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अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2019 जारी करने के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन में विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो का संबोधन

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अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
तत्काल जारी करने के लिए
प्रेस को संबोधन
जून 10, 2020

प्रेस ब्रीफ़िंग कक्ष
वाशिंगटन, डी.सी.

 

विदेश मंत्री पोम्पियो:  सुप्रभात। आज आपलोगों के साथ होना सुखद है। मैं यहां एक बार फिर, गर्व से, स्वतंत्रता और स्वतंत्र समाजों की बात करूंगा। भले ही अमेरिका हर दृष्टि से एक आदर्श राष्ट्र नहीं हो, लेकिन हम हमेशा एक अधिक परिपूर्ण संघ के लिए प्रयासरत रहते हैं, बेहतर करने की कोशिश करते हैं। हम आज भी मानव इतिहास का महानतम राष्ट्र हैं।

इस प्रशासन में हमारे द्वारा किए जाने वाले अच्छे कार्यों में से एक है दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए हमारा समर्पण। गत सप्ताह, राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसे पहले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं जोकि संपूर्ण अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने का निर्देश देता है।

यहां विदेश विभाग में मैं दो बार धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने हेतु मंत्रिस्तरीय बैठकों का आयोजन कर चुका हूं। हमने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन स्थापित किया है। हमने धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों को अधिक गहराई से समझने के लिए विदेश सेवा के अपने अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है।

और आज, मुझे अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2019 जारी करने पर गर्व है। दुनिया में और कोई देश नहीं है जो धार्मिक स्वतंत्रता की इतनी क़द्र करता हो। हमने पूरी दुनिया से जानकारियां जुटाई हैं – यह एक व्यापक काम है, यह इस बुनियादी मानवाधिकार का विस्तृत लेखाजोखा है।

मैं पहले गत वर्ष के कुछ सकारात्मक घटनाक्रमों पर प्रकाश डालना चाहूंगा:

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन के सदस्य राष्ट्र गांबिया ने रोहिंग्याओं के खिलाफ़ अपराधों से जुड़े एक मामले को साहसपूर्वक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष उठाने का काम किया।

मध्य पूर्व में धार्मिक स्वतंत्रता पर एक पुराना साझेदार संयुक्त अरब अमीरात चर्च ऑफ़ जीसस क्राइस्ट ऑफ लैटर-डे सेंट्स को चर्च निर्माण की अनुमति देने वाला मध्य-पूर्व का पहला देश बन गया है।

उज़्बेकिस्तान ने धार्मिक स्वतंत्रता के अपने रिकॉर्ड को बेहतर करने के लिए क़दम उठाए हैं, और ये काम अभी जारी है। इस साल अपनी यात्रा के दौरान वहां स्थानीय धार्मिक नेताओं से मेरी बहुत अच्छी बातचीत हुई थी।

हमें 2019 के दौरान वहां अपंजीकृत धार्मिक समूहों की बैठकों पर पुलिस छापे की एक भी घटना की जानकारी नहीं मिली, जबकि 2018 में ऐसी 114 और उससे पहले के साल में 240 घटनाएं दर्ज की गई थीं। ये बड़ी प्रगति है, वास्तविक प्रगति है। विदेश विभाग की हमारी टीम की कोशिशों का परिणाम दिखने लगा है।

लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में स्थिति अंधकारमय है जहां आस्थावान लोगों को प्रताड़ित किया जाता है या उन्हें उपासना के अधिकार से वंचित किया जाता है:

निकारागुआ की सरकार धार्मिक नेताओं और उपासकों को तंग करती है और डराती-धमकाती है, और धार्मिक स्थलों को, अक्सर छद्म प्रतिनिधियों के ज़रिए, अपवित्र करती है।

नाइजीरिया में, आइसिस और बोको हराम मुसलमानों और ईसाइयों दोनों पर हमले करना जारी रखे हुए हैं। गत दिसंबर में ही आइसिस ने उस देश में 10 ईसाइयों के सिर कलम कर दिए थे।

