात्रियों को क्यों निकाला जा रहा था?

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: डॉ. वॉल्टर्स, क्या मैं जवाब देना शुरू करूं, और बाद में आप अपनी बात जोड़िएगा?

डॉ. वॉल्टर्स: ठीक है।

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: बढ़िया सवाल। जब हमारी टीम वहां पहुंची, जैसा कि हमारे अपने देश में भी देखा जा रहा है, शीघ्रता से जांच करने की क्षमता बहुत सीमित है। और यदि आप पोत पर मौजूद 3,000 यात्रियों के बारे में सोचें, तो जापानी स्वास्थ्य मंत्रालय अपनी क्षमतानुसार यात्रियों की निरंतर जांच कर रहा था। और इस तरह एयरपोर्ट के रास्ते में बस में बैठे जिन लोगों के संक्रमित होने की पहचान हुई, उनका परीक्षण वास्तव में उन्हें निकाले जाने से दो-तीन दिन पहले हो चुका था. इस तरह, उनके मामले में दो-तीन दिनों की देरी हुई थी।

हमारे – मेरे चिकित्सा दल से जो संक्रमित लोगों की पड़ताल के लिए पोत पर गए थे, वे संक्रमित यात्रियों की पहचान करने में क़ामयाब रहे थे – और हां, जब हम कुछ लोगों की पड़ताल कर रहे थे, जांच रिपोर्ट आ गई और वे अभी पोत पर ही थे। उन लोगों को बाकियों से अलग कर लिया गया क्योंकि उनकी पहचान हो चुकी थी, और तय प्रक्रिया के मुताबिक उन्हें अस्पताल भेजा जा चुका था।

तो इस तरह परीक्षण हुए थे, जापानी परीक्षण। हमारे पास खुद अपने स्तर पर परीक्षण करने के साधन नहीं थे। और मैं अतिरिक्त बातों के लिए डॉ. वॉल्टर्स से आग्रह करूंगा।

डॉ. वॉल्टर्स: हां, मैं इस बात पर ध्यान दिलाना चाहूंगा कि परीक्षण का जापानियों का अपना एक दृढ़ तरीका है। उन्होंने कुछ अच्छी प्रक्रियाएं तय कर रखी हैं, या निश्चय ही अपनी क्षमता के अनुरूप, पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में उनके पास पर्याप्त सूचनाएं नहीं थीं – जो कि परीक्षणों और त्वरित परीक्षणों का आधार होती हैं – क्योंकि बीमारी के बारे में चीन से सूचनाएं देर से बाहर आ रही थीं।

इसलिए, हम सभी पर मानो सही कदम उठाने का दबाव था, और हम पर परीक्षण करने का दबाव था, हमें उम्मीद थी कि परीक्षण में दो या तीन दिन लगेंगे। और, इस अभूतपूर्व घटनाक्रम को लेकर जापानियों को जितने परीक्षण करने पड़े उसके कारण ये निश्चित नहीं था कि परिणाम कब आ पाएंगे। यदि परिणाम कुछ घंटे पहले आ जाते, हमारे पोत छोड़ने से पहले, इन लोगों को निकालना शुरू किए जाने से पहले, तो बात ही कुछ और होती।

लेकिन आख़िरकार जब हमें परीक्षणों के परिणाम मिले, ये लोग बस में बैठ चुके थे, वे निकासी की प्रक्रिया में थे और अगला कदम था उन्हें अलगाव वाले क्षेत्र में ले जाना। और सच कहें तो एक बार उनके अलगाव वाले खंड में पहुंचने के बाद सबसे सुरक्षित यही था कि उन्हें उसी जगह रहने दिया जाए और निकासी की प्रक्रिया पूरी की जाए।

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: वैसे, इतने बड़े समूह का परीक्षण करना पड़े तो हमारे ऊपर वैसी ही बाध्यता रहेगी।

श्री ब्राउन: ठीक है, क्या हम अगले सवाल के लिए वाशिंगटन पोस्ट के एलेक्स हॉर्टन की लाइन खोल सकते हैं?

