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पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र के मीडिया प्रतिष्ठानों के पत्रकारों के साथ विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो का राउंड टेबल साक्षात्कार

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अमेरिकी विदेश विभाग
इंटरव्यू
तत्काल जारी करने के लिए
अप्रैल 1, 2020

 

सुश्री वाल्श:  पहला सवाल स्ट्रेट्स टाइम्स के निर्मल घोष का।

प्रश्न:  सुप्रभात, विदेश मंत्री जी।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  सुप्रभात।

प्रश्न:  आप मुझे सुन पा रहे हैं?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  हां, मैं आपको बढ़िया से सुन पा रहा हूं।

प्रश्न:  अच्छा। निर्मल घोष, स्ट्रेट्स टाइम्स से। आपका बहुत शुक्रिया। आप महामारी या कम-से-कम महामारी के संकटपूर्ण चरण के बाद अमेरिका-चीन के संबंधों को कैसे देखते हैं? पहले से अच्छे या बुरे?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  अब जब हम संकट की इस घ़ड़ी में हैं, हम चीन के साथ काम करने का मौक़ा ढूंढते रहेंगे। हमारे बीच महत्वपूर्ण आर्थिक संबंध हैं। संकट के ठीक पहले, हमने अपने व्यापार समझौते का पहला चरण पूरा किया था। हमें नहीं लगता समझौते का दूसरा चरण ज़्यादा दूर है। लेकिन चीन के साथ बड़ी चुनौतियां भी हैं, जैसा कि राष्ट्रपति ने उदाहरण गिनाए हैं जहां पारस्परिकता का अभाव है। हमने व्यापार के क्षेत्र में ऐसा देखा है। हमने पत्रकारों के साथ ऐसा देखा है कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है, सूचना की स्वतंत्रता, कैसे यह सीमाओं के आर-पार और क्षेत्र में प्रवाहित होती है।

इसलिए चीन, जैसा कि हमने प्रशासन के आरंभिक दिनों में ही पहचान लिया था, अमेरिका का एक वास्तविक सामरिक प्रतिस्पर्धी बना रहेगा। मुझे नहीं लगता कि इस स्थिति में बदलाव आएगा, पर हम कुछ बातें सीख चुके हैं। हमने सीखा है अमेरिका का ये सुनिश्चित करना कि हमारे पास सही संसाधन हों जिन्हें हम वर्तमान जैसी परिस्थितियों में भी क़ायम रख सकें।

प्रश्न:  धन्यवाद।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, श्रीमान। हमसे अगला सवाल पूछ रहे हैं, बैंकॉक पोस्ट के कोर्नाचनोक।

प्रश्न:  (अस्पष्ट।)  अब जबकि अमेरिका में कोविड का प्रसार बहुत ज़्यादा है, तो ऐसे में, वायरस के खिलाफ़ लड़ाई में थाईलैंड और आसियान के साथ सहयोग की आपकी क्या योजना है?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  इस सवाल के लिए धन्यवाद। हमने बहुत काम किए हैं। मेरे सहायक मंत्री हर हफ़्ते पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ फ़ोन कॉल पर होते हैं, न सिर्फ़ दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्व एशिया के देश बल्कि दक्षिण मध्य एशिया और मध्य एशिया के देश भीI वहां जो हो रहा है उसके बारे में और मध्य एशियाई देशों को वायरस के ख़तरों को लेकर हम बेहद चिंतित हैं। हमने उऩके साथ मिलकर काम भी किया है।

गत सप्ताह हमने एक महत्वपूर्ण सहायता कार्यक्रम की घोषणा की, जिसके तहत प्राथमिकता वाले 64 देशों को क़रीब 274 मिलियन डॉलर की मदद दी जाएगी। इसमें से अधिकांश हिस्सा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जाएगा, जो देशों को तकनीकी रूप से प्रभावी बनाने, बीमारी का पता लगाने की क्षमता बरकरार रखने और ऐसे ही उपायों पर ख़र्च किए जाएंगे जिन्हें हमने महामारी का सामना करने के दौरान सामूहिक रूप से सीखा है। ये संसाधन बांग्लादेश से बर्मा तक, और कंबोडिया, भारत एवं कज़ाखस्तान तक, क्षेत्र के लगभग सभी देशों तक पहुंचेंगे और मुझे विश्वास है कि इन देशों को आगे आने वाली चुनौतियों से पार पाने में मदद के लिए अमेरिका सबसे बड़ा साझेदार होगा।