और चीन में, सभी धर्मों के खिलाफ़ सरकार प्रायोजित दमनात्मक कार्यों में तेज़ी आ रही है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अब धार्मिक संगठनों को आदेश दे रही है कि वे सीसीपी नेतृत्व के निर्देशों का पालन करें और अपनी शिक्षाओं और धार्मिक प्रथाओं में कम्युनिस्ट मान्यताओं को शामिल करें। शिनजियांग में उइगरों को सामूहिक हिरासत में रखा जाना जारी है। तिब्बतियों, बौद्धों, फ़ालुन गोंग मताबलंबियो और ईसाइयों का दमन भी जारी है।

मैं आज जारी रिपोर्ट सभी को समर्पित करता हूं। इसकी मौजूदगी मात्र ही मानव गरिमा की रक्षा के हमारे मज़बूत संकल्प का सबूत है।

जब मैं अपनी बात समाप्त करूंगा तब राजदूत ब्राउनबैक, जो यहां मेरे साथ खड़े हैं, आपके सवालों के जवाब देंगे।

चीन की बात करें, तो गत सप्ताह मुझे 31 साल पूर्व थियानमेन स्क़्वॉयर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नरसंहार के कई उत्तरजीवियों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 

मैंने हमारे घरेलू घटनाक्रम का फ़ायदा उठाते हुए अपना राजनीतिक एजेंडा चलाने के चीन के घृणित प्रयासों पर भी एक बयान जारी किया है, जिसे मैं समझता हूं आप में से कइयों ने देखा होगा।

हमारी दोनों सरकारों के स्वरूपों में कोई समानता नहीं है। हमारे यहां क़ानून का शासन है; चीन में नहीं है। हमारे यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और हम शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का स्वागत करते हैं। वे ऐसा नहीं करते। हम धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं; जैसा कि मैंने अभी उल्लेख किया, चीन ने धर्म के खिलाफ़ दशकों से युद्ध छेड़ रखा है।

अंतर इससे अधिक स्पष्ट नहीं हो सकता: अच्छे दिनों में भी, चीन बेरहमी से साम्यवाद थोपता है. जबकि सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण समय में भी अमेरिका में, हम सबके लिए स्वतंत्रता के संरक्षण का काम करते हैं।

और स्वतंत्रता की ही बात करें, तो मैं बता नहीं सकता कि माइकल व्हाइट की सुरक्षित स्वदेश वापसी पर मैं कितना खुश हूं। मैं अपनी टीम का आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिसका नेतृत्व करते हुए विशेष प्रतिनिधि ब्रायन हुक ने कूटनीतिक प्रयास किए, जिससे माइकल की रिहाई संभव हुई। मैं इस कार्य में सहायता के लिए स्विस सरकार का भी धन्यवाद करता हूं।

काम अभी पूरा नहीं हुआ है। अमेरिकी नागरिक बक़र नमाज़ी, सियामक नमाज़ी और मुराद तहबाज़ अभी भी ईरान की अवैध हिरासत में हैं। तेहरान उन्हें तुरंत रिहा करे।

मध्य पूर्व की चर्चा जारी रखते हुए मैं लीबिया पर संक्षिप्त टिप्पणी करना चाहूंगा।

जीएनए और एलएनए के बीच संयुक्तराष्ट्र की वार्ताओं में दोबारा शामिल होने की सहमति एक अच्छा शुरुआती क़दम है, बहुत ही सकारात्मक क़दम। युद्धविराम को लागू करने और संयुक्तराष्ट्र के नेतृत्व में अंतर्-लीबियाई राजनीतिक वार्ताओं को फिर से शुरू करने के लिए अब विश्वास के माहौल में बातचीत तुरंत शुरू किए जाने की ज़रूरत है। समय आ गया है। ये तमाम पक्षों के लीबियाइयों के लिए क़दम उठाने का समय है, ताकि ना तो रूस और ना ही कोई अन्य देश अपने फ़ायदे के लिए लीबिया की संप्रभुता में हस्तक्षेप कर सके।

