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ईरान के लिए विशेष दूत एवं विदेश मंत्री के विशेष सलाहकार ब्रायन एच. हुक की विशेष ब्रीफ़िंग

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विशेष ब्रीफ़िंग
अमेरिकी विदेश विभाग
ब्रायन एच. हुक
ईरान के लिए विशेष दूत एवं विदेश मंत्री के विशेष सलाहकार
प्रेस ब्रीफ़िंग कक्ष
वाशिंगटन डी.सी.
तत्काल जारी करने के लिए
फरवरी 20, 2020

 

श्री ब्राउन: सुप्रभात। आप सभी को आज यहां देखकर खुशी हो रही है। हमसे जुड़कर, एक बार फिर –

श्रोता: आपकी बात पर यक़ीन नहीं होता।

श्री ब्राउन: मैं सच कह रहा हूं, सचमुच। (हंसी।) हमारे बीच आज ईरान के लिए विशेष दूत ब्रायन हुक मौजूद हैं। पहले की ही तरह वह ईरान के घातक रवैये और उसे रोकने के हमारे प्रयासों के बारे में बात करेंगे। शुरुआत वह अपनी संक्षिप्त टिप्पणी से करेंगे और फिर आपक सवालों के जवाब देंगे।

ब्रायन।

श्री हुक: धन्यवाद। सुप्रभात।

श्रोता: सुप्रभात।

श्री हुक: कल ईरानी शासन एक आयोजन करने जा रहा है जिसे चुनाव की संज्ञा दी जाएगी। ईरानी लोगों के लिए ये दुर्भाग्य की बात है कि वोट डाले जाने से बहुत पहले ही गुप्त रूप से असल चुनाव हो चुके हैं। ईरान में पिछले 41 सालों से यही स्थिति है। कौन चुनाव लड़ने के योग्य है इसका पहले से ही निर्णय कर ये शासन ईरान के लोगों को एक प्रतिनिधि संसद चुनने से वंचित कर देता है।

आज ट्रंप प्रशासन ईरानी शासन को जवाबदेह ठहराने के लिए कार्रवाई कर रहा है। मैं बता दूं कि अमेरिका कार्यकारी आदेश 13876 के तहत ईरानी शासन के पांच वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा रहा है। प्रतिबंधों के लिए आज नामित किए जा रहे अधिकारियों ने ईरानी लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष संसदीय चुनावों से वंचित किया है। इसमें गार्डियन काउंसिल के सचिव अहमद जन्नती और काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य एवं ईरान की क्रूर न्यायपालिका के पूर्व प्रमुख मोहम्मद यज़्दी शामिल हैं। हम तीन अन्य अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगा रहे हैं, जो गार्डियन काउंसिल की चुनाव पर्यवेक्षण की केंद्रीय समिति के सदस्य हैं।

ये पांच अधिकारी मिलकर एक ऐसी प्रक्रिया संचालित करते हैं, जो ईरानी जनता की आवाज़ को दबाती है, उनकी स्वतंत्रता पर अंकुश लगाती है, और उनकी राजनीतिक भागीदारी को सीमित करती है। कोई भी ईरानी जो चुनाव लड़ना चाहता है, उसे पहले गार्डियन काउंसिल और काउंसिल की चुनाव पर्यवेक्षण समिति की स्वीकृत की दरकार होती है। गार्डियन काउंसिल का नेतृत्व 12 अनिर्वाचित मौलवियों और तथाकथित कानूनी विशेषज्ञों के एक समूह द्वारा किया जाता है। वे ही तय करते हैं कि किसको चुनाव लड़ने दिया जाएगा। असलियत में तो ईरान में मतदान करने का अधिकार इन्हीं लोगों को है।

कल के चुनाव के लिए काउंसिल ने 7,000 से अधिक उम्मीदवारों को चुनाव में भाग लेने के अधिकार से वंचित कर दिया है। उन्होंने ईरानी संसद के 90 मौजूदा सदस्यों को भी दोबारा चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा दिया है। गार्डियन काउंसिल के अध्यक्ष अहमद जन्नती हैं। वह 92 साल के मौलवी हैं। वह 1980 में काउंसिल में शामिल हुए थे और 1988 में काउंसिल के अध्यक्ष बने। वो पिछले 40 वर्षों से ये तय करने में व्यस्त हैं कि ईरानियों को किनके लिए वोट करना है। और 2010 में, जब ईरानियों ने उनके दिखावटी चुनाव का विरोध किया, तो जन्नती ने ईरानी शासन द्वारा विरोध करने वालों को मौत के घाट उतारे जाने की सराहना की थी। उन्होंने आह्वान किया था कि विरोध प्रदर्शन रुकने तक और लोगों को ख़त्म करते रहा जाए।

