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जी7 मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो की प्रेस वार्ता

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अमेरिकी विदेश विभाग
तत्काल जारी करने के लिए
मार्च 25, 2020
प्रेस ब्रीफ़िंग कक्ष
वाशिंगटन, डी.सी.

 

विदेश मंत्री पोम्पियो: नमस्कार। इससे पहले कि मैं आज की मंत्रिस्तरीय बैठक की चर्चा करूं, मैं अफ़ग़ानिस्तान में हमले के आइसिस-के के दावे की बात करना चाहता हूं। अमेरिका, काबुल में आज सुबह एक सिख गुरुद्वारे और सामुदायिक केंद्र पर कथित रूप से आइसिस-के द्वारा किए गए भयावह हमले की भर्त्सना करता है जिसमें दो दर्जन से अधिक निर्दोष लोगों की जान गई है। अफ़ग़ान जनता आइसिस-के और अन्य आतंकवादी गतिविधियों से मुक्त भविष्य की हक़दार है। देश की राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, मौजूदा अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया अफ़ग़ानों के लिए एक राजनीतिक समझौते के लिए एकजुट होने और आइसिस-के के ख़तरे के खिलाफ़ एक एकीकृत मोर्चा बनाने का एक अहम अवसर है। हम सभी अफ़ग़ानों को इस अवसर का फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

अब आज की बैठक की बात।

आज की वर्चुअल जी7 मंत्रिस्तरीय बैठक उस प्रारूप के अनुरूप नहीं थी जिसकी हमने आरंभ में परिकल्पना की थी, लेकिन मुझे खुशी है कि हमें मिलने का मौक़ा मिला, भले ही केवल टेलीकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए।

मैं वास्तविक बैठक की योजना बनाने में सहायता और सहयोग के लिए पिट्सबर्ग के लोगों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिसे हमें दुर्भाग्य से रद्द करना पड़ा। निश्चित रूप से, आज के एजेंडे में सर्वाधिक महत्व वाला विषय वुहान वायरस का था – ऐसा संकट जिससे दुनिया में जहां भी ज़रूरी हुआ हम सभी पारदर्शिता के साथ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मैंने अपने G7 साझेदारों – विशेष रूप से इटली और शेष यूरोप में अपने मित्रों – को स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका उनकी हरसंभव तरीके से सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले शनिवार को, अमेरिकी वायुसेना ने इटली के लिए चिकित्सा आपूर्ति से भरा एक सी-130 विमान भेजा। अमेरिकी सेना वहां मौजूद अतिरिक्त चिकित्सा उपकरणों में से कुछ अपने इतालवी मित्रों को उपलब्ध कराने की योजना को भी अंतिम रूप दे रही है।

इसके अलावा, निजी क्षेत्र की हमारी कंपनियां, वैज्ञानिक समुदाय, गैर-सरकारी संगठन और धार्मिक संगठन भी मदद के आह्वान पर आगे आ रहे हैं। एक निजी अमेरिकी चैरिटी समैरिटंस पर्स ने महामारी से बुरी तरह प्रभावित उत्तरी इटली के शहर क्रेमोना में 68 बिस्तरों वाला एक फ़ील्ड अस्पताल स्थापित किया है। यह अमेरिकी लोगों की जानी मानी उदारता का बेहतरीन प्रदर्शन है।

आज एकजुट होकर वायरस से लड़ने के तरीकों पर विचार करने में अपना अधिकांश समय देने के बावजूद हम दुनिया भर की अन्य बड़ी चुनौतियों पर अपनी नज़र रखे हुए हैं, जिन्हें मैंने विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया है:

सर्वप्रथम, हमने निरंकुश शासनों द्वारा उत्पन्न खतरों पर विचार के लिए पर्याप्त समय दिया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) हमारे स्वास्थ्य और जीवन शैली के लिए एक बड़ा ख़तरा है, जोकि वुहान वायरस के प्रकोप से स्पष्ट हो चुका है। सीसीपी द्वारा उस मुक्त और खुली व्यवस्था को कमज़ोर किए जाने का भी ख़तरा है, जो जी7 देशों में हमारी पारस्परिक समृद्धि और सुरक्षा का आधार रहा है।

मैंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों को इसके घातक प्रभाव और अधिनायकवाद से बचाने के लिए सभी देशों से मिलकर काम करने का आग्रह किया। हम जी7 देशों को स्वतंत्रता, संप्रभुता, सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के हमारे साझा मूल्यों को बढ़ावा देना चाहिए और साथ ही इन सिद्धांतों को क़ायम रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र को भी प्रेरित करना चाहिए।

संगठन में रूस की और यूक्रेन में आक्रामकता के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराए जाने पर भी खूब चर्चा हुई। पूर्वी यूक्रेन पर वास्तविक प्रगति रूस द्वारा मिंस्क समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने के साथ शुरू होनी चाहिए। मैंने इस सरल सच्चाई को भी दोहराया: क्रीमिया यूक्रेन है। अमेरिका कभी भी रूस द्वारा इस पर कब्ज़े के प्रयास को मान्यता नहीं देगा।

हमने अवैध परमाणु प्रसार से जुड़े ख़तरों पर भी चर्चा की।

ईरान पर, मैंने विभिन्न कार्रवाइयों के ज़रिए ईरानी शासन को दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराने के लिए देशों का आभार व्यक्त किया, जैसे कि महान एयर पर प्रतिबंध लगाना तथा हिज़्बुल्ला और ईरान समर्थित सभी आतंकवादी समूहों को आतंकवादी संगठनों के रूप में नामित करना।

दबाव बढ़ाने का हमारा अभियान ईरान को एक सामान्य देश की तरह व्यवहार के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है। मैंने अपने जी7 साझेदारों से आग्रह किया कि वे हमारे साथ आगे बढ़ें – और उन्हें विशेष रूप से अमेरिका के साथ खड़ा होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाए।

इसी तरह, जी7 और सभी देशों को उत्तर कोरिया को दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए कहने को लेकर एकजुट रहना चाहिए, और उसके अवैध परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर राजनयिक और आर्थिक दबाव बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करनी चाहिए।

हमने जिस एक और विषय पर विस्तार से चर्चा की वो लंबे समय से जारी संघर्षों का विषय था:

अफ़ग़ानिस्तान पर, हमने शांति प्रक्रिया की चर्चा की। मैंने उन्हें अपनी हाल की यात्रा के बारे में बताया, और इस बात की चर्चा की कि कैसे हम अंतर्-अफ़ग़ान वार्ताओं को वास्तव में सफल बना सकते हैं।

हमने सीरिया पर चर्चा को भी समय दिया, जहां रूस, ईरानी शासन, हिज़्बुल्ला, और असद शासन यूरोप के लिए मानवीय आपदा का ख़तरा बना रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 के अनुसार राजनीतिक समाधान की राह में बाधक बन रहे हैं।

हमने लीबिया पर भी बात की। वहां नेताओं को संयम बरतना चाहिए, तनाव कम करना चाहिए और विषाक्त विदेशी हस्तक्षेप को ठुकराना चाहिए तथा लीबिया के भविष्य के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाली वार्ताओं में गंभीरता से भाग लेना चाहिए।

और जहां तक बर्मा की बात है, तो संगठन बर्मा की लोकतंत्र की दिशा में प्रगति, वहां आर्थिक सुधारों और बुरे बाहरी प्रभावों से उसके बचने के प्रयासों को लेकर एकजुट था।

बर्मा को अपने रखाइन स्टेट के संकट को सुलझाना चाहिए, और उत्पीड़न के पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ सैन्य नेताओं समेत सभी की जवाबदेही तय करनी चाहिए।