लीबिया को आर्थिक रिकवरी की राह पर लाने का मतलब है लीबियाई तेल प्रतिष्ठानों का संरक्षण और नेशनल ऑयल कॉरपोरेशन की सशक्त भूमिका।

इराक़ की बात: इराक़ सरकार अप्रैल में प्रस्तावित जिस सामरिक संवाद के लिए सहमत हुई थी, वो कल शुरू हो रहा है। अवर विदेश मंत्री हेल रक्षा विभाग, वित्त विभाग, ऊर्जा विभाग और विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधियों और उनके इराक़ी समकक्षों के बीच इस बातचीत का नेतृत्व करेंगे।

सामरिक संरचना समझौता 2008 पर आधारित पूर्व के समझौतों के अनुरूप, इस बातचीत में दोनों देशों के बीच महत्व के सभी क्षेत्र – राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, संस्कृति और ऊर्जा – शामिल रहेंगे।

वैश्विक कोरोना वायरस महामारी, तेल की क़ीमतों में भारी गिरावट और विशाल बजटीय घाटे जैसी नई चुनौतियों के मद्देनज़र, ये महत्वपूर्ण है कि अमेरिका और इराक़ दोनों ही राष्ट्रों के पारस्परिक लाभ हेतु योजना बनाने के उद्देश्य से सामरिक साझेदारों के रूप में साथ आएं।

अपने देश के आसपास की बात करें तो ट्रंप प्रशासन यहां पश्चिमी गोलार्ध में बड़े बदलावों के लिए अपने साझेदारों के साथ निरंतर काम कर रहा है, ताकि इसे स्वतंत्रता के गोलार्ध में बदला जा सके, जिसकी कि हमने चर्चा की है।

यह काम द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तरों पर जारी रहना चाहिए – इसी संदर्भ में मैं ब्राज़ील के मैइस मेडिको कार्यक्रम में क्यूबाई डॉक्टरों से ज़बरन श्रम कराने में पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (पीएएचओ) की सहायक भूमिका पर अमेरिका की चिंताओं का ज़िक्र करना चाहता हूं। इस कार्यक्रम के तहत कथित तौर पर क्यूबा के 10,000 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों की मानव तस्करी की गई है।

पीएएचओ को ये स्पष्ट करना चाहिए कि ब्राज़ील में क्यूबा के स्वास्थकर्मियों के शोषण की योजना में उसकी बिचौलिए की भूमिका कहां से आई।

पीएएचओ को स्पष्ट करना चाहिए कि इसने कास्त्रो के हत्यारे शासन को 1.3 बिलियन डॉलर कैसे भेजे।

पीएएचओ को ये स्पष्ट करना चाहिए कि उसने इस कार्यक्रम में अपनी भूमिका के लिए कार्यकारी परिषद – अपनी ख़ुद की कार्यकारी परिषद – की स्वीकृति क्यों नहीं ली।

और, पीएएचओ को ये स्पष्ट करना चाहिए कि संगठन में वो कौन है जिसने इस संभावित अवैध समझौते को मंज़ूरी दी।

उसे ये भी स्पष्ट करना चाहिए कि इस कार्यक्रम हेतु समझौता कराने के लिए मिले 75 मिलियन डॉलर का उसने क्या किया।

ऐसी घटनाएं दोबारा कभी नहीं हो, इसके लिए उसे ज़रूरी बदलाव करने चाहिए।

और जैसा कि हमने हाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ किया, ट्रंप प्रशासन अमेरिकी करदाताओं द्वारा प्रदत्त संसाधनों पर निर्भरता वाले सभी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों से जवाबदेही की मांग करेगा। हमारा धन उन्हीं कार्यों में लगना चाहिए जो मूल्यों को स्थापित करते हैं और जो हमारे मूल्यों का समर्थन करते हैं।

अमेरिका इस गोलार्ध में बाक़ी जगहों पर भी लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन जारी रख रहा है।

हम गयाना में वोटों की पुनर्गिनती के कार्य की त्वरित और विश्वसनीय पूर्णता की उम्मीद करते हैं।