इसलिए हम उनसे प्रतिदिन बात करते हैं। मैंने सप्ताहांत में या शायद शुक्रवार को, सिंगापुर के अपने समकक्ष से बात की थी। हम उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं, सिंगापुर ने सफलतापूर्वक जो काम किया है उससे सीख लेने, साथ ही ये सुनिश्चित करने के लिए कि हम विदेश विभाग के प्रयासों और संपूर्ण अमेरिका सरकार के प्रयासों के तहत, इन देशों को आने वाले समय में मदद दें जो उनमें से कइयों के लिए एक मुश्किल समय होगा, जिनके पास भविष्य की चुनौतियों का सामना करने लायक़ स्वास्थ्य सेवा ढांचा नहीं है। हम उन देशों की सहायता के वास्ते हरसंभव प्रयास करने के लिए तैयार हैं।

और आपने चीन के बारे में भी पूछा था। हम पहले देश या सबसे पहले देशों में से थे जिन्होंने चीन को भी समर्थन एवं मदद देने का प्रस्ताव किया। महामारी का प्रकोप फैलने के कुछ ही दिनों के भीतर हमने वुहान में सहायता पहुंचाई थी। हमने न सिर्फ़ उनको तकनीकी, स्वास्थ्य सेवा संबंधी और पेशेवर सहायता की पेशकश की, बल्कि डब्ल्यूएचओ जैसे तमाम बहुपक्षीय संगठनों के माध्यम से भी सहायता दी है जोकि चीन में और पूरे क्षेत्र में सक्रिय हैं।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, श्रीमान। अगला सवाल वॉयस ऑफ अमेरिका की नाइक चिंग का।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  नमस्कार।

प्रश्न:  सुप्रभात, विदेश मंत्री जी। टेलीफ़ोन के ज़रिए इस राउंड टेबल वार्ता के आयोजन के लिए आपका बहुत धन्यवाद। विश्व स्वास्थ्य संगठन में अपना कथानक बढ़ाने के चीनी प्रयास पर अमेरिका की कितनी नजर है?

और एक सवाल ये भी कि कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने एस. 1678 पहलक़दमी को मंज़ूरी दी थी जोकि ताइपे नामक क़ानून बना, जिसके तहत विदेश विभाग पर कतिपय क़दम उठाने की बाध्यता हैं, जिसमें उचित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ताइवान को पर्यवेक्षक का दर्ज़ा दिलाने की मांग उठाना भी शामिल है।

मेरा आपसे सवाल ये है, विदेश मंत्री महोदय: क्या आप विश्व स्वास्थ्य संगठन में ताइवान के पर्यवेक्षक के दर्ज़े का समर्थन करते हैं? विदेश विभाग अमेरिकी क़ानून का पालन कैसे करने वाला है? आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  धन्यवाद, दोनों ही सवालों के लिए आपका धन्यवाद। पहले मैं दूसरे सवाल का जवाब देता हूं।

राष्ट्रपति ने इस क़ानून पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने बहुत ख़ुशी से ऐसा किया। वह इसके प्रावधानों से ख़ुश थे। अब इसके हर प्रावधान का पालन करने की ज़िम्मेदारी अमेरिका सरकार की है, और इसमें ये बात शामिल है कि हर संगठन – आपने ख़ासकर डब्ल्यूएचओ का नाम लिया – कि इसमें एक प्रावधान है जो इस बात से संबंधित है कि ताइवान के भीतर जो भी हो रहा है हम वहां उनकी उचित भूमिका में मदद करेंगे। हम ऐसा करेंगे। हम इसका पूरी तरह पालन करेंगे। हम समझते हैं ये महत्वपूर्ण है, और हम ख़ुश हैं कि ऐसा क़ानून कांग्रेस से होकर गत सप्ताह राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए आया।