जन्नती को समय-समय पर अमेरिका के लिए और इज़रायल के लिए मौत की कामना करने के लिए भी जाना जाता है। वह ईरानी शासन के यहूदी-विरोधवाद के दुनिया के अग्रणी सरकारी प्रायोजक होने के पीछे एक बड़ी वजह हैं। जन्नती को अमेरिकी और यूरोपीय मीडिया में उतनी अच्छी तरह नहीं जाना जाता है क्योंकि शासन ऐसा नहीं चाहता है। क्योंकि ऐसा होने पर बदनामी होगी। लेकिन ईरान के लोग उन्हें अच्छी तरह से जानते हैं और अहमद जन्नती जैसे मौलवियों के कारण ही ईरानी शासन को स्वदेश में विश्वसनीयता और वैधता का संकट झेलना पड़ रहा है।

ईरानी लोग जानते हैं कि कल का चुनाव राजनीतिक नाटक है। जब सरकार चुनाव लड़ रहे आधे उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर देती हो, तो ईरान बस नाम का ही गणतंत्र है। लाखों ईरानियों ने मतदान में भाग नहीं लेने का फ़ैसला किया है। वे जानते हैं कि इस प्रक्रिया में उनकी राय का महत्व नहीं है। वे एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं, जिसमें कि वे हाशिए पर डाले जाने या मार डाले जाने के डर के बिना अपने विचारों को खुलकर साझा कर सकें।

अमेरिका, ईरानी अधिकारियों को बेनक़ाब करना जारी रखेगा जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरानी लोगों को उनके अधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रताओं से वंचित करते हैं। इस शासन को एक प्रतिनिधि सरकार की अपने लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें चुनावों में वास्तविक विकल्प देना चाहिए। यह ध्यान देने की बात है कि ईरानी शासन ने स्वदेश में तो दमन को बढ़ा दिया है, लेकिन वह विदेशों में संघर्षों पर ईरानी लोगों का पैसा खर्च करना जारी रख रही है। ईरानियों को गैस सब्सिडी में कटौती करने के बजाय, शायद शासन को हूथियों को मिसाइल सहायता में कटौती करनी चाहिए।

पर मुझे ज़्यादा उम्मीद नहीं है। कुछ हफ़्ते पहले ही अमेरिका की नौसेना ने एक नौका से ईरानी हथियारों की एक बड़ी खेप बरामद की जो यमन में हूथियों को भेजी जा रही थी। पकड़े गए हथियारों में 150 ईरान निर्मित टैंकरोधी मिसाइलों के साथ-साथ ईरान द्वारा विकसित और निर्मित सतह से हवा में मार करने वाली तीन मिसाइलें भी थीं। इसके अलावा ईरान निर्मित थर्मल ऑप्टिकल उपकरण तथा हूथियों के लिए भेजे जा रहे जलजनित विस्फोटक उपकरण बनाने के पुर्ज़े भी थे। ये हथियार लाल सागर में व्यापारिक नौवहन और नौवहन की स्वतंत्रता के लिए बहुत वास्तविक ख़तरा पैदा करते हैं।

इस ज़ब्ती से पहले अमेरिकी नौसेना ने नवंबर में भी यमन के हूथियों को भेजे जा रहे उन्नत ईरानी हथियारों और ईरानी हथियार के कलपुर्ज़ों की एक खेप रोकी थी। उसमें भी वैसी टैंकरोधी मिसाइलें और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें शामिल थीं जैसी कि कुछ हफ़्ते पहले पकड़ी गई हैं। संयुक्तराष्ट्र ने जनवरी में इन हथियारों और पूर्व में ज़ब्त किए गए यमन को भेजे जा रहे हथियारों की जांच पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें हथियारों के ईरान में निर्मित होने की संभावना व्यक्त की गई है।