हम सूरीनाम में विधायी चुनावों के पारदर्शी और विश्वसनीय नतीजे की भी अपेक्षा करते हैं।

और हम वेनेज़ुएला के लोगों की स्वतंत्रता की चाहत का समर्थन करना जारी रख रहे हैं।

हमें इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए कि मादुरो शासन ने अमेरिकियों को कितना नुक़सान पहुंचाया है। हम मादुरो शासन से फिर से मांग करते हैं कि वह अमेरिकी तेल कंपनी के उन छहों अधिकारियों को तुरंत रिहा करे जिन्हें उसने बिना मुक़दमा चलाए ढाई वर्षों से अधिक समय से हिरासत में ले रखा है।

हम रूस से भी पॉल व्हीलन के बारे में यही मांग करते हैं, जिन्हें अब रिहा किया जाना चाहिए।

इस बात के लिए निश्चिंत रहें कि राजदूत सुलिवन और उऩकी टीम पॉल के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे।

अमेरिका का ध्यान मॉस्को द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघनों पर भी केंद्रित रहेगा। 2015 के बाद से, रूस ने क्रीमिया के हज़ारों नौजवानों को अपनी सशस्त्र सेनाओं में भर्ती किया है और इससे इनक़ार करने वालों पर उसने आपराधिक ज़ुर्माने लगाए हैं। रूस को उसके कब्ज़े का विरोध करने वालों का दमन बंद करना चाहिए, अन्यायपूर्ण ढंग से क़ैद किए गए यूक्रेनी नागरिकों को रिहा करना चाहिए, और यूक्रेन को उसके प्रायद्वीप का पूर्ण नियंत्रण वापस करना चाहिए। क्रीमिया यूक्रेन का है।

अब अटलांटिक के उस पार से अच्छी ख़बर। ग्रीनलैंड के नूक में हमारे कांसुलेट ने आज से औपचारिक रूप से काम करना शुरू कर दिया है। मैं इसको लेकर बहुत उत्साहित हूं। इसके लिए काफ़ी प्रयास करने पड़े और यह एक अच्छी ख़बर है। ये आर्कटिक क्षेत्र में हमारी उपस्थिति मज़बूत करने के प्रशासन के प्रयासों की परिणति है। इसे संभव बनाने के लिए राजदूत कार्ला सैंड्स और कोपेनहागेन में उनकी टीम का बहुत शुक्रिया।

इस दिन को मुमकिन बनाने में सहयोग के लिए हम ग्रीनलैंड और डेनमार्क के आभारी हैं। इस समाचार की घोषणा के लिए मुझे गत वर्ष वहां का दौरा करना था और अभी भी मैं उम्मीद करता हूं कि मैं उत्तर की यात्रा कर ऐसा कर सकूंगा। मुझे पता है कि उस दौरे पर आप सब भी मेरे साथ चलना चाहेंगे।

यूरोप का एक और विषय: मैं अल्बानिया में चुनावी सुधारों पर सर्वदलीय समझौते का स्वागत करता हूं। इससे वहां लोकतंत्र मज़बूत होगा और अल्बानिया के यूरोपीय भविष्य का आधार और भी सुदृढ़ हो सकेगा। हम सभी हितधारकों को इस समझौते को क़ानूनी रूप देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

अब अफ़्रीका का रुख़ करते हैं। हम संयुक्तराष्ट्र के विशेषज्ञ माइकल शार्प और ज़ाइदा कैटेलान की 2017 में हुई हत्या के मामले में आरोपी ट्रेज़र म्पूतू कंकोंडे की कांगो (डीआरसी) में हुई गिरफ़्तारी का स्वागत करते हैं। उसे ढूंढा जाना और हिरासत में लिया जाना डीआरसी में क़ानून के शासन और एक अमेरिकी नागरिक की हत्या के मामले में न्याय दिलाने की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।

और मैं संक्षेप में कोविड-19 के मुद्दे पर महासचिव शी की अफ़्रीकी नेताओं के साथ आगामी बैठक का भी ज़िक्र करना चाहता हूं। हमने अफ़्रीका में चीन और कथित प्राइवेट चीनी कंपनियों द्वारा बहुत ही सीमित मात्रा में वित्तीय अनुदान दिए जाने की बात को नोट किया है।