ऑपरेटर: वाशिंगटन पोस्ट के एलेक्स हॉर्टन की लाइन खोल दी गई है। कृपया अपनी बात कहें।

प्रश्न: हां, छुट्टी के दिन इस कॉल के लिए एकत्रित होने पर आप सभी का धन्यवाद। मैं ये जानना चाहूंगा कि सीडीसी निकासी के इस कदम पर कब सहमत हुआ। कुछ दिन पहले अपने प्रेस रिलीज़ में उन्होंने कहा था कि रोगलक्षण वाले यात्रियों के जापान से रवाना नहीं होने देने के उद्देश्य से स्क्रीनिंग की जाएगी। आपके प्रेस रिलीज़ की भाषा में बड़ी सतर्कता बरती गई थी जिसमें आपने कहा था, “एचएचएस से परामर्श के बाद, विदेश विभाग ने उन लोगों को रवाना होने देने का फ़ैसला किया,” उन 14 लोगों को।

तो क्या उन्हें रवाना होने देने को लेकर सीडीसी और एचएचएस के साथ आप लोगों की परस्पर सहमति थी और उनकी आपत्तियां क्या थीं – जिनको कि लगता है आपने नज़रअंदाज़ किया है?

डॉ. वॉल्टर्स: मैं डॉ. वॉल्टर्स बोल रहा हूं। मैं ये कहना चाहूंगा कि अमेरिकी दूतावास के ज़रिए मिशन प्रमुख ही अंतत: कार्यकारी शाखा के तमाम क्रिया-कलापों का नेतृत्व करता है। इसलिए जब हम फ़ैसले की ज़िम्मेदारी लेने के लिए बहुत सतर्क हैं, विदेश विभाग – ये दूतावास की ज़िम्मेदारी है। इस हवाई मिशन को विदेश विभाग संचालित कर रहा था, और इन लोगों को शुरू में अलगाव वाले खंड में रखकर आगे के कदम पर बातचीत के लिए थोड़ा समय निकालने का निर्णय विदेश विभाग का है।

मुझे लगता है कि आपको रोग-लक्षण की परिभाषा में थोड़ी विसंगति नज़र आएगी। रोग-लक्षण की – जब हम ‘सिंप्टोमैटिक’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं, हम खांसने और छींकने और बुखार और शरीर में दर्द की बात करते हैं। ये सब रोग-लक्षण हैं, है ना? और जैसा कि डॉ. कैडलेक ने बताया और मैंने ज़ोर दिया, इन 338 लोगों में सभी का एक अनुभवी चिकित्साकर्मी ने परीक्षण किया, और उनमें से किसी में भी रोग के लक्षण नहीं थे।

एक बार जब वे बस पर सवार हो गए, हमें एक लैब परीक्षण से संबंधित सूचना दी गई जो दो या तीन दिन पूर्व किया गया था। लेकिन ये एक तथ्य है कि जब इन लोगों की निकासी के बारे में निर्णय किया गया तब रोग-लक्षण वाला एक भी व्यक्ति नहीं था – एक भी व्यक्ति जिसे बुखार हो या खांसी हो या निचले श्वसन तंत्र का संक्रमण हो, या ऐसा कोई भी लक्षण हो जिससे लगे कि वो वायरस से संक्रमित है – ऐसा कुछ भी नहीं था।

श्री ब्राउन: अच्छा, शुक्रिया। अगले सवाल के लिए क्या हम एबीसी के कॉनर फ़िनेगन की लाइन खोल सकते हैं?

ऑपरेटर: एबीसी के कॉनर फ़िनेगन, आपकी लाइन खुली है।

प्रश्न: नमस्कार, दो छोटे सवाल। पहला, ये स्पष्ट जानना चाहूंगा कि क्या डायमंड प्रिंसेस क्रूज़ पोत पर अब भी अमेरिकी नागरिक मौजूद हैं, और क्या जापान के अस्पतालों में भी कोई भर्ती है?

और दूसरा सवाल, विदेश विभाग के कल के एक बयान में कहा गया था कि अमेरिका सरकार विदेशों में अलग-अलग विकल्पों पर विचार करना जारी रखेगी, जिनमें ज़रूरत पड़ने पर अमेरिकी नागरिकों को स्वदेश लाना भी शामिल है। क्या ऐसे और भी मामले हैं, शायद कंबोडिया में मौजूद सैंकड़ो अमेरिकियों का मामला, जिनको लेकर आप आगे और निकासी उड़ानें संचालित करने की सोच रहे हों?