ईरान द्वारा हूथियों को हथियार भेजे जाने में संयुक्तराष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों का उल्लंघन होता है। अमेरिका के इन सफल अभियानों से यमन को लेकर ईरान का दोमुंहापन उजागर होता है। ईरानी शासन जहां संघर्ष के राजनयिक समाधान के समर्थन का दावा करता है, वहीं उसके कृत्य इसके विपरीत सबूत पेश करते हैं। निर्देशित मिसाइलें और अपरिष्कृत विस्फोटक उपकरण कूटनीति के साधन नहीं हो सकते; वे युद्ध के हथियार हैं और संघर्ष में ईरान का यही योगदान है।

अमेरिका ईरान की घातक गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए इस क्षेत्र में अपने साझेदारों के साथ खड़ा रहेगा। इसमें सऊदी अरब भी शामिल है, जो यमन में ईरान के छद्म युद्ध के खिलाफ़ अग्रिम मोर्चे पर खड़ा है। विदेश मंत्री पोम्पियो आज रियाद में हैं, जहां वह शाह सलमान, युवराज मोहम्मद बिन सलमान, विदेश मंत्री फ़ैसल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ईरानी ख़तरे पर चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री ने इससे पहले आज प्रिंस सुल्तान एयरबेस का दौरा किया। इस सैनिक अड्डे पर वर्तमान में अमेरिकी सैनिक भी मौजूद हैं। सऊदी अरब के साथ वहां हमारी संयुक्त उपस्थिति ईरानी आक्रामकता को रोकने और क्षेत्र की रक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए अपने साझेदारों के साथ सहयोग की अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हम जिस प्रकार क्षेत्र में अपने साझेदारों के साथ मिलकर काम करते हैं, उसी तरह हम ईरान के हथियारों की आपूर्ति और मिसाइल प्रसार को रोकने के लिए दुनिया भर में अपने साझेदारों के साथ भी काम कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ईरान पर तब तक दबाव बढ़ाना चाहिए जब तक कि वह संघर्ष के क्षेत्रों में अपने प्रतिनिधि समूहों को हथियार, प्रशिक्षण और धन मुहैया कराना बंद नहीं कर देता हो। इसमें ईरान पर संयुक्तराष्ट्र के हथियार प्रतिबंधों को बढ़ाने के लिए कदम उठाना भी शामिल है, जोकि ईरान समझौते के तहत अक्टूबर में समाप्त हो रहे हैं।

आतंकवादी समूहों या हथियारबंद गुटों को हथियार मुहैय्या कराने की ईरान की क्षमता के विरुद्ध सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को हटाए जाने से क्षेत्र में शांति पर विपरीत असर पड़ेगा। इससे ईरान का मनोबल बढ़ेगा, उसे अपने हथियार भंडार के विस्तार का मौक़ा मिलेगा, और मौजूदा संघर्षों में वह अपनी भूमिका को और बढ़ा सकेगा।

मैं अब आपके कुछ सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हूं।

श्री ब्राउन: मैट।

प्रश्न: हां। मेरा सवाल गार्डियन काउंसिल पर आज के प्रतिबंधों के बारे में है, तो क्या ये लोग अभी किसी प्रतिबंध के तहत नहीं थे?

श्री हुक: नहीं, नहीं थे।

प्रश्न: तो ऐसा क्यों जब वे ज़िम्मेवार थे –

श्री हुक: राष्ट्रपति ने गत वर्ष जून में ईरान के सर्वोच्च नेता और सर्वोच्च नेता के कार्यालय पर प्रतिबंधों के लिए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। और हम उस आदेश का कई बार इस्तेमाल कर चुके हैं। उसी आदेश के तहत हमने जावेद ज़रीफ़, ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख इब्राहिम रईसी, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी समेत कई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे। तो हम इस नए आदेश का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। तो हमने विगत में उन सबों पर प्रतिबंध लगाए, और आज हमने उनमें पांच और जोड़े हैं।

प्रश्न: अच्छा। तो ये प्रतिबंध वही हैं – परिसंपत्तियों को फ़्रीज़ करना – वे –

श्री हुक: हां। बिल्कुल।

प्रश्न: पर अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में इनलोगों की कोई परिसंपत्ति नहीं है, है ना? तो फिर –

श्री हुक: अच्छा, तो आपको पता है?