आपका पहला सवाल इस समय कोविड-19 को लेकर पूरी दुनिया में चल रहे दुष्प्रचार अभियान के बारे में है। निश्चय ही हमने इसे देखा है। हमने देखा है कि न सिर्फ़ ईरान और रूस बल्कि चीन और अन्य देश भी अपने कथानक गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनके कथानकों में भले ही अंतर है, लेकिन उन सबमें एक साझा बात है, जो ज़िम्मेदारी से बचने और दुनिया में भ्रम फैलाने के बारे में है, भ्रम इस बात की कि वायरस की उत्पत्ति कहां हुई, और विभिन्न देशों के जवाबी क़दमों को लेकर भ्रम और इस बारे में भ्रम कि कौन से देश असल में दुनिया में सहायता प्रदान कर रहे हैं। और मैं समझता हूं ये महत्वपूर्ण है कि इन कथानकों में सुधार किया जाए। राष्ट्रपति ट्रंप ने निश्चय ही कतिपय दुष्प्रचारों को लेकर रिकॉर्ड सही किया है, और हम भी ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा करना महत्वपूर्ण है।

सूचना का ये मुक्त प्रवाह बहुत ही ज़रूरी है। ये वर्तमान में भी ज़रूरी है जब हम इस संकट के बीचोंबीच हैं, जब हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इसका कैसे मुक़ाबला किया जाए। मैं लोगों को दुष्प्रचार की बात करते सुनता हूं, और उनका फ़ोकस सिर्फ़ आरंभ की घटनाओं पर होता है। लेकिन ज़रूरत पारदर्शिता की है, ज़रूरत स्पष्ट डेटा की है, ज़रूरत ये सुनिश्चित करने की है कि पहचाने गए मामलों की ठीक से रिपोर्टिंग हो, और जबकि लोग दुनिया भर में सामान भेज रहे हैं तो ज़रूरत इस बात की है कि सामान अच्छी गुणवत्ता का हो और सही काम करता हो, और ये भी कि हम इन सबकी दुनिया भर में ट्रैकिंग करें, ये बेहद महत्वपूर्ण है कि हम इस तरह की व्यापक पारदर्शिता हासिल करें।

यही कारण है कि जब चीन ने पश्चिमी प्रेस को अपने यहां से बाहर करने का फ़ैसला किया था तो हमने एक बयान जारी किया। हमें लगा था कि ये बुरी बात है न सिर्फ़ इसलिए कि हम अमेरिका में सूचना की स्वतंत्रता में पूरा विश्वास करते हैं, बल्कि इसलिए भी कि इससे हमलोगों की ये समझने की क्षमता कम हो जाएगी कि न सिर्फ़ चीन में बल्कि पूरे क्षेत्र में क्या हो रहा है, क्योंकि ये रिपोर्टर पूरे क्षेत्र की रिपोर्टिंग कर रहे थे।

सही आंकड़े मौजूद होने की बात – हम हमेशा इसकी ज़रूरत बताते हैं, अब ये परीक्षण के बारे में हो या पुष्ट मामलों के बारे में या मौत की दर के बारे में या संभावित उपचार के बारे में, इन सारी ही बातों के बारे में – हमें ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सूचना सही हो, समय पर उपलब्ध हो, आसानी से समझे जाने लायक़ हो और पहचान किए जाने लायक़ हो ताकि हम उसकी पुष्टि कर सकें। यह एक विश्वव्यापी महामारी है। इसका समाधान पूरी दुनिया में लोगों के परस्पर मिलकर काम करने पर निर्भर करेगा, इसलिए असल घटनाक्रम के बारे में सरकारों के दुष्प्रचार या ग़लत सूचनाएं फैलाने से जान बचाने की दुनिया की क्षमता को नुक़सान पहुंचता है।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, महोदय।

प्रश्न:  बहुत धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  धन्यवाद।

सुश्री वाल्श:  अगला सवाल मलेशियाकिनी के मार्टिन का।

प्रश्न:  जी। नमस्कार, विदेश मंत्री जी। (अस्पष्ट।)

विदेश मंत्री पोम्पियो:  नमस्कार, मार्टिन।

प्रश्न:  अच्छा, आपने प्रमाण की बात की – दुष्प्रचार, ख़ासकर ईरान, रूस और चीन के दुष्प्रचार की। क्या हमारे पास मरने वालों की संख्या को लेकर कोई प्रमाण है?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  माफ़ करें, क्या आपका मतलब इन तीनों देशों में हुई मौतों को लेकर है?

