अमेरिका काबुल में आज हुए भीषण हमले की कड़ी निंदा करता है, जिसमें अपुष्ट संख्या में कई लोगों की मौत हो गई है और कम-से-कम 50 बच्चों समेत 100 से अधिक अन्य घायल हो गए
ईरानी शासन ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए नए कदम उठाए हैं। दुनिया में आतंकवाद का यह अग्रणी सरकारी प्रायोजक अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाने और क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है।
ईरानी शासन ने आज यूरेनियम संवर्धन का स्तर बढ़ाने की कार्रवाई की है। परमाणु समझौते के तहत ईरान को किसी भी स्तर पर यूरेनियम संवर्धित करने की अनुमति देना एक भूल थी।
विदेश मंत्री पोम्पियो: धन्यवाद। नमस्कार, आप सभी को। यहां आकर अच्छा लग रहा है। मेरे लिए एक बड़े चुनाव, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी विजयी हुए, के तुरंत बाद यहां आ पाना एक बड़ी उपलब्धि है। स्वयं कई चुनाव अभियान संचालित करने के कारण मैं उनकी जीत को अत्यंत प्रभावशाली कहूंगा, और उन्हें जो जनादेश मिला है वो मैं समझता हूं अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निम्नांकित पाठ प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टेगस के हवाले से है:
राजदूत जस्टर: नमस्कार, देवियों और सज्जनों। भारत में अमेरिका का राजदूत होने के नाते, मुझे अपने आज शाम के वक्ता विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का परिचय कराने का सौभाग्य मिला है।
विदेश मंत्री पोम्पियो का करियर सार्वजनिक और निजी, दोनों ही क्षेत्रों में सेवा का रहा है कि जो उन्हें आज की दुनिया और अमेरिका-भारत संबंधों की अधिकांश चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें विशिष्ट रूप से योग्य बनाता है। वेस्ट प्वाइंट स्थित अमेरिकी सैन्य अकादमी से अपने वर्ग में प्रथम रहते हुए पढ़ाई पूरी करने के बाद, विदेश मंत्री पोम्पियो ने पांच वर्षों तक अमेरिकी सेना में नौकरी की। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल में दाखिला लिया और वहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद देश के शीर्ष कानूनी कंपनियों में से एक में काम किया।
आज यातना के पीड़ितों के समर्थन का अंतरराष्ट्रीय दिवस है। यह अत्याचार और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक बर्ताव या सजा के खिलाफ़ संधि के लागू होने की 32वीं वर्षगांठ है। संधि के मज़बूत समर्थक राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने 1988 में संधि पर अमेरिका के हस्ताक्षर के मौके पर कहा था, “अमेरिका द्वारा संधि की पुष्टि से वर्तमान दुनिया में दुर्भाग्य से अब भी प्रचलित यातना की घृणित प्रथा के अमेरिका द्वारा विरोध की अभिव्यक्ति होगी.”
देश मंत्री पोम्पियो: नमस्कार, आप सभी को। दुनिया में इस समय इतना कुछ चल रहा है कि कई बार यहां अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की प्रतिबद्धता को भुलाना आसान लगता है, पर दुनिया को जान लेना चाहिए कि ट्रंप प्रशासन इसे नहीं भूला है और अमेरिकी जनता इसे नहीं भूली है। हमें यहां उनके हितों का प्रतिनिधित्व हमेशा की तरह जोश के साथ करना चाहिए। इसलिए अभी अफ़ग़ानिस्तान वापस आना मेरे लिए महत्वपूर्ण था।
“मुझे सचमुच विश्वास है कि हमारे दोनों राष्ट्रों के पास अपने लोगों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वास्तव में पूरी दुनिया की भलाई के लिए मिलकर आगे बढ़ने का अत्यंत अनूठा अवसर है।” – अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, जून 12, 2019
अमेरिका के विदेश मंत्री माइकल आर. पोम्पियो धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए 16 से 18 जुलाई तक वाशिंगटन, डी.सी. स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में दूसरे मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का आयोजन करेंगे। दुनिया में सभी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना 21वीं सदी की निर्णायक चुनौतियों में से एक है, जो इस प्रशासन की विदेश नीति की शीर्ष प्राथमिकताओं में से है।