और अंत में, हम आतंकवाद के खिलाफ सख़्ती से लड़ने के लिए सहमत हुए। साहेल में आइसिस – जिससे कि मैंने आज अपनी बात शुरू की है – और अल-कायदा के आतंकवादी हमले बढ़ रहे हैं। इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए बेहतर प्रशासन और इस क्षेत्र में एवं विश्व स्तर पर हमारे सहयोगियों द्वारा भार साझा किए जाने की आवश्यकता है। माली में शांति और सुलह के लिए अल्जीयर्स समझौते में शामिल सभी पक्षों को उस समझौते को पूरी तरह से लागू करना चाहिए।

भले ही हम व्यक्तिगत रूप से मिलने में असमर्थ रहे, पर हमारी ये बैठक सफल रही। और ट्रंप प्रशासन हमारे सहयोगियों और साझेदारों के साथ इस प्रकार के उपयोगी बहुपक्षीय मंचों पर काम करने के लिए समर्पित है।

और इसके साथ ही, मुझे आपके कुछेक सवालों के जवाब देकर खुशी होगी।

श्री ब्राउन: शॉन।

प्रश्न:  धन्यवाद, विदेश मंत्री जी। जी7 के बारे में आज आपकी टिप्पणियों के बाद – मैं कल होने वाली जी20 की वर्चुअल वार्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं, जिसकी सऊदी अरब मेज़बानी कर रहा है। चीन पर आपका क्या संदेश है? क्या ये समय उनके साथ सहयोग का है, शायद वायरस पर, या उनका सामना करने का? आपने उल्लेख किया कि अमेरिका अपने जी7 साझेदारों की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। चीन के बारे में क्या राय है? वे मास्क आदि के रूप में दुनिया भर में बहुत सारी सहायता दे रहे हैं। क्या आप इसे सकारात्मक मानते हैं? क्या आप इसमें कुछ ऐसा देखते हैं जिससे कि हमें सावधान रहना चाहिए? और क्या अमेरिका स्वयं भी सहायता स्वीकार करने के लिए तैयार होगा? पीटर नवारो ने कहा है कि शायद हम स्वीकार करेंगे।

और मैं इसी से जुड़ा एक और सवाल पूछना चाहूंगा। जर्मन पत्रिका डेर स्पीगल का कहना है कि जी7 में आप चाहते थे कि वे ‘वुहान वायरस’ शब्द का उपयोग करें, और शायद इससे साझेदारों के बीच कुछ दरार पैदा हुई। क्या ऐसा हुआ था, और क्या आप मानते हैं कि यह नामकरण इतना महत्वपूर्ण है कि इसे एक अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ में होना चाहिए? धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो: तो मैं पहले सवाल को पहले लेता हूं। हम इस पूरे संकट के दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ काम करना चाहते थे – यह संकट जो चीन के वुहान में शुरू हुआ था। हमने कोशिश की – आपको याद होगा – शुरुआती दिनों से ही हमने अपने वैज्ञानिकों को, अपने विशेषज्ञों को वहां ज़मीन पर उतारने की कोशिश, ताकि हम चीन में जो कुछ भी शुरू हुआ, उसके खिलाफ़ वैश्विक कार्रवाई में योगदान देना शुरू कर सकें, लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाए। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ऐसा करने की अनुमति नहीं देगी।

आपको यह भी याद होगा, संकट की शुरुआत में, जब यह स्पष्ट था कि यह एक गंभीर समस्या है, चीन को इसके बारे में पता था, वो इस वायरस से दुनिया को जोख़िम के बारे में जानने वाला पहला देश था, और उन्होंने बार-बार दुनिया के साथ यह जानकारी साझा करने में देरी की।

इसलिए हां, हम पूरी दुनिया के हर देश के साथ तत्परता से काम करना चाहते हैं। यह एक वैश्विक महामारी है; यह ऐसा कुछ है जिस पर कि अमेरिका चीन सहित हर देश के साथ काम करना चाहता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कैसे अधिकतम लोगों को जीवित रखा जा सकता है, अधिकतम लोगों को स्वस्थ रखा जा सकता है, और फिर वुहान वायरस द्वारा नष्ट हमारी अर्थव्यवस्थाओं में जान डाली जा सके।

