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कोविड-19 और इंटरनेट की स्वतंत्रता पर फ़्रीडम ऑनलाइन कोएलिशन का बयान

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अमेरिकी विदेश विभाग
मीडिया नोट
प्रवक्ता का कार्यालय
मई 27, 2020

 

फ़्रीडम ऑनलाइन कोएलिशन (एफ़ओसी) मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (यूडीएचआर) में उद्घोषित मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रताओं के संवर्धन एवं संरक्षण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता वाले 31 देशों का समूह है। हमारा मानना है कि व्यक्तियों को ऑफ़लाइन उपलब्ध मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं को ऑनलाइन संरक्षण भी मिलना चाहिए। हम दुनिया भर में लोगों की इंटरनेट की स्वतंत्रता का समर्थन करने हेतु मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं – जिसमें अभिव्यक्ति, संगठन बनाने और शांतिपूर्ण सभा करने की स्वतंत्रताओं के साथ ही ऑनलाइन निजता अधिकार भी शामिल हैं।

कोविड-19 वैश्विक महामारी के मद्देनज़र एफ़ओसी इससे जुड़े नकारात्मक आर्थिक प्रभावों समेत लोगों की तमाम चिंताओं को, और आपातकालीन उपायों को लागू करके वायरस का प्रसार रोकने के सरकारी प्रयासों की ज़रूरत को समझता है। लेकिन इसके साथ ही चूंकि पहले से कहीं अधिक गतिविधियां ऑनलाइन हो रही हैं, हम संकट के प्रत्युत्तर में सरकारों द्वारा पेश कुछ उपायों, प्रथाओं और डिजिटल अनुप्रयोगों के मानवाधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। इनमें निगरानी के मनमाने या गैरक़ानूनी तरीक़ों का उपयोग; आंशिक या पूर्ण इंटरनेट शटडाउन; तथा मानवाधिकार क़ानूनों के खिलाफ़ जाकर ऑनलाइन सामग्री का नियमन एवं सेंसरशिप जैसे क़दम शामिल हैं। साथ ही, हम महामारी के खत्म होने के बाद भी अभिव्यक्ति, संगठन बनाने और शांतिपूर्ण सभा करने की स्वतंत्रता, और गोपनीयता के अधिकारों पर इनके संभावित अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर भी चिंतित हैं।

मानवाधिकारों के ऑनलाइन उल्लंघन और दुरुपयोग को लेकर जवाबदेही और प्रभावी समाधानों के अभाव से सरकारी अधिकारियों में भरोसा कम होने का ख़तरा है, जो आगे भावी सरकारी क़दमों की प्रभावशीलता को कम कर सकता है। मानवाधिकारों का उल्लंघन और दुरुपयोग भेदभाव के ख़तरे को भी बढ़ाता है तथा भेदभाव के विभिन्न और परस्पर संबद्ध रूपों के संभावित जोख़िम का सामना करने वाली महिलाओं एवं लड़कियों और अन्य व्यक्तियों समेत पहले से ही हाशिए पर पड़े और कमज़ोर समुदायों के सदस्यों को अत्यधिक नुक़सान पहुंचाता है। मानवाधिकारों का ऑनलाइन उल्लंघन और दुरुपयोग, मानवाधिकारों के ऑनलाइन अनुपालन तथा एक खुले, मुक्त, सुरक्षित, विश्वसनीय और अंतर-संचालनीय इंटरनेट, दोनों की ही सुरक्षा और संवर्धन के एफ़ओसी के लक्ष्य के लिए एक सीधी चुनौती है।

इसके अलावा, एफ़ओसी ग़लत सूचनाओं के ऑनलाइन प्रसार तथा ग़लत इरादों से कोविड-19 महामारी के इस्तेमाल के प्रयासों को लेकर भी चिंतित है। इनमें क़ानून आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तथा लोकतंत्र एवं मानवाधिकारों के इसके आधार को कमज़ोर करने के वास्ते सूचनाओं की हेराफ़ेरी और ग़लत सूचनाओं का प्रसार शामिल हैं। तथ्यात्मक और सटीक सूचनाओं की उपलब्धता, जिसमें मुक्त और स्वतंत्र मीडिया की ऑनलाइन एवं ऑफ़लाइन मौजूदगी शामिल है, कोविड-19 वायरस के फैलाव को रोकने, ज़िंदगियां बचाने तथा समाज के कमज़ोर वर्गों की रक्षा करने में लोगों की मदद करती है।

हम एफ़ओसी के संस्थापक दस्तावेज़ों में उल्लिखित प्रतिबद्धताओं और सिद्धांतों के अत्यधिक महत्वपूर्ण होने की बात को दोहराते हैं। हम फिर इस बात पर ज़ोर देते हैं कि देशों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि महामारी के संबंध में लागू किए गए उपाय अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुरूप हों। केवल वही उपाय अपनाए जाने चाहिए जोकि सार्वजनिक स्वास्थ्य की वैध सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं, इसके लिए इन उपायों को सिर्फ़ कोविड-19 संकट संबंधी प्रयासों तक सीमित किया जाना चाहिए। निजता और अन्य प्रासंगिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं में कोई भी हस्तक्षेप नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों और यूडीएचआर के अनुरूप होना चाहिए। और ये सब ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों ही तरह की गतिविधियों से संबंधित प्रतिबंधों पर लागू होते हैं। हम इस मुद्दे पर संयुक्तराष्ट्र महासचिव, संयुक्तराष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त, और संयुक्तराष्ट्र के विशेष प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों द्वारा ध्यान दिए जाने का स्वागत करते हैं।

कोविड-19 महामारी के मद्देनज़र हम दुनिया भर की सरकारों से मांग करते हैं कि वे:

  • उन क़ानूनों और नीतियों को अपनाने या उनके कार्यान्वयन से बचें जोकि मानवाधिकारों के अनुपालन पर नकारात्मक असर डालते हों, या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों के तहत राष्ट्रों के दायित्वों का उल्लंघन करते हुए नागरिकों को ऑनलाइन और ऑफ़लाइन मिली आज़ादी को अनुचित रूप से सीमित करते हों;
  • मुक्त अभिव्यक्ति के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करने तथा निजता के अधिकार के संरक्षण के लिए सूचना की ऑनलाइन उपलब्धता को बढ़ावा देने का काम करें तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों के खिलाफ़ जाकर कंटेंट पर रोक लगाने से बचें;
  • इंटरनेट पर और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के ज़रिए मानवाधिकार समर्थकों समेत व्यक्तियों और समूहों के खिलाफ़ हिंसा, डराने-धमकाने की कार्वाइयों और हमलों से निपटने के लिए उचित उपाय करें;
  • इंटरनेट शटडाउन को तुरंत समाप्त करें, तथा डिजिटल विभाजन को दूर करने के क़दम उठाते हुए ऑनलाइन सेवाओं की अधिकतम उपलब्धता सुनिश्चित करें; और
  • प्रतिबद्धता व्यक्त करें कि आपातकालीन उपायों या क़ानूनों के तहत उठाया गया हर क़दम प्रभावी पारदर्शिता और जवाबदेही के उपायों के अधीन होगा और महामारी ख़त्म होने के बाद उसे हटा लिया जाएगा।

…और हम स्वयं ऐसा ही करने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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