डॉ. वॉल्टर्स: मैं डॉ. वॉल्टर्स बोल रहा हूं। हम जापान में अस्पताल में भर्ती दोनों अमेरिकी नागरिकों की स्थिति पर बहुत करीब से नज़र रख रहे हैं; साथ ही, हम डायमंड प्रिंसेस पर रुकने का फ़ैसला करने वालों तथा नोम पेन्ह या दुनिया भर में मौजूद उन अमेरिकियों का भी ध्यान रख रहे हैं जिन्हें या तो वायरस का जोख़िम हो, जो वायरस से संक्रमित हों, या फिर जिन्हें अंतरराष्ट्रीय विमानन उद्योग में और उड़ानों आदि में व्यवधान के कारण अमेरिका लौटने में परेशानी हो रही हो।

ये कोंसुलर मामलों के बुनियादी विषय हैं। ये विदेश विभाग के बुनियादी विषय हैं – ये विदेशों में अमेरिकी नागरिकों की सलामती के लिए विदेश विभाग की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है, और हम इसे बेहद गंभीरता से लेते हैं।

श्री ब्राउन: धन्यवाद। अगले सवाल के लिए क्या हम सैन एंटोनियो की लॉरेन करूबा के पास जा सकते हैं।

ऑपरेटर: सैन एंटोनियो एक्सप्रेस-न्यूज़ की लॉरेन करूबा की लाइन खोल दी गई है। कृपया अपना सवाल पूछें।

प्रश्न: मेरा सवाल लेने के लिए बहुत शुक्रिया। क्या आप अलग-अलग संख्या बता सकते हैं कि 338 यात्रियों में से कितने लैकलैंड गए, और कितने ओमाहा और कितने ट्रेविस? क्या आप यात्रियों के गंतव्य के बारे में विस्तार से बता सकते हैं?

और, इसी से जुड़ा ये सवाल कि कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए यात्रियों में से किसी को लैकलैंड भेजा गया?

डॉ. वॉल्टर्स: मैं डॉ. वॉल्टर्स बोल रहा हूं। तीन सौ अड़तीस यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया था। ट्रेविस पहुंचे पहले विमान पर 177 लोग थे। उन 177 यात्रियों में से 7 को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के कारण अलग रखा गया था। उड़ान के दौरान बुखार से पीड़ित तीन अन्य यात्रियों को अलग किया गया, पर ये उन लोगों में से नहीं हैं जिन्हें कि परीक्षणों के बाद वायरस-संक्रमित पाया गया था। एक सौ सड़सठ लोगों को अलग-थलग नहीं किया गया। एक सौ इकहत्तर ट्रेविस में रुके हैं। छह लोगों को ओमाहा भेजा गया, और ये तीन दंपति युगल के रूप में थे, इसका मतलब ये हुआ कि चार व्यक्ति जो कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए हैं पर जिनमें रोग-लक्षण नहीं दिख रहे, उन्हें ट्रेविस एयरफ़ोर्स बेस के निकट के स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाया गया है।

दूसरा विमान लैकलैंड पहुंचा था। उस पर 151 यात्री सवार थे। उनमें से सात लैब परीक्षणों में पॉजिटिव पाए गए थे पर उनमें रोग-लक्षण नहीं दिख रहे थे; उन्हें अलग करके रखा गया था। उड़ान के दौरान दो और यात्रियों को बुखारग्रस्त पाए जाने पर तयशुदा प्रक्रिया के अनुरूप अलग बिठाया गया। एक सौ तैंतालीस यात्रियों को अलग-थलग नहीं किया गया। कुल एक सौ चौवालीस व्यक्ति लैकलैंड में ही रखे गए, जबकि सात को ओमाहा भेजा गया। इन सातों में से एक दंपति युगल है। लैब परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए सभी कार्मिकों – या यात्रियों को ओमाहा, नेब्रास्का भेज दिया गया है।.

श्री ब्राउन: ठीक है। तो मैं समझता हूं हमारे पास एक और सवाल के लिए समय है, यदि आप वॉल स्ट्रीट जर्नल की मिशेल हैकमैन की लाइन खोल दें।

प्रश्न: नमस्कार। एक – 

ऑपरेटर: आपकी लाइन खुली हुई है।.

प्रश्न: क्या आप हमें सुन पा रहे हैं? धन्यवाद।

स्पष्टीकरण के लिए एक सवाल और एक पूरक सवाल। तो सबसे पहले, आपने कुछ यात्रियों को ट्रेविस एयरफ़ोर्स बेस के पास के अस्पतालों में लाए जाने की बात की। आपने कुछ लोगों को ओमाहा भेजे जाने के बजाय स्थानीय अस्पतालों में ले जाने का फ़ैसला कैसे किया?