प्रश्न:  हां। क्या ये देश इस बारे में भी ग़लत सूचनाएं देने के दोषी हैं, और क्या अमेरिका के पास इसका प्रमाण है?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  मेरे पास इस बारे में कहने को कुछ नहीं है। हम इस बारे में स्वंत्र प्रेस  रिपोर्टिंग देख रहे हैं। हम देख रहे हैं कि ये सरकारें क्या बता रही हैं। और हमने हमेशा ही ये बात कही है कि ये बेहद महत्वपूर्ण है जब आप अमेरिका की और यहां प्रांतों और काउंटियों में जो हो रहा है उसका हिसाब रखने की हमारी क्षमता की बात करते हैं। हम सही सूचनाएं देते हैं। हम विस्तार से और सार्वजनिक रूप से इन सूचनाओं को साझा करते हैं ताकि दुनिया के सारे राष्ट्र इसे देख सकें। संकट के मध्य भी, हम बीमारी के प्रसार को धीमा करने और लोगों की जान बचाने वाले उपायों की पहचान करने का हरसंभव प्रयास करते हैं। ये महत्वपूर्ण है कि हरेक देश इस तरह की सूचनाएं जारी करे। इस तरह जब डेटा की उपलब्धता बढ़ने लगेगी, तब दुनिया भर के तकनीशियन, चिकित्सा सेवा प्रदाता, वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य सेवा पर अनुसंधान करने वाले परस्पर साथ आएंगे और समाधान प्रस्तुत करेंगे जोकि अंतत: इस संदर्भ में मुख्य कारक होगा कि आख़िरकार ये संकट कितना बड़ा हो पाता है।

इसलिए ईरान हो या उत्तर कोरिया या दुनिया का कोई अन्य देश, हम उम्मीद करते हैं कि वे न सिर्फ संक्रमण के मामलों और मौत की दर को लेकर, बल्कि बीमारी के प्रसार को कम करने के लिए किए गए उपायों को लेकर भी पारदर्शिता बरतेंगे ताकि हम वैश्विक स्तर पर इस संकट के खिलाफ़ प्रभावी उपाय तैयार कर सकें।

प्रश्न:  अच्छा। शुक्रिया।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, श्रीमान।  अगला सवाल योनहैप की हयेह ली का।

प्रश्न:  सुप्रभात, विदेश मंत्री जी। इस बातचीत के लिए शुक्रिया।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  नमस्कार। हां, मैम।

प्रश्न:  उत्तर कोरिया ने कुछ घंटे पहले एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया था कि एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप ने कोविड-19 के संबंध में सहायता की पेशकश करते हुए पत्र भेजा है, लेकिन दूसरी ओर आपने एक लापरवाह टिप्पणी की कि जी7 को उत्तर कोरिया पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बनाना जारी रखना चाहिए। उसने कहा है कि आपकी टिप्पणी ने उसे और अधिक दृढ़ विश्वास के साथ बातचीत में रुचि नहीं रखने के लिए प्रेरित किया है। तो आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या आपके पास उत्तर कोरिया को कोविड-19 संबंधी सहायता प्रदान करने की कोई विशिष्ट योजना है? और क्या आपको लगता है कि दक्षिण कोरियाई सरकार ने महामारी को ठीक से संभाला है? धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  क्या आपने दक्षिण कोरियाई सरकार कहा, कि क्या दक्षिण कोरियाई सरकार ने उचित क़दम उठाए हैं?