महामारी से लड़ने में चीन का योगदान कुछ भी नहीं है बशर्ते हम इसकी तुलना महामारी की बात दबाने के उसके कृत्य की वित्तीय और मानवीय लागत से करें। और मैं इस संबंध में अपनी चिंताओं का भी उल्लेख करना चाहूंगा कि चीन महामारी के बहाने उधार देने की अपनी अपारदर्शी नीतियों को जारी रखेगा, जिसने पूरे अफ़्रीका में राष्ट्रों को क़र्ज़ और निराशा के भंवर में डाल दिया है।

अमेरिका ने अफ़्रीका में बहुत से अच्छे काम किए हैं जिन्हें हम आगे भी करना जारी रखेंगे। हमारी एड्स विरोधी पेपफ़ार योजना ने हज़ारों अफ़्रीकियों की जान बचाने का काम किया है और अमेरिका कोविड-19 महामारी से मुक़ाबले के लिए भी कई कार्यक्रम चला रहा है। हम अपने अनेकों अफ़्रीकी मित्रों के एक विश्वसनीय, पारदर्शी और पक्के साझेदार के रूप में इस शानादार मानवीय सहायता कार्य को जारी रखेंगे।

और अंत में, मैं महामारी से पीड़ित देशों और लोगों की सहायता के अमेरिका के अटल वायदे के बारे में एक घोषणा करना चाहूंगा।

सर्वप्रथम, मैं शरणार्थियों और कमज़ोर प्रवासियों के लिए 14 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त मानवीय सहायता की घोषणा करता हूं।

दूसरे, राष्ट्रपति ट्रंप को दुनिया भर के तमाम देशों को वेंटिलेटर उपलब्ध कराने में मदद करने पर गर्व है।

आज हम इन वेंटिलेटरों की ख़रीद और इन जटिल मशीनों के संचालन के लिए आवश्यक ट्रेनिंग और अन्य समर्थनों पर क़रीब 180 मिलियन डॉलर ख़र्च कर रहे हैं।

अभी तक, हमने 60 से अधिक देशों को लगभग 15,000 वेंटिलेटरों की आपूर्ति की प्रतिबद्धता जताई है।

राजदूत ब्राउनबैक: धन्यवाद। आज यहां एकत्रित होने के लिए आप सभी का आभार। मैं विदेश मंत्री पोम्पियो का धन्यवाद करता हूं। धार्मिक स्वतंत्रता के इस अहम मुद्दे पर नेतृत्व प्रदान करने के लिए मैं राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति पेंस का आभारी हूं।

शीघ्रता से, एक संक्षिप्त अवलोकन के रूप में मैं धार्मिक स्वतंत्रता के इस मुद्दे पर उन कई पहलक़दमियों का उल्लेख करना चाहूंगा जो पहली बार इस प्रशासन ने किए हैं। पिछले हफ़्ते आपने धार्मिक स्वतंत्रता पर राष्ट्रपति द्वारा जारी कार्यकारी आदेश को देखा। ये पहला मौक़ा है जब दुनिया के किसी राष्ट्राध्यक्ष ने ऐसा आदेश जारी किया है। गत वर्ष सितंबर में संयुक्तराष्ट्र महासभा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप धार्मिक स्वतंत्रता पर कार्यक्रम का आयोजन करने वाले पहले राष्ट्रपति, पहले राष्ट्राध्यक्ष थे।

विदेश मंत्री ने धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिस्तरीय बैठकों के आयोजन की चर्चा की। ये धार्मिक स्वतंत्रता पर दुनिया में कहीं भी हुए इस तरह के सबसे बड़े आयोजन, विदेश विभाग द्वारा आयोजित मानवाधिकार केंद्रित सबसे बड़े सम्मेलन थे। विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन शुरू किया। वह दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व के स्तर पर अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को स्थापित करने वाले पहले अमेरिकी विदेश मंत्री हैं। मुसलमानों, ईसाइयों और यहूदियों के बीच, उनके प्रमुख धार्मिक विद्वानों की भागीदारी के ज़रिए, शांति को बढ़ावा देने के लिए गत वर्ष हमने अब्रैहमिक फ़ेथ इनिशिएटिव की शुरुआत की।