प्रश्न: मुझे नहीं पता, पर ये तो माना ही जा सकता है –

श्री हुक: तो ईरान जो है – ईरान –

प्रश्न: –  कि गार्डियन काउंसिल के 92 वर्षीय प्रमुख का सिटीबैंक में खाता या ऐसी कोई बात तो नहीं ही है।

श्री हुक: दरअसल ईरान की परिसंपत्तियां दुनिया भर में हैं, तो जहां भी ये परिसंपत्तियां हैं, जिनके यहां भी वो परिसंपत्तियां हैं वे उन्हें फ़्रीज़ करें।

प्रश्न: समझ गया। क्या मैं संयुक्तराष्ट्र की पाबंदियों के बारे में पूछ सकता हूं? क्या आप अब ये कह रहे हैं कि आप बस पाबंदियों को आगे भी लागू रखने की कोशिश कर रहे हैं और नई पाबंदियों का प्रयास नहीं कर रहे? आपको पता है कि इस शहर में उन लोगों की बेचैनी बढ़ रही है जोकि परमाणु समझौते से सहमत नहीं हैं – बेचैनी इस बात की कि आपलोग संयुक्तराष्ट्र की सारी पाबंदियां लागू कराने की मांग या प्रयास नहीं कर रहे हैं।

इसलिए मेरा सवाल ये है कि क्या अभी भी ये विकल्प है? क्या आप नई पाबंदियों की मांग कर रहे हैं या सिर्फ हथियार प्रतिबंधों को अक्टूबर के बाद भी लागू रखना चाहते हैं?

श्री हुक: हमने – यूरोपीयों की इस घोषणा से भी पहले कि वे विवाद निपटान व्यवस्था को अपनाएंगे, हमने पाबंदियों की समय-सीमा ख़त्म होने के ख़तरे को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता का इज़हार शुरू कर दिया था। और इसलिए हमारा फ़ैसला हथियार प्रतिबंधों के नवीकरण के लिए है और इसके नवीकरण की आवश्यकता ई3 समूह के विवाद निपटान व्यवस्था अपनाने से पूर्व की है, इसलिए मैं उनको परस्पर नहीं जोड़ूंगा।

आपके सवाल के जवाब में मैं वही कहूंगा जो राष्ट्रपति ने जनवरी के आरंभ में कहा था, कि वह चाहेंगे कि ईरान परमाणु समझौते से जुड़े पक्ष हमारे प्रयासों में शामिल हों और समझौते से अलग हट जाएं, और एक नए और बेहतर समझौते के हमारे प्रयासों का साथ दें, जिसमें सिर्फ परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि मिसाइलें तथा क्षेत्रीय आक्रामकता और बंधक बनाने के कृत्य भी सम्मिलित होंगे।

इसलिए अब जबकि ईरान परमाणु समझौते का उल्लंघन कर चुका है, मैं बारंबार यही सोचता हूं कि यूरोपीयों को विवाद निपटान व्यवस्था अपनाने के लिए किस बात ने प्रेरित किया, क्योंकि परमाणु समझौते में अब बचाए जाने लायक़ कुछ रह नहीं गया है। यह अक्टूबर में समाप्त होना शुरू हो जाएगा, और ईरानी शासन इसका कई बार उल्लंघन कर चुका है। हमें अपनी विदेश नीति में कुछ बहुत ही अच्छी सफलताएं मिल रही हैं, ईरानी शासन को अपने छद्म प्रतिनिधि संगठनों को पहले की तरह धन उपलब्ध कराने और अपने खुद के कार्यक्रमों को चलाने से रोकने में। इसलिए हम समझते हैं कि और अधिक राष्ट्रों को हमारी विदेश नीति से जुड़ना चाहिए, और राष्ट्रपति ने इसके लिए आह्वान किया है।

श्री ब्राउन: नादिया।

प्रश्न: शुक्रिया। ब्रायन, जब आप ये कहते हैं कि पिछले 41 वर्षों से चुनाव गुप्त रूप से तय किए गए हैं, तो क्या आपके पास इसके ठोस सबूत हैं? और क्या इसमें खातमी और बाकियों का निर्वाचन भी शामिल है जिन्हें कि वे उदार राष्ट्रपति मानते हैं? और क्या मौजूदा चुनाव के बारे में कोई विशेष सबूत है – मुझे पता है कि ये राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नहीं, संसद के हैं।