इसलिए हम उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं, हम उनकी सहायता करने के लिए तैयार हैं। हम चीनी लोगों के लिए भी अच्छी कामना करते हैं। उनके इस व्यवहार के परिणामस्वरूप चीन में भी बहुत से लोगों की मौत हो गई। यह कुछ ऐसा नहीं है जो चीन से बाहर ही हुआ हो। लेकिन यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि हम ये सुनिश्चित करें कि हम इसके खिलाफ़ कारगर साबित हों। जी7 के सदस्यों के बीच आज चीन द्वारा चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दुष्प्रचार अभियान पर विस्तार से चर्चा हुई। आप ये देख सकते हैं। आपको ये सोशल मीडिया में दिखता है। आप इसे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर के वरिष्ठ नेताओं की टिप्पणियों में देख सकते हैं कि क्या इसे अमेरिका चीन लेकर आया था। मैं समझता हूं ये पागलपन है। और जी7 के प्रत्येक सदस्य ने आज देखा — एक दुष्प्रचार अभियान। चीन अब दुनिया भर में इस बात को फैला रहा है और अब यह दावा कर रहा है कि जो कुछ भी उसके यहां हुआ है उसमें उसका कोई दोष नहीं है। ये समय आरोप लगाने का नहीं है; यह इस वैश्विक समस्या को हल करने का समय है। हमने आज उसी पर ध्यान केंद्रित किया। इसी मुद्दे पर आज जी7 सदस्यों ने अपना सारा समय बिताया। लेकिन आज सुबह की बैठक में शामिल राष्ट्रों में से हरेक को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के दुष्प्रचार अभियान के बारे में पूरी जानकारी थी जोकि वहां हुए असल घटनाक्रम से लोगों का ध्यान बंटाने का प्रयास है।

और जहां तक बयान की बात है, तो मैं हमेशा इन बैठकों के बारे में यही सोचता हूं कि सही जवाब होगा ये सुनिश्चित करना कि इससे हमारा एक जैसा संदेश बाहर आए। मुझे विश्वास है कि जब आप अन्य छह विदेश मंत्रियों की बात सुनेंगे, तो आप उन्हें यहां आज हुई बात से सहमत पाएंगे और हम उन चीजों के बारे में बात करेंगे, जिन पर कि हमारे बीच सहमति है, और मुझे यक़ीन है कि वे उन कुछेक मुद्दों की भी चर्चा करेंगे – जैसे जेसीपीओए – जहां सामरिक परिणाम प्राप्त करने को लेकर हमारे बीच मतभेद हैं। पर ये नहीं भूलें कि इस सुबह की बैठक में हर कोई ये सुनिश्चित करने पर बहुत ध्यान दे रहा था कि हम न केवल वुहान वायरस से जुड़े स्वास्थ्य संकट से निपटेंगे, बल्कि आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करेंगे जिसका कि दुनिया और हम सामना कर रहे हैं।

श्री ब्राउन: अरशद।

प्रश्न: अफ़ग़ानिस्तान के बारे में।

विदेश मंत्री पोम्पियो: हां, श्रीमान्।

प्रश्न: सोमवार को, अपने लिखित बयान में, आपने कहा था कि अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान को दी जाने वाली सहायता राशि में तत्काल एक अरब डॉलर की कटौती करेगा। सबसे पहले, वास्तव में आप किस मद में कटौती कर रहे हैं? दूसरे, ख़बर है कि राष्ट्रपति ग़नी ने आज सुबह अपने गृह, रक्षा और वित्त मंत्रियों को अपने सुरक्षा बजट में एक अरब डॉलर की कटौती करने के निर्देश जारी किए हैं। ऐसा नहीं लगता कि वह अमेरिकी सहायता खोने को लेकर बहुत चिंतित है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? और तीसरी बात, क्या अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों की नियोजित वापसी की योजना पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है, बशर्ते तालिबान अमेरिकी बलों को निशाना नहीं बनाए और आतंकवादी गुटों से संबंध तोड़ने के अपने समझौते का सम्मान करे, भले ही राष्ट्रपति ग़नी और पूर्व मुख्य कार्यकारी अब्दुल्ला चुनाव को लेकर आपसी मतभेदों को दूर कर पाते हों या नहीं?

