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विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो का संवाददाता सम्मेलन

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अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
सितंबर 2, 2020
माइकल आर. पोम्पियो, विदेश मंत्री
वाशिंगटन, डी.सी.
प्रेस ब्रीफ़िंग रूम

 

विदेश मंत्री पोम्पियो:  सुप्रभात। आप सबों को देखकर खुशी हो रही है।

मैं आज अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षवाद से अपनी बात शुरू करना चाहता हूं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि बहुपक्षीय संस्थाएं काम करें, वास्तव में काम करें। लेकिन सिर्फ़ कहने भर के बहुपक्षवाद, बस एक कमरे में जमा होकर बातें करने, का कोई लाभ नहीं होता।

मैं इसी सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) की बात करूंगा, जो पूरी तरह विघटित और भ्रष्ट संस्था है। अमेरिका ने इस न्यायालय की स्थापना करने वाली रोम संविधि की कभी पुष्टि नहीं की है, और हम अमेरिकियों को अपने न्यायाधिकार में लाने के इसके अवैध प्रयासों को सहन नहीं करेंगे।

जून में, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका या उसके मित्र देशों के कार्मिकों की जांच के आईसीसी के प्रयासों में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने वाले विदेशियों, और उन प्रयासों का भौतिक समर्थन करने वालों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने को स्वीकृति दी थी।

आज हम अगला क़दम उठा रहे हैं, क्योंकि दुःख की बात है कि आईसीसी अमेरिकियों को लक्षित करना जारी रख रहा है।

कार्यकारी आदेश 13928 के तहत अमेरिका आईसीसी की अभियोजक फ़ातू बेनसूदा पर, और बेनसूदा का भौतिक समर्थन करने वाले आईसीसी के न्यायाधिकार, संपूरक एवं सहयोग विभाग के प्रमुख फ़ाकिसो मोचोचोको पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है।

इन व्यक्तियों का भौतिक समर्थन जारी रखने वाले लोगों और उपक्रमों पर भी प्रतिबंधों का ख़तरा रहेगा।

साथ ही, विदेश विभाग ने अमेरिकी कार्मिकों की जांच के आईसीसी के प्रयासों में शामिल कतिपय व्यक्तियों को वीज़ा दिए जाने पर भी रोक लगा दी है।

बहुपक्षवाद की ही बात करें, तो मैं अगले सप्ताह विभिन्न वर्चुअल बैठकों में अपने आसियान और हिंद-प्रशांत के समकक्षों से बातचीत का इंतज़ार कर रहा हूं।

हमारी विस्तृत मुद्दों पर बातचीत होगी जिनमें कोविड, उत्तर कोरिया, दक्षिण चीन सागर, हांगकांग और बर्मा के रखाइन स्टेट के विषय शामिल होंगे।

मैं इस बात को भी सामने रखूंगा कि ट्रंप प्रशासन किस प्रकार अमेरिका-चीन संबंधों में पारस्परिकता को बहाल कर रहा है। और आज हम इस ज़रूरी काम को जारी रख रहे हैं।

वर्षों तक, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन में तैनात अमेरिकी राजनयिकों पर व्यापक पाबंदियां लगाई हैं।

विशेष रूप से, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपारदर्शी अनुमोदन प्रक्रियाओं की एक प्रणाली को लागू कर रखा है, जिसके तहत अमेरिकी राजनयिकों को नियमित काम करने, आयोजनों में भाग लेने, मुलाक़ातें करने तथा चीनी लोगों के साथ, विशेष रूप से विश्वविद्यालय परिसरों में और प्रेस एवं सोशल मीडिया के माध्यम से, जुड़ने से रोका जाता है।

आज मैं ये घोषणा करता हूं कि विदेश विभाग ने एक व्यवस्था निर्धारित की है जिसके तहत अमेरिका स्थित वरिष्ठ चीनी राजनयिकों को विश्वविद्यालय परिसरों का दौरा करने और स्थानीय सरकारी अधिकारियों से मुलाक़ात के लिए अनुमति लेनी होगी। चीनी दूतावास और कॉन्सुलर केंद्रों को अपने परिसर से बाहर 50 से अधिक लोगों से अधिक बड़े समूह की भागीदारी वाले सांस्कृति आयोजनों के लिए भी हमारी स्वीकृति की ज़रूरत होगी।