श्री हुक: गार्डियन काउंसिल पहले भी – ये कोई पहला मौक़ा नहीं है कि गार्डियन काउंसिल ने उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराया हो। वे ऐसा नियमित रूप से करते रहे हैं। जन्नती 1980 से ही इस पद पर हैं। वह एक अनिर्वाचित अधिकारी हैं जो ये तय करते हैं कि ईरानियों को किनको वोट देना है। और ईरान नाम से तो यह एक इस्लामी गणतंत्र है, फिर भी यह संसदीय चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों में से आधे को अयोग्य ठहरा देता है। जबकि संविधान का अनुच्छेद 6 कहता है कि “देश का कामकाज़ जनता के वोटों के आधार पर चलाया जाना चाहिए” और “चुनावों के द्वारा”। पर ऐसा होता नहीं – आप सचमुच में इन्हें चुनाव नहीं कह सकते जब चुनाव लड़ने के इच्छुक आधे लोगों को कुछेक अनिर्वाचित लोगों द्वारा अयोग्य ठहरा दिया जाता हो।

तो इस तरह ईरान दोनों तरह से फ़ायदे चाहता है। वे इस धर्मतांत्रिक, भ्रष्ट, धार्मिक माफ़िया के शासन को जारी रखना चाहते हैं, पर वे इसे दुनिया के सामने गणतंत्र के रूप में पेश करना चाहते हैं। और शासन के लिए यह भूमिका आमतौर पर जावेद ज़रीफ़ की रही है। मेरे लिए ये जानना दिलचस्प था – मैंने कल रात गूगल सर्च किया, और उसमें अहमद जन्नती के नाम पर जहां आपको 69,000 परिणाम मिलते हैं, वहीं जावेद ज़रीफ़ के नाम पर 4 मिलियन से अधिक सर्च परिणाम मिलेंगे। और ईरानी शासन ऐसा ही चाहता है, क्योंकि ये पश्चिमी दुनिया के लोगों के समक्ष शासन की एक अच्छी छवि पेश करना चाहता है, पर शासन के केंद्र में अहमद जन्नती जैसे लोग हैं।

श्री ब्राउन: हुमेरा।

प्रश्न: नमस्कार, ब्रायन।

श्री हुक: नमस्कार।

प्रश्न: क्या मैं मानवीय सहायता संपर्कों के बारे में पूछ सकती हूं, जिसकी घोषणा आपलोगों ने कुछ ही समय पहले की है? तब आपने कहा था कि आपलोग अन्य कंपनियों और देशों से बात कर रहे हैं? क्या और कुछ आपूर्ति की गई है? और भी किसी ने ईरान को दवा और अन्य चीज़ें भिजवाने के लिए इस संपर्क का इस्तेमाल किया है?

श्री हुक: हम कुछ सप्ताह पूर्व पहला लेन-देन कर पाए हैं, कैंसर उपचार की दवाओं के लिए, जिस पर हमें बहुत खुशी हुई। मैंने यहां इसी मंच से उस बारे में बात की थी। हम कम से कम दो और कंपनियों के साथ इस बारे में अलग से बातचीत कर रहे हैं।

हम चैनल का परीक्षण करने के लिए जल्द से जल्द लेन-देने होते देखना चाहते थे, ताकि सुनिश्चित कर सकें कि यह काम कर रहा है। और अब मुझे लगता है कि अन्य कई कंपनियों को इसकी जानकारी मिल रही है – चिकित्सा कंपनियां और दवा कंपनियां, औषधि कंपनियां – अब इस चैनल का उपयोग करने में बहुत रुचि देखी जा रही है।

गत सप्ताह मैं अगले लेन-देन के बारे में बातचीत के लिए वित्त विभाग में उप वित्त मंत्री म्यूज़िनिच के साथ था। इसलिए हम बहुत निकट सहयोग के साथ काम करना जारी रखेंगे, और आपको अधिक लेन-देन देखने को मिलेगा।