प्रश्न:  हां, अंतिम हिस्सा दक्षिण कोरिया के बारे में था –

विदेश मंत्री पोम्पियो:  हां, हां, अंतिम हिस्सा, हां। देखिए, मैं जिस दिन विदेश मंत्री बना उस दिन से ही उत्तर कोरिया को लेकर राष्ट्रपति का और मेरा रुख़ एक है। हमने राष्ट्रपति की – विदेश मंत्री के रूप में वहां की यात्रा करने के समय से ही उनसे संपर्क रखने, बातचीत करने और समाधान के लिए वार्ताएं करने का हरसंभव प्रयास किया है। जब दोनों नेता सिंगापुर में पहली बार मिले थे, तो दोनों ने ही विभिन्न बातों को लेकर प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। कुल चार प्रमुख प्रतिबद्धताएं थीं, जिनमें उत्तर कोरिया का परमाणु हथियार त्यागना और उत्तर कोरियाई लोगों का बेहतर भविष्य ऐसी बातें जो हमें अच्छी तरह याद हैं। अमेरिकी पक्ष उन वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए उस दिन से ही बहुत लगन से प्रयास कर रहा है। हमें उम्मीद है कि हमें ऐसा करने का मौक़ा मिलेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ये भी स्पष्ट कर रखा है: जब तक हम इस संबंध में पर्याप्त प्रगति नहीं कर लेते, प्रतिबंध – अमेरिकी प्रतिबंध नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव – बने रहेंगे और लागू रहेंगे। और हम उम्मीद करते हैं कि हमें उत्तर कोरिया के नेतृत्व के साथ फिर से बातचीत का और उत्तर कोरियाई जनता के उज्ज्वल भविष्य के लिए राह तैयार करने का मौक़ा मिलेगा। जबसे हमने प्रयास शुरू किए हैं तभी से राष्ट्रपति ट्रंप का यही रुख़ है।

जहां तक कोविड-19 को लेकर दक्षिण कोरिया और हमारे प्रयासों की बात है तो शुरू से ही, जब ये साफ़ हो गया कि उत्तर कोरियाइयों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, हमने सहायता की पेशकश की। हमने वर्ल्ड फ़ूड बैंक के ज़रिए ऐसा किया, हमने सीधे तौर पर ऐसा किया, और हमने अन्य देशों की भी मदद की और स्पष्ट किया कि हम हरसंभव प्रयास करेंगे कि उनकी मानवीय सहायता की उस देश तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे।

और जहां तक कोविड वायरस के संबंध में दक्षिण कोरियाइयों द्वारा किए गए उपायों की बात है तो मैं ये दूसरों पर छोड़ना चाहूंगा, और सिर्फ़ इतना कहूंगा कि उनका प्रयास अत्यंत प्रभावी रहा है। और सारे उपलब्ध डेटा से प्रतीत होता है कि दक्षिण कोरियाइयों ने दक्षिण कोरिया में बीमारी के शीर्ष बिंदु से पार पा लिया है, और इसके लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए।

प्रश्न:  धन्यवाद।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, श्रीमान। हमारा अगला सवाल एबीएस-सीबीएन के क्रिश्टियन एस्गुएरा की तरफ़ से।

प्रश्न:  सुप्रभात, विदेश मंत्री जी। मौक़ा देने के लिए बहुत धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  धन्यवाद। आप कैसे हैं?

प्रश्न:  मैं ठीक हूं। मेरा सवाल है: वर्तमान समय में देशों की मदद करने और कोरोना वायरस से निपटने की राह दिखाने में अमेरिका की नेतृत्वकारी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है? और इस पर इस बात का कितना असर पड़ा है कि अमेरिका स्वयं भी अपने यहां वायरस पर नियंत्रण की कोशिशों में जुटा हुआ है? और बेशक, आपने प्रशांत क्षेत्र के देशों को सहायता की बात की, क्या आप फ़िलिपींस को दी जाने वाली सहायता के बारे में विस्तार से बता सकेंगे? धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  ज़रूर। आपके तीसरे सवाल से शुरू करूं तो मैं ये सुनिश्चित करूंगा कि मॉर्गन और उऩकी टीम आपको इस बारे में विवरण उपलब्ध करा सकेंगे कि हम फ़िलिपींस की किस प्रकार मदद कर रहे हैं। मुझे पता है कि हमने पहले ही वहां काफ़ी काम किया है, लेकिन जहां डॉलर में आंकड़ों की बात है, तो वो इस समय मेरे सामने नहीं है। मैं सुनिश्चित करूंगा कि आपको ये जानकारी मिले, और मैं ये भी सुनिश्चत करूंगा कि आपको हमारी मदद के स्वरूप के बारे में भी जानकारी मिले।