और फिर, बस यात्रा के बारे में भी, क्या आप हमें बता सकते हैं कि कितनी देर तक कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए यात्री बसों पर अन्य यात्रियों के साथ रहे?

और क्या इस अनुभव ने आपलोगों को इस बात पर गौर करने के लिए प्रेरित किया कि कोरोना वायरस के प्रभावी होने की अवधि या इनक्यूबेशन पीरियड आपके शुरुआती अनुमानों के विपरीत कहीं अधिक दिनों की है?

डॉ. वॉल्टर्स: तो मैं आपके सवाल के पहले हिस्से – या आखिरी हिस्से का जवाब पहले दूंगा, और फिर अस्पताल के चयन और उससे जुड़े फैसलों के बारे में बताने के लिए डॉ. कैडलेक से आग्रह करूंगा।

जहां तक बस की बात है, तो पोत से एयरपोर्ट तक की यात्रा में लगभग 40 मिनट लगे थे। और हमने हवाई पट्टी तक पहुंचते ही उन्हें पोत से – माफ़ करें, बसों से उतार लिया था और ऐसा करना सुरक्षित था।

जहां तक वायरस संबंधी विज्ञान की बात है, इसमें निरंतर प्रगति हो रही है। और जैसे ही हमें वुहान से, चीन से, डब्ल्यूएचओ से और सीडीसी से और जानकारियां मिलती हैं, मैं समझता हूं उनसे वायरस के बारे में, उसके इनक्यूबेशन पीरियड के बारे में और मानव शरीर में उसके व्यवहार के बारे में हमारी समझ विकसित हो सकेगी।

मैं अब अस्पतालों के चयन के सवाल के बारे में बताने के लिए डॉ. कैडलेक से आग्रह करता हूं।

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: ज़रूर, मैं पहले इनक्यूबेशन पीरियड के बारे में बात करूंगा। ऐसा लगता है कि औसत अवधि 5 से 6 दिनों की है, जबकि संपूर्ण दायरा 2 से 14 दिनों का है। डेटा के एकत्रीकरण से यही जानकारी मिलती है – पर फिर से कहूंगा कि ये अंतिम सूचना नहीं है, पर इससे आपको इनक्यूबेशन पीरियड का अनुमान लगाने का एक आधार मिल जाता है।

और माफ़ करें, क्या आप अस्पतालों के चयन वाला अपना सवाल दोहराएंगी? हेलो?

श्री ब्राउन: उनकी लाइन शायद बंद हो गई हो। मैं समझता हूं सवाल ये था कि कुछ रोगियों को ट्रेविस के आसपास के स्थानीय अस्पतालों में जबकि कुछ को ओमाहा भेजने का फ़ैसला किस आधार पर किया गया।

सहायक स्वास्थ्य मंत्री कैडलेक: अच्छा, हां। मेरा मतलब, इस मुद्दे पर राज्य और स्थानीय जनस्वास्थ्य अधिकारियों के बीच पहले से सहमति है – पर सभी प्रकार के बुखार, हर तरह की बीमारी, कोरोना वायरस से जुड़ी नहीं है। इसलिए यहां इरादा मूलत: उचित परिवेश में, अलग रखते हुए, उनकी स्थिति के आकलन की है – किसी स्थानीय अस्पताल के श्वसन संबंधी अलगाव कक्ष में रखा जाना, जोकि राज्य और स्थानीय अधिकारियों द्वारा निर्दिष्ट हो, और फिर उनके संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन; और खासकर कोरोना वायरस और साथ ही संभावित इन्फ़्लूएंज़ा – ये इन्फ़्लूएंज़ा का मौसम है – या अन्य किसी रोग की आशंका को दूर करना।

तो लैकलैंड और ट्रेविस, या और भी जगह संगरोध या क़्वारंटाइन में रखे गए व्यक्तियों के मामलों में इसी तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

धन्यवाद।

श्री ब्राउन: ठीक है, आज के कॉल से जुड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद, और ब्रीफ़िंग करने वालों का भी हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद।

चूंकि अब इस कॉल की समाप्ति हो रही है, इसलिए इससे जुड़ी सामग्रियों के प्रसार पर लगी रोक अब हटाई जाती है।

आप सभी का दिन शुभ हो।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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