ट्रंप प्रशासन ने सभी धर्मों, धार्मिक समूहों, या बिना किसी धार्मिक विश्वास के लोगों, की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने और उसे बढ़ावा देने के लिए किसी भी अन्य प्रशासन की तुलना में अधिक काम किया है।

आज, पास्टर एंड्रयू ब्रंसन दोबारा अपने परिवार के साथ हैं। दुनिया ने चीन सरकार द्वारा मानवाधिकारों के हनन पर गौर किया है और उसके खिलाफ़ आवाज़ें उठने लगी हैं। आसिया बीबी को मुक्त हुए एक वर्ष से अधिक हो गया है। और हाल के सुधारों के कारण, सूडान और उज़्बेकिस्तान दोनों को ख़ास चिंता वाले देशों की सूची से हटा दिया गया है। बड़ी उपलब्धियां हासिल हो रही हैं और बड़े काम हो रहे हैं।

कोविड महामारी फैलने के बाद से हमने बर्मा को अपने आरोप वापस लेते हुए 1,000 से अधिक रोहिंग्याओं को जेल से रिहा करते देखा है। ईरान ने अनुचित तौर पर हिरासत में रखे गए दर्जनों धार्मिक अल्पसंख्यकों में से कइयों को अस्थाई रूप से रिहा किया है।

प्रशासन ने सभी जगह, सभी धर्मों के लोगों के लिए, हमेशा संघर्ष करने के आह्वान का अनुपालन किया है। असाधारण कर्मचारियों के साथ काम करते हुए दुनिया के हर हिस्से में धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए काम करना मेरे लिए संतोषप्रद रहा है। इसके बावजूद धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति आदर्श नहीं है, और बेहद चिंताजनक है। दुनिया के कई स्थानों पर लोग धार्मिक स्वतंत्रता की तुलना में धार्मिक उत्पीड़न से अधिक परिचित हैं, और आज जारी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2019 में इसी मुद्दे को उठाया गया है।

चीन स्थित धार्मिक समूह अपनी आस्था के कारण बेहद धार्मिक उत्पीड़न झेलने वालों में शामिल हैं। ईरान में, मात्र धार्मिक अल्पसंख्यक होने के कारण अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के 109 सदस्यों को जेल में रखा जा रहा है। और वहां ईश्वर से विद्वेष के आरोप में सरकार ने गत वर्ष कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया। नाइजीरिया में, उत्तर मध्य के राज्यों में मुख्यतया मुस्लिम फुलानी चरवाहों और ईसाई किसानों के बीच संघर्ष और क़त्लेआम जारी है।

इसलिए हमारे सामने स्पष्टतया बड़ी चुनौतियां हैं। हमें दुनिया में धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता को साझा करने वाले राष्ट्रों से साझेदारी और गठबंधन करते रहना होगा, और हमें बुरे किरदारों को रोकने के लिए प्रयासरत रहना होगा। और हमें अपनी क्षमताओं को भी बढ़ाना होगा। धार्मिक स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने का काम अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे हमारी विदेश नीति के सभी पहलुओं में शामिल करना होगा और इसीलिए, जैसा कि मैंने उल्लेख किया, राष्ट्रपति ने गत सप्ताह एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया, जो अमेरिकी विदेश नीति के नियोजन और कार्यान्वयन में तथा विदेशी सहायता कार्यक्रमों में धार्मिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता देता है।

हम सभी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते रहेंगे, और हमने ऐसा ही किया है और हम ये करते रहेंगे, और इस प्रयास का नेतृत्व करने में विदेश मंत्री की, और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति की, भूमिका शानदार रही है, और मैं समझता हूं आपको अभी और प्रगति देखने को मिलेगी।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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