विदेश मंत्री पोम्पियो: मैंने ऐसे समय में अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा की, जब एक विशेष कारण से अधिक यात्राएं नहीं हो रही थीं। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए वहां गया था कि अफ़ग़ान नेता वहां अमेरिका के हितों को, बीते वर्षों में रिज़ॉल्युट सपोर्ट मिशन द्वारा वहां निभाई गई भूमिका को समझ पाएं, और उनसे आग्रह करने गया था कि वे संयुक्त घोषणा में की गई प्रतिबद्धताओं पर अमल करें – अफ़ग़ान नेतृत्व ने कुछ प्रतिबद्धताएं घोषित की थीं, ऐसी बातें जिन्हें कि वे पूरा करेंगे, और अब तक उन्होंने उन पर अमल नहीं किया है। मैं उनसे बात करने वहां गया था कि प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में हम उनकी कैसे सहायता कर सकते हैं।

सच कहूं तो, ये सब बहुत निराशाजनक था। वहां मैं यह राजनीतिक संकट को दूर करने के लिए कोशिश करने गया था और जिन बयानों की आपने बात की है, मैंने उन बयानों को नहीं देखा है – हमें अफ़ग़ानिस्तान में सारे राजनीतिक नेतृत्व को एक साथ लाने की ज़रूरत है: राष्ट्रपति ग़नी, डॉ. अब्दुल्ला, और वे सभी जिनका अफ़ग़ानिस्तान को आगे बढ़ाने, अफगान लोगों के लिए शांति और सुलह का माहौल बनाने, अफ़ग़ान लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने और बाक़ी मुद्दों को अंतर्-अफ़ग़ान वार्ताओं से हल करने के लिए सभी अफ़ग़ानों के साथ बैठकर बातचीत करने वाली एक टीम के गठन में साझा हित हो। अफ़ग़ान नेतृत्व से हमारी यही अपेक्षा है। तो ये वे कारण थे जिनके लिए मैं वहां गया। मैंने इसी की बात की थी। अपनी बैठक के दौरान ये सब हासिल नहीं होने पर इसीलिए हमने वो घोषणा की थी। इसी कारण हमने घोषणा की कि अमेरिका उनकी सुरक्षा सहायता में कमी करने के लिए तैयार है। और हम तालिबान समेत सभी पक्षों को इस बात के लिए राज़ी करने की कोशिश करते रहेंगे कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति और सुलह के लिए यह उपयुक्त समय है।

अमेरिकी बलों के संबंध में, हमने अपने सभी साझेदारों को स्पष्ट कर दिया है कि हम आगे बढ़ते हुए स्थिति का मूल्यांकन करते रहेंगे। हमारी प्रतिबद्धताएं हैं। और इस योजना को निष्पादित करते हुए, हम स्थिति पर नज़र रखेंगे। हम सशर्त योजना पर सहमत हुए थे। हम योजना पर आगे बढ़ते रहेंगे ताकि सभी पक्ष उन शर्तों पर खरा उतर सकें। अंत में, हर कोई समझता है, और हर कोई जिससे मैं मिला – मैं केवल राष्ट्रपति ग़नी और डॉ. अब्दुल्ला से ही नहीं मिला, बल्कि मैंने सुरक्षा प्रमुखों से भी मुलाक़ात की, मैं दोहा में मुल्ला बरादर से भी मिला – उनमें से हर कोई इस बात को समझता है कि संघर्ष का समाधान मैदान में बंदूक और मोर्टार से नहीं होने वाला है। समाधान एक राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा, और यह सभी अफ़ग़ानों को वार्ता की मेज़ पर एकत्रित कर उस राजनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत का मौक़ा है।

मैं अब भी आशावादी हूं कि हम इतनी प्रगति कर पाएंगे। समय बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न: आप कहां पर कटौती कर रहे हैं? क्या है (अस्पष्ट) जिसमें आप कमी कर रहे हैं –

विदेश मंत्री पोम्पियो: कृपया, अगला सवाल पूछें।

प्रश्न: — किस मद में तत्काल कटौती की बात की है आपने?