आपके पहले सवाल की बात करें, तो अमेरिका हमेशा से ही दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय सहायता प्रदाता रहा है और आगे भी रहेगा। मैं समझता हूं ये हमारी परंपरा है। यही बात है – आप आंकड़ों को देख सकते हैं। ये बिल्कुल साफ़ है। बात चाहे देशों को सीधे द्विपक्षीय मदद की हो, अथवा संयुक्त राष्ट्र या विश्व स्वास्थ्य संगठन या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्था में हमारे योगदान की, वास्तव में, अमेरिका सबसे आगे होता है। मुझे पूरा भरोसा है कि कोविड-19 के बारे में भी यही सच्चाई सामने आएगी।

हम देशों की परवाह करते हैं; हम उनके साथ सहयोग करना चाहते हैं। हम लोगों और उनके देशों का जोख़िम कम करना चाहते हैं। और अमेरिका इस मामले में भी, हम वैसा ही करेंगे जो हम बेहतर करते हैं – जब आप इस संकट के खिलाफ़ सामूहिक रूप से क़दम उठाने की बात करते हैं, जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वो ये कि हम इस वायरस से बुरी तरह प्रभावित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के उपाय करेंगे।

और आप यदि इतिहास में झांकें तो 1960 के दशक की बात हो या 1990 के दशक में एशियन टाइगर्स कहे जाने वाल देशों की, प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका ने हमेशा ही अपने निजी सेक्टर के साथ मिलकर बेहतरीन परिणाम दिए हैं – प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी की क्षेत्र में उपलब्धता के ज़रिए, जिसने एशिया में करोड़ों लोगों को निर्धनता के दायरे से बाहर निकाला है।

और मुझे विश्वास है कि मौजूदा संकट को लेकर अमेरिका न सिर्फ़ मानवीय सहायता के साथ मौजूद रहेगा, बल्कि इन देशों में अमेरिकी कौशल, अमेरिकी उद्यमशीलता और अमेरिकी निजी क्षेत्र उपस्थित मिलेंगे, जो लोगों को अपने व्यवसाय दोबारा स्थापित करने, उनके रोज़गार को उचित स्तर तक वापस लाने, और उन्हें अपनी अर्थव्यवस्थाओं को दोबारा पटरी पर लाने में मदद करेंगे। हम सरकार के स्तर पर इन दोनों ही बातों के लिए प्रतिबद्ध हैं, और मुझे पता है कि अमेरिकी निजी क्षेत्र भी मदद के लिए आगे आएगा।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, महोदय। अगला सवाल पूछ रहे हैं असाही शिंबुन के ताकाशी वातानाबे।

प्रश्न:  नमस्कार। धन्यवाद, विदेश मंत्री जी।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  धन्यवाद।

प्रश्न:  माफ़ करें। ऐसी ख़बरें थीं कि जी7 के विदेश मंत्री संयुक्त बयान जारी नहीं कर पा रहे थे क्योंकि अमेरिका कोरोना वायरस को वुहान वायरस कहने पर अड़ा हुआ था, और कुछ देश इस पर चिंतित थे। क्या इस पर प्रकाश डालेंगे, और आपने उस समय क्या चर्चा की थी?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  हां, दुर्भाग्य से इस बारे में बहुत ख़राब रिपोर्टिंग की गई। सच तो ये है कि जी7 की हमारी बैठक बहुत क़ामयाब रही, जहां इस सामूहिक भाव का अहसास था कि जी7 समूह के रूप में कोविड-19 प्रकोप के खिलाफ़ हमारी विशेष ज़िम्मेदारी है, और हम इसे वैश्विक स्तर पर समाधान प्रस्तुत करने के लिए इस प्रकार निभाएं कि हमारी प्रौद्योगिकी, हमारे संसाधनों और हमारे बाज़ारों के हिसाब से ये पश्चिमी जगत के सर्वोत्कृष्ट योगदान के रूप में उभर कर सामने आए।