श्री ब्राउन: माइकल।

प्रश्न: धन्यवाद। कांग्रेस के सदस्यों और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों की विदेश मंत्री ज़रीफ जैसे ईरानी अधिकारियों के साथ बैठकों को कैसे देखते हैं? और दूसरा, विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने कहा है कि जब तक अमेरिका प्रतिबंधों को हटा नहीं देता, तब तक ईरान बातचीत नहीं करेगा और आज आप नए प्रतिबंध लगा रहे हैं।

श्री हुक: विदेश मंत्री इस बारे में बोल चुके हैं। मैं समझता हूं राष्ट्रपति ने भी इस बारे में बोला है। पहले सवाल के बारे में, जितना उन्होंने बोला है उससे अधिक कहने के लिए मेरे पास कुछ नहीं है। जहां तक –

प्रश्न: क्या हम इसे अमेरिका की रणनीति या इस प्रशासन की रणनीति के लिए उपयोगी मानते हैं?

श्री हुक: विदेश मंत्री कल इस बारे में बोल चुके हैं और उससे अधिक कहने के लिए मेरे पास कुछ नहीं है। पर क्या था आपका दूसरा प्रश्न?

प्रश्न: ईरान के विदेश मंत्री के बयान पर कि ईरान तब तक बात नहीं करेगा –

श्री हुक: ये तो ईरान को तय करना है। वे इस प्रशासन की शुरूआत से ही इस राह पर चल रहे हैं। ईरानी शासन इस प्रशासन द्वारा पिछले दो वर्षों के दौरान की गई सीमित राजनयिक संपर्क की पहल को ठुकराता रहा है। लेकिन यह केवल अमेरिका का प्रस्ताव ही नहीं है जिसे कि वे अस्वीकार करते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री आबे के कूटनीतिक प्रयासों को अस्वीकार कर दिया है। कई देशों ने कोशिशें की कि ईरान एक बेहतर रास्ता चुने, अमेरिका के साथ काम करे, कूटनीतिक रूप से हमारे बीच के मतभेदों को सुलझाए। ईरानी शासन हमारे मतभेदों को कूटनीतिक रूप से हल करने के बजाय सैन्य बल का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसलिए उस पर हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है। जहां तक एक साथ आने की बात है, तो राष्ट्रपति ने कहा है कि वह किसी बैठक के लिए भुगतान नहीं करेंगे। और इसलिए उन्होंने बार-बार कहा है कि किसी बैठक के लिए प्रतिबंधों में राहत नहीं दी जाएगी। राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ने ऐसे कई फ़ायदों की बात स्पष्ट रूप से कही है जोकि ईरानी शासन के साथ पूर्ण और व्यापक समझौते के बाद दिए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा होने के लिए पहले हमें व्यवहार में बदलाव तो दिखे।

श्री ब्राउन: आइए तीसरी पंक्ति से सवाल लेते हैं, वहीं पर।

प्रश्न: धन्यवाद, ब्रायन। ईरान के नेता अली खमनेई और राष्ट्रपति रूहानी ने गत सप्ताहांत में कहा कि वे अमेरिका के दबाव अभियान बंद करने तक बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। मैं चाहूंगा कि आप इस पर कुछ कहें।

श्री हुक: मुझे लगता है अभी जो पूछा गया था, ये उससे मिलता-जुलता सवाल है, पर हम ईरान को लेकर 2017 से एक ही रणनीति अपनाए हुए हैं। इसके तीन घटक हैं: ईरानी शासन को उस धन से वंचित करना जो उसे अपनी क्रांतिवादी विदेश नीति और अपने छद्म प्रतिनिधि संगठनों के वित्तपोषण के लिए चाहिए; निवारक शक्ति को पुनर्बहाल करना; और ईरान के लोगों का साथ देना। हम इस रणनीति को प्रतिदिन लागू कर रहे हैं और इसके नतीजे से प्रसन्न हैं।

उस पूरी अवधि में हमने स्पष्ट किया कि हम बात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ईरानी शासन ने एक नई राह चुनने का फैसला किया है। और इसलिए हम जल्दी में नहीं हैं। हमारे पास बहुत समय है। और इसलिए ईरानी शासन को सिर्फ यह तय करना है – जोकि विदेश मंत्री ने मई 2018 के एक भाषण में कहा था – उन्होंने कहा था कि ईरानी शासन या तो एक सामान्य राष्ट्र की तरह व्यवहार करे या फिर वह अपनी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होते देखे। और उन्होंने पतन का रास्ता चुना है।