श्री ब्राउन: आइए पीछे बैठे माइकल का सवाल लेते हैं।

प्रश्न: शुक्रिया। धन्यवाद, विदेश मंत्री जी।

विदेश मंत्री पोम्पियो: हां, श्रीमान्।

प्रश्न: कॉरोना वायरस के प्रकोप के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहराने के लिए कांग्रेस में बातचीत चल रही है क्योंकि उसने जानकारी छुपाई थी, और वे चीन से मांग करेंगे कि वह अमेरिका और दुनिया को हुए नुक़सान की भरपाई करे। क्या आप योजना बना रहे हैं – क्या प्रशासन चीन पर मुक़दमा चलाने या चीन को हर्जाना देने के लिए कहने की योजना बना रहा है? और सीरिया पर, विदेश विभाग ने सीरियाई शासन से क़ैदियों, जिनमें अमेरिकी नागरिक भी हैं, को रिहा करने के लिए कहा है। यदि उन्होंने बात नहीं मानी तो क्या आपकी इस मामले में सीरियाई शासन पर दबाव डालने की कोई योजना है?

विदेश मंत्री पोम्पियो: आपके दूसरे सवाल पर मैं बताना चाहूंगा कि हमने सीरियाइयों से अवैध तरीक़े से बंदी बनाए गए लोगों को रिहा करने की मांग की है, न सिर्फ़ अमेरिकियों को बल्कि बाक़ी लोगों को भी। हमने ईरानी शासन से भी यही मांग की है। हम समझते हैं मौजूदा समय में उनके स्वास्थ्य को भारी ख़तरे को देखते हुए विशुद्ध मानवीय आधार पर – भूल जाएं अन्य कारणों को – कि सबसे पहले तो उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया, हम समझते हैं उनके लिए मानवीय सहायता का और इन अमेरिकियों को अपने परिजनों के पास स्वदेश जाने देने का ये बढ़िया मौक़ा है।

आपके पहले सवाल के संबंध में, मैं ये कांग्रेस पर ही छोड़ता हूं। मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा। मैं ये कांग्रेस पर ही छोड़ता हूं कि वे इस बारे में क्या करना चाहते हैं। लेकिन जैसा कि मैंने पहले कहा, आज का दिन आरोपों और जवाबदेही का नहीं है। हमें यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि दुनिया में सभी के लिए जानकारी उपलब्ध हो। इसका मतलब है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी समेत सभी की पूर्ण पारदर्शिता। यह एक सतत चुनौती है। हमें अब भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से इस बारे में ठोस जानकारी चाहिए कि वहां क्या हुआ है और उस देश के अंदर मौजूद वायरस का स्तर क्या है। हमें वैसी ही सटीक और पारदर्शी जानकारी चाहिए, जैसी हम दुनिया भर के हरेक देश से मांग रहे हैं। लेकिन इसका एक सही समय होगा। जब हम इस संकट को हल करने में क़ामयाब हो जाते हैं, जब हम इन अर्थव्यवस्थाओं को अपने पैरों पर वापस खड़ा करने में क़ामयाब हो जाते हैं, तो उसके बाद दुनिया के लिए एक समय आएगा कि जो भी हुआ उसकी ज़िम्मेदारी तय की जाए।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।


मूल सामग्री देखें: https://www.state.gov/secretary-michael-r-pompeo-at-a-press-availability-3/
यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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