हमने दुष्प्रचार अभियानों पर भी व्यापक चर्चा की, लेकिन आज सुबह यहां पहले या दूसरे सवाल के जवाब में उस पर विस्तार से चर्चा हो चुकी है। हमने इस बारे में व्यापक चर्चा की और यूरोपीय देशों ने भी स्पष्ट किया कि उन्हें भी इसका सामना करना पड़ रहा है। वास्तव में मुझसे एक मंत्री ने कहा कि वायरस की यूरोप में उत्पत्ति और निर्माण के बारे में एक देश द्वारा किए गए दुष्प्रचार के कारण अफ़्रीका में यूरोपीय लोगों को तंग किया जा रहा है। इस तरह पारदर्शिता, सही सूचना और समय से डेटा की उपलब्धता के महत्व का उन्हें भी पूरा अहसास है, ताकि दुनिया समझ सके कि आख़िर हुआ क्या है और तदनुसार वे ऐसे उपाय करें ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि (क) भविष्य में ये स्थिति दोबारा नहीं आए, और (ख) हम इस संकट के समाधान के सबसे बेहतर तरीक़े के बारे में त्वरित निर्णय कर सकें।

इस मामले पर पूरी तरह सर्वसम्मति थी, और इस बारे में डेर स्पीगल की ख़बर के बारे में, मुझे नहीं पता कि किस आधार पर उन्होंने ये ख़बर की है। यदि आप इस संकट के संबंध में जी7 के हर सदस्य देश का बयान देखें तो इस संकट के समाधान तथा साथ मिलकर देशों और दुनिया के पुनर्निर्माण की प्रतिबद्धता को लेकर वे एकमत हैं।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, श्रीमान। अगला सवाल द ऑस्ट्रेलियन के कैमरन स्टीवर्ट का।

प्रश्न:  धन्यवाद, विदेश मंत्री जी। मैं फ़ाइव आइज़ गठजोड़ के तहत ऑस्ट्रेलिया के अमेरिका के साथ खुफ़िया सूचनाओं पर निकट संबंधों के बारे में ये सवाल पूछ रहा हूं। क्या फ़ाइव आइज़ तंत्र का उपयोग किया गया या ये किसी भी तरह से महामारी की मैपिंग, उसकी भविष्यवाणी या उसके खिलाफ़ उपायों के संबंध में उपयोगी है?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  ये बहुत ही बढ़िया सवाल है, और सीआईए के पूर्व निदेशक के रूप में, मैं ख़ुफिया तंत्र के बारे में किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे सकता। पर मैं इतना कह सकता हूं: मैं इन संबंधों को बेहतर जानता हूं। मैं फ़ाइव आइज़ संबंधों के महत्व को जानता हूं।

और मैं – जो कुछ चल रहा है उस बारे में किसी ख़ास डेटा को साझा किए बिना, मैं बेहद आश्वस्त हूं कि इऩ पाँच देशों के बारे में हमारी सामूहिक समझ के लिए फ़ाइव आइज़ संबंध बहुत ही सहायक रहे हैं, और फिर हमारे राष्ट्रों के बीच साझा की जाने वाली सूचनाएं इस प्रकोप को समझने में बहुत मददगार रही हैं, इस प्रकोप को महत्वानुसार और पारदर्शी तरीक़े से देखने और फिर हमारे फ़ाइव आइज़ साझेदारों को उसके खिलाफ़ अच्छे परिणामों के वास्ते मदद देने की दृष्टि से भी। डेढ़ साल तक सीआईए का निदेशक रहने के दौरान मैंने फ़ाइव आइज़ तंत्र को काम करते और प्रबल प्रभाव छोड़ते देखा था, और मुझे विश्वास है कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण दौर में भी इसका वैसा ही प्रभाव हो रहा है।

प्रश्न:  धन्यवाद।

सुश्री वाल्श:  धन्यवाद, श्रीमान। अगला सवाल न्यूज़ीलैंड हेराल्ड की ऑड्री यंग का है।

प्रश्न:  सुप्रभात।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  नमस्कार, सुप्रभात।

प्रश्न:  कोविड संकट के टलने के बाद, जब भी ऐसा होता है, क्या आपको लगता है कि इससे प्रभावित विभिन्न देश अधिक अंतर्मुखी हो जाएंगे और शायद मुक्त वैश्विक व्यापार एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के ज़्यादा प्रतिरोधी भी?