साथ ही, हम इस दिशा में भी क़दम उठा रहे हैं कि चीनी दूतावास और कॉन्सुलर केंद्रों के सारे सोशल मीडिया अकाउंट को सही ढंग से सरकारी अकाउंट के रूप में चिन्हित किया जाए, चीन सरकार के अकाउंट के रूप में।

मेरे साथ पूर्वी एशिया एवं प्रशांत मामलों के सहायक विदेश मंत्री डेविड स्टिलवेल मौजूद हैं। वे आपके सवालों का जवाब देंगे

हम बस पारस्परिकता की मांग कर रहे हैं। चीन में हमारे राजनयिकों को उतनी ही छूट मिलनी चाहिए जितनी अमेरिका में चीनी राजनयिकों को मिलती है, और आज के क़दम से हम काफी कुछ उस दिशा में बढ़ पाएंगे।

चीन के बारे में और बातें:

हाल ही में अवर विदेश मंत्री क्रैच ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों के गवर्निंग बोर्डों को पत्र लिखकर अकादमिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और विश्वविद्यालय को मिलने वाले अनुदानों पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के ख़तरे के बारे में आगाह किया है।

ये ख़तरे रिसर्च की अवैध फ़ंडिंग, बौद्धिक संपदा की चोरी, विदेशी छात्रों के भयादोहन, और प्रतिभाओं के चयन की अपारदर्शी प्रक्रिया के रूप में सामने आ सकते हैं।

विश्वविद्यालयों के प्रशासकीय बोर्ड कतिपय अहम क़दमों के ज़रिए अपने संस्थानों के लिए सही निवेश और सही अनुदान निधि की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं:

अनुदान निधि से संबद्ध चीन की सभी कंपनियों के नाम सार्वजनिक करें, ख़ासकर जो उभरते बाज़ारों के इंडेक्स फंड से संबंधित हैं।

वाणिज्य विभाग की कंपनी सूची में शामिल मानवाधिकार उल्लंघनों, सैन्य दबाव और अन्य उत्पीड़नों से जुड़ी चीनी कंपनियों से निवेश निकालें।

और वित्तीय बाज़ारों पर राष्ट्रपति के कार्यकारी समूह की अनुशंसाओं पर गौर करें, जिसने अमेरिकी शेयर बाज़ारों में सूचीबद्ध चीनी कंपनियों के निवेशकों के जोख़िमों की पड़ताल की है।

चीन की ही बात करते हैं, लेकिन अपनी सीमाओं से दूर:

हम भारत-चीन सीमा पर स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद करते हैं। ताइवान जलडमरूमध्य से लेकर हिमालय और उससे आगे तक, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा अपने पड़ोसियों को डराने-धमकाने का एक स्पष्ट और गहन पैटर्न नज़र आता है।

ये धौंसपट्टी दक्षिण चीन सागर में भी दिख रही है। गत सप्ताह, अमेरिका ने उस क्षेत्र में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साम्राज्यवाद के लिए ज़िम्मेवार चीनी व्यक्तियों और उपक्रमों पर प्रतिबंधों और वीज़ा पाबंदियों की घोषणा की, जो अवैध ऊर्जा निगरानी तथा हमारे मित्र राष्ट्र फिलिपींस और अन्य देशों के आर्थिक क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां चलाने जैसे क्रियाकलापों में शामिल रहे हैं।

गैलापेगोस द्वीप समूह के पास चीनी ध्वज वाले 300 से अधिक पोतों की गतिविधियों – जिसकी हम पहले भी चर्चा कर चुके हैं – को लेकर हमारी चिंताएं बनी हुई हैं, जोकि लगभग निश्चित रूप से वहां अवैध रूप से मछली मार रहे हैं।

समुद्र में इस अराजकता के मद्देनज़र, ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि पिछले सप्ताह समुद्री क़ानून पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के लिए हुए चुनाव में चीन के उम्मीदवार को किसी भी अन्य उम्मीदवार की तुलना में अधिक अनुपस्थितियों का सामना करना पड़ा।

चीन समुद्री क़ानून संधि का सबसे प्रमुख उल्लंघनकर्ता है, और दुनिया भर के राष्ट्र इस बारे में अपनी अस्वीकृति दर्ज करा रहे हैं।

हम तिब्बत में चीनी कार्रवाइयों के बारे में भी चिंतित हैं, ख़ासकर तिब्बती बौद्ध धर्म का “चीनीकरण” करने और वहां “विभाजनवाद” से लड़ने के महासचिव के हाल के आह्वान के मद्देनज़र। हम अपनी मांग को दोहराते हैं कि बीजिंग दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के वार्ता शुरू करे, ताकि उनके आपसी मतभेदों का समाधान हो सके।