श्री ब्राउन: माफ़ करें। लारा।

प्रश्न: नमस्कार ब्रायन, सुप्रभात। क्या आपको लगता है कि कल के चुनाव के बाद गठित होने वाली नई संसद का – चाहे उसका स्वरूप जो भी हो, चाहे वह पहले के मुक़ाबले थोड़ा अधिक रूढ़िवादी हो या बहुत अधिक रूढ़िवादी – अमेरिका के साथ कूटनीति पर कोई प्रभाव पड़ेगा?

श्री हुक: मुझे इसमें संदेह है, क्योंकि चुनावों के बाद भी सर्वोच्च नेता का ही नियंत्रण रहने वाला है, और सर्वोच्च नेता किसी वजह से ही सर्वोच्च नेता हैं। मुझे लगता है कि अन्य प्रशासनों ने ईरानी शासन में उदारवादियों की पहचान करने में कुछ ज़्यादा ही रुचि ली थी, और मुझे लगता है कि ये नीति कुछ बेहद बुरी नीतियों का कारण बन सकती है। और इसलिए हम शासन को इस आधार पर आंकते हैं कि वह क्या करता है, इस आधार पर नहीं कि सरकार के भीतर किसका प्रभाव हो सकता है या नहीं। यह एक हिंसक, क्रांतिवादी, विस्तारवादी शासन है, और यह आज के मध्यपूर्व में अस्थिरता का प्रमुख कारक है। हमने एक विदेश नीति तय की है जिसमें यह वास्तविकता प्रतिबिंबित होती है।

और जहां तक मजलिस की बात है, तो वैसे तो अब उन्होंने उन सारे उदारवादियों को चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा दिया है, फिर भी यदि मजलिस में उदारवादी होते हैं तो भी सारे निर्णय सर्वोच्च नेता के हाथ में ही होंगे। उनके साथ लोगों की एक छोटी-सी टीम है जो सारे फ़ैसले करती है। इसलिए हम उदारवादियों और कट्टरपंथियों के सवाल पर ध्यान नहीं देते हैं। आप यदि शासन का हिस्सा हैं, तो फिर आप कट्टरपंथी हैं।

श्री ब्राउन: मुझे लगता है हम कुछेक और सवाल ले सकते हैं।

श्री हुक: हां।

श्री ब्राउन: कैरोल।

प्रश्न: ऐसा करने के लिए धन्यवाद, ब्रायन। इलियट अब्रैम्स ने कहा है कि वेनेज़ुएला के खिलाफ़ प्रतिबंध अब आधे रास्ते पर हैं। प्रतिबंधों की क्या स्थिति है – क्या आप ईरान के खिलाफ़ प्रतिबंधों की भी इसी तरह की समीक्षा करते हैं? क्या आपके पास ऐसे संगठनों और लोगों की एक सूची अभी भी है जिन पर कि आप आगे प्रतिबंध लगा सकते हैं, या आप इस दिशा में कहां तक पहुंचे हैं?

श्री हुक: हां, हमेशा ही बहुत सारे लोग निशाने पर होते हैं। ईरान प्रतिबंधों से बचने को लेकर बहुत गतिशील है, और दिखावटी कंपनियां स्थापति करने में वे बहुत माहिर हैं, और इसलिए हम इस पर लगातार नज़र रखते हैं। हम नियमित अंतराल पर अपने प्रतिबंधों को अपडेट करते हैं। साथ ही हम – विदेश मंत्री पोम्पियो, प्रतिबंधों को लागू करने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, और प्रतिबंधों के लिए लोगों को नामित करने जितना ही महत्वपूर्ण है प्रतिबंधों को लागू करना। और हम अब भी हर महीने कुछेक लाख बैरल तेल चीन जाते देख रहे हैं। हम संबंधित चीनी लोगों और कंपनियों पर तीन चरणों में प्रतिबंध लगा चुके हैं। हम ईरानी शासन को ज़रूरी राजस्व से वंचित करने के रास्ते ढूंढते रहते हैं, अब ये कच्चे तेल की बात हो, या पेट्रोकेमिकल, औद्योगिक धातु या कीमती धातु की; या व्यक्तियों और कंपनियों को प्रतिबंधित करने की।