विदेश मंत्री पोम्पियो:  मुझे लगता है हर कोई – हर राष्ट्र अपने कार्यों को और अपनी पूर्व तैयारियों को देखेगा, कि उन्होंने सही किया या नहीं, उन्होंने सही तरीक़ा अपनाया या नहीं, क्या उनके पास सही संसाधन थे, क्या उऩ्होंने इस तरह के ख़तरे के बारे में सही सोचा था। मैं समझता हूं हर देश का अपने नागरिकों के प्रति कर्तव्य है कि वे इस तरह का मूल्यांकन करें।

लेकिन अब भी ये एक विशाल दुनिया है जहां व्यापार, मुझे लगता है, असाधारण रूप से महत्वपूर्ण साबित होगा। लेकिन मुझे लगता है कि प्रत्येक राष्ट्र को अपने व्यय किए गए संसाधनों को देखना होगा, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापार के बारे में कहा है, और मुझे लगता है कि कई राष्ट्र अब देखेंगे कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सही कहा था, व्यापार में पारस्परिकता के बारे में, व्यापार में निष्पक्षता के बारे में, और उन सभी तत्वों के बारे में जिन्हें राष्ट्रपति ट्रंप ने असंतुलित व्यापार की स्थिति के जोख़िमों से जोड़ा है – मुझे लगता है कि हर देश ये पाएगा कि कुछ वास्तविक प्रभाव उन असंतुलनों के परिणामस्वरूप थे और वे इसे ठीक करने की कोशिश करेंगे।

सुश्री वाल्श:  और श्रीमान, मुझे पता है कि आपके पास सीमित समय है, इसलिए अब हम आख़िरी सवाल लेते हैं। आख़िरी सवाल निक्केई के मिकियो सुजेनो का।

प्रश्न:  सुप्रभात, विदेश मंत्री जी।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  सुप्रभात।

प्रश्न:  धन्यवाद। मेरा सवाल है- राष्ट्रपति ट्रंप ने कल कहा कि वह घरेलू आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने की संभावित तिथि पहली जून को मानते हैं। और कितने समय तक – मेरा मतलब सप्ताहों और महीनों तक – अमेरिका को सीमाएं बंद रखनी होंगी, अंतरराष्ट्रीय आवागमन पर रोक लगाए रखनी होगी? मेरा मतलब, अमेरिका सब कुछ जून में दोबारा शुरू करने की सोचता है या बाद में? और किन परिस्थितियों के निर्मित होने पर ही अमेरिका दोबारा सबकुछ खोलने की सोचेगा? धन्यवाद।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  धन्यवाद। बहुत ही बढ़िया सवाल है। देखिए मैं इनमें से किसी भी मामले में समय को लेकर अनुमान नहीं लगाना चाहता। राष्ट्रपति और कोरोना वायरस टास्क फ़ोर्स हर दिन अमेरिका द्वारा उठाए गए क़दमों का मूल्यांकन कर रहे हैं, और हमारी भूमिका ये सुनिश्चित करने की भी है कि विश्व स्तर पर भी हम सही क़दम उठा रहे हैं – एक वैश्विक समझ विकसित करने के लिए कि प्रतिक्रियात्मक क़दम क्या हो सकते हैं और क्या होने चाहिए।

और जहां तक यात्रा प्रतिबंधों की बात है, हम उनका नियमित अंतराल पर मूल्यांकन करते हैं। हम उन पर लगातार विचार करेंगे और सही विकल्प अपनाएंगे; ऐसा विकल्प जो अमेरिकी लोगों की रक्षा करे, और ऐसा विकल्प जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को जल्दी-से-जल्दी पटरी पर वापस लाने में मदद करे। जहां तक समय की बात है, अभी इस तरह की अटकलों का अवसर नहीं आया है।

प्रश्न:  धन्यवाद।

सुश्री वाल्श:  आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, श्रीमान। हमने अपने सभी प्रतिभागियों के सवाल लिए हैं, इसलिए विदेश मंत्री पोम्पियो, अब आप हमारे पत्रकार मित्रों के लिए कोई समापन टिप्पणी करना चाहें तो कृपया ऐसा करें।

विदेश मंत्री पोम्पियो:  बढ़िया। आप सभी का धन्यवाद। नहीं, मेरे पास मुझसे जुड़ने के लिए आप सभी का आभार व्यक्त करने के सिवा और कुछ कहने को नहीं है। मुझे उम्मीद है कि आप इसे उतना ही उपयोगी मानेंगे जितना मैंने माना, और मैं आपके सुखद दिन और शाम की कामना करता हूं। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद कि आप आज मुझसे जुड़े। फिर मिलेंगे।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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