हम बेलारूस की स्थिति पर भी करीब से नज़र रख रहे हैं। उप विदेश मंत्री बीगन ने पिछले सप्ताह मेरे निर्देश पर वहां की यात्रा की। बेलारूसियों को स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में, एक वास्तविक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के माध्यम से अपने नेताओं को चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।

हम उऩके खिलाफ़ हिंसा पर तत्काल रोक लगाने और अन्यायपूर्ण ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों, जिनमें अमेरिकी नागरिक विताली श्किलियारोव शामिल हैं, की रिहाई की मांग करते हैं।

हम अटलांटिक पार के अपने सहयोगियों के साथ भी समन्वय कर रहे हैं, और साथ मिलकर मानवाधिकार हनन और दमन में शामिल व्यक्तियों पर विस्तृत लक्षित प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं।

अब मध्य पूर्व की बात करते हैं, जहां की उपयोगी यात्रा के बाद मैं अभी-अभी लौटा हूं और जहां आज हमारे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं:

राष्ट्रपति ट्रंप के़ नेतृत्व में इजरायल और उसके पड़ोसियों के बीच संबंधों की स्थापना के कारण यह क्षेत्र तेज़ी से बदल रहा है। अब्राहम समझौता इसका स्पष्ट प्रमाण है।

यही बात इस सप्ताह तेल अवीव और अबू धाबी के बीच पहली सीधी उड़ान से भी उजागर हुई, तथा इज़रायल और सूडान के बीच पहली सीधी उड़ान से भी, जिसमें अपने दौरे के दौरान मुझे भी शामिल होने का सम्मान मिला।

साथ ही, अपने हर पड़ाव पर, मैंने अपने समकक्षों से क्षेत्र में ईरान के ख़तरों के खिलाफ़ एकजुट रहने का आह्वान किया।

और इसी से जुड़ा है मेरा अगला विषय:

चालीस साल पहले इसी महीने, ईरानी शासन ने बहाई नेशनल स्पिरिचुअल असेंबली ऑफ़ ईरान के नौ सदस्यों को गिरफ़्तार किया था। तबसे उऩकी कोई ख़बर नहीं है।

दुर्भाग्य से, इन नौ लोगों के बारे में हमें यही मानना पड़ेगा कि उनका भी 200 से अधिक उन ईरानी बहाइयों वाला ही हाल हुआ होगा, जिन्हें कि अपने धर्म के शांतिपूर्ण अनुपालन के कारण मौत के घाट उतार दिया गया।

हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पूछते हैं: ईरानी शासन को इन अपराधों के लिए कब ज़िम्मेवार ठहराया जाएगा?

अफ़्रीका की बात करें, तो हम इस ख़बर का स्वागत करते हैं कि सूडान की असैनिक नेतृत्व वाली संक्रमणकालीन सरकार ने विभिन्न विपक्षी गुटों के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते की पहल की है। ये एक बढ़िया समाचार है। मेरी यात्रा के दौरान उन्होंने समझौता संभव होने की बात की थी। उन्हें बधाई।

और यहां घर के पास पश्चिमी गोलार्ध की बात करें, तो अमेरिकी उम्मीदवार मॉरिशियो क्लैवर-कैरोनी इंटरनेशनल डेवलपमेंट बैंक की अध्यक्षता के लिए सही उम्मीदवार हैं। इस संबंध में 12 सितंबर को प्रस्तावित मतदान को टाला नहीं जाना चाहिए। यह चुनाव निर्धारित दिन ही होना चाहिए।

और वेनेज़ुएला की बात करें, तो अब तक 34 देश साथ आ चुके हैं – वहां एक संक्रमणकालीन सरकार के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय सहमति बढ़ती जा रही है। अधिकाधिक देश जान रहे हैं कि मादुरो द्वारा इस साल 6 दिसंबर को प्रस्तावित नेशनल असेंबली के कपटपूर्ण चुनाव ना तो स्वतंत्र होंगे और ना ही निष्पक्ष।

हम हैती में भी, तकनीकी रूप से जब भी संभव हो, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की मांग करते हैं।

और इसी के साथ मैं आपके कुछ सवालों के लिए तैयार हूं।


यह अनुवाद एक शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेजी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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