जब हम अहमद जन्नती जैसे व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाते हैं तो हम दुनिया को उनके बारे में बताने का भी काम करते हैं ताकि लोग जान सकें कि सर्वोच्च नेता के पीछे छुपे लोग वास्तव में देश को चलाने वालों में से हैं, और वे ईरान के विदेश मंत्री के मुक़ाबले कहीं अधिक प्रभावी हैं और देश का कहीं अधिक प्रतिनिधित्व करते हैं। इस तरह प्रतिबंधों का एक व्यावहारिक प्रभाव है और एक प्रतीकात्मक प्रभाव भी, क्योंकि यदि आप इन लोगों पर प्रतिबंध नहीं लगाते हैं तो इससे एक संदेश जाता है। ये संदेश होता है चुप्पी मारने या बगलें झांकने के बारे में। और जैसा कि मैंने कहा, हम ईरानी लोगों के साथ खड़े हैं। हम इस तरह के बहुत से लोगों को सामने लाना चाहते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के संज्ञान में लाना चाहते हैं।

हम एक और सवाल लेंगे।

श्री ब्राउन: बिल्कुल सामने, अंतिम। रुफ़िनी।

प्रश्न: नमस्कार, ब्रायन।

श्री हुक: नमस्कार।

प्रश्न: सुलेमानी पर हमले के बाद, इसके तुरंत बाद, ईरान से संकेत मिले थे कि वह अनिवार्य रूप से अपनी हिरासत में मौजूद अमेरिकियों या क़ैदियों के आदान-प्रदान या इस तरह की किसी अन्य मुद्दे पर पर किसी भी तरह की बातचीत को बंद करने जा रहा है। क्या इस सिलसिले में कोई प्रगति हुई है? क्या ये अब भी पहले जैसा मामला है? क्या आप बता सकते हैं कि इस बारे में क्या प्रयास किए जा रहे हैं और क्या यह उस हमले का अब भी अन्य अमेरिकियों को ईरान से बाहर निकालने की हमारी क्षमता पर असर पड़ रहा है?

श्री हुक: हम नवंबर में इस तरह का एक आदान-प्रदान कर पाए थे, और हमने ऐसा प्रतिबंधों में कोई ढील दिए बिना, बोरी भर नकदी सौंपे बिना, और नीतियों को बदले बिना किया। इसलिए हम समझते हैं परिस्थितियां चाहे जो हो अमेरिकियों को वापस लाने के अवसर हमेशा होते हैं। हम गलत ढंग से हिरासत में लिए गए अमेरिकियों को ईरान से निकालने के लिए दिन-प्रतिदिन के आधार पर काम करते हैं। मै इस बारे में विस्तार से नहीं बताऊंगा, पर मैं इस पर रोज़ काम करता हूं।

ईरान में पांच अमेरिकी अब भी गलत ढंग से हिरासत में रखे गए हैं। मैं इस पर काम कर रहा हूं – आपको जल्दी ही इस बारे में कुछ देखने को मिलेगा। मैं उनकी दुर्दशा पर और उन्हें गलत तरीके से हिरासत में लिए जाने के बारे में अधिक बोलना शुरू करने जा रहा हूं। मैं पीड़ा झेल रहे परिवारों से नियमित रूप से बात करता हूं। और संयुक्तराष्ट्र तथा अन्य देश भी बंधक बनाने के कृत्य के लिए ईरान की निंदा कर रहे हैं। ये एक त्रासदी है। मैं हाल में शियु वांग को देख पाया, और ये बहुत ही सुखद अनुभव था। हम और लोगों को स्वदेश वापस लौटता देखना चाहते हैं।

श्री ब्राउन: ठीक है।

प्रश्न: उन पांच में लेविंसन शामिल नहीं हैं, है ना?

श्री हुक: हां।

प्रश्न: क्या इसमें शामिल?

श्रोता: धन्यवाद।

श्री हुक: फिर मिलेंगे। हां, धन्यवाद।

श्रोता: धन्यवाद, ब्रायन।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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